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पक्ष
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पक्ष (बहुविकल्पी)
पक्ष अथवा पखवाड़ा सामान्य व्यवहार में 15 दिनों के अंतराल को कहा जाता है। सुविधानुसार आधा महीना या दो सप्ताह के समय को भी एसा कह दिया जाता है। हालाँकि ज्योतिष शास्त्र, भारतीय पंचांग या काल गणना की हिन्दू पद्धति के अनुसार तकनीकी रूप से पक्ष की परिभाषा है - चंद्रमा द्वारा कलाचक्र में एक से दूसरी स्थिति (अमावस्या से पूर्णिमा अथवा पूर्णिमा से अमावस्या) तक जाने के लिया जाने वाला समय। इसी के अनुसार पक्ष दो प्रकार के परिभाषित किए जाते हैं - शुक्ल पक्ष तथा कृष्ण पक्ष।
कृष्ण अथवा शुक्लपक्ष में प्राय: 15 दिन होते हैं'। परंतु किसी पक्ष में कोई तिथि-क्षय हो जाने की स्थिति में 14 दिन अथवा तिथि-वृद्धि होने पर 16 दिन भी हो जाते हैं। पक्ष में तिथि की हानि या वृद्धि न होने की स्थिति में 15 दिन ही होते हैं।
तेरह दिन का पक्ष
कभी-कभी चन्द्र और सूर्य की स्पष्ट गणित प्रक्रिया के कारण किसी पक्ष में दो बार तिथि का क्षय हो जाने से 13 दिन का पक्ष भी आ जाता है। वर्तमान विक्रम संवत् 2064 के श्रावण मास के कृष्णपक्ष में (31 जुलाई से 12 अगस्त तक) दो तिथियों का क्षय हो जाने के कारण यह पक्ष मात्र 13 दिन का था। महाभारत के युद्ध के समय भी तेरह दिन का पक्ष पड़ा था। सनातनधर्म के ग्रन्थों तथा ज्योतिषशास्त्र में 13 दिवसीय पक्ष को 'विश्वघस्त्र पक्ष' का नाम देकर इसे विश्व-शांति को भंग करने वाला माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस पक्ष का असर तेरह पक्ष और तेरह मास के अन्दर अपना प्रभाव जरूर देता है। इसको धर्म एवं ज्योतिष के ग्रंथों में 'विश्वघस्त्र पक्ष' कहा गया है। धर्मग्रंथों में विश्वघस्त्र पक्ष को 'कालयोग' का नाम भी दिया गया है -
त्रयोदश दिने पक्षेस्तदा संहरते जगत्।
...........कालयोग: प्रकीतत:॥
कालचक्र के कारण जब तेरह दिन का पक्ष आता है, तब विश्व में संहार की स्थिति उत्पन्न होती है। तेरह दिवसीय विश्वघस्त्र पक्ष असाध्य रोगों का उत्पादक, उपद्रव पैदा करने वाला, हिंसा एवं रक्तपात बढ़ाने वाला, राष्टों के मध्य युद्ध की स्थिति बनाने वाला, प्राकृतिक प्रकोप-दुर्घटनावश जन-धन की भीषण हानि करने वाला, समाज में अशांति एवं अराजकता के वातावरण का सृजनकर्ता पाया गया है। प्राचीन ग्रंथों में इसे अमंगलदायक मानकर यहां तक कहा गया है-
"यदा च जायते पक्षस्त्रयोदश दिनात्मक:। भवेल्लोकक्षयो घोरो मुण्डमाला युतामही॥"
जब कभी तेरह दिवसीय पक्ष आता है, तब संसार में संहार होता है और महाकाली नरमुण्डों की माला धारण करती हैं।
इन्हें भी देखें
हिन्दू काल गणना
हिन्दू पंचांग
तिथि
शुक्ल पक्ष
कृष्ण पक्ष
अमावस्या
पूर्णिमा
चंद्र मास
सन्दर्भ
श्रेणी:ज्योतिष
श्रेणी:समय की इकाइयाँ
श्रेणी:हिन्दू काल गणना