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नवाब फजल अली खान
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नवाब फज़ल अली खान (1705–1773) उत्तर भारत के 18वीं सदी के एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्तित्व थे, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर क्षेत्र में। वे गाजीपुर के नवाब शेख अब्दुल्ला के सबसे बड़े पुत्र थे और 1744 में अपने पिता की मृत्यु के बाद गाजीपुर के नवाब के रूप में उनका उत्तराधिकारी बने।।https://archive.org/details/dli.bengal.10689.12411/page/n33 First Nawabs of Awadh.फजल अली खान गाजीपुर में नवाब शेख अब्दुल्ला और उनके बेटे का महल। वर्ष 1804 की छवि सुन्नी इस्लाम गाजीपुर पटना 1786 (उम्र 76 साल) https://dspace.gipe.ac.in/xmlui/handle/10973/37271 Ghazipur Gazeteer ,1909. गाजीपुर 1710https://dspace.gipe.ac.in/xmlui/handle/10973/37271 Ghazipur Gazeteer ,1909. शेख अब्दुल्ला नवाब फजल अली खान नवाब, 2 Consort नवाब शेख अब्दुल्ला 1744https://dspace.gipe.ac.in/xmlui/handle/10973/37271 Ghazipur Gazeteer ,1909. 1744-1757https://dspace.gipe.ac.in/xmlui/handle/10973/37271 Ghazipur Gazeteer ,1909. गाजीपुर में नवाब शेख अब्दुल्ला और उनके बेटे का महल। वर्ष 1804 की छवि फजल अली खान
जेवनी
1705 में जन्मे फ़ज़ल अली खान ने दिल्ली में शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्हें प्रशासनिक मामलों का गहरा ज्ञान हुआ। 1744 में अपने पिता के निधन के बाद, उन्होंने गाजीपुर सरकार की कमान संभाली, जिसमें वर्तमान समय के बलिया, मऊ और आजमगढ़ जिले शामिल थे।
उनकी शासनकाल में कुछ उपलब्धियाँ थीं, लेकिन कई चुनौतियाँ भी सामने आईं। 1747 में उन्हें शासकीय कर्तव्यों में लापरवाही के आरोप में पद से हटा दिया गया, लेकिन 1748 में उनके भाई की मृत्यु के बाद उन्हें फिर से बहाल कर दिया गया। उनके शासन को स्थानीय शासकों से भी विरोध का सामना करना पड़ा, खासकर बनारस के राजा बलवंत सिंह से, जिसके कारण उन्हें 1757 में पुनः हटाया गया। इसके बाद 1765 में उन्हें चकला (गोरखपुर) का जागीरदार नियुक्त किया गया।
फ़ज़ल अली खान का योगदान गाजीपुर में कई वास्तुकला के धरोहरों के रूप में देखा जा सकता है, जिनमें नवाब का बाग और चिहल सतुन महल प्रमुख हैं। उनका निधन 1773 में हुआ और उन्हें गाजीपुर के नवाब किला बुर्जी में दफनाया गया।