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सैक्रोमाइसीज़ सेरेविसी
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सैक्रोमाइसीज़ सेरेविसी background-color: #d3d3a4; 250px|center
1. स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (SEM) द्वारा यीस्ट कोशिकाएँ
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4. फेज-कंट्रास्ट सूक्ष्मदर्शी द्वारा 100x ज़ूम पर कोशिकाएँ कवक एस्कोमाइकोटा सैक्रोमाइसिटीज़ सैक्रोमाइसिटेल्स सैक्रोमाइसिटेसी Saccharomyces S. cerevisiae वैज्ञानिक विवरण मॉडल जीव सुकेन्द्रकीय मॉडल जीव जीनोम आकार ~12.1 मिलियन बेस पेयर गुणसूत्र 16 प्रथम अनुक्रमण 1996 (विश्व का प्रथम सुकेन्द्रकीय) मुख्य उपयोग किण्वन, बेकिंग, ब्रूइंग Saccharomyces cerevisiae Meyen ex E.C.Hansen (1883)
सैकेरोमाइसिस सेरेविसी (Saccharomyces cerevisiae), जिसे सामान्यतः मद्य-खमीर या बेकर खमीर कहा जाता है, एककोशिकीय कवकीय सूक्ष्मजीवों की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजाति है। प्राचीन काल से ही इसका उपयोग वाइन निर्माण, बेकिंग तथा मद्य-निर्माण की प्रक्रियाओं में होता आया है, जहाँ यह किण्वन की क्रिया का प्रमुख आधार बनता है। ऐसा माना जाता है कि इस प्रजाति की पहचान सबसे पहले अंगूर के छिलकों से हुई थी, जहाँ यह स्वाभाविक रूप से पाई जाती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह जीव अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। सैकेरोमाइसीज़ सेरेविसी को आण्विक और कोशिका जीवविज्ञान में आदर्श यूकेरियोटिक मॉडल जीव के रूप में व्यापक रूप से अध्ययन किया जाता है, ठीक उसी प्रकार जैसे एशेरिशिया कोलाई जीवाणुओं के अध्ययन में मानक मॉडल के रूप में प्रयुक्त होता है। यह सूक्ष्मजीव अनेक प्रकार के किण्वन के लिए उत्तरदायी है, जो खाद्य और पेय उद्योगों में इसकी उपयोगिता को और अधिक महत्त्वपूर्ण बनाता है।
आकृति की दृष्टि से इसकी कोशिकाएँ सामान्यतः गोल या अंडाकार होती हैं, जिनका व्यास लगभग 5 से 10 माइक्रोमीटर तक होता है। यह मुख्यतः मुकुलन की प्रक्रिया द्वारा प्रजनन करते है,Yeast. Molecular and Cell bio फेल्डमैन हॉर्स्ट https://books.google.co.th/books/about/Yeast.html?id=XR7yeYaoElMC&source=kp_book_description&redir_esc=y 2012 जॉन विली एंड संस 9783527332526 जिसमें मुख्य कोशिका से छोटी नई कोशिका विकसित होकर स्वतंत्र इकाई में अलग होती है।
खमीर के अध्ययन ने मानव जीवविज्ञान की समझ को नई दिशा दी है और इसे इस क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जाता है। कोशिका चक्र को नियंत्रित करने वाले प्रोटीन, संकेतकारी तंत्र से जुड़े प्रोटीन तथा प्रोटीन-प्रसंस्करण एंजाइम जैसे अनेक महत्त्वपूर्ण मानव प्रोटीनों की पहचान सर्वप्रथम इसी खमीर में उनके समजात रूपों के अध्ययन से संभव हुई। इसके अतिरिक्त, यह एकमात्र ज्ञात खमीर है जिसमें स्रावी मार्गों से संबंधित ‘बर्कले निकाय’ जैसी विशिष्ट संरचनाएँ पाई जाती हैं, जो कोशिकीय प्रक्रियाओं को समझने में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करती हैं।
जीवविज्ञान के अतिरिक्त, इसका उपयोग रोग निदान के क्षेत्र में भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। विशेषकर प्रदाहक आन्त्र रोग के परीक्षण में इसके विरुद्ध बनने वाले प्रतिजन प्रभावी सीरोलॉजिकल सूचक के रूप में कार्य करते हैं। ये प्रतिजन क्रोहन रोग के लगभग 60–70 प्रतिशत तथा अल्सरेटिव कोलाइटिस के 10–15 प्रतिशत रोगियों में पाए जाते हैं। इस आधार पर न केवल इन दोनों रोगों के बीच अंतर स्पष्ट करने में सहायता मिलती है, बल्कि रोग की तीव्रता और प्रगति का आकलन भी अधिक सटीक रूप से किया जा सकता है।वॉकर एलजे, एल्डहॉस एमसी, ड्रमंड एचई, स्मिथ बीआर, निमो ईआर, अर्नोट आईडी, सत्संगी जे 2004 Anti-Saccharomyces cerevisiae antibodies (ASCA) in Crohn's disease are associated with disease severity but not NOD2/CARD15 mutations क्लिन. एक्सपे. इम्यूनोल 135 3 490–96 10.1111/j.1365-2249.2003.02392.x 1808965 15008984
अंगूठाकार|डीआईसी (DIC) सूक्ष्मदर्शी के तहत यीस्ट का स्वरूप|198x198पिक्सेल|बाएँ
इतिहास
प्राचीन काल में वैज्ञानिक ज्ञान के अभाव के कारण, बेकिंग(भर्जनhttps://www.hindwidictionary.com/hindi-meaning-of-baking baking meaning in Hindi baking के हिंदी अर्थ हिन्दवी डिक्शनरी Hindwi Dictionary hi 2026-04-28) में प्राकृतिक रूप से जंगली खमीर और जीवाणुओं का ही उपयोग होता था, जिसके परिणामस्वरूप प्रायः खट्टे उत्पाद बनते थे। 19वीं सदी में इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव तब आया, जब बेकर्स ने मद्य-निर्माताओं के खमीर का उपयोग कर पहली बार मीठी ब्रेड बनानी शुरू की।http://archive.org/details/bub_gb_6jRDAAAAIAAJ Report on Vienna Bread Eben Norton Horsford U.S. Government Printing Office University of California 1875 86 en इसके पश्चात्, 1846 में विकसित हुई 'वियना प्रक्रिया' ने खमीर उत्पादन की तकनीक में सुधार लाया।क्रिस्टियनसेन, बी.; रैटलेज, कॉलिन (2001). बेसिक बायोटेक्नोलॉजी. कैम्ब्रिज, यूके: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस. p. 378. ISBN 978-0-521-77917-3. आगे चलकर, लुई पाश्चर के वैज्ञानिक शोधों और अपकेंद्रण मशीन के उपयोग से खमीर की शुद्ध प्रजातियों का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन संभव हो सका। इसी निरंतर तकनीकी प्रगति के फलस्वरूप, बीसवीं सदी तक आते-आते 'केक यीस्ट' बेकिंग उद्योग का व्यावसायिक मानक बन गया।
जीव विज्ञान
पारिस्थितिकी
अंगूठाकार|208x208px|प्लेट पर विकसित यीस्ट की कॉलोनियां
प्रकृति में यीस्ट मुख्य रूप से पके फलों और ओक के पेड़ों की छाल पर पाया जाता है।https://books.google.com/books?id=VvI0AQAAMAAJ Microbiology: A Text-book of Microörganisms, General & Applied. Contributors: F.T. Bioletti ... R.E. Buchanan ... Marshall Charles Edward 1912 P. Blakiston's Son & Company enhttps://www.nationalgeographic.com/science/article/you-can-thank-wasps-for-your-bread-beer-and-wine You can thank wasps for your bread, beer and wine 2012-07-30 Science en 2026-04-28 2 नवंबर 2021 https://web.archive.org/web/20211102211512/https://www.nationalgeographic.com/science/article/you-can-thank-wasps-for-your-bread-beer-and-wine dead चूँकि यह हवा के माध्यम से स्वयं नहीं फैल सकता, इसलिए इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने के लिए वाहकों की आवश्यकता होती है।Mortimer Robert Polsinelli Mario On the origins of wine yeast https://linkinghub.elsevier.com/retrieve/pii/S0923250899800369 Research in Microbiology en 150 3 199–204 10.1016/S0923-2508(99)80036-9 इस प्राकृतिक फैलाव में ततैया महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सर्दियों के मौसम में ततैया की रानियाँ यीस्ट को अपने भीतर आश्रय देकर सुरक्षित रखती हैं और इसे अपनी संतानों तक स्थानांतरित करती हैं।Stefanini Irene Dapporto Leonardo Legras Jean-Luc Calabretta Antonio Di Paola Monica De Filippo Carlotta Viola Roberto Capretti Paolo Polsinelli Mario 2012-08-14 Role of social wasps in Saccharomyces cerevisiae ecology and evolution https://pnas.org/doi/full/10.1073/pnas.1208362109 Proceedings of the National Academy of Sciences en 109 33 13398–13403 10.1073/pnas.1208362109 0027-8424 3421210 22847440 इसके अतिरिक्त, ततैया की आंत का सूक्ष्म-वातावरण यीस्ट के प्रजनन और बीजाणुजनन के लिए अत्यंत अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है।Stefanini Irene Dapporto Leonardo Berná Luisa Polsinelli Mario Turillazzi Stefano Cavalieri Duccio 2016-02-23 Social wasps are a Saccharomyces mating nest https://pnas.org/doi/full/10.1073/pnas.1516453113 Proceedings of the National Academy of Sciences en 113 8 2247–2251 10.1073/pnas.1516453113 0027-8424 4776513 26787874 जहाँ तक यीस्ट के इष्टतम विकास की बात है, तो इसके लिए 30-35°C का तापमान सबसे आदर्श माना जाता है।Stefanini Irene Dapporto Leonardo Legras Jean-Luc Calabretta Antonio Di Paola Monica De Filippo Carlotta Viola Roberto Capretti Paolo Polsinelli Mario 2012-08-14 Role of social wasps in Saccharomyces cerevisiae ecology and evolution https://pnas.org/doi/full/10.1073/pnas.1208362109 Proceedings of the National Academy of Sciences en 109 33 13398–13403 10.1073/pnas.1208362109 0027-8424 3421210 22847440
जीवन चक्र
यीस्ट का विकास अगुणित (अलैंगिक) और द्विगुणित (लैंगिक) दोनों रूपों में होता है। पर्यावरणीय तनाव की स्थिति में अगुणित कोशिकाएँ प्रायः मृत हो जाती हैं, जबकि द्विगुणित कोशिकाएँ अपना अस्तित्व बचाने के लिए अर्धसूत्रीविभाजन करती हैं और चार अगुणित बीजाणुओं का निर्माण करती हैं। इसके विपरीत, जब परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं, तो बहुत तेज़ी से वृद्धि करती हैं और मात्र 100 मिनट में अपनी संख्या दोगुनी कर सकती हैं।Herskowitz I Life cycle of the budding yeast Saccharomyces cerevisiae https://journals.asm.org/doi/10.1128/mr.52.4.536-553.1988 Microbiological Reviews en 52 4 536–553 10.1128/mr.52.4.536-553.1988 0146-0749 373162 3070323https://nirfriedmanlab.blogspot.com/2011/01/growing-yeasts-robotically.html The Friedman Lab Chronicles: Growing yeasts (Robotically) Foobar 2011-01-03 The Friedman Lab Chronicles 2026-04-28 यद्यपि विभिन्न प्रभेदों और वातावरण के अनुसार इनकी विकास दर भिन्न-भिन्न हो सकती हैWarringer Jonas Zörgö Enikö Cubillos Francisco A. Zia Amin Gjuvsland Arne Simpson Jared T. Forsmark Annabelle Durbin Richard Omholt Stig W. 2011-06-16 Kruglyak Leonid Trait Variation in Yeast Is Defined by Population History https://dx.plos.org/10.1371/journal.pgen.1002111 PLoS Genetics en 7 6 e1002111 10.1371/journal.pgen.1002111 1553-7404 3116910 21698134, फिर भी यीस्ट कोशिका का औसत प्रतिकृति जीवनकाल 15 और 30 विभाजन चक्रों के बीच होता हैSorokin Maksim I. Knorre Dmitry A. Severin Fedor F. 2014-01-06 Early manifestations of replicative aging in the yeast Saccharomyces cerevisiae https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5349164/ Microbial Cell (Graz, Austria) 1 1 37–42 10.15698/mic2014.01.122 2311-2638 5349164 28357208
पोषण संबंधी आवश्यकताएँ
एस॰ सेरेविसी के सभी प्रभेद वायवीय रूप से ग्लूकोज़, माल्टोज़,Bell P.J.L. Higgins V.J. Attfield P.V. 11 April 2001 Comparison of fermentative capacities of industrial baking and wild-type yeasts of the species Saccharomyces cerevisiae in different sugar media Letters in Applied Microbiology 32 4 224–229 10.1046/j.1472-765x.2001.00894.x 11298930 और ट्रेहलोज़Jules Matthieu Guillou Vincent François Jean Parrou Jean-Luc May 2004 Two Distinct Pathways for Trehalose Assimilation in the Yeast Saccharomyces cerevisiae Applied and Environmental Microbiology 70 5 2771–2778 2004ApEnM..70.2771J 10.1128/AEM.70.5.2771-2778.2004 404389 15128531 पर वृद्धि कर सकते हैं, लेकिन ये लैक्टोज़ और सेलोबायोज़ पर वृद्धि करने में असमर्थ होते हैं। हालाँकि, अन्य शर्कराओं पर इनकी वृद्धि दर भिन्न-भिन्न होती है। गैलेक्टोज़ और फ्रुक्टोज़ को दो सर्वोत्तम किण्वनकारी शर्कराएँ माना जाता है। विभिन्न शर्कराओं का उपयोग करने के साथ यीस्ट की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें वायवीय या अवायवीय रूप से संवर्धित किया गया है। कुछ प्रभेद अवायवीय परिस्थितियों में सुक्रोज़ और ट्रेहलोज़ पर वृद्धि नहीं कर सकते हैं।
सभी प्रभेद अमोनिया और यूरिया का उपयोग एकमात्र नाइट्रोजन स्रोत के रूप में कर सकते हैं, लेकिन वे नाइट्रेट का उपयोग नहीं कर सकते, क्योंकि उनमें इसे अमोनियम आयनों में अपचयित करने की क्षमता नहीं होती है। वे अधिकांश अमीनो अम्लों, छोटे पेप्टाइड्स और नाइट्रोजन क्षारकों का भी नाइट्रोजन स्रोत के रूप में उपयोग कर सकते हैं। हालाँकि, हिस्टिडीन, ग्लाइसिन, सिस्टीन, और लाइसिन का उपयोग यीस्ट द्वारा सरलता से नहीं किया जाता है। चूँकि एस॰ सेरेविसी प्रोटिएज़ का स्राव नहीं करता है, इसलिए यह बाह्यकोशिकीय प्रोटीनों का चयापचय नहीं कर सकता है।
यीस्ट को फॉस्फोरस की भी आवश्यकता होती है, जिसे यह डाइहाइड्रोजन फॉस्फेट आयन के रूप में स्वांगीकृत करता है। इसके अतिरिक्त, इसे सल्फर की भी आवश्यकता होती है, जिसे सल्फेट आयन या कार्बनिक सल्फर यौगिकों (जैसे- मेथियोनीन और सिस्टीन नामक अमीनो अम्लों) के रूप में स्वांगीकृत किया जा सकता है। यीस्ट की उचित वृद्धि के लिए मैग्नीशियम, आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसी कुछ धातुओं की भी आवश्यकता होती है।
कार्बनिक आवश्यकताओं के संबंध में, एस॰ सेरेविसी के अधिकांश प्रभेदों को बायोटिन की आवश्यकता होती है।Wu Hong Ito Kiyoshi Shimoi Hitoshi November 2005 Identification and Characterization of a Novel Biotin Biosynthesis Gene in Saccharomyces cerevisiae https://archive.org/details/sim_applied-and-environmental-microbiology_2005-11_71_11/page/6845 Applied and Environmental Microbiology 71 11 6845–6855 2005ApEnM..71.6845W 10.1128/AEM.71.11.6845-6855.2005 0099-2240 1287709 16269718 वास्तव में, एस॰ सेरेविसी-आधारित वृद्धि परीक्षण ने ही बायोटिन के पृथक्करण, क्रिस्टलीकरण और बाद में इसकी संरचनात्मक रूपरेखा के निर्धारण की नींव रखी थी। अधिकांश प्रभेदों को अपनी पूर्ण वृद्धि के लिए पैन्टोथेनेट की भी आवश्यकता होती है। सामान्यतः, एस॰ सेरेविसी विटामिनों के लिए प्रोटोट्रॉफिक होता है।
प्रजनन
thumb|α-कारक की प्रतिक्रिया में एस॰ सेरेविसी के प्रजनन प्रकार a में कोशिकीय उभार देखा जा सकता है, जिसे शमू कहा जाता है।
यीस्ट में मुख्य रूप से दो प्रजनन प्रकार होते हैं: a और α (अल्फा), जो जीवों में लैंगिक विभेदन के प्रारंभिक पहलुओं को दर्शाते हैं।http://bioweb.uwlax.edu/bio203/s2007/nelson_andr/ Saccharomyces cerevisiae bioweb.uwlax.edu 2026-04-28 27 दिसंबर 2011 https://web.archive.org/web/20111227083949/http://bioweb.uwlax.edu/bio203/s2007/nelson_andr/ dead कई अन्य यूकेरियोटिक जीवों की भाँति, यीस्ट में भी प्रजनन (संलयन) के परिणामस्वरूप आनुवंशिक पुनर्संयोजन होता है; अर्थात् इसके द्वारा गुणसूत्रों के नवीन संयोजनों का निर्माण होता है। विपरीत प्रजनन प्रकार की दो अगुणित यीस्ट कोशिकाएँ आपस में संलयित होकर द्विगुणित कोशिकाएँ बना सकती हैं। ये द्विगुणित कोशिकाएँ या तो अगुणित कोशिकाओं की अगली पीढ़ी उत्पन्न करने के लिए बीजाणु का निर्माण कर सकती हैं, या फिर द्विगुणित रूप में ही अपना सामान्य जीवन चक्र जारी रख सकती हैं। जीवविज्ञानियों द्वारा यीस्ट के प्रजनन की इस प्रक्रिया का उपयोग अपनी इच्छानुसार जीन, प्लास्मिड या प्रोटीनों को संयोजित करने के लिए शक्तिशाली उपकरण के रूप में किया जाता है।
यीस्ट का प्रजनन मार्ग जी प्रोटीन-युग्मित रिसेप्टर, जी प्रोटीन, आरजीएस प्रोटीन, और तीन-स्तरीय MAPK सिग्नलिंग कैस्केड का उपयोग करता है। यह प्रणाली मनुष्यों में पाए जाने वाले कैस्केड के पूर्णतः समजात होती है। वैज्ञानिकों द्वारा यीस्ट की इस विशेषता का उपयोग संकेत पारक्रमण और विसुग्राहीकरण के बुनियादी तंत्रों का गहन अध्ययन करने के लिए किया गया है।Jacobs Katherine C. Gorman Olivia Lew Daniel J. 2022-10-01 Mechanism of commitment to a mating partner in Saccharomyces cerevisiae https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9635292/ Molecular Biology of the Cell 33 12 ar112 10.1091/mbc.E22-02-0043 1939-4586 9635292 35947501
कोशिका चक्र
यीस्ट में वृद्धि मुकुल के विकास के साथ-साथ होती है। मातृ कोशिका से अलग होने से पूर्व, यह मुकुल परिपक्व कोशिका का आकार ले लेता है। पर्याप्त पोषण वाले तीव्र संवर्धनों में लगभग सभी कोशिकाओं में मुकुल दिखाई देते हैं, क्योंकि यह प्रक्रिया संपूर्ण कोशिका चक्र में चलती रहती है। विभाजन पूर्ण होने से पूर्व ही मातृ और संतति दोनों कोशिकाएँ नए मुकुलों का निर्माण शुरू कर सकती हैं। इसके विपरीत, धीमी गति से बढ़ने वाले संवर्धनों में मुकुलन कोशिका चक्र के केवल विशिष्ट चरण में होता है, जिससे बिना मुकुल वाली कोशिकाएँ भी देखी जा सकती हैं।Alberts Bruce An Overview of the Cell Cycle 2002 https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK26869/ Molecular Biology of the Cell. 4th edition Garland Science en 2026-04-28 Johnson Alexander Lewis Julian Raff Martin Roberts Keith Walter PeterAir to air Saccharomyces cerevisiae 2023-07-30 https://www.youtube.com/watch?v=-ndVopPj4UQ 2026-04-28
कोशिकाद्रव्य विभाजन
कोशिकाद्रव्य विभाजन के द्वारा मुकुलन करने वाला यीस्ट, सैकेरोमाइसीज़ सेरेविसी, दो संतति कोशिकाओं में विभाजित होता है। इसका मुकुल संपूर्ण कोशिका चक्र के दौरान वृद्धि करता है और समसूत्री विभाजन पूर्ण होने पर मातृ कोशिका से अलग हो जाता है।https://books.google.co.in/books/about/The_Cell_Cycle.html?hl=id&id=ScEuiD2V6GoC&redir_esc=y The Cell Cycle: Principles of Control Morgan David Owen 2007 OUP/New Science Press 978-0-19-920610-0 en
कोशिका चक्र के अध्ययन में एस॰ सेरेविसी अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ध्रुवीकृत कोशिका के रूप में असममित विभाजन करता है, जिससे भिन्न आकार और नियति वाली दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं। उच्च श्रेणी के जीवों में स्टेम कोशिकाएँ भी स्व-नवीनीकरण और विभेदन के लिए इसी प्रकार का असममित विभाजन करती हैं। Bi Erfei 2017 Mechanics and regulation of cytokinesis in budding yeast Seminars in Cell & Developmental Biology 66 107–18 10.1016/j.semcdb.2016.12.010 28034796 5474357
समय-निर्धारण
अधिकांश यूकेरियोटिक कोशिकाओं के विपरीत, एस॰ सेरेविसी में समसूत्री विभाजन के लिए 'एस प्रावस्था' का पूर्ण होना आवश्यक नहीं है। इसमें कोशिकाद्रव्य विभाजन 'पश्च जी1 प्रावस्था' में मुकुलन के साथ ही शुरू हो जाता है और अगले चक्र के मध्य तक चलता है। गुणसूत्रों के द्विगुणन से पूर्व ही तर्कु का निर्माण आरंभ हो सकता है। इसके अलावा, इसमें स्पष्ट 'जी2 प्रावस्था' और उच्चतर सुकेन्द्रिकों जैसे व्यापक कोशिका चक्र नियमन का अभाव होता है।
विभाजन के समय संतति कोशिका का आकार मातृ कोशिका का लगभग दो-तिहाई होता है, Wloka Carsten 2012 Mechanisms of cytokinesis in budding yeast Cytoskeleton 69 10 710–26 10.1002/cm.21046 22736599 जबकि मातृ कोशिका के भौतिक आकार में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता।Bi Erfei 2001 Advances in Cytokinesis Research. Cytokinesis in Budding Yeast: The Relationship between Actomyosin Ring Function and Septum Formation. http://www.jstage.jst.go.jp/article/csf/26/6/26_6_529/_article Cell Structure and Function en 26 6 529–537 10.1247/csf.26.529 0386-7196 विभाजन पूर्ण होते ही संतति कोशिका में आरएएम मार्ग सक्रिय हो जाता है, जो इसके उचित पृथक्करण को सुनिश्चित करता है।
एक्टोमायोसिन वलय और प्राथमिक पट (सेप्टम) का निर्माण
एस॰ सेरेविसी में कोशिकाद्रव्य विभाजन दो परस्पर निर्भर घटनाओं से संचालित होता है: संकुचनशील एक्टोमायोसिन वलय (AMR) का संकुचन और प्राथमिक पट (PS) का निर्माण। प्राथमिक पट काइटिनयुक्त कोशिका भित्ति है जो केवल विभाजन के दौरान बनती है। जंतुओं में यह बाह्यकोशिकीय आधात्री के पुनर्रचना के समान है। AMR के संकुचित होते ही प्राथमिक पट की वृद्धि शुरू हो जाती है। यदि इनमें से किसी की भी कार्यप्रणाली बाधित होती है, तो दूसरे की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है, जो इनके गहरे संबंध को दर्शाता है।Fang Xiaodong Luo Jianying Nishihama Ryuichi Wloka Carsten Dravis Christopher Travaglia Mirko Iwase Masayuki Vallen Elizabeth A. Bi Erfei 2010-12-27 Biphasic targeting and cleavage furrow ingression directed by the tail of a myosin II https://rupress.org/jcb/article/191/7/1333/36333/Biphasic-targeting-and-cleavage-furrow-ingression Journal of Cell Biology en 191 7 1333–1350 10.1083/jcb.201005134 1540-8140 3010076 21173112
कोशिकाद्रव्य की ओर स्थित AMR मुख्य रूप से एक्टिन और मायोसिन II अणुओं से बना होता है। यह वलय संकुचनशील बल उत्पन्न करके प्लैज्मा झिल्ली के अंतर्वलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।Wloka Carsten Vallen Elizabeth A. Thé Lydia Fang Xiaodong Oh Younghoon Bi Erfei 2013-02-04 Immobile myosin-II plays a scaffolding role during cytokinesis in budding yeast https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3563683/ The Journal of Cell Biology 200 3 271–286 10.1083/jcb.201208030 1540-8140 3563683 23358243Avcu Serhat Ozen Ozkan Unal Ozkan 2009-04-27 Bilateral giant open lip schizencephaly with associated cerebral anomalies: a case report https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC2827135/ Cases Journal 2 7012 10.1186/1757-1626-0002-0000007012 1757-1626 2827135 20181186
इस संकुचनशील वलय का सही संयोजन सेप्टिन नामक प्रोटीनों पर निर्भर करता है। 'पश्च जी1 प्रावस्था' में मुकुलन स्थल पर सेप्टिन एकत्रित होकर वलय बनाते हैं, जो बाद में 'आवरग्लास' (रेतघड़ी) का आकार ले लेता है। सेप्टिन आवरग्लास और मायोसिन वलय मिलकर भविष्य के विभाजन स्थल को निर्धारित करते हैं।Glomb Oliver Gronemeyer Thomas 2016-11-03 Septin Organization and Functions in Budding Yeast Frontiers in Cell and Developmental Biology 4 123 10.3389/fcell.2016.00123 10.3389/fcell.2016.00123 free 2296-634X 5093138 27857941
इसके बाद, यह सम्मिश्र गॉल्जी काय से आने वाले ग्लूकन और काइटिन अणुओं का उपयोग करके प्राथमिक पट का निर्माण करता है। VerPlank Lynn 2005 Cell cycle-regulated trafficking of Chs2 controls actomyosin ring stability during cytokinesis Mol. Biol. Cell 16 5 2529–43 10.1091/mbc.e04-12-1090 15772160 1087255 संकुचन पूर्ण होने पर ग्लूकन द्वारा दो द्वितीयक पट बनते हैं। विभाजन में सूक्ष्मनलिकाओं की भूमिका नगण्य होती है; अतः मुख्य रूप से AMR और सेप्टम ही यीस्ट में विभाजन के प्राथमिक चालक हैं। Adams A 1984 Relationship of actin and tubulin distribution to bud growth in wild-type and morphogenetic-mutant Saccharomyces cerevisiae https://archive.org/details/sim_journal-of-cell-biology_1984-03_98_3/page/934 J. Cell Biol. 98 3 934–945 10.1083/jcb.98.3.934 6365931 2113156
विखंडन यीस्ट से भिन्नताएँ
विशेषता मुकुलन यीस्ट विखंडन यीस्ट विभाजन की प्रक्रिया मातृ कोशिका से मुकुल उत्पन्न करके विभाजित होता है। अपने मध्य में नई कोशिका भित्ति का निर्माण करके दो समान भागों में बँटता है। विभाजन का आरंभ और स्थल विभाजन 'जी1 प्रावस्था' में मुकुल स्थल के चयन के साथ शुरू होता है। Balasubramanian Mohan 2004 Comparative Analysis of Cytokinesis in Budding Yeast, Fission Yeast and Animal Cells Curr. Biology 14 18 R806–18 10.1016/j.cub.2004.09.022 15380095 free 2004CBio...14.R806B विभाजन 'जी2 प्रावस्था' में कोशिका के सटीक मध्यबिंदु के चयन के साथ आरंभ होता है। वलय और सेप्टम का विकास एक्टोमायोसिन वलय और सेप्टम का विकास प्रारंभिक पश्चावस्था तक निरंतर जारी रहता है। एक्टोमायोसिन वलय का विकास मध्यावस्था-पश्चावस्था के दौरान ही शुरू होता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:वनस्पति विज्ञान
श्रेणी:जीव विज्ञान
श्रेणी:सूक्ष्मजैविकी