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बिहारी हिन्दी
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बिहारी हिन्दी हिन्दुस्तानी का एक रूप है, जो बिहार में, विशेषतः बिहार के नगरीय क्षेत्रों में बोली जाती है। इस पर मगही, मैथिली तथा भोजपुरी जैसी अनेक क्षेत्रीय बिहारी भाषाओं का गहन प्रभाव विद्यमान है।
ध्वनिविज्ञान
स्वर
हिन्दी में स्वाभाविक रूप से दश‑स्वरीय सममित स्वर‑प्रणाली पायी जाती है। [ɛː] तथा [ɔː] के स्थान पर बिहारी हिन्दी में द्विस्वन [əi/əe] तथा [əu/əo] प्रयुक्त होते हैं। स्वर [ə], [ɪ], [ʊ] सदैव ह्रस्व माने जाते हैं, जबकि [ɑː], [iː], [uː], [eː], [oː] दीर्घ माने जाते हैं।
बिहारी हिन्दी के स्वर
अग्रमध्यपश्चदीर्घह्रस्वह्रस्वदीर्घ
IPAरोमनलिपिIPAरोमनलिपिIPAरोमनलिपिIPAरोमनलिपिIPAरोमनलिपिCloseiːīईɪiइʊuउuːūऊClose‑mideːeएoːoओOpen‑midə/ɐ/ʌaअOpenɑːāआ
द्विस्वन
अग्रपश्चIPAरोमनलिपिIPAरोमनलिपिəi/əeaiऐəu/əoauऔ
व्यञ्जन
हिन्दी में चार वर्गों के स्पर्श, एक वर्ग के अफ़्रिकेट (जो सामान्यतः स्पर्श‑श्रेणी में ही गिने जाते हैं), उनसे सम्बद्ध अनुनासिक, श्वसनीय (fricatives) तथा निकटवर्ती (approximants) ध्वनियाँ पायी जाती हैं।
ओष्ठ्यदन्त्य/अल्विओलरमूर्धन्यतालव्यकण्ठ्यकण्ठ्य‑उच्चारणअनुनासिकm ⟨म⟩n ⟨न⟩ɳ ⟨ण⟩(ɲ) ⟨ञ⟩ŋ ⟨ङ⟩स्पर्श/अफ्रिकेट (अघोष) अनास्पिp ⟨प⟩t ⟨त⟩ʈ ⟨ट⟩tɕ ⟨च⟩k ⟨क⟩स्पर्श/अफ्रिकेट (अघोष) महाप्राणpʰ ⟨फ⟩tʰ ⟨थ⟩ʈʰ ⟨ठ⟩tɕʰ ⟨छ⟩kʰ ⟨ख⟩स्पर्श (सघोष) अनास्पिb ⟨ब⟩d ⟨द⟩ɖ ⟨ड⟩dʑ ⟨ज⟩ɡ ⟨ग⟩स्पर्श (सघोष) महाप्राणbʱ ⟨भ⟩dʱ ⟨ध⟩ɖʱ ⟨ढ⟩dʑʱ ⟨झ⟩ɡʱ ⟨घ⟩श्वसनीय (अघोष)s ⟨स⟩(ʂ) ⟨ष⟩(ɕ) ⟨श⟩ -(h) ⟨ः⟩श्वसनीय (सघोष)ɦ ⟨ह⟩रोटिकɾ~r ⟨र⟩(ɽ) ⟨ड़⟩रोटिक (महाप्राण)(ɽʱ) ⟨ढ़⟩पार्श्वl ⟨ल⟩निकटवर्ती(ʋ~w) ⟨व⟩(j) ⟨य⟩
रूपविज्ञान
संज्ञाएँ
मानक हिन्दी में दो लिङ्ग (पुल्लिङ्ग‑स्त्रीलिङ्ग), दो प्रकार की संज्ञाएँ (गणनीय‑अगणनीय), दो वचन (एकवचन‑बहुवचन) तथा तीन कारक (प्रथमा, परसर्गीय, सम्बोधन) माने जाते हैं। परन्तु बिहारी हिन्दी में प्रथमा रूप ही सर्वाधिक प्रचलित है, अन्य कारक रूप प्रायः सुप्त हैं।
बहुवचन‑रूप भी सामान्यतः परिभाषिक (periphrastic) रूप में बनता है, न कि रूपान्तरण द्वारा। पूर्वी हिन्दी तथा भोजपुरी से लिया गया एक दुर्बल बहुवचन‑प्रत्यय ‑an (सजीवों के लिये) प्रयुक्त होता है।
संज्ञाएँ दो वर्गों में बाँटी जाती हैं, चिह्नित (marked) तथा अचिह्नित (unmarked)। दोनों में अर्थगत भेद नहीं, किन्तु चिह्नित रूप रूपान्तरणीय विशेषणों के साथ प्रयुक्त होता है।
बिहारी हिन्दी में एक विशिष्ट दीर्घ‑रूप भी मिलता है, जो मैथिली, मगही तथा भोजपुरी में भी पाया जाता है। इसके अर्थ—
लघुता अथवा अल्प‑सम्मान का बोध
निश्चितता का बोध
व्यक्तिनामों में आत्मीयता का बोध
इसी दीर्घ‑रूप से दुर्बल बहुवचन भी बन सकता है
लिङ्ग‑प्रणाली मानक हिन्दी के समान है, किन्तु भेद यह कि अचिह्नित निर्जीव संज्ञाएँ पुल्लिङ्ग मानी जाती हैं। अतः लिङ्ग‑प्रणाली को पुल्लिङ्ग‑नपुंसकलिङ्ग तथा स्त्रीलिङ्ग के रूप में समझा जाता है।
प्रत्यय‑रूप
(‑Ø का अर्थ है कि मूल शब्द में कोई प्रत्यय नहीं जोड़ा जाता।)
एकवचनएकवचन दीर्घ‑रूपदुर्बल बहुवचनबहुवचनपुल्लिङ्ग‑नपुंसकलिङ्गचिह्नित‑ā‑avā‑an/avan‑ā sabअचिह्नित‑Ø‑ā (i/ī‑अन्त में yā; ∅/a/ā‑अन्त में vā)‑an (i/ī‑अन्त में ‑iyan; ∅/a/ā‑अन्त में van)‑Ø sabस्त्रीलिङ्गचिह्नित‑ī/i, ‑iyā, iyā, aiyā‑in/iyan, ‑iyan/aiyan‑ī/i sab, ‑iyā sabअचिह्नित‑Ø‑ā (i/ī‑अन्त में yā; ∅/a/ā‑अन्त में iyā)‑an, ‑iyan‑Ø sab
बहुवचन अनिवार्य नहीं है; निर्जीव अथवा अनिश्चित संज्ञाओं में इसे छोड़ा भी जा सकता है।
अगली सारणी में संज्ञा‑रूपान्तरण के उदाहरण दिये गये हैं। शब्द— लड़का, कुआँ, सेब, बाबा/बलीद (‘पिता’), चाक़ू ('छुरी'), आदमी (‘मनुष्य’), मित्र, लड़की, चिड़िया, किताब (‘पुस्तक’), भाषा, औरत (‘महिला’)।
एकवचनएकवचन दीर्घ‑रूपदुर्बल बहुवचनबहुवचनlaṛkā — लड़काlarkavā — लड़कवाlaṛkan (निर्जीव) (अतद्भव नहीं)laṛkā sab — लड़का सबkuā̃ — कुआँkuãvā — कुआँवा—kuā̃ sab — कुआँ सब
अचिह्नित
एकवचनएकवचन दीर्घ‑रूपदुर्बल बहुवचनबहुवचनseb — सेबsebvā → sebbā — सेबवा/सेब्बा(निर्जीव)seb (sab) — सेब (सब)cāqū — चाक़ूcaquā — चाक़ुआ(निर्जीव)cāqū sab — चाक़ू सबadmī — आदमीadmiyā (तत्सम) (अतद्भव नहीं)ādmiyan (तत्सम) (अतद्भव नहीं)ādmī sab — आदमी सबmitr — मित्र——mitr sab — मित्र सबbalid — बलीद/पिता——balid sab — बलीद सब
अचिह्नित, मानक हिन्दी में स्त्रीलिङ्ग
एकवचनएकवचन दीर्घ‑रूपदुर्बल बहुवचनबहुवचनkitāb — किताबkitabvā → kitabba — किताबवा/कितब्बा(निर्जीव)kitāb sab — किताब सबbhāsā — भाषाbhasvā — भसवा(निर्जीव, तत्सम)bhāsā sab — भाषा सब
स्त्रीलिङ्ग
चिह्नित
एकवचनएकवचन दीर्घ‑रूपदुर्बल बहुवचनबहुवचनlaṛkī — लड़कीlaṛkiyā — लड़कियाlaṛkin / laṛkiyan (निर्जीव)laṛkī sab — लड़की सबciṛiyā — चिड़ियाciṛaiyā — चिड़इया—ciṛiyā sab — चिड़िया सब
अचिह्नित
एकवचनएकवचन दीर्घ‑रूपदुर्बल बहुवचनबहुवचनaurat — औरतauratiyā — औरतियाauratan / auratiyan — औरतन/औरतियनaurat sab — औरत सब
अतिरिक्त टिप्पणियाँ
१. कुछ चिह्नित पुल्लिङ्ग संज्ञाएँ, जैसे kuā̃, सभी रूपों में नासिक्य उच्चारण बनाये रखती हैं।
२. कुछ ā‑अन्त वाले पुल्लिङ्ग शब्द अचिह्नित वर्ग में आते हैं, जैसे bālid (‘पिता’), cacā (‘चाचा’), rājā (‘राजा’)।
३. ū तथा ī‑अन्त वाली अचिह्नित संज्ञाएँ बहुवचन‑प्रत्यय से पूर्व प्रायः u तथा i में ह्रस्व हो जाती हैं, और ī‑अन्त वाले रूपों में y का संयोग भी हो सकता है।
४. संस्कृत‑तत्सम स्त्रीलिङ्ग शब्द जैसे bhāsā (‘भाषा’), mātā (‘माता’) ā‑अन्त होने पर भी लिङ्ग‑निर्धारण में भ्रम उत्पन्न कर सकते हैं; अतः केवल ā‑अन्त को लिङ्ग का संकेतक नहीं माना जा सकता।
५. iyā‑अन्त भी लिङ्ग अथवा संज्ञा‑वर्ग का विश्वसनीय संकेतक नहीं है। उदाहरण—
pahiyā (‘पहिया’) पुल्लिङ्ग चिह्नित: pahiyan (‘पहिए’)
takiā (‘तकिया’) पुल्लिङ्ग चिह्नित: takiyan (‘तकिए’)
स्त्रीलिङ्ग उधार शब्द जैसे duniā (‘दुनिया’), kiriyā (‘क्रिया’) अचिह्नित स्त्रीलिङ्ग में आते हैं। ६. फ़ारसी‑अरबी मूल के वे शब्द जिनके अन्त में मौन h होता है, बिहारी हिन्दी में पुल्लिङ्ग चिह्नित माने जाते हैं— जैसे bacca(h) → baccā।
विशेषण
विशेषण दो वर्गों में विभाजित किये जाते हैं—रूपान्तरित (declinable) तथा अरूपान्तरित (indeclinable)।Shapiro 2003 264Hindi Kachru Yamuna John Benjamins Publishing Company 2006 90 272 3812 X Philadelphia, PA 65
मानक हिन्दी में रूपान्तरित विशेषण संज्ञा के लिङ्ग के अनुसार बदलते हैं। परन्तु बिहारी हिन्दी में अरूपान्तरित विशेषण भी दीर्घ‑रूप बनाने हेतु रूपान्तरित किये जाते हैं, अतः वे भी अचिह्नित कहे जा सकते हैं।
संख्या (वचन) के स्थान पर विशेषणों में सम्मान‑सूचकता का भेद किया जाता है— यह बिहारी भाषाओं की विशेषता है।
दीर्घ‑रूप बनाने के लिये प्रत्यय—
पुल्लिङ्ग‑नपुंसकलिङ्ग: ‑kā
स्त्रीलिङ्ग: ‑kī
दुर्बल बहुवचन का प्रयोग विशेषण के रूप में नहीं होता; वे क्रिया‑विशेषण (adverb) के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
लिङ्गसामान्यदीर्घ‑रूपसम्मान‑सूचकपुल्लिङ्ग‑नपुंसकलिङ्ग‑ā‑kā‑eस्त्रीलिङ्ग‑ī‑kī‑ī
लिङ्गसामान्यदीर्घ‑रूपसम्मान‑सूचकपुल्लिङ्ग‑नपुंसकलिङ्ग‑yā‑yakā/ikkā‑yeस्त्रीलिङ्ग‑yā‑yakkī‑yā
लिङ्गसामान्यदीर्घ‑रूपसम्मान‑सूचकपुल्लिङ्ग‑नपुंसकलिङ्ग‑yā̃‑ẽka‑yẽस्त्रीलिङ्ग‑yī̃‑ẽkī‑yī̃
अचिह्नित
लिङ्गसामान्यदीर्घ‑रूपसम्मान‑सूचकपुल्लिङ्ग‑नपुंसकलिङ्ग‑Ø‑kā/kkā‑Øस्त्रीलिङ्ग—‑kī—
अरूपान्तरित विशेषण पूर्णतः अपरिवर्तनीय होते हैं; वे व्यञ्जन या स्वर (ā, ī सहित) पर समाप्त हो सकते हैं। कुछ रूपान्तरित विशेषण सभी रूपों में नासिक्य उच्चारण बनाये रखते हैं।Shapiro 2003 264
चिह्नित (प्रकार‑१) विशेषण
baṛā — बड़ा, choṭā — छोटा, moṭā — मोटा, acchā — अच्छा, burā — बुरा, kālā — काला, ṭhaṇḍā — ठण्डा
चिह्नित (प्रकार‑२) विशेषण
baṛhiyā — बढ़िया, ghatiyā — घटिया, cūtiyā — चूतिया
चिह्नित (प्रकार‑३) विशेषण
dāyā̃ — दायाँ, bāyā̃ — बायाँ
अचिह्नित विशेषण
kharāb — ख़राब, sāf — साफ़, bhārī — भारी, murdā — मुर्दा, sundar — सुन्दर, pāgal — पागल, lāl — लाल
सन्दर्भ
श्रेणी:बिहार की भाषाएँ