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411 समाचार
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मार्शल आर्ट

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300px|right|thumb|चीन में लोग आज भी युद्ध कलाओं का अभ्यास करते हैं मार्शल आर्ट या युद्ध कलाएँ विधिबद्ध अभ्यास की प्रणाली और बचाव के लिए प्रशिक्षण की परंपराएं हैं। सभी मार्शल आर्ट्स का एक समान उद्देश्य है : ख़ुद की या दूसरों की किसी शारीरिक ख़तरे से रक्षा । मार्शल आर्ट को विज्ञान और कला दोनों माना जाता है। इनमें से कई कलाओं का प्रतिस्पर्धात्मक अभ्यास भी किया जाता है, ज़्यादातर लड़ाई के खेल में, लेकिन ये नृत्य का रूप भी ले सकती हैं। मार्शल आर्ट्स का मतलब युद्ध की कला से है और ये लड़ाई की कला से जुड़ा पंद्रहवीं शताब्दी का यूरोपीय शब्द है जिसे आज एतिहासिक यूरोपीय मार्शल आर्ट्स के रूप में जाना जाता है। मार्शल आर्ट के एक कलाकार को मार्शल कलाकार के रूप में संदर्भित किया जाता है। मूल रूप से 1920 के दशक में रचा गया ये शब्द मार्शल आर्ट्स मुख्य तौर पर एशिया के युद्ध के तरीके के संदर्भ में था, विशेष तौर पर पूर्वी एशिया में जन्मे लड़ाई के तरीके के. हालांकि इसकी उत्पत्ति की परवाह किये बगैर इस शब्द को किसी भी संहिताबद्ध युद्ध प्रणाली के लिए शाब्दिक अर्थ और उसके बाद के उपयोग में लिया जा सकता है। यूरोप मार्शल आर्ट्स की कई व्यापक प्रणालियों का घर है, यूरोप की ऐतिहासिक मार्शल आर्ट्स की जीवंत परंपराएं (उदाहरणतया जोगो डु पाओ और दूसरी लकड़ी और तलवार से लड़ाई की कलाओं एवं सेवेट - एक फ्रांसिसी पाद प्रहार शैली जो नाविकों और सड़क सेनानियों द्वारा विकसित की गयी थी) और पुराने तरीके जो आज भी अस्तित्व में हैं, उनमें से कई का अब पुनर्निर्माण किया जा रहा है। अमेरिका में, अमेरिकी मूल निवासियों में खुले हाथों की मार्शल आर्ट्स जिसमें कुश्ती शामिल है और हवाई लोगों में ऐतिहासिक रूप से अभ्यास में लाई जा रही कलायें जिनमें छोटे और बड़े संयुक्त जोड़ तोड़ होते हैं, की प्रथा है। केपोएईरा के पहलवानी खेलों में मूल का मिश्रण पाया जाता है, जिसे अफ्रीकी गुलामों ने अपने अफ्रीकी कौशल से ब्राज़ील में विकसित किया। प्रत्येक शैली के अद्वितीय पहलु उसे दूसरी मार्शल आर्ट्स से अलग बनाते हैं, लेकिन लड़ाई की तकनीकों का प्रबंधन एक ऐसा लक्षण है जो सभी शैलियों में पाया जाता है। प्रशिक्षण के तरीके भिन्न होते हैं और उनमें मुक्केबाज़ी का अभ्यास (कृत्रिम लड़ाई) या औपचारिक समूह या तकनीकों का व्यवहार हो सकता है, जिन्हे मुद्रा या काटा से जाना जाता हैं। विशेषतया एशिया और एशिया से आई मार्शल आर्ट्स में मुद्रा आमतौर पर पायी जाती है।http://martialarts.about.com/od/formsandkatas/Forms_Katas_Extended_Martial_Arts_Sets.htm Samples of forms from different arts 12 मई 2010 https://web.archive.org/web/20081020024514/http://martialarts.about.com/od/formsandkatas/Forms_Katas_Extended_Martial_Arts_Sets.htm 20 अक्तूबर 2008 dead युद्ध कलाएँयुद्ध की कूट एवं पारम्परिक पद्धतियाँ हैं जिन्हे विविध कारणों से व्यवहार में लाया जाता रहा है। इन्हें आत्मरक्षा, प्रतिस्पर्धा, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास आदि के लिये व्यवहार में लाया जाता है। विश्व में विभिन्न प्रकार की युद्ध कलाएँ हैं जैसे भारत में युद्धकला चीन में कुंग फू और जापान में कराते। पुराणों के मुताबिक मार्शल आर्ट के जनक भगवान परशुराम है| विविधता और कार्यक्षेत्र मार्शल आर्ट्स व्यापक रूप से भिन्न है और एक विशिष्ट क्षेत्र या क्षेत्रों के संयोजन पर केंद्रित हो सकती है, लेकिन इन्हे मोटे तौर पर हमले, प्रहार या हथियारों के प्रशिक्षण के वर्गों में बांटा जा सकता है। नीचे उदाहरणों की एक सूची है जो कि इन क्षेत्रों में से एक का सघन उपयोग करती है; ये न तो उस क्षेत्र की सभी कलाओं की व्यापक सूची है और न ही ये आवश्यक रूप से केवल वो क्षेत्र हैं जो इस कला से आच्छन्न हैं, बल्कि ये उस क्षेत्र के उदाहरणों उस क्षेत्र का केंद्र या उससे भी अच्छी तरह कहा जाये तो उसका उदाहरण हैं: प्रहार मुक्केबाजी: बोक्सिंग (पश्चिमी), विंग चुन पाद प्रहार: कोपेरा, किकबोक्सिंग, सेवेट, टाईकोंडो अन्य प्रहार: कोहनी और घुटने: मुई थाई मुक्त हाथ: कराटे, शाओलिन कूंग फू कुश्ती थ्रोइंग: ग्लिमा, जूडो, जूजूत्सु, संबो ज्वोइंट लॉक / सबमिशन होल्ड: एकिडो, ब्राजील की जिउ-जित्सू, हपकिडो पिनिंग तकनीक: जूडो, कुश्ती हथियार पारंपरिक हथियार: तलवारबाजी, गटका, केंडो, क्वूडो, एस्करिमा आधुनिक हथियार: जुकेंड़ो, वुशु, शाओलिन कूंग फू कई मार्शल आर्ट्स विशेषतया एशिया से आने वाली कलायें लड़ाई के अलावा औषधीय पद्धतियों से संबंधित शिक्षा भी प्रदान करती है। ये मुख्य तौर पर पारंपरिक चीनी मार्शल आर्ट्स में प्रचलित है जिसमें अस्थी बिठाना, किगोंग, एक्यूपंक्चर, एक्यूप्रेशर (तूई ना) और पारंपरिक चीनी दवाइयों के अन्य पहलू भी सिखाये जा सकते हैंhttp://www.chiflow.com/html/gas_kungfu.htm Internal Kung Fu 12 मई 2010 https://web.archive.org/web/20120304221029/http://www.chiflow.com/html/gas_kungfu.htm 4 मार्च 2012 dead . मार्शल आर्ट्स को धर्म के साथ भी जोड़ा जा सकता है, उदाहरण के लिए सिखवाद का अभिन्न हिस्सा गटका, जैसा कि सिख इतिहास से पता चलता उन्हे जबर्दस्ती युद्ध में भेजा गया था। विंग चुन कुंग फू चीन में यात्रा कर रही ननों द्वारा खुद की रक्षा के लिए आविष्कृत किया गया था और इसी तरह कई जापानी मार्शल आर्ट्स जैसे ऐकिडो ऊर्जा और शांति के बहाव की मजबूत दार्शनिक आस्था पर आधारित है। इतिहास प्राचीन पूर्वी हिस्से के पास मिले कांस्य युगीन अवशेषों में कुश्ती और सशस्त्र लड़ाई के चित्रीय आलेख मिले हैं, ऐसे ही चित्र 20वीं शताब्दी ईसा पूर्व बने बेनी हसन स्थित एमेनेम्हेट के गुंबज की दीवरों या 26वीं शताब्दी ईसा पूर्व "स्टैंडर्ड ऑफ उर" में मिले हैं। thumb|200px|आत्मरक्षा की कला का अभ्यास करते हुए शाओलिन भिक्षुओं का प्राचीन चित्रण. अफ्रीका अफ्रीकी चाकूओं को आकार के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है – विशिष्ट रूप से "f" समूह और "वृत्तीय" समूह में – और अक्सर गलती से इन्हे फेंके जाने वाले चाकूओं के रूप में वर्णित किया जाता है। Spring Christopher Swords and Hilt Weapons Weidenfeld and Nicolson 1989 London 204–217 ???? पश्चिमी अफ्रीका में भी मल्ल और जूझने की तकनीकें पायी गयी हैं। दक्षिण अफ्रीका में "छड़ी युद्ध" जुलु संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया और उत्तरी दक्षिण अफ्रीका एवं दक्षिणी बोस्वाना में प्रचलित एक लड़ाई ओब्नू बिलेट का भी ये एक विशेष हिस्सा है। मिस्र के प्राचीन गुंबजों में भी छड़ी युद्ध का वर्णन किया गया था, अभी भी मिस्र के ऊपरी हिस्से (ताह्तिब) में इसका अभ्यास किया जाता हैBrewer Douglas J. Egypt and the Egyptians https://archive.org/details/egyptegyptians0000brew_v7m0 2nd ed. Cambridge University Press Cambridge 2007 0521851505 p. 120Shaw Ian Egyptian Warfare and Weapons Shire Publications Oxford 1999 0747801428, CH, 5 और इसके लिए 1970 के दशक में एक आधुनिक संघ का गठन किया गया था। रफ और टंबल (RAT) एक आधुनिक अफ्रीकी मार्शल आर्ट है जिसमें जुलु और सोथो छड़ी युद्ध के तत्वों को भी शामिल किया गया है। अमेरिका उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के पास अपना मार्शल प्रशिक्षण था जो बचपन से ही शुरू हो जाता था। देश के कुछ फर्स्ट नेशन पुरुषों और बहुत ही कम महिलाओं को तभी योद्धा कहा जाता था जब वो युद्ध में खुद को साबित कर देते थे। ज़्यादातर समूह किशोरावस्था में ही लोगों को चाकूबाजी, भाले फेंकने, आग उगलने वाली बंदूकों और युद्ध प्रशिक्षण के लिए चुन लिया करते थे। युद्ध संघ पसंदीदा मार्शल हथियार थे क्योंकि अमरिका के मूल निवासी योद्धा, शत्रुओं को आमने सामने की एक ही लड़ाई में मार कर अपना सामाजिक स्तर ऊंचा उठा सकते थे। फ़रवरी 2007 योद्धा पूरी उम्र प्रशिक्षण के द्वारा अपना हथियार कौशल और छड़ी तकनीक बढ़ाते रहते थे। केपोएइरा, अफ्रीका में गहरी जड़ें रखने वाली एक एफ्रो-ब्राज़ीलियाई या एफ्रो-अमेरिकी मार्शल आर्ट है, जिसकी शुरुआत ब्राज़ील में हुई और उच्च दर्ज़े का लचीलापन और सहनशक्ति इसका हिस्सा हैं। इसमें लातें, कोहनी, हाथों और सर से हमले, गाड़ी के पहिये और लपेटे भी शामिल होते हैं। जीत कुन डो एक एसी मार्शल आर्ट है जिसे मार्शल कलाकार और अभिनेता ब्रूस ली ने विकसित किया है। इसका आधार विंग चुन, पश्चिमी मुक्केबाज़ी और तलवारबाज़ी के साथ ही अनुपयोगी चीज़ों को उपयोग और जहां राह ना हो वहां भी रास्ता तलाशने के सिद्धांत में है। ब्राज़ील की जिउ जित्सु, दो भाईयो कार्लोस और हेलिओ ग्रेसिए द्वारा द्वितिय विश्व युद्ध पूर्व विकसित जुडो का एक अनुकूलन है, इसे बड़े ही ध्यान के साथ काफी मेहनत कर एक खेल के रूप में पुनर्गठित किया गया। ये प्रणाली एक लोकप्रिय मार्शल आर्ट बन गयी है और UFC और PRIDE जैसे मिश्रित मार्शल आर्ट्स प्रतियोगिताओं में कारगर साबित हुई है।http://www.ufc.com/index.cfm?fa=LearnUFC.Styles fighting art used in the UFC 12 मई 2010 https://web.archive.org/web/20100523232346/http://www.ufc.com/index.cfm?fa=LearnUFC.Styles 23 मई 2010 live एशिया प्रारंभिक इतिहास एशियाई मार्शल आर्ट्स का आधार पुरानी भारतीय मार्शल आर्ट्स और चीनी मार्शल आर्ट्स का मिश्रण लगता है। 600 ई.पू. राजनयिकों, व्यापारियों और भिक्षुओं की सिल्क रोड द्वारा यात्रा के साथ इन देशों के बीच सघन व्यापार शुरू हुआ। चीन के इतिहास में दृढ राज्यों की अवधि के दौरान (480-221 ई.पू.) मार्शल दर्शन और रणनीति का व्यापक विकास हुआ, चूंकि सुन जू ने अपने द्वारा रचित आर्ट ऑफ वार में वर्णन किया है (c. 350 ई.पू.).http://www.sonshi.com/why.htmlदिसंबर 2021 InternetArchiveBot मार्शल आर्ट की एक दन्त कथा के मुताबिक 550 ई.पू. दक्षिण भारत के पल्लव वंश के राजकुमार बोधिधर्मा (जिन्हे धरुमा नाम से भी पुकारा गया) नाम के भिक्षु बन गये। मार्शल के गुण अनुशासन, विनम्रता, संयम और सम्मान इसी दर्शन शास्त्री की देन माने जाते हैं।रीड, हावर्ड और क्रोशेर, माइकल. द वे ऑफ द वेरियर-द पाराडोक्स ऑफ द मार्शल आर्ट" न्यू यॉर्क ओवरलुक प्रेस: 1983. दारुमा को चीन में ज़ैन बौद्धवाद के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है। इसीलिए नैतिक आचरण और आत्मानुशासन पुरातन काल से ही मार्शल अभ्यास का हिस्सा बन गये।http://www.cs.virginia.edu/~alb/zen/bodhidharma.html संग्रहीत प्रति 12 मई 2010 https://web.archive.org/web/20090818075850/http://www.cs.virginia.edu/~alb/zen/bodhidharma.html 18 अगस्त 2009 dead इसी के साथ भारतीय ध्यान गुरू बुद्धभद्र (मैंडेरिन में इसे बाटुओ बुलाया जाता है) चीन के शाओलिन मंदिर के पहले महंत बने। ऑर्डर ऑफ द शाओलिन चान (2004, 2006). द शाओलिन ग्रैंडमास्टर टेक्स्ट: हिस्ट्री, फिलोसॉफी, एण्ड गूंग फू ऑफ शाओलिन चान ओरेगन उत्तरी वी राजवंश के राजा झीआओवेन ने 477 ई. पू. शाओलिन मठ का निर्माण करवाया. एशिया में मार्शल आर्ट्स की शिक्षा ऐतिहासिक रूप से गुरू-शिष्य प्रणाली की सांस्कृतिक परंपरा का अनुकरण करती आई है। छात्र एक सख्त पदानुक्रम व्यवस्था में एक गुरू प्रशिक्षक द्वारा प्रशिक्षित किये जा रहे हैं: मैंडारिन में शिफू या केंटोनीज़ में सिफु: जापानी में सेनसेई : कोरियाई में सेबैओम-निम:संस्कृत, हिंदी, तेलुगु औऱ मलय में गुरू: खेमर में क्रू : तागालोग में गुरो : मलयालम में कालारी गुरुक्कल या कालारी असान : तमिल में असान : थाई में अचान या ख्रू और म्यांमार में साया. इन सभी शब्दों को शिक्षक, गुरू या परामर्शदाता कहा जा सकता है।http://www.thefreedictionary.com/Asia संग्रहीत प्रति 12 मई 2010 https://web.archive.org/web/20100522101413/http://www.thefreedictionary.com/Asia 22 मई 2010 live आधुनिक इतिहास विशेष तौर पर आग्नेयास्त्रों के परिचय के साथ एशियाई देशों के यूरोप उपनिवेशन में भी स्थानीय मार्शल आर्ट में गिरावट आई. 19 वीं सदी में भारत में ब्रिटिश राज की पूर्ण स्थापना के बाद इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।ज़रील्ली, फिलिप B. (1998). वेन द बॉडी बिकम्स ऑल आइज: पाराडिग्म्स, डिस्कोर्स एण्ड प्रेकटिसेस ऑफ पावर इन कलारीपयाट्टू, ए साउथ इंडिया मार्शल आर्ट. ऑक्सफोर्ड: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, भारत. ISBN 0-19-563940-5 पुलिस, आर्मी और सरकारी संस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने के लिए अधिकांश यूरोपियन तरीकों में और आग्नेयास्त्रों का अधिक उपयोग से जाति विशेष कर्तव्यों के साथ जुड़े पारम्परिक युद्ध प्रशिक्षण को समाप्त कर दिया गया है और 1804 में ब्रिटिश औपनिवेशन सरकार ने विद्रोहों की श्रृंखला के जवाब में कलारीपयत को प्रतिबंधित कर दिया है।Luijendijk D.H. Kalarippayat: India's Ancient Martial Art http://www.martialartssupermarket.com/index.cfm?action=showProd&subid=1083 2005 Paladin Press Boulder 1581604807 12 मई 2010 https://web.archive.org/web/20090818031453/http://www.martialartssupermarket.com/index.cfm?action=showProd&subid=1083 18 अगस्त 2009 dead कलारीपयत और अन्य पारंपरिक कला का पुनरुत्थान 1920 के दशक में तेलीचेरी में हुआ और पूरे दक्षिण भारत भर में फैला. मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपाइन्स जैसे दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में इसी तरह की कला को पाया गया। अन्य भारतीय मार्शल आर्ट जैसे थांग-टा का विकास 1950 के दशक में देखा गया।http://sports.indiapress.org/thang_ta.php संग्रहीत प्रति 12 मई 2010 https://web.archive.org/web/20100325015214/http://sports.indiapress.org/thang_ta.php 25 मार्च 2010 dead संयुक्त राज्य के साथ चीन और जापान के बीच व्यापार की वृद्धि के कारण 19 वीं सदी के अंत में पश्चिम में एशियाई मार्शल आर्ट में दिलचस्पी वापस पैदा हो गई। अपेक्षाकृत कुछ पश्चिमी देशों ने वास्तव में कला का अभ्यास किया और इसे केवल प्रदर्शन के रूप में तवज्जो दिया। एडवर्ड विलियम बार्टन-राइट, एक रेलवे इंजीनियर, जिसने 1894-97 के बीच जापान में काम करते समय जूजूत्सु का अध्ययन किया और उसे पहला आदमी माना जाता है जो यूरोप में एशियाई मार्शल आर्ट सिखाता था। उसने एक इलेक्ट्रीक मार्शल आर्ट शैली की भी स्थापना की जिसका नाम बारतित्सू था और जो जूजूत्सू, जूडो, बोक्सिग, सेवेट और छड़ी युद्ध से संयुक्त था। जैसा की पश्चिम का प्रभाव एशिया में काफी तेजी से बढ़ रहा था और यही कारण था कि सैन्य कर्मियों का एक बड़ा भाग ने चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में इसके अध्ययन के लिए अपना समय बिताया. कोरियाई युद्ध के दौरान मार्शल आर्ट की प्रसिद्धि भी काफी महत्वपूर्ण है। पश्चिम और दुनिया के अन्य देशों में मार्शल आर्ट को चर्चित करने का श्रेय काफी हद तक स्वर्गीय ब्रूस ली को दिया जाता है। बाद में 1960 और 1970 के दशक में मार्शल कलाकार और हॉलीवुड अभिनेता ब्रूस ली से प्रभावित मीडिया की दिलचस्पी मार्शल आर्ट के प्रति देखा गया। एशियाई और हॉलीवुड मार्शल आर्ट फिल्मों को भी आंशिक रूप से इसका श्रेय दिया जाता हैं जहां जैकी चेन और जेट ली जैसे प्रख्यात फिल्मी हस्तियों को हाल के वर्षों में चीनी मार्शल आर्ट को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। यूरोप thumb|left|200px|प्राचीन भूमध्य में मुक्केबाजी का अभ्यास किया गया था पारम्परिक यूरोपीय सभ्यता में मार्शल आर्ट विद्यमान था, विशेष रूप से ग्रीस में, जहां यह खेल जीवन के साथ जुड़ गया था। मुक्केबाजी (पिग्मी, पिक्स), कुश्ती (पेल) और पनक्रेशन (पैन, जिसका अर्थ है "सभी" और क्रतोस का अर्थ "शक्ति" या "बल") को प्राचीन ओलिंपिक खेलों में प्रतिनिधित्व किया गया था। रोमन ने इसे तलवार चलानेवाले का मुकाबलाके रूप में एक सार्वजनिक तमाशा को प्रस्तुत किया। अनेको ऐतिहासिक तलवारबाजी और नियम पुस्तिका अभी भी बची हुई है और कई समूह प्राचीन यूरोपियन मार्शल आर्ट को पुनः स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में 1400–1900 A.D. में उत्पादित ग्रंथों के गहन अध्ययन और प्रयोगात्मक प्रशिक्षण या विभिन्न तकनीको और रण कौशल के "बल परीक्षण" आदि शामिल है। इसमें तलवार और ढाल, दो हाथों की तलवार युद्ध फर्सा युद्ध, घोड़े पर सवारी करते हुए भाले से युद्ध, अन्य प्रकार के हथियारों के मुकाबले शामिल है। पुनर्निर्माण के प्रयास और ऐतिहासिक तरीके के आधुनिक विकास को आम तौर पर पश्चमी मार्शल आर्ट के रूप में उल्लेख किया जाता है। मध्यकालीन मार्शल आर्ट के कई नियम पुस्तिका बचे हुए हैं, जिसमें 14 वीं शताब्दी की सबसे प्रसिद्ध जोहानिस लिछटेनियर की फेचबच (फेंसिंग बुक) है। आज लिछटेनियर ग्रंथ ने जर्मन स्कूल ऑफ सोर्डमैनशिप के आधार रूपों को बनाया है। यूरोप में, आग्नेयास्त्रों की वृद्धि के चलते मार्शल आर्ट में काफी गिरावट आ गई है। परिणाम के रूप में एशिया की ही तरह यूरोप में भी ऐतिहासिक जड़ों के साथ मार्शल आर्ट आज मौजूद नहीं है और यही कारण है कि पारम्परिक मार्शल आर्ट या तो समाप्त हो चुकी है या उसे एक खेल के रूप में विकसित किया गया है। सोर्डमैनशिप का विकास तलवारबाजी के रूप में हुआ है। मुक्केबाजी के साथ-साथ कुश्ती के कई रूप अभी भी टिके हुए हैं। अधिकांश यूरोपीय मार्शल आर्ट को बदलते तकनीको में अनुकूलित किया जाता है ताकि कुछ पारम्परिक आर्ट अभी भी मौजूद रहे और सैन्य कर्मियों को बेनट युद्ध और निशानेबाजी जैसे कौशल का प्रशिक्षण दिया जा सके। कुछ यूरोपीय हथियार प्रणालियां लोक खेल और आत्मरक्षा के तरीकों के रूप में बचे हुए है। इनमें छड़ी-युद्ध प्रणाली जैसे इंग्लैंड का क्वाटरस्टाफ, आयरलैंड का बाटायरेच्ट, पुर्तगाल का जोगो दो पउ और कानारी आइसलैंड के डुवेगो डेल पालो शैली शामिल है। अन्य मार्शल आर्ट का विकास खेल के रूप में हुआ और युद्ध के रूप में इसकी पहचान लगभग समाप्त हो गई। पुरुषों के जिमलास्टिक में पोमेल होर्स इवेंट इसका एक उदाहरण है, एक अभ्यास जो स्वयं इक्वेस्ट्रियन छलांग के खेल से उत्पन्न हुआ है। कैवेलरी सवार को अपने घोड़े पर सरपट अपने स्थान बदलने, घोड़े से गिरने से बचाव, प्रभावी ढंग से लड़ने में सक्षम होना चाहिए साथ ही दौड़ते घोड़े की पीठ से उतरने की कला भी आनी चाहिए। एक स्टेशनरी बैरल पर इस प्रकार का प्रशिक्षण जिमनास्टिक पॉमेल हॉर्स अभ्यास खेल के रूप में विकसित है। अगर देखा जाए तो शॉट पुट और जैवलीन थ्रो का अत्यंत प्राचीन मूल है, दोनों ही हथियार का प्रयोग बड़े पैमाने पर रोमन द्वारा किया जाता था। आधुनिक इतिहास कुश्ती, भाला तलवारबाजी (1896 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक), तीरंदाजी (1900), मुक्केबाजी (1904) और हाल ही में उत्पन्न जूडो (1964) और टाई कों डो (2000) आधुनिक ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों के रूप में शामिल है। मार्शल आर्ट पुलिस बलों और सैन्य के बीच गिरफ्तारी और आत्म रक्षा के तरीकों के रूप में भी विकसित है : इसराइल रक्षा बलों में यूनिफाइट, कपाप और क्राव मागा विकसित है, चीन में सम शाउ, रूसी सशस्त्र बलों और रफ एण्ड टम्बल (RAT) में सिस्टमा: जो मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका विशेष बलों के लिए विकास किया गया था (कमांडो के प्राथमिक आक्रमण) (अब असैनिक शक्ति को सिखाया जाता है). क्लोज कार्टर कोम्बेट वारफेयर में रणनीति कौशल का प्रयोग के लिए मिलिटरी मार्शल आर्ट कहा जाता है e.g. (UAC (ब्रिटिश), LINE (USA). अन्य युद्ध प्रणालियों का मूल आधुनिक सैन्य में उपलब्ध है जिसमें सोवियत बोजेवोजे (कोम्बेट) सम्बो शामिल है। पार्स टैक्टिकल डिफेंस (तुर्की सुरक्षा व्यक्तिगत रूप से आत्म रक्षा प्रणाली) मराठा योद्धाओं की अपनी एक मार्शल आर्ट पद्धति है जो शिवाजी महाराज द्वारा विकसित की गई है आज के समय में यह पद्धति भारत में फाइट साइंस एकेडमी के नाम से विकसित है प्रथम अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप के साथ इंटर कला प्रतियोगिता 1993 में सामने आया था, इसमें मिश्रित मार्शल आर्ट का आधुनिक खेल अधिगृहित था। आधुनिक युद्ध के मैदान पर thumb|200px|U.S. आर्मी युद्ध प्रशिक्षक मैट लार्सन चोकहोल्ड को दर्शाते हुए कुछ पारंपरिक मार्शल अवधारणाओं का नए प्रकार से प्रयोग आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण में देखा गया है। संभवतः सबसे हाल का उदाहरण है प्वोइंट शूटिंग, जिसमें अजीब किस्म की स्थितियों में एक प्रभावी ढंग से बंदूक का उपयोग करने के लिए स्मृति पेशी पर निर्भर होता है और अधिकाशतः इयाडोका गुरु द्वारा तलवार चलाने का कार्य किया जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय के दौरान एक शंघाई पुलिस विलियम E. फेयरबेर्न और एशियाई युद्ध तकनीकों का अग्रणी पश्चमी विशेषज्ञ को स्पेशल ऑपरेशंस कार्यकारी (SOE) द्वारा U.K., U.S. और कैनेडियन विशेष बल को जूजूत्सु का प्रशिक्षण देने की लिए भर्ती किया गया था। कर्नल रेक्स एप्पलगेट द्वारा लिखित पुस्तक किल ओर गेट किल्ड हाथों की लड़ाई के लिए एक क्लासिक सैन्य ग्रंथ बन गई। लड़ाई की विधि का नाम डिफेंडु था। परंपरागत हाथ की लड़ाई, चाकू और भाला तकनीकों का इस्तेमाल समग्र विकसित प्रणालियों में आज के युद्धों के लिए जारी है। इसके उदाहरणों में यूरोपीय अनफाइट, मैट लार्सेन द्वारा विकसित US आर्मी की युद्ध प्रणाली, इजराइल आर्मी अपने सेनाओं को कपाप और क्राव मागा में प्रशिक्षित करना और US नौसेना सैन्यदल के लिए मरीन कोर्प्स मार्शल आर्ट प्रोग्राम (MCMAP) शामिल है। बिना हथियार के चाकू प्रतिरक्षा फियोर डेई लिबेरी और कोडेक्स वालरस्टाइन में प्राप्त नियम पुस्तिका में दोनों एक जैसे ही हैं और 1942 में U.S. आर्मी के प्रशिक्षण पुस्तक के साथ एकीकृत है। Vail Jason Medieval and Renaissance Dagger Combat Paladin Press 2006 91–95 और तब से लेकर आज के तकनीको में भी अन्य पारम्परिक तकनीकों जैसे एस्क्रीमा के साथ उसका प्रभाव जारी है। राइफल-माउंटेड बेनट, जिसका मूल भाला है, संयुक्त राज्य आर्मी, संयुक्त राज्य नौसेना दल और हाल ही के इराक़ वार में ब्रिटिश आर्मी द्वारा इसके इस्तेमाल को देखा गया। http://www.telegraph.co.uk/news/main.jhtml?xml=/news/2004/06/13/wirq113.xml British battalion 'attacked every day for six weeks' 11 दिसम्बर 2008 Sean Rayment 12/06/2004 डेली टेलीग्राफ Telegraph Media Group Limited https://web.archive.org/web/20080103232432/http://www.telegraph.co.uk/news/main.jhtml?xml=%2Fnews%2F2004%2F06%2F13%2Fwirq113.xml 3 जनवरी 2008 live परीक्षण और प्रतियोगिता मार्शल आर्ट के प्रशिक्षुओं के लिए कई स्तरों पर परीक्षण या मूल्यांकन महत्वपूर्ण होता है जो विशिष्ट संदर्भों में अपनी प्रगति या कौशल के अपने स्वयं के स्तर को निर्धारित करने की इच्छा करते हैं। एक विशेष प्रकार के मार्शल आर्ट प्रणाली के तहत छात्रों का अक्सर समय-समय पर आवधिक परीक्षण किया जाता है और उनके शिक्षकों द्वारा ग्रेडिंग दी जाती है ताकि वे एक उच्च स्तर के मान्यता प्राप्त उपलब्धी को प्राप्त कर सके जैसे विभिन्न रंग के बेल्ट या उपाधि. भिन्न-भिन्न पद्धतियों में परीक्षण के मायने अलग-अलग होते हैं लेकिन विधियों और मुक्केबाजी के अभ्यास को शामिल कर सकते है। thumb|right|स्टीवन हो एक जम्प स्पिन हूक किक को दर्शाते हुए सामान्यतः विभिन्न विधियों और मुक्केबाजी के अभ्यास को मार्शल आर्ट प्रदर्शनियों और प्रतियोगिताओं में किया जाता है। कुछ प्रतियोगिताओं में भिन्न अनुशासन के सामना करने वाले प्रशिक्षुओं के लिए एक दूसरे के खिलाफ सामान्य नियम का प्रयोग किया जाता है, इसे मिश्रित मार्शल आर्ट प्रतियोगिता के रूप में संदर्भित किया जाता है। द्वन्द्व के नियम संगठनों और कलाओं के बीच बदतले रहते हैं लेकिन सामान्यतः न्यून सम्पर्क, मध्यम सम्पर्क और पूर्ण सम्पर्क स्वरूपों में विभाजित हो सकता है, जो प्रतिद्वंद्वी पर लागू किए गए शक्ति को दर्शाता है। न्यून और मध्यम संपर्क इस प्रकार के द्वन्द्व में प्रतिद्वन्दी को हिट करने के लिए इस्तेमाल हुए बल राशि को सीमित किया जा सकता है, आम तौर पर न्यून द्वन्द्व में स्पर्श सम्पर्क होता है, उदाहरण के तौर पर एक घूंसा मारने के बाद या सम्पर्क होने से पहले जितना जल्दी हो सके मुक्का को वापस खींच लेना चाहिए। मध्यम संपर्क में -(कभी-कभी अर्द्ध संपर्क के रूप में भी संदर्भित किया जाता है) मुक्के को वापस तो नहीं खींचा जाता लेकिन मुक्के में पूरे बल का प्रयोग नहीं किया जाता. चूंकि इसमें बल का प्रयोग प्रतिबंधित है, इसलिए इस प्रकार के द्वन्द्व में प्रतिद्वंद्वी को नोक आउट करने का उद्देश्य नहीं होता और प्रतियोगिता में प्वोइंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। रेफरी, फाउल्स को जांचता है और मैच का नियंत्रण कार्य करता है, जबकि मुक्केबाजी में जज स्कोर अंक को चिन्हित करता है। विशेष लक्ष्य प्रतिबंधित हो सकता है, (जैसे सर से मारना या ग्रॉइन पर मारना वर्जित है) कुछ तकनीकों को भी वर्जित किया जा सकता है और प्रतियोगी को सर, हाथ, छाती, ग्रॉविन, पैर के अग्र भाग या पैर पर एक सुरक्षात्मक उपकरण को पहनना आवश्यक हो सकता है। अइकिडो कुश्ती कला में नमनशील प्रशिक्षण के समरूप प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है जो न्यून या मध्यम संपर्क के बराबर होता है। कुछ शैलियों में (जैसे तलवारबाजी और टाइकोंडो द्वन्द्व के कुछ शैलियां) एक तकनीक में लैंडिंग करने या रेफरी द्वारा फैसला किया गया प्रहारों के आधार पर प्रतियोगी प्वोइंट स्कोर करता है, वहां रेफरी संक्षिप्त समय के लिए मैच को रोकता है और प्रतियोगी को प्वोइंट पुरस्कृत करता है और फिर मैच को पुनः शुरु किया जाता है। वैकल्पिक रूप से, जज द्वारा नोट किए प्वोइंट के साथ द्वन्द्व को जारी रखा जा सकता है। द्वन्द्व के कुछ आलोचकों का मानना है कि परीक्षण की यह पद्धति ऐसी आदतें सिखाती है जिससे द्वंद्व में न्यून प्रभावकारिता फलित होता है। न्यून सम्पर्क द्वन्द्व का इस्तेमाल खास तौर पर बच्चों या अन्य परिस्थितियों में किया जा सकता है जब पूर्ण सम्पर्क अनुपयुक्त हो (जैसे नौसिखिया के रूप में), वहीं द्वन्द्व में मध्यम सम्पर्क का इस्तेमाल पूर्ण सम्पर्क के प्रशिक्षण के लिए अक्सर किया जाता है। पूर्ण संपर्क पूर्ण सम्पर्क द्वन्द्व या युद्ध के लिए कुछ लोगों ने बिना औजार के युद्ध सीखना आवश्यक माना है। http://www.straightblastgym.com/aliveness101.html Aliveness 101 3 नवंबर 2008 Straight Blast gym https://web.archive.org/web/20090107052738/http://www.straightblastgym.com./aliveness101.html 7 जनवरी 2009 dead - एन एसे ऑन काँटेक्ट लेवल इन ट्रेनिंग XX पूर्ण संपर्क द्वन्द्व न्यून और मध्यम सम्पर्क द्वन्द्व से कई तरीकों से भिन्न है जिसमें, प्रहार का इस्तेमाल में उसे वापस खींचने के लिए प्रतिबंधित नहीं होता बल्कि नाम के अनुरूप पूरी ताकत से प्रहार किया जाता है, शामिल है। पूर्ण संपर्क द्वन्द्व में, प्रतिस्पर्धी मैच का उद्देश्य या तो प्रतिद्वंद्वी को नोक आउट कर दिया जाता है या प्रतिद्वंद्वी को समर्पण के लिए बाध्य किया जाता है। पूर्ण संपर्क द्वन्द्व में स्वीकृत प्रहार और शरीर पर प्रहार करने की सीमा की व्यापक विविधता को शामिल किया जा सकता है। जहां स्कोरिंग का मूल्यांकन अन्य के रूप में किया जाता है, इसका इस्तेमाल केवल उस समय किया जाता है जब दूसरे पैमाने पर कोई स्पष्ट परिणाम नहीं निकलते; कुछ प्रतियोगिताओं में जैसे UFC 1, में वहां कोई स्कोरिंग नहीं था, तथापि अभी तक ज्यादातर निर्णय के कुछ रूप बैकअप के रूप में इस्तेमाल किए गए हैं। http://sports.yahoo.com/mma/news;_ylt=AuvUi2TrSN_ILBVsuNLmsjk9Eo14?slug=dm-earlyufc111207&prov=yhoo&type=lgns First UFC forever altered combat sports 3 नवंबर 2008 Yahoo! Sports November 12, 2007 Dave Meltzer, https://web.archive.org/web/20100512183116/http://sports.yahoo.com/mma/news 12 मई 2010 live इन कारकों के कारण, पूर्ण संपर्क वाले मैच और अधिक आक्रामक हो जाते हैं, लेकिन अभी तक नियमों में सुरक्षात्मक दस्ताने का इस्तेमाल अभी लागू किया जा सकता है और मैच के दौरान कुछ तकनीकों या क्रियाओं का उपयोग वर्जित कर दिया गया है, जैसे सिर के पीछे प्रहार करना। UFC, पैनक्रेस, शोटो जैसे लगभग सभी मिश्रित मार्शल आर्ट लीग में पूर्ण सम्पर्क नियमों का पालन किया जाता है जैसा कि पेशेवर मुक्केबाजी संगठन और K-1 करते हैं। क्योकुशिन कराटे में माहिर अभ्यासकर्ताओं की आवश्यकता होती है जिसमें उंगलियों की गांठ में बिना कुछ पहनाए पूर्ण सम्पर्क द्वन्द्व करवाया जाता है, हालांकि इसमें उन्हें केवल कराटे जी और ग्रॉविन संरक्षक पहनाया जाता है लेकिन चेहरे पर मुक्के मारने की अनुमति नहीं होती केवल पाद और घुटनों से प्रहार किया जा सकता है। ब्राजील की जिउ-जित्सू और जूडो मैचों में स्ट्राइकिंग करने की अनुमति नहीं होती लेकिन कुश्ती और आत्म समर्पण करवाने के तकनीकों में पूर्ण बल लगाने के अर्थ में यह पूर्ण सम्पर्क मैच होते हैं। द्वन्द्व विवाद नियमों के साथ खेले जाने वाली खेल प्रतियोगिताएं, हाथों की लड़ाई की क्षमता के मापन के लिए सही नहीं हैं और इन नियमों का प्रशिक्षण वास्तविक जीवन में स्व-सुरक्षा की स्थितियों में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इस प्रकार के अभ्यासकर्ता अधिक से अधिक नियमों पर आधारित मार्शल आर्ट प्रतियोगिताओं में भाग लेना पसंद नहीं करते हैं (यहां तक कि वेल टुडो में भी नहीं जिसमें कम से कम नियम होते हैं) और उसके बजाए कम से कम या बिना सम्मान के प्रतिस्पर्धात्मक नियमों या शायद नैतिक सरोकारों और कानून का चुनाव करते हैं। जबकि दूसरों का कहना है कि, एक रेफरी और एक रिंग डॉक्टर जैसे उचित सावधानियों के साथ विशेष रूप से पूर्ण संपर्क द्वन्द्व का बुनियादी नियमों के साथ मेल खाता है और एक व्यक्ति के समग्र रूप से लड़ने की क्षमता का मूल्यांकन किया जा सकता है और इसमें एक विरोधी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ तकनीक का परीक्षण असफल होता है और आत्मरक्षा की स्थिति में बाधा की संभावना होती है। मार्शल खेल thumb|160px|अनेक मार्शल आर्ट, जैसे जूडो एक ओलिंपिक खेल हैं जब यह द्वन्द्व प्रतिस्पर्धात्मक बनने लगा तब से मार्शल आर्ट का बदलाव एक खेल के रूप में हुआ और यह अपने नियमों के साथ एक खेल बना जो कि यह अपने मूल रूप से अलग हो गया जैसे पश्चमी तलवारबाजी के साथ एक अलग रूप में स्थापित हुआ। ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों में जूडो, टाईकोंडो, पश्चिमी तीरंदाजी, मुक्केबाजी, जेवलिन, कुश्ती और तलवारबाजी एक इवेंट्स के रूप में शामिल है, जबकि हाल ही में चीनी वूशू इसमें शामिल होने में विफल हो गया लेकिन अभी भी दुनिया भर में सक्रिय रूप से प्रतियोगिताओं में इसका प्रदर्शन किया जाता है। किक बोक्सिंग और ब्राज़ील के जिउ-जूत्सू जैसे कुछ कलाओं के अभ्यासकर्ताओं को अक्सर खेल प्रतियोगिताओं के लिए ट्रेन किया जाता है, जबकि एइकिडो और विंग चून जैसे कुछ अन्य कलाओं को आम तौर पर ऐसे प्रतियोगिताओं में अस्वीकार किया जाता है। कुछ स्कूलों का मानना है कि प्रतियोगिता अभ्यासकर्ताओं को बेहतर और अधिक कुशल बनाती है और खिलाड़ी की भावना अधिक प्रदान करती है। दूसरों का मानना है कि वे नियम जिसके तहत प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, उससे मार्शल आर्ट मुकाबले की प्रभावशीलता कम हो जाती है या विशेष प्रकार के नैतिक खेल के अभ्यास की बजाए ट्रॉफी जीतने वाले पर ध्यान केन्द्रीत किया जाता है और उसी प्रकार के अभ्यासों को बढ़ावा दिया जाता है। "सर्वोतम मार्शल आर्ट क्या है" का प्रश्न अब प्रतियोगिता के नए रूपों में परिवर्तित हो चुका है: U.S. के मूल अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पिनयशिप में बहुत ही कम नियमों के साथ इसका आयोजन किया जाता था और उसमें सभी मार्शल आर्ट शैलियों को शामिल किया जाता था और नियमों के कारण उसे सीमित नहीं किया जाता था। अब यह एक अलग द्वन्द्व खेल बन गया है जिसे मिश्रित मार्शल आर्ट (MMA) के रूप में जाना जाता है। इसी प्रकार के प्रतियोगिताएं जैसे पैनक्रेस, DREAM और शोटो का आयोजन जापान में किया जाता है। कुछ मार्शल कलाकार गैर द्वन्द्व प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं जैसे ब्रेकिंग या नृत्य शैली के तकनीकों के नियमों जैसे पुम्से, कता या अका या मार्शल आर्ट के आधुनिक रूपों जिसमें ट्रिकिंग जैसे नृत्य प्रभावित प्रतियोगिताएं शामिल हैं। मार्शल परंपराएं को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सर्वाधिक पसंदीदा खेल बनाने के लिए सरकारों द्वारा प्रभावित जाता है; केन्द्रीय प्रोत्साहन के तहत पिपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन द्वारा चीनी मार्शल आर्ट को कमेटी द्वारा संचालित वूशू के खेल को बदलने का प्रयास किया था क्योंकि विशेष कर परिवार की पारंपरिक प्रणाली के तहत उन्होंने मार्शल प्रशिक्षण के एक नकारात्मक पहलू के रूप में देखा था।Fu Zhongwen Louis Swaine Mastering Yang Style Taijiquan 1996, 2006 Blue Snake Books Berkeley, California (trade paper) नृत्य जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है कि अनेक संस्कृतियों में विभिन्न कारणों से कुछ मार्शल आर्ट को नृत्य के रूप में भी प्रदर्शित किया जाता है, जैसे युद्ध के लिए तैयार करने में उग्रता लाने या अत्यधिक श्रेष्ठ शैली में कौशल को प्रदर्शित करने के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। ऐसे कई मार्शल आर्ट संगीत को शामिल करते हैं, विशेष रूप से मजबूत और हिला देने वाला लय. ऐसे युद्ध नृत्य के उदाहरणों में शामिल हैं: thumb|पारम्परिक मार्शल आर्ट कपोइरा को संगीत के साथ नृत्य-की तरह यहां प्रदर्शित किया जा रहा है। कुवैत में - अर्डॉ॰ ऊपरी मिस्र में तहतिब रूस से - बूजा. पैंथर नृत्य - तलवार के साथ बर्मी बंडो (धा) जिम्नोपैडिआई- प्राचीन स्पार्टा यूरोपीय तलवार नृत्य या विभिन्न प्रकार के हथियार नृत्य हाका - न्यूजीलैंड सब्रे नृत्य - खाचाटुरियन के बैले गयाना में दर्शाया गया है मासाई मोरन (वरियर एज-सेट) नृत्य अदुक-अदुक - ब्रुनेई अर्डा - कतर खट्टक नृत्य - अफगानिस्तान और पाकिस्तान ब्राजील की कपोइरा साथ ही कुछ इसी तरह का अफ्रीकी-कैरेबियन कला डंन्नसा बायोडग - स्कॉटलैंड और स्कॉटिश तलवार नृत्य हुला & लुआ - देशी हवाईयन की परंपराओं से यूक्रेन से - होपक युद्ध मशेटेरो कोलम्बिया. ओमान/UAE से - योलाह टमुनानगुए - वेनेजुएला के एक पारंपरिक युद्ध शैली ईल जुएगो डेल गरोटे पर आधारित और अमेरिका स्पेनिश उपनिवेशण के दौरान यूरोपीय तलवार युद्ध द्वारा प्रभावित प्रयोग और लाभ प्रारंभ में मार्शल आर्ट का उद्देश्य आत्मरक्षा और जीवन का संरक्षण था। वर्तमान में भी इसके जरूरतें मौजूद है लेकिन अब यह प्राथमिक कारण नहीं है जिसके लिए कोई व्यक्ति खुद को इसके साथ व्यस्त होगा। प्रशिक्षु के लिए मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण अनेकों प्रकार से लाभ प्रदान करता है, शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों. मार्शल आर्ट का व्यवस्थित प्रशिक्षण से एक व्यक्ति का शारीरिक फिटनेस काफी हद तक बढ़ जाता है, (ताकत, सहनशक्ति, लचीलापन, गति समन्वय, आदि) क्योंकि इससे पूरे शरीर का व्यवस्थित रूप से व्यायाम होता है और पूर्ण रूप से पेशी प्रणाली सक्रिय हो जाती है। उचित रूप से सांस लेने की तकनीक और एक बेहतर और पौष्टिक आहार की शिक्षा के संबंध में, मार्शल आर्ट एक प्रभावी तकनीक है जो समकालीन समाज और गतिहीन जीवन के कई समस्याओं और रोगों और कमजोर प्रतिरक्षित प्रणाली से लड़ता है। इसके प्रशिक्षण से प्रशिक्षु में आत्म नियंत्रण, दृढ़ संकल्प और एकाग्रता की विशेषता उत्पन्न हो जाती है जो परिस्थितियों के अनुरूप हमेशा लाभकारी ढ़ंग से और बिना तनाव के प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। गंभीर रूप से प्रशिक्षण का परिणाम आत्मरक्षा, फिर और मजबूत आत्म नियंत्रण होता है। प्रत्येक व्यक्ति खुद के बारे में सीखता है और केवल क्षमताओं में ही नहीं बल्कि सम्मान और न्याय की भावना में भी सुधार करता है। ब्रूस ली के अनुसार मार्शल आर्ट में एक कला की भी उपस्थिति है चूंकि इसमें भावनात्मक सम्प्रेषण और पूर्ण भावनात्मक अभिव्यक्ति होती है। एक व्यक्ति के अपने आप को और अपने वातावरण को खोजने के रूप में भी मार्शल आर्ट को वर्णित किया जा सकता है। जूडो की जड़ केरल में कलारीपयत्तु केरल की युद्धकला के रूप में प्रसिद्ध है। लेकिन इसका प्रभाव और इसके कुछ तत्वों को राज्य की अनेक नृत्य और नाट्य शैलियों में, जिनमें केरल की शास्त्रीय नाट्य शैली कथकली भी शामिल है, देखा जा सकता है। जिन नृत्य शैलियों में कलारीपयत्तु के तत्व देखे जाते हैं, वे हैं कोलॅकली, वेलॅकली तथा यात्राकली। यह बड़ी रोचक बात है कि भारत के राज-परिवार में जन्में, "राजपाट-छोड़कर" एक बौद्ध-भिक्षु बनें, "बोधिधर्मा" इस कलारीपयत्तु कला को पाँचवीं शताब्दी में चीन ले गए। इस कला को सिखाने के लिए उन्होंने शावोलिन मन्दिर चुना। कालक्रम में कलारीपयत्तु ने जूडो, कराटे तथा कुंग-फु जैसी युद्धकलाओं को जन्म दिया। चीन के लोग इसे ज्यादा सीखते हैं और "आत्मरक्षा" के लिए इस विधा को अपनाते हैं. लेकिन इससे यह तो साबित नहीं होता है कि कुंगफू चीन की ही खोज हो. संत-बोधिधर्मा को "कुंग-फू" का पिता कहा जाता है. चीन के शाओलिन में उनके नाम पर कई मंदिर बने हैं. तो कयास ये लगाए जाते रहे हैं कि 6वीं सदी के समय संत बोधिधर्मा चीन गए. उस समय चीन का कोई अस्तित्व नहीं था, संत तो हिंदकुश के हिमालय पर्वत के उस पार रह रहें लोगों को बौद्ध धर्म का ज्ञान देने गए थे. लेकिन वह वहीं बस गए और साथ में अपने नायाब अविष्कार कुंग फू को वहां के लोगों में बांटा. जिससे कुंग फू उस खास इलाके में पूरी तरह से फला-फूला. इन्हीं सब बातों पर टाइगर ने कहा कि 'कुंग फू का अविष्कार भारत में हुआ है. कुंग फू मार्शल आर्ट की सबसे पुरानी विधा है जिसमें बिना किसी हथियार के लड़ाई लड़नी होती है. यूं कहें तो यह बिना लड़े लड़ने की कला है. "कुंग-फू भारतीय-बौद्ध-संत-बोधिधर्मा" की शिक्षाओं पर आधारित है जो कि पाँचवीं-छठीं सदी में चीन में चले गए थे.. लेकिन यह बात निश्चित है कि बोधिधर्मा जहां भी गए अपने साथ मार्शल ऑर्ट का एक नायाब रूप अपने साथ लेकर गए. जैसा कि केरल का कलिरीपयट्टू आप अभी देख सकते हैं. बोधिधर्मा शॉओलिन में बने नए मंदिर में रह गए और अन्य बौद्ध संतों के साथ अपनी पूरी जिंदगी इसी कला को सौंप दी. समय के साथ-साथ कुंग फू चाइना के साथ पूरे विश्व में फैला और आज इसे सबसे खतरनाक फाइटिंग स्किल माना जाता है. इन्हें भी देखें कलरीपायट्टु भारतीय युद्धकलायें शैलियां समय के साथ, दुनिया भर के सैकड़ों विद्यालयों और संगठनों में मार्शल आर्ट की संख्या बढ़ती रही है और वर्तमान में असंख्य लक्ष्यों की दिशा में कार्य जारी है और शैलियों की एक विशाल विविधता का अभ्यास किया जा रहा है। मार्शल आर्ट के शैलियों की विस्तृत सूची के लिए देखें मार्शल आर्ट की सूची मार्शल आर्ट के विस्तृत काल्पनिक सूची के लिए देखें काल्पनिक मार्शल आर्ट की सूची सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ Martial arts al Arts Community Martial art books and resources श्रेणी:युद्ध शैली श्रेणी:प्रदर्शन कला श्रेणी:युद्ध कलाएँ