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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कालमेघ

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Andrographis paniculata (Kalpa) in Narshapur forest, AP W2 IMG 0867.jpg Plantae Angiosperms Eudicots Asterids Lamiales Acanthaceae Andrographis A. paniculata Andrographis paniculata (Burm.f.) Wall. ex NeesGRIN Species Profile http://www.ars-grin.gov/cgi-bin/npgs/html/taxon.pl?414228 ২৬ সেপ্টেম্বর ২০১৩ https://web.archive.org/web/20090505040402/http://www.ars-grin.gov/cgi-bin/npgs/html/taxon.pl?414228 ৫ মে ২০০৯ dead margin-left: 1em; text-indent: -1em; Justicia paniculata Burm.f. thumb|tight|300px|कालमेघ कालमेघ एक बहुवर्षीय शाक जातीय औषधीय पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम एंडोग्रेफिस पैनिकुलाटा है। कालमेघ की पत्तियों में कालमेघीन नामक उपक्षार पाया जाता है, जिसका औषधीय महत्व है। यह पौधा भारत एवं श्रीलंका का मूल निवासी है तथा दक्षिण एशिया में व्यापक रूप से इसकी खेती की जाती है। इसका तना सीधा होता है जिसमें चार शाखाएँ निकलती हैं और प्रत्येक शाखा फिर चार शाखाओं में फूटती हैं। इस पौधे की पत्तियाँ हरी एवं साधारण होती हैं। इसके फूल का रंग गुलाबी होता है। इसके पौधे को बीज द्वारा तैयार किया जाता है जिसको मई-जून में नर्सरी डालकर या खेत में छिड़ककर तैयार करते हैं। यह पौधा छोटे कद वाला शाकीय छायायुक्त स्थानों पर अधिक होता है। पौधे की छँटाई फूल आने की अवस्था अगस्त-नवम्बर में की जाती है। बीज के लिये फरवरी-मार्च में पौधों की कटाई करते है। पौधों को काटकर तथा सुखाकर बिक्री की जाती है। औसतन ३००-४०० की शाकीय हरा भाग (६०-८० किग्रा सूखा शाकीय भाग) प्रति हेक्टेयर मिल जाती है।http://opaals.iitk.ac.in/zcu/Dhaura/paudh.html पौध रोगों के जैविक नियन्त्रण में प्रभावी भूमिका एवं रसायन का विकल २१ मई २००९ एचटीएमएल कृषि विज्ञान केंद्रजून 2020 InternetArchiveBot औषधीय गुण भारतीय चिकित्सा पद्वति में कालमेघ एक दिव्य गुणकारी औषधीय पौधा है जिसको हरा चिरायता, देशी चिरायता, बेलवेन, किरयित् के नामों से भी जाना जाता है। भारत में यह पौधा पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश में अधिक पाया जाता है। इसका स्वाद कड़वा होता है, जिसमें एक प्रकार क्षारीय तत्व-एन्ड्रोग्राफोलाइडस, कालमेघिन पायी जाती है जिसके पत्तियों का उपयोग ज्वर नाशक, जांडिस, पेचिस, सिरदर्द कृमिनाशक, रक्तशोधक, विषनाशक तथा अन्य पेट की बीमारियों में बहुत ही लाभकारी पाया गया है। कालमेघ का उपयोग मलेरिया, ब्रोंकाइटिस रोगो में किया जाता है। इसका उपयोग यकृत सम्बन्धी रोगों को दूर करने में होता है। इसकी जड़ का उपयोग भूख लगने वाली औषधि के रूप में भी होता है। कालमेघ का उपयोग पेट में गैस, अपच, पेट में केचुएँ आदि को दूर करता है। इसका रस पित्तनाशक है। यह रक्तविकार सम्बन्धी रोगों के उपचार में भी लाभदायक है। सरसों के तेल में मिलाकार एक प्रकार का मलहम तैयार किया जाता है जो चर्म रोग जैसे दाद, खुजली इत्यादि दूर करने में बहुत उपयोगी होता है। चिली में किए गए एक प्रयोग में यह पाया गया कि सर्दी के कारण बहते नाक वाले रोगी को १२०० मिलीग्राम कालमेघ का रस दिये जाने पर उसकी सर्दी ठीक हो गई।http://www.goodhousekeeping.com/health/diseases/fight-common-cold-2 Stop a Cold in Just 12 Hours १६ मई २००९ एचटीएमएल good house keeping https://web.archive.org/web/20090316052154/http://www.goodhousekeeping.com/health/diseases/fight-common-cold-2 16 मार्च 2009 dead इंडियन ड्रग इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में भी स्वीकार किया गया है कि कालमेघ में रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता पाई जाती है और यह मलेरिया और अन्य प्रकार के बुखार के लिए रामबाण दवा है। इसके नियमित सेवन से रक्त शुद्ध होता है तथा पेट की बीमारियां नहीं होतीं। यह लीवर यानी यकृत के लिए एक तरह से शक्तिवर्धक का कार्य करता है। इसका सेवन करने से एसिडिटी, वात रोग और चर्मरोग नहीं होते।http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_3804097.html कालमेघ से भागे डेंगू व चिकनगुनिया २१ मई २००९ जागरण https://web.archive.org/web/20120117230412/http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_3804097.html 17 जनवरी 2012 dead चित्र दीर्घा सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ आयुर्वेद का बहु-उपयोगी द्रव्य कालमेघ yes श्रेणी:औषधीय पौधे श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना