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चिलम
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thumb|right|इटली में निर्मित एक चिलम
thumb|पारंपरिक मिट्टी की चिलम, जोरहाट, असम के चौक बाज़ार में बिक्री के लिए प्रदर्शित
चिलम, जिसे चिलाम या सुल्पा भी कहा जाता है, एक सीधी शंक्वाकार धूम्रपान पाइप है, जो परंपरागत रूप से मिट्टी या किसी मुलायम पत्थर (जैसे स्टीटाइट या कैटलिनाइट) से बनाई जाती है। इसका उपयोग नेपाल और भारत में मुख्यतः गांजा के धूम्रपान के लिए किया जाता है।A bidri chillum https://web.archive.org/web/20160305055757/http://www.trocadero.com/paha/items/495809/item495809store.html 2016-03-05 Dolf Hartsuiker. John van Zijl of Plumstead, South Africa was the first person to smoke from a marble chillum. Holy Smoke https://web.archive.org/web/20071011184141/http://adolphus.nl/sadhus/stories/holysmoke.html 2007-10-11 since last 5000 years by Sadhus, Nagas and Yogis of India
चिलम के नलीनुमा भाग में धूम्रपान सामग्री को भीतर गिरने से रोकने के लिए प्रायः एक छोटा पत्थर अवरोधक (स्टॉपर) के रूप में लगाया जाता है। इस प्रकार की पाइप की परंपरा अफ्रीका तक फैल गई, तथा 1960 के दशक से इसका उपयोग अमेरिका महाद्वीप में भी प्रचलित है। रास्ताफ़ारी धार्मिक अनुष्ठानों में भी चिलम का उपयोग किया जाता है।
इतिहास
अल्फ्रेड डनहिल के अनुसार, अफ्रीका में लंबे समय से चिलम-शैली की पाइपों का उपयोग कैनाबिस तथा बाद में तंबाकू के धूम्रपान के लिए किया जाता रहा है। इन पाइपों के निर्माण में प्रायः लौकी तथा विभिन्न प्रकार के पशु-सींगों का उपयोग किया जाता था, जबकि युगांडा में शंक्वाकार पात्र (बाउल) विशेष रूप से प्रचलित थे। इस प्रकार की प्रसिद्ध पाइपों में से एक हाथीदांत से निर्मित शंक्वाकार पाइप है, जो बुगांडा के सम्राट म्यूटेसा प्रथम की थी।Dunhill Alfred The Pipe Book https://archive.org/details/pipebook0000alfr_h9a0 1924 A. & C. Black London
हाल के समय में रास्ताफ़ारी परंपरा में भी चिलम का उपयोग धार्मिक संस्कारों (सैक्रामेंट) के दौरान किया जाने लगा है।Spotlight on Rastafarian sects https://web.archive.org/web/20080214125910/http://www.jamaica-gleaner.com/gleaner/20020224/arts/arts1.html 2008-02-14 'Rasta in Transition' launched at Livity Restaurant https://web.archive.org/web/20090114102815/http://www.jamaica-gleaner.com/gleaner/20030427/ent/ent3.html 2009-01-14
रास्ताफ़ारी समारोह
रास्ताफ़ारी समुदाय की बैठकों, जिन्हें "रीज़निंग सत्र" (Reasoning Sessions) कहा जाता है, तथा ग्राउनेशन डे के समारोहों के दौरान चिलम का उपयोग किया जाता है। यह प्रायः गाय के सींग या शंक्वाकार लकड़ी के टुकड़े से बनाई जाती है, जिसमें एक लंबी नली (ड्रॉ-ट्यूब) लगी होती है, जिससे धुआँ श्वास द्वारा भीतर लेने से पहले ठंडा हो जाता है। जल-निस्पंदन कक्ष (वॉटर फ़िल्ट्रेशन चैंबर) से युक्त बोंग जैसी चिलम को कभी-कभी चैलिस भी कहा जाता है। चिलम का धूम्रपान करने से पहले रास्ताफ़ारी अनुयायी ईश्वर, जिन्हें वे जाह कहते हैं, के प्रति धन्यवाद और स्तुति अर्पित करते हैं।The Rastafarians by Leonard E. Barrett 1988
चिलम का उपयोग करते समय लोग किन दिशानिर्देशों का पालन करते हैं
चिलम में सामग्री को न बहुत कसकर और न ही बहुत ढीला भरना चाहिए। सही पैकिंग से हवा का प्रवाह बना रहता है और सामग्री समान रूप से जलती है। जलाते समय लौ को किनारे पर रखें और धीरे-धीरे कश लें, क्योंकि तेज़ी से खींचने पर सामग्री असमान रूप से जल सकती है।
चिलम का सही ढंग से पकड़ना भी महत्वपूर्ण है। इसे इस प्रकार पकड़ें कि उंगलियाँ गर्म होने वाले हिस्से से दूर रहें। कुछ लोग धुएँ को थोड़ा ठंडा करने के लिए हाथों से एक छोटा-सा कक्ष (fist chamber) बनाकर भी उपयोग करते हैं।
हर उपयोग के बाद चिलम को तुरंत साफ करना चाहिए। इसके लिए पहले बची हुई राख निकालें, फिर उपयुक्त सफाई सामग्री से अंदर जमी हुई परत हटाएँ और अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सूखने दें। नियमित सफाई से हवा का प्रवाह बेहतर रहता है और स्वाद भी प्रभावित नहीं होता।https://www.thickassglass.com/blogs/enlightenment/how-to-use-chillum How To Use a Chillum - Smoking Guide for Better Sessions Thick Ass Glass August 5, 2025 2026-07-03
इन्हें भी देखें
हुक्का
संदर्भ
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चिलम
श्रेणी:भारत की संस्कृति