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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मुहम्मद जौनपुरी

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हज़रत सय्यद मुहम्मद The Holy Tomb of Imam Mahdi AS at Farah,Afghanistan.jpg मुहम्मद जौनपुरी का मज़ार मुहम्मद जौनपुरी (سید محمد جونپورى) 14, जमादी उल अव्वल 847 (सितम्बर 9, 1443) जौनपुर, उत्तरप्रदेश, भारत 19 ज़ी क़ादा 910 (अप्रेल 23, 1505 ई०) फ़राह, अफ़ग़ानिस्तान सय्यद अब्दुल्लाह उर्फ़ सय्यद ख़ान (पिता) सय्यदा आमिना (माता) इस्लाम सय्यद मुहम्मद जौनपुरी (سید محمد جونپورى) (सितम्बर 9, 1443 – अप्रेल 23, 1505 ई) ने मक्का में हिजरी वर्ष 901 में स्वयं को इमाम महदी घोषित किया। इसके कारण महदविया में उन्हे आदरपूर्वक देखा जाता है। उनका जन्म जौनपुर, उत्तरप्रदेश, भारत हुआ था तथा उन्होंने पूरे भारत, अरबी प्रायद्वीप और प्राचीन ख़ुरासान का भ्रमण किया था, जहाँ 63 वर्ष की आयु में फ़राह, अफ़ग़ानिस्तान में उनका निधन हो गया। यात्रा जौनपुरी ने अपने परिवार और अनुयायिओं के एक छोटे दल के साथ जौनपुर छोड़ा। कई स्थानों को बदलने और महदविया के नए साथियों के साथ इस दल ने फ़राह, अफ़ग़ानिस्तान में प्रवेश किया। हज्ज यात्रा और महदी होने का दावा 53 वर्ष की आयु में जौनपुरी ने हज्ज की यात्रा के लिए मक्का का दौरा किया। यहीँ पर 1496 (901 हिजरी), में काबा का तवाफ़ करने के पश्चात जौनपुरी ने दावा किया कि वही भविष्यवाणी वाले महदी हैं और जो कोई उन्हें मानता है वह मोमिन है। जौनपुरी की बातों को मक्का के इस्लामी विद्वानों अनदेखा किया। मक्का में लगभग सात या आठ महीने रहने के बादhttp://mahdavia.info/promised_one/index.html संग्रहीत प्रति 2 सितंबर 2017 https://web.archive.org/web/20080927122944/http://mahdavia.info/promised_one/index.html 27 सितंबर 2008 dead जौनपुरी भारत लौटे जहाँ उन्होंने स्वयं को अहमदाबाद में महदी घोषित किया। इसके बाद उन्होंने यही दावा बधली में किया जो पाटण, गुजरात के निकट है। सन्दर्भ