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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सड़कों की ज्यामितीय डिजाइन

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thumb|Traffic seen from top of Arc de Triomphe|सड़कों की डिजाइन ट्रैफिक जाम से बचने के लिए महत्वपूर्ण हैसड़कों की दिशा या ढाल में परिवर्तन लाने के लिये, विशेषकर जिन सड़कों पर तेज गाड़ियाँ चलने की संभावना हो, भली भाँति आकल्पित (डिजाइन किये) मोड़ आवश्यक होते हैं। मूलत: मोड़ दो प्रकार के होते हैं: क्षैतिज मोड़ (वृतीय और संक्रामी) तथा ऊर्ध्वाधर मोड़। क्षैतिज मोड़ किसी मुख्य मार्ग पर तेज चलने वाली गाड़ी के लिये क्षैतिज दिशा में एकदम परिवर्तन लाना असंभव है, जबतक कि वह बिलकुल रूक न जाए। किंतु यदि सड़क में उपयुक्त क्षैतिज मोड़ दिया जाय, तो दिशा परिवर्तन क्रमश: और सुविधा के साथ, रोकने की आवश्यकता का अनुभव किए बिना ही, किया जा सकता है। सड़क जिस चाल के लिये बनी है और उसकी सतह जिस प्रकार की है, इनके ऊपर ही क्षैतिज मोड़ो के अभिकल्पन निर्भर हैं। विभिन्न चालों के लिये न्यूनतम त्रिज्याएँ निम्नलिखित हैं: आकल्पित चाल ५०, ४०, ३०, २०, मील प्रति घंटा मोड़ की न्यूनतम त्रिज्या ८००, ५००, ३००, २५० फुट में मोड़ पर अतिरिक्त चौड़ाई २, ३, ३, ४ फुटों में क्षैतिज मोड़ों में उपयुक्त उठान भी देनी चाहिए। मोड़ पर गोले की चौड़ाई भी बढ़ा देनी चाहिए, जैसा ऊपर की तालिका में दिखाया है। सभी मोड़ अधिकतम व्यवहार्य त्रिज्या वाले होने चाहिए। संक्रामी मोड़ सड़क के सीधे भाग पर तेजी से चलती हुई कोई गाड़ी जब भी मोड़ में प्रवेश करती है, तब अपकेंद्री बल की आकस्मिक क्रिया के कारण यात्रियों को कुछ असुविधा की अनुभुति होती है। संक्रामी मोंड़ द्वारा सीधे भाग और वृतीय मोड़ के बीच सरल परिवर्तन सुनिश्चित हो जाता है, जिससे सड़क के प्रयोक्ताओं को दिशा परिवर्तन में असुविधा की अनुभूति नहीं होती। सड़कों में संक्रामी मोड़ का सामान्य रूप सर्पिल होता है। ऊर्ध्वाधर मोड़ सड़क की लंबाई में जहाँ कहीं भी ढाल बदलती है, ढालों के कटान पर उपयुक्त ऊर्ध्वाधर मोड़ देकर गोलाई कर देनी चाहिए। इन मोड से ढाल में परिवर्तन सुगम हो जाता है, जिससे तेज चलनेवाली गाड़ी में यात्रियों को असुविधा की अनुभूति नहीं होती और सड़क का आगे दूर तक का मार्ग दिखाई देता रहता हैं। ऊर्ध्वाधर मोड़ों के आकल्पन में कल्पित चाल, आगे कितनी दूर तक दिखाई देना आवश्यक है और कटान पर की ढाल, इन तीन बातों पर विचार किया जाता है। खड़े मोड़ आकृति में प्राय: परवलयिक होते हैं। जब ढालों के कटान पर चोटी बनती है, तब मोड़ उत्तल और जब कटान पर घाटी बनती है, तब वे अवतल होते हैं। इन्हें भी देखें उठान (cant या superelevation) श्रेणी:सड़क