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मध्य प्रदेश का इतिहास

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मध्य प्रदेश का इतिहास पाषाण युग के समय से ही शुरुआत मे आ गया था। इसे मुख्यत: तीन अवधियों में विभाजित किया जा सकता है। जहा गोंड,चंदेल, परमार जैसे शक्तिशाली क्षत्रियों का सफल शासन रहा, जिनका परिचय आज भी मध्य भारत में मिलता है। पाषाण युग /पत्थर युग right|250px|भीमबेटका शैलाश्रय चित्रकारी भीमबैठिका की गुफाएं वर्तमान के मध्य प्रदेश में पिलेओलिथिक बस्तियों के प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। नर्मदा नदी घाटी के विभिन्न स्थानों पर पाषाण युग के कई उपकरण पाये गए है। एरान, कायथ, महेश्वर, नागदा और नवदतोली सहित कई जगहों पर ताम्रयुगीन स्थानों की खोज की गई है।प्रणब कुमार भट्टाचार्य 1977 1 कई स्थानों पर लगभग 30,000 ईसा पूर्व के गुफा चित्रों की खोज की गई है।प्रणब कुमार भट्टाचार्य 1977 2 वर्तमान मध्य प्रदेश में मनुष्यों की बस्तियां मुख्य रूप से नर्मदा, चंबल और बेतवा जैसे नदियों की घाटियों में विकसित हुई हैं।प्रणब कुमार भट्टाचार्य 1977 3 वैदिक काल प्रारंभिक वैदिक काल के दौरान, विंध्य पर्वतों ने इंडो-आर्यन क्षेत्र की दक्षिणी सीमा का गठन किया था। प्राचीनतम प्रचलित संस्कृत पाठ ऋग्वेद में, नर्मदा नदी का उल्लेख नहीं मिलता है। चौथी सदी ईसापूर्व व्याकरणिक पाणिनी ने मध्य भारत में अवंती जनपद का उल्लेख किया। इसमें नर्मदा के दक्षिण में बसे केवल एक क्षेत्र अष्मका का उल्लेख है।प्रणब कुमार भट्टाचार्य 1977 3 बौद्ध पाठ अंगुतारा निकैया ने सोलह महाजनपदों का नाम दिया, जिनमें से अवंती, चेदि और वत्स में मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों आते है। महावस्तु ने पूर्वी मालवा क्षेत्र में एक अन्य दशर्न नामक राज्य का उल्लेख किया था। पाली भाषा मे लिखित बौद्ध लेखों मे मध्य भारत में उज्जैनी (उज्जयिनी), वेदीसा (विदिशा) और महिस्सती (महिष्मति) सहित कई महत्वपूर्ण शहरों का उल्लेख हैं।प्रणब कुमार भट्टाचार्य 1977 4-5 प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, अवंती मे हैहय राजवंश, वितिहोत्रा वंश (हैहय की एक शाखा) और प्रद्योत वंश द्वारा क्रमिक रूप से शासन किया गया था। प्रद्योत के शासन में, अवंती भारतीय उपमहाद्वीप की एक प्रमुख शक्ति बन गई।प्रणब कुमार भट्टाचार्य 1977 5 बाद में शिशुनाग ने इस पर कब्जा कर मगध साम्राज्य में मिला लिया।प्रणब कुमार भट्टाचार्य 1977 6 शिशुनाग वंश को नंदों ने उखाड़ दिया, जिन्हें बाद में मौर्यों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।प्रणब कुमार भट्टाचार्य 1977 6-8 गोंडवाना साम्राज्य(गोंड क्षत्रिय) मध्यप्रदेश एक कबिलाई बाहुल्य राज्य है। मध्यप्रदेश के गोंड क्षत्रिय राजाओं ने इस राज्य के एक बड़े हिस्से पर शासन किया। गोंड क्षत्रिय कबीलो ने मध्य भारत के बड़े भू भाग पर अपना शासन कायम किया और कई क्षेत्रों को बसाया था। मदन सिंह द्वारा 11वी शताब्दी में राजा किया गया। उदय सिंह द्वारा परमार राजा महालक देव की सहायता के लिए अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध किए। राजा संग्राम शाह द्वारा मध्यकाल में 52 गढ़ 57 परगनों का विस्तृत राज्य रहा है। राजा संग्राम शाह के बेटे दलपत शाह की पत्नी महान वीरांगना रानी दुर्गावती का नाम मुगल अकबर से युद्ध के लिए भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। भोपाल - राजा भोपाल सिंह सल्लाम द्वारा भोपाल शहर को बसाया गया था। गढ़ा मंडला में गोंडवाना साम्राज्य का राजवंश 157 से 1781 सदी तक कायम रहा। भोपाल की रानी कमलापति भोपाल की अंतिम गोंड रानी थी। जबलपुर के राजा शंकर शाह, कुंवर रघुनाथ शाह, देवगढ़ के राजा जटबा, खेरला के राजा प्रमुख उल्लेखनीय नाम है। नागपुर - नागपुर को राजा बख्त बुलंद शाह जी बसाए थे। जहा उनके वंशज 1947 तक शासन किए। एलोरा - राजा इल द्वारा बसाया गया इलिचपुर जहा एलोरा की गुफाएं है। प्रमुख गोंडकालीन किले स्मारको में जबलपुर का मदन महल किला, बाजना मठ, संग्राम सागर, रामनगर का किला, बघेलिन महल, रायभागत की कोठी, रानी ताल, आधार ताल, चेरी ताल, देवगढ़ का किला, चौरा गढ़ का किला प्रमुख है।। मौर्य और उनके उत्तराधिकारी right|thumb|350px|साँची का स्तूप जिसे ईसापूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने बनवाया था। उज्जैन शहर छठी शताब्दी में भारतीय शहरीकरण की लहर में एक प्रमुख केंद्र बन गया, और मालवा या अवंती राज्य के मुख्य शहर के रूप में स्थापित हो गया। इसके पूर्व में, चेदी राज्य, बुंदेलखंड में स्थित था। राजा चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा 322 ईसा पूर्व उत्तर भारत को संयुक्त कर, मौर्य साम्राज्य (322 से 185 ईसा पूर्व) की स्थापना, जिसमें आधुनिक मध्यप्रदेश के सभी क्षेत्र शामिल थे। राजा अशोक की पत्नी, वर्तमान भोपाल के उत्तर में स्थित एक शहर विदिशा से थी। अशोक की मौत के बाद मौर्य साम्राज्य का पतन होने लगा और 3 से 1 शताब्दी ईसा पूर्व तक मध्यभारत में शक, कुशाण और कई स्थानीय राजवंश स्वतंत्र रूप से राज्य करने लगे। प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व में उज्जैन, गंगा के मैदान और भारत के अरबसागर बंदरगाहों के बीच व्यापार मार्गों पर स्थित होने के कारण, एक प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र के रूप में उभरा। इसके अलावा यह हिंदू और बौध्दौ के लिये एक महत्वपूर्ण केंद्र भी था। उत्तरी दक्कन के सातवाहन वंश और पश्चिमी सतरापों का शक राजवंश 1 से 3 शताब्दियों तक मध्य प्रदेश के नियंत्रण के लिए आपस में लड़ते रहे। दक्षिण भारतीय के सातवाहन वंश के राजा गौतमपुत्र सातकर्णी ने दूसरी शताब्दी में शक राजाओं को हरा कर मालावा और गुजरात के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया। उत्तर भारत में चौथी और पाँचवीं शताब्दी में गुप्त साम्राज्य कि स्थापना हुई, जिसे भारत के लिये एक "प्रभावी या सुनहरा" समय माना जाता है। पारिवराज वंश ने मध्य प्रदेश में गुप्त साम्राज्य के सामंत के रूप में शासन किया। वाकाटक वंश गुप्ताओं के दक्षिणी पड़ोसी थे, जो अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक उत्तरी डेक्कन पठार पर शासन करते थे। पाँचवीं शताब्दी के अंत तक इन साम्राज्यों का पतन हो गया। मध्यकालीन right|thumb|350px|खजुराहो का जेवेरी मन्दिर हफ्थलीन लोगो (हूणों/गोरेहूणो) के आक्रमण के बाद गुप्त वंश का पतन होने लगा और भारतवर्ष छोटे छोटे टुकड़ों में बँट गया।मालवा के राजा यशोधवर्मन ने गोर हूणों को हराया था और उनके प्रसार को रोका। थानेसर के राजा हर्षवर्धन ने अपनी मृत्यु(647C) से पहले उत्तर भारत को पुनर्गठित किया मालवा पर दक्षिण भारत के राष्ट्रकूट वंश का राज 8वी से 10वी शताब्दी तक चला मध्यकालीन समय मे ही राजपूत, मालवा के परमार, बुन्देलखंड के चंदेल राजाओ का आविर्भाव हुआ। खजुराहो के मन्दिर का निर्माण भी चंदेल राजाओ ने करवाया था । परमार वंश के राजा भोज पाल (गड़रिया)(1010C-1060C) बहुविद लेखक हुए। इसी समय के आसपास महाकौशल ओर गोंडवाना क्षेत्र में गोंड साम्राज्य का जन्म हुआ। पश्चिम मध्य प्रदेश पर 13वी शताब्दी में तुर्को ने शासन किया। दिल्ली सल्तनत के पतन के बाद अन्य क्षेत्रीय राज्यो का आविर्भाव हुआ जिनमे ग्वालियर के तोमर वंश,ओर मालवा की मुस्लिम सल्तनत प्रमुख थे। आधुनिक स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद मध्य प्रदेश को तीन भागों में विभाजित किया गया। भाग क, भाग ख, और भाग ग। भाग क की राजधानी नागपुर, भाग ख की ग्वालियर और इंदौर तथा भाग ग की रीवा रखी गई। 1956 राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश का गठन भाषीय आधार पर किया गया। उस समय मध्य प्रदेश मैं कुल 79 रियासतें थी। इसकी राजधानी भोपाल रखी गई। इस समय मध्य प्रदेश में 8 संभाग व 43 जिले थे। 26 जनवरी 1972 को दो नए जिले भोपाल तथा राजनंदगांव का निर्माण हुआ। 1992 मैं दिग्विजय सरकार ने दस नए जिले बनाने का निर्णय किया। 1998 मैं सिंहदेव कमेठी का गठन किया जिसके आधार पर 6 और नए जिले बनाये गए। इस तरह 1998 में जिलो की संख्या 61 हो गई। 1 नवम्बर 2000 को भारत के 26वें राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ का गठन किया गया जिससे मध्य प्रदेश के 16 जिले छत्तीसगढ़ में चले गए। 15 अगस्त 2003 को तीन नए जिले अशोकनगर , बुरहानपुर तथा अनूपपुर का निर्माण किया। तथा 17 मई 2008 को अलीराजपुर 24 मई 2008 को सिंगरौली, 14 जून 2008 को सहडोल संभाग, 25 मार्च 2013 को नर्मदापुरम संभाग का गठन किया। 16 अगस्त 2013 को आगर मालवा का निर्माण किया। मध्य प्रदेश का 52वां जिला निवाड़ी 01 अक्टूबर 2018 को अस्तित्व में आया। जो टीकमगढ़ जिले की 3 तहसील निवाड़ी, ओरछा, और पृथ्वीपुर को मिलकर बनाया गया। 15 अगस्त 2023 को एक नया जिला *मऊगंज को रीवा से अलग करके बनाया गया है। 05अक्तूबर 2023 को 2 नये जिले पांढुरना (छिंदवाड़ा से) और मैहर (सतना से अलग करके) बनाए गए। इस प्रकार वर्तमान में मध्यप्रदेश 55 जिले तथा 10 संभाग हैं। 2 अन्य जिले प्रस्तावित हैं। भारतीय प्रजातंत्र के बाद सन्दर्भ श्रेणी:मध्य प्रदेश का इतिहास श्रेणी:भारत का इतिहास