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स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी
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स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी ( एसएसएनसी ) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय स्थापित पहली स्वदेशी भारतीय जलयान कंपनियों में से एक थी। सन् 1906 में http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-tamilnadu/swadeshi-ship-on-the-blue-waters-of-tuticorin/article4015532.ece Swadeshi ship on the blue waters of Tuticorin Manian, Ilasai 20 October 2012 17 August 2014 वीओ चिदम्बरम पिल्लई ने ब्रिटिश इंडिया स्टीम नेविगेशन कंपनी (बीआईएसएनसी) के एकाधिकार को समाप्त करने के लिये इसकी स्थापना की थी। http://timesofindia.indiatimes.com/city/madurai/VOCs-descendants-found-in-dire-straits/articleshow/11236236.cms VOC's descendants found in dire straits J, Arockiaraj 25 December 2011 17 August 2014 TNN Madurai यह तूतीकोरिन और कोलंबो के बीच जलयान चलाती थी। अंग्रेज सरकार के पक्षपातपूर्ण नीतियों तथा चिदम्बरम पिल्लै को दो आजीवन कारावास देने के कारण सन १९११ में यह कम्पनी समाप्त हो गयी।
पृष्ठभूमि
20वीं सदी की शुरुआत में, ब्रिटिश इंडिया स्टीम नेविगेशन कंपनी (बीआईएसएनसी) का हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापार पर एकाधिकार था। दक्षिण भारत स्थित तूतीकोरिन के व्यापारियों ने एकाधिकार को तोड़ने का फैसला किया। उन्होंने तूतीकोरिन और सीलोन (अब श्रीलंका) की राजधानी कोलंबो के बीच चलाने के लिए शॉलाइन स्टीम कंपनी से एक जहाज किराए पर लिया। किन्तु ब्रिटिश राज के दबाव के कारण शॉलाइन स्टीम कंपनी ने किराये पर ली गयी जहाज को वापस ले लिया। https://books.google.com/books?id=DEg1DwAAQBAJ&pg=PT50 V.O.Chidambaram Pillai R.N.Sampath Pe. Su. Mani 30 August 2017 Publications Division Ministry of Information & Broadcasting 978-81-230-2557-5 50–55
इस अवधि में, तूतीकोरिन के एक वकील वीओ चिदंबरम पिल्लई ने ब्रितानियों के राजनीतिक और वित्तीय एकाधिकार को समाप्त करने के उद्देश्य से एक नौकायन (नेविगेशन) कंपनी शुरू की। चिदम्बरम पिल्लै स्वदेशी आंदोलन में शामिल थे और भारत को आर्थिक और राजनैतिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा करने के प्रबल समर्थक थे।
कंपनी
चिदम्बरम पिल्लै ने 16 अक्टूबर 1906 को स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी पंजीकृत की। उन्होंने 40,000 शेयर जारी किये जिनका कुल मूल्य उस समय 10 लाख रूपये था (2019 की कीमतों में 2,000 करोड़ रूपये)। उन्होंने इस कंपनी का गठन लाभ के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रवाद के आदर्शों के लिए किया था। एशिया का कोई भी व्यक्ति शेयर रखने के लिए पात्र था। पलावनथम के जमींदार पंडितुरई थेवर ने २ लाख रूपये के शेयर खरीदे। इसके लिये उन्होंने पम्बुर नामक एक गाँव को बेच दिया।https://books.google.com/books?id=DEg1DwAAQBAJ&pg=PT112 V.O.Chidambaram Pillai R.N.Sampath Pe. Su. Mani 30 August 2017 Publications Division Ministry of Information & Broadcasting 978-81-230-2557-5 112 थेवर इस कम्पनी के अध्यक्ष बने और पिल्लई सहायक सचिव बने। कंपनी का उद्देश्य तूतीकोरिन और कोलंबो के बीच जहाज चलाना और एशियाई लोगों को नेविगेशन और जहाज निर्माण में प्रशिक्षित करना था। चिदम्बरम पिल्लई ने कंपनी के लिए धन जुटाने के लिए पूरे भारत का दौरा किया। https://books.google.com/books?id=A1acCwAAQBAJ&pg=PT38 Maritime Heritage of India Indian Navy Notion Press 1989 978-93-5206-917-0 38 कवि सुब्रमण्यम भारती ने इसके महत्व के बारे में निबंध लिखे। https://timesofindia.indiatimes.com/blogs/tracking-indian-communities/first-call-to-make-in-india-came-from-bharati-in-1909/ First call to ‘make in India’ came from Bharati in 1909 12 September 2016 Times of India Blog एसएस गैलिया, बाल गंगाधर तिलक और अरबिंदो घोष https://www.thehindu.com/thehindu/2001/09/22/stories/13221102.htm Doyen of Swadeshi shipping 2001-09-22 The Hindu https://web.archive.org/web/20020228055207/http://thehindu.com/thehindu/2001/09/22/stories/13221102.htm 2002-02-28 की मदद से फ्रांस से पहला जहाज खरीदा गया था और 1907 में तूतीकोरिन पहुंचा था। जहाज तूतीकोरिन और कोलंबो के बीच यात्रा करता था और 1300 यात्रियों और 40,000 बैग कार्गो ले जा सकता था। https://books.google.com/books?id=poiGCwAAQBAJ&pg=PT251 Incarnations: India in 50 Lives Sunil Khilnani 25 February 2016 Penguin Books Limited 978-0-241-20823-6 251 जहाज पर " वंदे मातरम् " का नारा लिखा हुआ एक झंडा लगा हुआ था। बाद में एक अन्य फ्रांसीसी जहाज, एसएस लावो भी इसमें सम्मिलित किया गया।
अब एसएसएनसी और बीआईएसएनसी के बीच व्यापार युद्ध छिड़ गया। जब बीआईएसएनसी ने किराया घटाकर एक रुपया कर दिया, तो पिल्लई ने किराया घटाकर 50 पैसे कर दिया। इसके बाद बीआईएसएनसी ने यात्रियों को मुफ्त छाते दिए। https://www.thehindu.com/children/unsung-hero/article25548136.ece Unsung hero Augustine Seline 22 November 2018 The Hindu राष्ट्रवादी भावना के कारण, एसएसएनसी को व्यापारियों और यात्रियों से तब भी समर्थन मिला जब बीआईएसएनसी ने मुफ्त सेवा की पेशकश की। ब्रिटिश राज की मदद से बीआईएसएनसी ने एसएसएनसी को https://timesofindia.indiatimes.com/blogs/tracking-indian-communities/how-indians-fought-back-on-high-seas/ How Indians fought back on high seas 2 November 2015 Times of India Blog परेशान करना शुरू किया। उदाहरण के लिये एसएसएनसी यात्रियों की चिकित्सा क्लीयरेन्स और सीमा शुल्क क्लीयरेन्स में देरी की जाने लगी। उन्हें बन्दरगाह की समयसारणी में जगह नहीं दी गयी। चिदम्बरम पिल्लै भी उस समूह का हिस्सा थे जिसने 1908 में बिपिन चंद्र पाल की जेल से मुक्ति को स्वराज्य दिवस के रूप में मनाने की योजना बनाई थी। Venkatachalapathy A.R. September 2009 An Irish link https://frontline.thehindu.com/static/html/fl2619/stories/20090925261908500.htm Frontline 26 19अक्तूबर 2023 InternetArchiveBot इससे नाराज होकर आंग्रेज सरकार ने 12 मार्च 1908 को सरकार के खिलाफ बैठकें आयोजित करने के लिए सुब्रमण्यम शिवा और चिदम्बरम पिल्लई को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। https://www.thehindu.com/news/cities/Madurai/remembering-july-7-1908-the-judgement-day/article6185099.ece Remembering July 7, 1908, the judgement day S Mohamed Imranullah 7 July 2014 The Hindu पिल्लई को दो आजीवन कारावास (40 वर्ष) की सजा सुना दी गई। https://www.thebetterindia.com/154337/freedom-fighter-tamil-nadu-chidambaram-pillai/ This Fiery Freedom Fighter From Tamil Nadu Challenged the British Raj on the Seas! 2 August 2018 The Better India जब वे जेल चले गये तब ब्रिटिश राज ने उनकी कंपनी की गतिविधियों को और अधिक दबाना शुरू किया। अधिकारियों के उत्पीड़न के बाद शेयरधारकों ने कंपनी वापस ले ली। 1911 में एसएसएनसी का परिसमापन हो गया, और एक जहाज उसकी प्रतिद्वंद्वी ब्रिटिश कंपनी को बेच दिया गया।
प्रभाव
17 जून 1911 को टिननेवेली जिले के कलेक्टर रॉबर्ट ऐश की मनियाच्ची जंक्शन रेलवे स्टेशन पर वंचीनाथन ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वंचीनाथन एक गुप्त सोसायटी के सदस्य थे। जाँच के बाद पता चला कि वंचिनाथन ने एसएसएनसी के दमन के लिए कलेक्टर ऐश को जिम्मेदार माना था।
तमिलनाडु में चिदम्बरम पिल्लै को "कपाल्लोत्य्य तमिलन्" कहा जाता है। इसका अर्थ है "जलयान चलाने वाले तमिल"। https://books.google.com/books?id=zE26DQAAQBAJ&pg=PT39 Prosperous Nation Building Through Shipbuilding 15 March 2013 KW Publishers Pvt Ltd 978-93-85714-81-8 39 स्वतन्त्रता संग्राम में उनके योगदान की याद में भारत सरकार ने तूतीकोरीन के पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर "वी० ओ० चिदम्बरनार पोर्ट" कर दिया।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
स्वदेशी
श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम