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मस्तिष्कखंडछेदन
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Lobectomy
right|thumb|250px|परानेत्रगोलकीय मस्तिष्कखंडछेदन, में प्रयुक्त ओरबिटोक्लास्टवॉल्टर फ्रीमैन ने अपने ल्यूकोटोमी के संशोधित रूप, जिसे उन्होंने परानेत्रगोलकीय मस्तिष्कखंडछेदन नाम दिया, में मूलतः बर्फ तोड़ने के सुए का इस्तेमाल किया था। हालांकि, इस तथ्य के कारण कि बर्फ तोड़ने के सुए कभी रोगी के सिर के अंदर टूट सकते थे और उनको निकालना पड़ता, उनके पास बहुत टिकाऊ, 1948 में प्रमाणित ओरबिटोक्लास्ट थे। आचार्य, हेर्निश जे. (2004).फ्रंटल ल्यूकोटॉमी के उतार और चढ़ाव.व्हाइट लॉ, डब्ल्यू.ए. में चिकित्सा दिन के 13 वीं वार्षिक इतिहास की कार्यवाही.कैलगरी: पृष्ठ. 40.
मस्तिषकखंडछेदन (लोबोटॉमी) (λοβός – lobos: "लोब (मस्तिष्क का)"; τομή - टोम: "काटना/फांक") एक तंत्रिकाशल्यक्रिया संबंधी प्रक्रिया है, मनःशल्यचिकित्सा का एक रूप, जिसे ल्यूकोटॉमी या ल्यूकोटामी (यूनानी λευκός से - ल्यूकोस: "स्पष्ट/सफेद" तथा टोम). इसमे मस्तिष्क के ललाट खंड के अग्रभाग, मस्तिष्काग्र प्रान्तस्था का और से संबंध काटना शामिल है। आरंभ में इस शल्यक्रिया को ल्यूकोटॉमी कहा गया था, जो 1935 में इसकी शुरुआत से ही विवादास्पद रहा है, मनोविकारी (और कभी-कभी अन्य) अवस्थाओं के लिए निर्धारित- इसके लगातार और गंभीर दुष्प्रभावों की आम मान्यता के बावजूद, दो दशकों से अधिक तक यह मुख्यधारा की शल्यक्रिया थी। 1949 का शरीरक्रियाविज्ञान या आयुर्विज्ञान का नोबेल पुरस्कार एंतोनियो इगास मोनिज को “उनकी निश्चित मनोविक्षिप्तियों में मस्तिष्कखंडछेदन के चिकित्साशास्त्रीय महत्त्व की खोज के लिए” दिया गया था।
http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1949/index.html The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1949 Walter Hess, Egas Moniz Nobelprize.org 6 जुलाई 2010 https://web.archive.org/web/20180810164616/https://www.nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1949/index.html 10 अगस्त 2018 live इसका उपयोग 1940 के दशक के आरंभ से 1950 के दशक के मध्य तक जोरों पर था, जब आधुनिक मनोवियोजी (मनोविक्षिप्तिरोधी) औषधियां पेश की गईं. 1951 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 20,000 मस्तिष्कखंडछेदन किए जा चुके थे। इस शल्यक्रिया में गिरावट एक दम से न आकर क्रमिक रूप से आई. उदाहरण के लिए, ओटावा में मनोरोग अस्पतालों में 1953 में 153 मस्तिष्कखंडछेदन हुए थे जो 1954 में कनाडा में मनोरोगरोधी औषधि क्लोरप्रोमाजिन के आगमन के बाद 1961 में 58 रह गए थे।ब्रैस्लो, जोएल. टी. (1997). मेंटल इल्स एंड बॉडिली क्योर्स: साइकिएट्री इन द फर्स्ट हाफ ऑफ़ द ट्वेंटिएथ सेंचरी. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय प्रेस: पीपी. 126-127शॉर्टर, एडवर्ड (1997). अ हिस्ट्री ऑफ़ साइकिएट्री: फ्रॉम द एरा ऑफ़ द असाइलम टू द एज ऑफ़ प्रोजैक. विले: पीपी 390-391, संख्या. 161.
सन्दर्भ
मस्तिषकखंडछेदन सदी बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में यूरोप में विकसित अतिवादी चीर-फाड़ वाली शारीरिक उपचार पद्धतियों की श्रृंखला में से एक थी। इन मनोरोगविज्ञान संबंधी नवाचारों ने मनोरोगियों को शरण-स्थानों में भेजने की संस्कृति पर रोक का संकेत दिया, जो उस समय प्रभावी थी क्योंकि मानसिक रोगों का उपचार सिर्फ असंतोषजनक ढंग से अतिवादी उपायों से किया जाता था या उन्हें उपचार योग्य नहीं माना जाता था।Swayze VW 1995 Frontal leukotomy and related psychosurgical procedures in the era before antipsychotics (1935–1954): a historical overview American Journal of Psychiatry 152 505–515 7900928 http://ajp.psychiatryonline.org/cgi/content/abstract/152/4/505 4 N 23 जनवरी 2011 https://web.archive.org/web/20080724145339/http://ajp.psychiatryonline.org/cgi/content/abstract/152/4/505 24 जुलाई 2008 liveयुगो सेर्लेटी, उदाहरण के लिए, "फ्युनेरियल साइंस" के रूप में इंटरवॉर अवधि के दौरान मनश्चिकित्सा चित्रित. शॉर्टर, एडवर्ड (1997) में उद्धृत. अ हिस्ट्री ऑफ़ साइकिएट्री: फ्रॉम द एरा ऑफ़ द असाइलम टू द एज ऑफ़ प्रोजैक. विले: पृष्ठ 218. इन्हें भी देखें: होनिग, जे. (1995). सिज़ोफ्रेनिया. बेरियस, जर्मन और पोर्टर, रॉय (एड्स.) में, नैदानिक मनश्चिकित्सा के इतिहास . आथ्लॉन: पृष्ठ 337मेड्युना, एल.जे. (1985). एल.जे. मेड्युना की आत्मकथा। कंवल्सिव थेरपी . 1 (1): पृष्ठ. 53. बीसवीं शताब्दी के आरंभ की इन दैहिक चिकित्सा पद्धतियों, जिन्हें एक जीवन बचाने के हताश अंतिम उपाय के अर्थ में वीरतापूर्ण वर्णित किया गया था, में पागल के सामान्य आंशिक पक्षाघात के लिेए विषमज्वरीय चिकित्सा (1917),ब्राउन, एडवर्ड एम. (2000). व्हाइ वैगनर-जौरेग वॉन द नोबल प्राइज़ फॉर डिस्कवरिंग मलेरिया थेरपी फॉर जनरल पैरेसिस ऑफ़ द इंसेन. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 11 (4): पीपी. 371-382; बार्बिटुरेट प्रेरित गहरी नींद चिकित्सा (1920), इन्सुलिन आघात चिकित्सा (1933), कार्डियाजोल आघात चिकित्सा और विद्युत-आक्षेपी चिकित्सा शामिल थी।शॉर्टर, एडवर्ड (1997). मनश्चिकित्सा के इतिहास . विले: पीपी. 190-225.http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/articles/moniz/index.html Controversial Psychosurgery Resulted in a Nobel Prize Jansson Bengt 29 अक्टूबर 1998 Nobelprize.org 6 जुलाई 2010 https://web.archive.org/web/20100109122957/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/articles/moniz/index.html 9 जनवरी 2010 live
1936 में मोनिज द्वारा मस्तिष्कखंडछेदन शल्यक्रिया का विकास, उस समय हुआ जब उपर्युक्त सभी चिकित्सकीय हस्तक्षेप चरम पर थे तथा उन पद्धतियों से उलाज करवाने वाले अधिकांश रोगियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा थीं। अनेक मनोचिक्त्सकों द्वारा मस्तिष्कखंडछेदन को इन्सुलिन या कार्डियाजोल आघात जैसी चिकित्साओं से अधिक कष्टकारक नहीं माना गया था;उदाहरण के लिए, जर्नल ऑफ मेंटल साइंस, जो बाद में ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकियेट्री बन गया, के संपादक और ग्लूसेस्टर में एक निजी मनोरोग संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक, जीडब्लूटीएच फ्लेमिंग ने टिप्पणी की: 'पहली नजर में शल्यक्रिया [मस्तिष्कखंडछेदन] एक क्रांतिकारी कार्यवाही प्रतीत होता था, जो कि कुछ मायनों में यह है, हालांकि यह ऐंठन या इन्सुलिन उपचार से अधिक कठोर नहीं है जिसमें रोगी उस रेखा से अधिक दूर नहीं होता जो जीवन और मृत्यु को अलग करती है'. फ्लेमिंग, जी.डब्ल्यू.टी.एच. (G.W.T.H.) (1942). प्रिफ्रंटल ल्यूकोटॉमी पर कुछ प्रारंभिक टिप्पणी. मानसिक विज्ञान के जर्नल . 88 (371): 282. गंभीर मानसिक बीमारियों से ग्रस्त रोगियों के उपचार के लिए कल्पना की गई इन प्रक्रियाओं ने बौद्धिक वातावरण और चिकित्सकीय तथा सामाजिक तकाजों की रचना करने में सहायता की और मस्तिष्कखंडछेदन जैसी क्रांकिकारी और अपरिवर्तनीय शल्य प्रक्रिया व्यवहार्य तथा यहां तक कि एक आवश्यकता के रूप में प्रकट हो सकी. इसके अलावा, जोएल ब्रैस्लो का तर्क है कि मलेरिया संबंधी चिकित्साओं से आगे मस्तिष्कखंडछेदन तक, इस अंग के उत्तरोत्तर “रोग के स्रोत और इलाज स्थल के रूप में केंद्रीय स्थान लेने” के साथ-साथ दैहिक मनोरोग चिकित्सा, "बढ़ती हुई मस्तिष्क के अंदरूनी भाग के और करीब आती गई".ब्रैस्लो, जोएल (1997). मानसिक बीमारियों और शारीरिक उपचार. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस: पृष्ठ 3. रॉय पोर्टर के अनुसार, ये प्रायः हिंसक और चार-फाड़ वाले मनोरोग उपचार, मनोचिक्त्सकों की बीसवीं शताब्दी में मनोरोग चिकित्सालयों में हजारों रोगियों की तकलीफों को कम करने के लिए किसी चिकित्सा का माध्यम खोजने की नेकनीयत इच्छा तथा मनोचिकित्सालयों के चिकित्सकों के बढ़ते हुए अतिवादी, यहां तक कि अविचारी उपचारों का विरोध करने के लिए कुछ मरीजों में सामाजिक शक्ति के अभाव का संकेत देते हैं।पोर्टर, रॉय (1999). द ग्रेटेस्ट बेनेफिट टू मैनकाइंड: अ मेडिकल हिस्ट्री फ्रॉम एंटीक्यूटी टू द प्रेजेंट. फोंटाना प्रेस: पृष्ठ 520.
पथप्रदर्शक
गॉटलीब बुर्खार्ट
Gottlieb Burckhardt
दिसंबर 1888 में शल्यक्रिया के कम अनुभव वाले एक मनोचिक्त्सक गॉटलीब बुर्खार्ट ने मनःशल्यचिकित्सा के क्षेत्र में पहला प्रयत्न किया था जब उन्होंने स्विट्जरलैंड में एक निजी मनोरोग चिकित्सालय में 26 से 51 के बीच की आयु के, दो महिला व चार पुरुष, छः रोगियों की शल्यक्रिया की थी। उनके निदान भिन्न-भिन्न थे, एक को पुराना उन्माद था, एक को प्राथमिक मनोभ्रंश और चार मूल पीड़नोन्माद (प्रिमेयर वेरुक्थेत, एक अप्रचलित नैदानिक श्रेणी जिसे कभी-कभी कालदोषी प्रकृति से मनोभाजन के तुल्य माना जाता था) के रोगी थे और, बुर्खार्ट के केस-नोट के अनुसार उनमें गंभीर मनोविकृति लक्षण थे, जैसे श्रवणीय विभ्रम, पीड़नोन्मादी मतिभ्रम, आक्रामकता, उत्तेजना और हिंसा. उन्होंने इन रोगियों के ललाट, कनपटी और प्रमस्तिषक खंड पर शल्यक्रिया की. परिणाम बहुत ज्यादा प्रोत्साहित करने वाले नहीं थे, क्योंकि एक मरीज शल्यक्रिया के पांच दिन बाद मिरगी के दौरे अनुभव करने के बाद मृत्यु हो गई, एक में सुधार हुआ लेकिन उसने बाद में आत्महत्या करली, अन्य दो में कोई परिवर्तिन दिखाई नहीं दिया तथा अंतिम दो और अधिक “गुमसुम” हो गए। यह सफलता की 50% दर के बराबर था। शल्यक्रिया के फलस्वरूप होनेवाली जटिलताओं में मिर्गी (दो रोगियों में), प्रेरक की कमजोरी, "शब्द बहरापन" और संवेदी वाचाघात शामिल थे। बिना किसी जटिलता के केवल दो रोगी दर्ज किए गए।बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पीपी 69-70; मंजिला एस. रेंगैच्री एस, ज़ेवियर एआर (AR), पार्कर बी, गुथीकोंडा एम. (2008). मॉडर्न साइकोसर्जरी बिफोर एगस मोनिज़: अ ट्रिब्यूट टू गोटलिब बर्कहार्ट https://web.archive.org/web/20110722134926/http://www.unboundmedicine.com/medline/ebm/record/18590386/abstract/Modern_psychosurgery_before_Egas_Moniz:_a_tribute_to_Gottlieb_Burckhardt_ 22 जुलाई 2011 न्युरोसर्ग फोकस 2008; 25(1): पृष्ठ 2.स्टोन, जेम्स एल. (2001). गोटलिब बर्कहार्ट - साइकोसर्जरी की पायनियर. न्यूरोसाइंसेस के इतिहास के जर्नल . 10 (1): पीपी 79-80.
बुर्खार्ट की कार्रवाई का सैद्धांतिक आधार तीन प्रस्ताव थे। पहला था कि मानसिक बीमारी का एक शारीरिक आधार था और विकृत मन विकृत मस्तिष्कों के प्रतिबिंब मात्र थे। अगला, तंत्रिका प्रकार्य का संघवादी दृष्टिकोण है जिसने निम्नलिखित तितरफा श्रम विभाजन के अनुसार तंत्रिका तंत्र के कार्य करने की कल्पना की थीः एक निवेश (या संवेदी या अभिवाही) प्रणाली, एक संयोजन प्रणाली जो सूचना का संसाधन करती थी) और एक निर्गम (या अपवाही या प्रेरक) प्रणाली. बुर्खार्ट की अंतिम धारणा थी कि मस्तिष्क प्रमापीय था जिसका मतलब था कि प्रत्येक मानसिक प्रमाप या मानसिक संकाय मस्तिष्क में एक विशिष्ट स्थान से जुड़े हो सकते थे। इस तरह के दृष्टिकोण के अनुसार, बुर्खार्ट यह मानते थे कि मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्र में घाव व्यवहार को विशिष्ट तरीके से प्रभावित कर सकते थे। दूसरे शब्दों में, उन्होंने सोचा कि संयोजन प्रणाली या मस्तिष्क की संचार प्रणाली की दूसरी सहयोगी अवस्था को काट देने से, तंत्रिका तंत्र के निवेश या निर्गम तंत्रों के साथ समझौती किए बिना परेशान करने वाले लक्षणों को कम किया जा सकता था। इस शल्यक्रिया का उद्देश्य लक्षणों में राहत पहुंचाना था, न कि मानसिक रोग का उपचार करना.बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पीपी 68, 77. इसलिए, उन्होंने 1891 में लिखा:
यदि उत्तेजना और आवेगी व्यवहार इस तथ्य की वजह से हैं कि गुणवत्ता, मात्रा और तीव्रता में असामान्य उत्तेजनाएं संवेदी सतह उठती हैं और प्रेरक सतहों पर कार्य करती हैं, तो दोनों सतहों के बीच एक बाधा पैदा करके सुधार प्राप्त किया जा सकता है। प्रेरक या संवेदी क्षेत्र का उन्मूलन हमें गंभीर प्रकार्यात्मक गड़बड़ियों के खतरे और तकनीकी कठिनाइयों के सामने हम अनावृत हो जाएंगे.. प्रेरक क्षेत्रके पीछे और दोनों तरफ प्रांतस्था की एक पट्टी को काट कर कनपटी की पालि में एक नाली बनाना अधिक लाभप्रद होगा.बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पीपी 68-69.
बुर्खार्ट ने 1989 के बर्लिन चिकित्सा सम्मेलन जिसमें विक्टर होर्सली, वैलेंटिन मैगनन और एमिल क्रेपलिन जैसे दिग्गज मनोरोग विशेषज्ञों ने भाग लिया था, में भाग लिया और अपनी मस्तिष्क शल्यक्रियाओं पर एक शोधपत्र प्रस्तुत किया। जबकि उनके निष्कर्ष बाद में मानसिक रोगों के साहित्य में व्यापक रूप से प्रकाशित हुए, लेकिन समीक्षाएँ लगातार नकारात्मक थीं और उनके द्वारा की गई शल्य क्रियाओं की काफी आलोचना का गई थी।बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पीपी 69स्टोन, जेम्स एल. (2001). गोटलिब बर्कहार्ट - साइकोसर्जरी की पायनियर. न्यूरोसाइंसेस के इतिहास के जर्नल . 10 (1): पीपी 79-80शॉर्टर, एडवर्ड (1997). अ हिस्ट्री ऑफ़ साइकिएट्री: फ्रॉम द एरा ऑफ़ द असाइलम टू द एज ऑफ़ प्रोजैक. विले: पी. 225मंजिला एस. रेंगैच्री एस, ज़ेवियर एआर (AR), पार्कर बी, गुथीकोंडा एम. (2008). मॉडर्न साइकोसर्जरी बिफोर एगस मोनिज़: अ ट्रिब्यूट टू गोटलिब बर्कहार्ट https://web.archive.org/web/20110722134926/http://www.unboundmedicine.com/medline/ebm/record/18590386/abstract/Modern_psychosurgery_before_Egas_Moniz:_a_tribute_to_Gottlieb_Burckhardt_ 22 जुलाई 2011 न्युरोसर्ग फोकस 2008; 25(1): पृष्ठ 2. 1983 में लिखते हुए क्रेपलिन ने बुर्खार्ट के प्रयासों की तीखी आलोचना की और कहा कि "उस [बुर्खार्ट] ने सुझाव दिया कि बेचैन रोगियों के मस्तिष्क की प्रांतस्था को खुरच कर उन्हें शांत किया जा सकता था।"मंजिला एस. रेंगैच्री एस, ज़ेवियर एआर (AR), पार्कर बी, गुथीकोंडा एम. (2008). मॉडर्न साइकोसर्जरी बिफोर एगस मोनिज़: अ ट्रिब्यूट टू गोटलिब बर्कहार्ट https://web.archive.org/web/20110722134926/http://www.unboundmedicine.com/medline/ebm/record/18590386/abstract/Modern_psychosurgery_before_Egas_Moniz:_a_tribute_to_Gottlieb_Burckhardt_ 22 जुलाई 2011 न्युरोसर्ग फोकस 2008; 25(1): पृष्ठ. 3. जबकि इतालवी तंत्रिका मनोरोग विज्ञान के प्रोफेसर ग्यूसेप सेपिली ने 1891 में टिप्पणी की कि मस्तिष्क के प्रमापीय होने का बुर्खार्ट का दृष्टिकोण “अधिकतर [विशेषज्ञों] के इस दृष्टिकोण से, कि मनोविक्षिप्ति प्रमस्तिष्कीय वल्कुट का व्यापक निदान है, मेल नहीं खाता और मन को एक एकात्मक इकाई मानने की अवधारणा के विरुद्ध है”.बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पृष्ठ 69.
बुर्खार्ट ने 1891 में लिखा था कि "डॉक्टर स्वभाव से अलग होते हैं। एक प्रकार के पुराने सिद्धांतों से चिपके रहते हैं: पहले, कोई नुकसान नहीं पहुंचाते (प्रिमम नोन नोसेरे); दूसरे कहते हैं: कुछ नहीं करने से कुछ करना बेहतर है (मीलिअस एन्सेप्स रिमीडियम क्वैम नलम). मैं निश्चित रूप से दूसरी श्रेणी से संबंध रखता हूं”.मंजिला एस. रेंगैच्री एस, ज़ेवियर एआर (AR), पार्कर बी, गुथीकोंडा एम मॉडर्न साइकोसर्जरी बिफोर एगस मोनिज़: अ ट्रिब्यूट टू गोटलिब बर्कहार्ट https://web.archive.org/web/20110722134926/http://www.unboundmedicine.com/medline/ebm/record/18590386/abstract/Modern_psychosurgery_before_Egas_Moniz:_a_tribute_to_Gottlieb_Burckhardt_ 22 जुलाई 2011 न्युरोसर्ग फोकस 2008; 25(1): ई9 (E9). इस बयान की प्रतिक्रिया फ्रांसीसी मनोरोग विशेषज्ञ आर्मंड सेमलेन द्वारा दी गई जब उन्होंने लिखा कि “एक बुरे उपचार की बजाय इलाज नहीं होना बेहतर है”.बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पीपी. 70,71. 1891 में इस विषय पर अपने 81 पृष्ठ के प्रभावशाली प्रबंध के प्रकाशन के बाद, बुर्खार्ट ने अपनी खोज और मनोशल्यक्रिया का पेशा समाप्त कर दिया, निःसंदेह अंशतः इसलिए कि उनके द्वारा अपनाए गए तरीकों के लिए उन्हें अपने साथियों से उपहास का सामना करना पड़ा था।स्टोन, जेम्स एल. (2001). गोटलिब बर्कहार्ट - साइकोसर्जरी की पायनियर. न्यूरोसाइंसेस के इतिहास के जर्नल . 10 (1): पृष्ठ. 88.
1891 में उनके मोनोग्राफ पर टिप्पणी करते हुए ब्रिटिश मनोचिकित्सक विलियम आयरलैंड ने अपनी स्थिति का संक्षिप्त संकलन प्रस्तुत कियाः
डॉ॰ बुर्खार्ट को इस दृष्टिकोण पर दृढ़ विश्वास है कि मन कई संकायों से मिल कर बना है, जिनके मस्तिष्क में अपने-अपने निश्चित स्थान हैं। जहां किसी कार्य की अधिकता या गड़बड़ी होती है वे उग्र केंद्रों के उस भाग के उच्छेदन द्वारा रोकने की कोशिश करते हैं। वे उन आलोचनाओं, जो निश्चय ही उनके उत्साही इलाज को लेकर थीं, का जिन मरीजों की शल्यक्रियाएं की गई थी, उनके रोग निदान के निराशाजनक पहलू को दिखाकर अपना बचाव करते हैं।बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पृष्ठ. 71.
लेकिन आयरलैंड को इस बात में शक था कि कोई अंग्रेज मनोचिकित्सक बुर्खार्ट द्वारा अपनाए गए “दुस्साहसी” मार्ग का अनुसरण करेगा.
इगास मोनिज
Egas Moniz
इस शल्यक्रिया के विकास में अगला पड़ाव पुर्तगाली चिकित्सक और तंत्रिकाविज्ञानी एंटोनियो इगास मोनिज ने प्रदान किया जिनकी 1927 में प्रमस्तिष्कीय वाहिकाचित्रण पर किए गए कार्य के लिए अत्यधिक प्रशंसा हुई थी (मस्तिष्क में रक्तवाहिकाओं का विकिरणचित्रीय दृश्य).डोबी, टी (1992) सेरेब्रल एंजियोग्राफी और एगस मोनिज़. रोएंटजेनोलॉजी के अमेरिकी जर्नल . 359 (2): पृष्ठ. 2. दरअसल, मनोशल्य चिकित्सा की अपनी खोज से पहले, वह दो बार नामित किया गया था और दो बार इस काम के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने में विफल रहा. एडवर्ड शॉर्टर, शायद गलत तरीके से, उसके मस्तिष्कखंडछेदन शल्यक्रिया के विकास का श्रेय उसकी अंततः महान पुरस्कार पर कब्जा करने की इच्छा को देते हैं।शॉर्टर, एडवर्ड (1997). मनश्चिकित्सा के इतिहास. विले: पी. 226. कोई नैदानिक अनुभव न होने और वास्तव में मनोरोगविज्ञान में कम रुचि होने के बावजूद उन्होंने 1935 में लिस्बन के साता मार्टा अस्पताल में उनहोंने एक शल्यक्रिया का आविष्कार किया, जिसे मस्तिष्काग्र मस्तिष्कखंडछेदन कहा गया और जो उनके निदेशन में तंत्रिकाशल्यचिकित्सक पेड्रो अलमीडा लीमा ने किया था। वे शब्द मनोशल्यचिकित्सा के प्रारंभ के लिए भी जिम्मेदार थे।कोटोविज़, ज़िगन्यु (2005). गोटलिब बर्कहार्ट और एगस मोनिज़ - साइकोसर्जरी के दो शुरुआत. https://web.archive.org/web/20111215210609/http://www.gesnerus.ch/fileadmin/media/pdf/2005_1-2/077-101_Kotowicz.pdf 15 दिसंबर 2011 जेसनेरस . 62(1/2): पीपी. 83, 80, 78. इस शल्यक्रिया में रोगी के सिर में ड्रिल द्वारा छिद्र करना तथा ललाट खंड में इंजेक्शन द्वारा अलकोहल से ऊतकों को नष्ट करना शामिल था। बाद में उन्होंने तकनीक बदल कर एक शल्य चिकित्सा उपकरण मस्तिष्कखंडछेदक का उपयोग शुरू किया, जो मस्तिष्क के ऊतकों को एक घूर्णी आकुंचनीय तार पाश से काटता था (इसी नाम के बिलकुल भिन्न उपकरण का उपयोग मस्तिष्कखंडछेदन हेतु किया जाता है).http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/articles/moniz/ Controversial Psychosurgery Resulted in a Nobel Prize 2008-03-30 Jansson Bengt 1998-10-29 Nobelprize.org Nobel Web AB https://web.archive.org/web/20101214220050/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/articles/moniz/ 14 दिसंबर 2010 live . प्रक्रिया के मोनिज़ द्वारा अकाउंट के लिए देखें: मोनिज़, एगस (1937). मानसिक विकार के उपचार में प्रिफ्रंटल ल्यूकोटॉमी. https://web.archive.org/web/20140428180553/http://books.google.com/books?hl=en&lr=&id=tXd98Ify7WgC&oi=fnd&pg=PA237&dq=moniz+leucotomy&ots=paTR2Ekkb7&sig=KDGReHFRuy5ozVueWqB0uLJFeXw 28 अप्रैल 2014 अमेरिकी मनोरोग एसोसिएशन में प्रजनन, सेस्कुइसेंटेनियल एनिवर्सरी 1844-1944 . अमेरिकी मनोरोग प्रकाशन: पी. 237. मोनिज और लीमा ने नवंबर 1935 और फ़रवरी 1936 के बीच बीस रोगियों की शल्यक्रियाएं कीं तथा अपने निष्कर्षों को उसी वर्ष प्रकाशित किया।कोटोविज़, ज़िगन्यु (2005) गोटलिब बर्कहार्ट और एगस मोनिज़ - साइकोसर्जरी के दो शुरुआत https://web.archive.org/web/20111215210609/http://www.gesnerus.ch/fileadmin/media/pdf/2005_1-2/077-101_Kotowicz.pdf 15 दिसंबर 2011 . जेसनेरस . 62(1/2): पृष्ठ. 81. उनका अपना आकलन था कि 35% रोगियों में अत्यधिक सुधार हुआ, 35% में मध्यम सुधार हुआ और शेष 30% में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। रोगियों की उम्र 27 से 62 वर्ष के बीच थी जिनमें से बारह महिलाएं थीं और आठ पुरुष थे। निदान के अनुसार नौ मरीज अवसाद से पाड़ित थे, छह विखंडित मनस्कता से, दो आतंक विकार से तथा एक-एक उन्माद, तानप्रतिष्टम्भ और उन्मत्त अवसाद से पीड़ित थे, उनमें प्रमुख लक्षण घबराहट और उत्तेजना के थे। रोगियों में शल्यक्रिया से पूर्व बीमारी की अवधि कम से कम चार सप्ताह से लेकर अधिक से अधिक 22 वर्ष तक थी, यद्यपि चार को छोड़ कर सभी कम से कम एक वर्ष से बीमार थे। शल्यकर्मोत्तर अनुवर्ती मूल्यांकन शल्यक्रिया के बाद कहीं एक से दस सप्ताह के बीच संपन्न हुए. देखी गई जटिलताएं बुर्खार्ट के मामलों से कम गंभीर थी, क्योंकि न तो कोई मृत्यु हुई और न ही किसी को मिरगी के दौरे पड़े और सर्वाधिक पाई गई जटिलता बुखार थी।बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पीपी 74-76.
मोनिज की अग्रणी मनोशल्यचिकित्सा का सैद्धांतिक आधार मुख्यतः उन्नीसवीं शताब्दी के अनुरूप था जो कि उनसे पहले बुर्खार्ट के सिद्धांतों का आधार बना था। हालांकि बाद के अपने लेखन में उन्होंने रेमन वाई कैयाल के तंत्रिकाकोशिका सिद्धांत तथा इवान पावलोव के अनुकूलित प्रतिवर्त को भी संदर्भित किया, साररूप में उन्होंने इस नए तंत्रिकाविज्ञानी अनुसंधान की पुराने सहचर्य सिद्धांत के परिप्रेक्ष्य में व्याख्या की.बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पीपी 72. वे बुर्खार्ट से काफी भिन्न थे इसलिए कि उन्हें नहीं लगता था कि मानसिक रूप से बीमार लोगों के मस्तिष्क में कोई स्थूल शारीरिक निदान था, बल्कि उनके तंत्रिकीय पथ स्थिर और विनाशक परिपथों में पाए गए।<ref>कोटोविज़, ज़िगन्यु (2005). गोटलिब बर्कहार्ट और एगस मोनिज़ - साइकोसर्जरी के दो शुरुआत. https://web.archive.org/web/20111215210609/http://www.gesnerus.ch/fileadmin/media/pdf/2005_1-2/077-101_Kotowicz.pdf 15 दिसंबर 2011 '' जेसनेरस. 62(1/2): पृष्ठ. 88. मोनिज ने 1948 में लिखा था: 'विषाद से पीड़ित, उदाहरण के लिए, निर्धारित और जुनूनी विचारों से व्यथित रहे हैं ...उनके पूरे जीवन में हावी रहे एक निश्चित विचार के कारण व्याकुलता की स्थाई स्थिति में रहते हैं।.. सहज क्रियाओं के विपरीत, ये बीमार विचार चेतोपागम संकुल में गहरे गड़े हुए हैं, जो चेतना के प्रकार्य को नियंत्रित करता है, उत्तेजित करता है और इसे लगातार गतिविधि में रखता है।.. इन सब बातों ने मुझे इस निष्कर्ष पर पहुंचाया किः यह जरूरी है कि इन चेतोपागम समायोजनों को बदला जाए और आवेगों द्वारा अपने सतत यात्रा में चुने गए मार्गों को भी बदला जाए ताकि संबंधित विचारों को बदला जा सके तथा विचारों को अलग रास्ते पर धकेला जा सके...' बेरियस, जी.ई. में उद्धृत (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पी. 74.</ref> जैसा कि उन्होंने 1936 में लिखा थाः
[] मानसिक परेशानियों का [...] संबंध कोशिका-संयोजी-समूहीकरण के गठन से होना चाहिए जो न्यूनाधिक स्थिर हो गया है। कोशिकीय शरीर बिलकुल सामान्य रह सकता है, उनके बेलनों में कोई संरचनात्मक परिवर्तन नहीं होता, लेकिन सामान्य लोगों में अत्यधिक परिवर्तनशील उनके बहु संपर्कों की व्यवस्थाएं न्यूनाधिक स्थिर हो सकती हैं जिनका संबंध लगातार विचारों और निश्चित अस्वस्थ मानसिक दशाओं में सन्निपात से संबंध हो सकता है।कोटोविज़, ज़िगन्यु (2005). गोटलिब बर्कहार्ट और एगस मोनिज़ - साइकोसर्जरी के दो शुरुआत. https://web.archive.org/web/20111215210609/http://www.gesnerus.ch/fileadmin/media/pdf/2005_1-2/077-101_Kotowicz.pdf 15 दिसंबर 2011 जेसनेरस . 62(1/2): पृष्ठ. 88.
right|thumb|200px|left|मस्तिष्क एनीमेशन: फ्रंटल लोब लाल में चिन्हांकित किया गया। मोनिज ने मस्तिष्कखंडछेदन शल्यक्रिया में, जिसकी कल्पना उन्होंने 1933 में की थी, ललाटखंड को लक्षित किया था।
इन विपथी तथा स्थिर विकृतिजन्य मस्तिष्क परिपथों को हटाने से मानसिक लक्षणों में कुछ सुधार हो सकता है। मोनिज का मानना था कि इस प्रकार की चोट को मस्तिष्क कार्यात्मक रूप से अनुकूलित कर लेगा.बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पृष्ठ. 74. इस दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण लाभ यह था कि, बुर्खार्ट द्वारा अपनाई गई स्थिति के विपरीत, यह समय के ज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुसार असत्यापनीय था, क्योंकि स्थूल मस्तिष्कीय विकृति और मानसिक रुग्णता के बीच ज्ञात संबंध के अभाव में उनके प्रबंध-लेख का खंडन नहीं किया जा सकता था।कोटोविज़, ज़िगन्यु (2005). गोटलिब बर्कहार्ट और एगस मोनिज़ - साइकोसर्जरी के दो शुरुआत. https://web.archive.org/web/20111215210609/http://www.gesnerus.ch/fileadmin/media/pdf/2005_1-2/077-101_Kotowicz.pdf 15 दिसंबर 2011 जेसनेरस . 62(1/2): पृष्ठ. 89.
परंपरागत रूप से, इस प्रश्न का कि मोनिज ने ललाट खंड को ही क्यों लक्षित किया, जॉन फुल्टन और कार्लाइल जैकबसन ने 1935 में लंदन में आयोजित तंत्रिकाविज्ञान की दूसरी अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस में एक प्रस्तुतिकरण के दौरान संदर्भ के द्वारा दिया. फुल्टन और कार्लाइल ने दो चिंपांज़ी प्रस्तुत किए जिनका ललाट खंड मस्तिष्कखंडछेदन किया गया था। पहले से व्यवहार विकारों से पीड़ित इन चिंपांजियों पर इस शल्यक्रिया का शांतिदायक प्रभाव हुआ। यह आरोप लगाया गया है कि इस से मोनिज को मनोविकार के रोगियों पर भी ऩसी तकनीक के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहन और प्रेरणा मिली.उदाहरण के लिए, शॉर्टर के अकाउंट: शॉर्टर, एडवर्ड (1997) देखें. मनश्चिकित्सा के इतिहास. विले: पृष्ठ 226. इस सम्मेलन ने "अ रिमार्क्बल सिमपोसियम...ऑन ड फंक्शन्स ऑफ़ द फ्रंटल लोब्स" का भी आयोजन किया।फ्रीमैन, वॉल्टर और वॉट्स, जेम्स डब्ल्यू. (1944). साइकोसर्जरी: सात साल से अधिक दो सौ मामले का मूल्यांकन. मानसिक विज्ञान के जर्नल . 90 (379): पृष्ठ. 532. हालांकि, जैसा कि बेरियोस बताते हैं, यह इस तथ्य के उलट है कि मोनिज ने बहुत पहले 1933 में ही मनोशल्यचिकित्सा का अपना विचार अपने सहयोगी लीमा को विश्वास में लेकर बता दिया था। और न ही 1936 में शल्यक्रिया के बारे में लिखते समय उन्होंने फुल्टन और कार्लाइल के प्रस्तुतिकरण के किसी प्रभाव का कोई उल्लेख किया।बेरियस, जी.ई. (1997). साइकोसर्जरी के मूल: शॉ, बर्कहार्ट और मोनिज़. मनश्चिकित्सा के इतिहास . 8 (1): पीपी. 72-73. दरअसल, जैसा कि कोटोविच लिखते हैं, उनका ध्यान उसी सम्मेलन में रिचर्ड ब्रिकनर द्वारा प्रस्तुत एक केस ने आकर्षित किया था जिसमें एक रोगी के ललाट खंड को काटा गया था और प्रभाव कम होने के अनुभव के दौरान उसकी बुद्धि में किसी प्रकार की गिरावट नहीं पाई गई। ब्रिकनर ने 1932 में इस केस को प्रकाशित किया था।कोटोविज़, ज़िगन्यु (2005). गोटलिब बर्कहार्ट और एगस मोनिज़ - साइकोसर्जरी के दो शुरुआत. https://web.archive.org/web/20111215210609/http://www.gesnerus.ch/fileadmin/media/pdf/2005_1-2/077-101_Kotowicz.pdf 15 दिसंबर 2011 जेसनेरस . 62(1/2): पृष्ठ. 84.
इस काम के लिए मौनिज को 1949 में चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था।http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1949/ The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1949 2008-03-30 Nobelprize.org Nobel Web AB https://web.archive.org/web/20070219032304/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1949/ 19 फ़रवरी 2007 live स्विस शरीर-क्रिया विज्ञानी वॉल्टर हेस के साथ उसने पुरस्कार बांटा.कोटोविज़, ज़िगन्यु (2005).गोटलिब बर्कहार्ट और एगस मोनिज़ - साइकोसर्जरी के दो शुरुआत. https://web.archive.org/web/20111215210609/http://www.gesnerus.ch/fileadmin/media/pdf/2005_1-2/077-101_Kotowicz.pdf 15 दिसंबर 2011 जेसनेरस . 62(1/2): पृष्ठ. 78 संख्या. 2.
वॉल्टर फ्रीमैन
Walter Freeman (neurologist)
अमेरिकी तंत्रकाविज्ञानी और मनोचिकित्सक वॉल्टर फ्रीमैन जिन्होंने 1935 में तंत्रिकाविज्ञान की लंदन कांग्रेस में भाग लिया था, के मन में मोनिज के काम से कुतूहल जागा और अपने निकट मित्र, तंत्रिकाशल्य चिकित्सक जेम्स डब्लू वॉट्स की सहायता से उन्होंने 1936 में, संयुक्त राज्य अमेरिका में पहला मस्तिष्काग्र मस्तिष्कखंडछेदन वॉशिंगटन में जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के अस्पताल में किया।शॉर्टर, एडवर्ड (1997). मनश्चिकित्सा के इतिहास .विले: पृष्ठ.227. फ्रीमैन और वॉट्स ने धीरे-धीरे शल्य तकनीक को परिष्कृत किया और फ्रीमैन-वॉट्स शल्यक्रिया की रचना की ("सटीक पद्धति", मानक मस्तिष्कखंडछेदन).
फ्रीमैन-वॉट्स मस्तिष्काग्र मस्तिष्कखंडछेदन में अभी भी खोपड़ी में ड्रिल द्वारा छिद्र करने की आवश्यकता थी, इसलिए शल्यक्रिया एक शल्यक्रिया-कक्ष में प्रशिक्षित तंत्रिकाशल्य चिकित्सकों द्वारा की जाती थी। वाल्टर फ्रीमैन का मानना था कि यह शल्यक्रिया उन लोगों के लिए अनुपलब्ध रहेगी जिनको उन्होंने देखा कि इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थीः सरकारी मानसिक चिकित्सालयों में शल्यक्रिया कक्ष, शल्यचिकित्सक या निश्चेतना विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं, बजट भी सीमित है। फ्रीमैन शल्यक्रिया को सरल बनाना चाहते थे ताकि इसे मनोचिकित्सक मानसिक आश्रय-स्थानों, जिनमें इस समय लगभग 6 लाख अमेरिकी अंतःरोगी रह रहे हैं।
इतालवी मनोचिकित्सक अमारो फिआम्बर्टी के कार्य से प्रेरित होकर, फ्रीमैन ने किसी समय खोपड़ी में ड्रिल किए छिद्रों की बजाय नेत्र गर्त में से ललाटखंड तक पहुंचने की कल्पना की थी। 1945 में उन्होंने अपनी रसोई से एक बर्फ तोड़ने का सुआवॉल्टर फ्रीमैन के पुत्र, फ्रैंक फ्रीमैन, ने हॉवर्ड डली के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि: "उसके पास कई बर्फ तोड़ने के सुए थे जो रसोई के ड्रॉअर में पीछे अस्तव्यस्त पड़े थे। पहला सुआ ड्रॉअर से ठीक बाहर आया। एक तुच्छ बर्फ तोड़ने का सुआ जो सीधे ललाटखंड के अंदर जाना था। यह सौंदर्यविज्ञान के दृष्टिकोण से क्रूर था। इसे देखना मात्र भयानक, वीभत्स था।" जब डली ने तब एक 79 वर्षीय सुरक्षा गार्ड, फ्रैंक फ्रीमैन से पूछा, कि क्या उसे अपने पिता पर गर्व था, उसने जवाब दियाः “ओ हां, हां, वाह. वे कमाल थे। वे वास्तव में एक उल्लेखनीय अग्रणी मस्तिष्कखंडछेदन विशेषज्ञ थे। काश वे और आगे तक गए होते. वॉल्टर फ्रीमैन के पुत्र फ्रैंक फ्रीमैन हॉवर्ड डली को डॉक्टर फ्रीमैन द्वारा विकसित परानेत्रगोलकीय मस्तिष्कखंडछेदन के स्रोत के बारे में बताता है। https://web.archive.org/web/20160305083628/http://www.npr.org/templates/player/mediaPlayer.html?action=1&t=1&islist=false&id=5014080&m=5016121 5 मार्च 2016 रेडियो वृत्तचित्र से उद्धृत: डली, हावर्ड. (2005). 'माई लोबोटॉमी': हावर्ड डली की यात्रा. https://web.archive.org/web/20110104154604/http://www.npr.org/templates/story/story.php?storyId=5014080 4 जनवरी 2011 ऑल थिंग्स कंसिडर्ड. एनपीआर (NPR). 28 नवम्बर 2009 को अभिगम. लिया और अपने विचार को एक मौसमीरॉडनी डली, जिनके पुत्र हावर्ड डली का, जब वह बारह वर्थाष की आयु का था, वॉल्टर फ्रीमैन द्वारा मस्तिष्कखंडछेदन किया गया था, ने अपने पुत्र के साथ एक साक्षात्कार में कहाः “मैं उनसे [फ्रीमैन] मैं सोचता हूं केवल एक बार मिला था। उन्होंने बताया कि यह [परानेत्रगोलकीय मस्तिष्कखंडछेदन] कितना सटीक था और उन्होंने काटने का अभ्यास किया था, सचमुच काटने, एक कार भर कर मौसमियां कीटकर, सही चाल और सही घुमाव पाने का. बस इतना ही उन्होंने मुझे बताया था।" 2004 में, ऑपरेशन के बाद से पहली बार, हावर्ड डली के पिता, रॉडनी डली, पुत्र के साथ मस्तिष्कखंडछेदन पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए. https://web.archive.org/web/20160305083628/http://www.npr.org/templates/player/mediaPlayer.html?action=1&t=1&islist=false&id=5014080&m=5016121 5 मार्च 2016 रेडियो वृत्तचित्र से उद्धृत: डली, हावर्ड. (2005). 'माई लोबोटॉमी': हावर्ड डली की यात्रा. https://web.archive.org/web/20110104154604/http://www.npr.org/templates/story/story.php?storyId=5014080 4 जनवरी 2011 ऑल थिंग्स कंसिडर्ड. एनपीआर (NPR). 28 नवम्बर 2009 को अभिगम. और शवों पर जांचना शुरू कर दिया. इस नए "पारनेत्रकोटरीय" मस्तिष्कखंडछेदन में ऊपरी पलक को उठा कर एक पतले शल्य उपकरण (जिसे प्रायः ओरबिटोक्लास्ट या मस्तिष्कखंडछेदक कहा जाता है, हालांकि यह ऊपर वर्णित तार पाश मस्तिष्कखंडछेदक से बिलकुल अलग अलग था) की नोक पलक के नीचे और नेत्रगर्त के शीर्ष के विरुद्ध रखना शामिल था। ओरबिटोक्लास्ट को हड्डी की पतली परत के माध्यम से और नाक के पुल की सतह के साथ मस्तिष्क में, अंतरागोलार्ध छिद्र की और लगभग 15 अंश बढ़ाने के लिए एक लकड़ी के हथौड़े का उपयोग किया गया। ओरबिटोक्लास्ट को ललाट खंड के अंदर पांच सेंटीमीटर तक ठोका गया और तब कक्षक छिद्रण पर 40 अंश धुरी पर रखा जिससे नोक विपरीत दिशा की ओर काटे (नाक की ओर). उपकरण सामान्य स्थिति में लौट आया और दोनों ओर 28 अंश धुरी पर रखने से पहले मस्तिष्क में और दो सेंटीमीटर आगे भेजा जा गया, बाहर की ओर तथा फिर अंदर की ओर काटने के लिए (पिछले कट की समाप्ति पर, अधिक मौलिक बदलाव के साथ, ओरबिटोक्लास्ट के बट को ऊपर की ओर रखा जिससे उपकरण अंतरीगोलार्ध छिद्र के बगल में ऊपर से नीचे काटे; “गहरा ललाट कट”.) मस्तिष्काग्र वल्कल को चेतक से जोड़ने वाले सफेद रेशेदार पदार्थ को आड़ा काटने के लिेए, सभी कटावों को डिजाइन किया गया था। मस्तिष्कखंडछेदक को तब बाहर निकाल लिया गया तथा यही प्रक्रिया दूसरे पक्ष में दोहराई गई।
1946 में फ्रीमैन ने एक जीवित रोगी पर पहली बार परानेत्रगोलकीय मस्तिष्कखंडछेदन किया था। इसकी सरलता ने शीघ्र और अधिक जटिल शल्यक्रियाओं के लिए आवश्यक शल्य सुविधाओं से रहित मनोरोग चिकित्सालयों में इसे किए जाने की संभावनाएं सुझाईं (फ्रीमैन ने सुझाव दिया कि जहां पारंपरिक निश्चेतना उपलब्ध नहीं था वहां रोगी को बेहोश करने के लिए विद्युत-आक्षेपी पद्धति का उपयोग किया जा सकता था).El-Hai Jack The Lobotomist https://archive.org/details/lobotomistmaveri0000elha Wiley 2005 0471232920 1947 में, फ्रीमैन और वॉट्स की भागीदारी समाप्त हो गई क्योंकि फ्रीमैन के मस्तिष्कखंडछेदन को एक शल्यक्रिया से एक “कार्यालय” प्रक्रिया में परिवर्तित करने के कारण वॉट्स निराश था। 1940 और 1944 के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका में 684 मस्तिष्कखंडछेदन किए गए। हालांकि, फ्रीमैन और वॉट्स द्वारा तकनीक के उत्कट प्रोत्साहन की वजह से इन संख्याओं में दशक के अंत में तेजी से वृद्धि हुई. अमेरिका में मस्तिष्कखंडछेदन के लिए शीर्ष वर्ष 1949 में, 5,074 शल्यक्रियाएं हुईं और 1951 तक अमेरिका में 18,608 से अधिक मस्तिष्कखंडछेदन किए जा चुके थे।शॉर्टर, एडवर्ड. (1997). मनश्चिकित्सा के इतिहास . विले: पीपी. 227-228.
प्रचलन
सर्वाधिक मस्तिष्कखंडछेदन शल्यक्रियाएं संयुक्त राज्य अमेरिका में की गईं, जहां लगभग 40,000 लोग मस्तिष्कखंडछेदित हुए. ग्रेट ब्रिटेन में, 17,000 मस्तिष्कखंडछेदन किए गए थे और तीनों नॉर्डिक देशों फिनलैंड, नॉर्वे तथा स्वीडन की संयुक्त संख्या लगभग 9,300 मस्तिष्कखंडछेदन थी।Lobotomy in Norwegian Psychiatry http://www.geocities.com/jordotradini/fil24.pdf PDF Tranøy Joar Blomberg, Wenche 2005 March History of Psychiatry 16 1 SAGE Publications London, Thousand Oaks, Calif., and नई दिल्ली 10.1177/0957154X05052224 2008-03-31 107 https://web.archive.org/web/20071203005450/http://www.geocities.com/jordotradini/fil24.pdf 3 दिसंबर 2007 dead स्कैंडिनेवियाई अस्पतालों में अमेरिकी अस्पतालों की तुलना में 2.5 गुना अधिक प्रति व्यक्ति मस्तिष्कखंडछेदन किए गए।Joar Tranøy University of Oslo The Journal of Mind and Behavior Winter 1996 1 1–20 (unknown title) 17 10.1177/0957154X05052224 स्वीडन में 1944 और 1966 के बीच, कम से कम 4,500 लोग, मुख्यतः महिलाएं मस्तिष्कखंडछेदित की गईं. इस आंकड़े में छोटे बच्चे भी शामिल हैं।ओग्रेन के, सैंडलंड एम (2005) स्वीडन में साइकोसर्जरी 1944-1964. जे हिस्ट नयूरोस्की. दिसंबर; 14(4):353-67 PMID 16338693 नॉर्वे में 2500 ज्ञात मस्तिष्कखंडछेदन हुए.Norway compensates lobotomy victims BMJ http://www.bmj.com/cgi/content/full/313/7059/708/a 23 जनवरी 2011 https://web.archive.org/web/20081205235614/http://www.bmj.com/cgi/content/full/313/7059/708/a 5 दिसंबर 2008 live डेनमार्क में 4,500 ज्ञात मस्तिष्कखंडछेदन हुए थे, जिनमें मुख्यतः युवा महिलाओं के साथ ही मानसिक रूप से विमंदित बच्चे भी थे।Shock Therapy in Danish Psychiatry, by JESPER VACZY KRAGH http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2889500/?tool=pmcentrez
संकेत और परिणाम: चिकित्सा साहित्य
1970 में प्रकाशित मनोरोग शब्दकोश हिंसी, लेलैंड ई. और कैम्पबेल, रॉबर्ट जीन (1970). मनश्चिकित्सा शब्दकोश. चौथा संस्करण. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस. के अनुसार :
मस्तिष्काग्र शब्दकोश मस्तिष्कखंडछेदन निम्नलिखित विकारों में महत्त्वपूर्ण है, जो अच्छे परिणामों के एक अवरोही पैमाने में सूचीबद्ध हैं: भावात्मक विकार, जुनूनी बाध्यकारी अवस्थाएं, जीर्ण अधीरता अवस्थाएं और अन्य गैर-खंडितमनस्कता की स्थितियां, संविभ्रमी खंडितमनस्कता की स्थिति, खंडितमनस्कता के अनिर्धारित या मिश्रित प्रकार, तानप्रतिष्टम्भी खंडितमनस्कता और हेबेफ्रेनिक तथा सामान्य खंडितमनस्कता. लगभग 40 प्रतिशत मामलों में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं, कुछ 35 प्रतिशत में सामान्य तथा 25 प्रतिशत के आसपास खराब परिणाम प्राप्त हुए.
मृत्यु दर शायद 3 फीसदी से अधिक नहीं है। सर्वाधिक अच्छे सुधार रोगपूर्व सामान्य व्यक्तित्व वाले रोगियों में, चक्रविक्षिप्त में या बाध्यकारी जुनूनी में; बेहतर बुद्धि और अच्छी शिक्षा वाले रोगियों में, अचानक शुरू होने और अवसाद या अधीरता के भावात्मक लक्षणों की एक नैदानिक तस्वीर के साथ मनोविक्षिप्ति में और भोजन लेने से इंकार करना, अतिक्रियाशीलता तथा संविभ्रम प्रकृति के भ्रातिमूलक विचारों जैसे व्यवहारशीलता संबंधी परिवर्तनों वाले रोगियों में देखे गए।हिंसी, लेलैंड ई. और कैम्पबेल, रॉबर्ट जीन (1970). मनश्चिकित्सा शब्दकोश. चौथा संस्करण. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस: पृष्ठ. 438.
अंगों के घावों के बाद होने वाले दर्द को नियंत्रित करने के लिए भी मस्तिष्काग्र मस्तिष्कखंडछेदन का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया। इस मामले में, एकतरफा मस्तिष्कखंडछेदन की प्रवृत्ति रही है, क्योंकि ऐसे प्रमाण हैं कि मानसिक रोग के लक्षणों को कम करने के लिए की जाने वाली व्यापक मस्तिष्कखंडछेदन की दर्द नियंत्रण के लिए आवश्यकता नहीं है।
उसी स्रोत के अनुसार, मस्तिष्काग्र मस्तिष्कखंडछेदन कम कर देती है:
व्याकुलता की भावनाएं और आत्मविश्लेषी गतिविधियां तथा अपर्याप्तता और आत्म चेतना की भावना कम होती है। मस्तिष्कखंडछेदन दु:स्वप्नों से जुड़े भावनात्मक तनाव कम कर देता है और तानप्रतिष्टम्भी स्थिति को दूर करता है। क्योंकि लगभग सभी मनोशल्य प्रक्रियाओं के अवांछनीय दुष्प्रभाव होते हैं, आमतौर पर इनका उपयोग तभी किया जाता है जब सभी अन्य तरीके नाकाम रहते हैं। मरीज का व्यक्तित्व जितना कम विकृत होता है, उतना ही अधिक स्पष्ट शल्यकर्मोत्तर दुष्प्रभाव होते हैं।..
सभी मामलों के 5 से 10 प्रतिशत में मस्तिष्कखंडछेदन की कड़ी के रूप में आक्षेपकारी दौरे बताए गए हैं। इस तरह के दौरे आमतौर पर सामान्य आक्षेपरोधी दवाओं से अच्छी तरह से नियंत्रित होजाते हैं। शल्यकर्मोत्तर व्यक्तित्व का कुंद होना, उदासीनता और लापरवाही अपवाद के बजाय नियम होते हैं। अन्य दुष्प्रभावों में ध्यानान्तरण, बचपना, मसखरापन, युक्ति या अनुशासन की कमी और शल्यकर्मोत्तर असंयम शामिल हैं।
आलोचना
बहत पहले 1994 में ही जर्नल ऑफ नर्वस एंड मेंटल डिजीज में एक संपादक ने टिप्पणी कीः “मस्तिष्काग्र मस्तिश्कखंडछेदन का इतिहास छोटा और तूफानी रहा हे. इसका काल हिंसक विरोध के तथा दासवत, निर्विवाद स्वीकृति के साथ दागदार है।" 1947 से शुरू करके स्वीडिश मनोचिकित्सक स्नोर वोलफार्ट ने आरंभिक प्रयासों का मूल्यांकन किया और टिप्पणी की कि यह “खंडित मनस्कता के रोगियों को मस्तिष्कखंडछेदित करना निश्चय ही खतरनाक है” तथा मस्तिष्कखंडछेदन “अभी इतना अपूर्ण है कि मानसिक विकृतियों के जीर्ण मामलों के विरुद्ध सामान्य कदम उठाने में यह हमारी कोई सहायता नहीं कर सकता” और कहा कि “मनोशल्यक्रिया अभी तक अपने सटीक निदेश तथा निषेध खोजने में असफल रही है और दुर्भाग्य से तरीकों को कई मायनों में अपक्व और खतरनाक माना जाएगा.” 1948 में सायबरनेटिक्स के लेखक नॉर्बर्ट वीनर ने कहा: "[म]स्तिष्काग्र मस्तिष्कखंडछेदन ... हाल के समय में कुछ प्रचलन में है, शायद इस तथ्य से असंबद्ध नहीं कि इससे अभिरक्षा में कई रोगियों की देखभाल आसान हो जाएगी. मुझे चलते-चलते टिप्पणी करने दें कि उनको मार देना उनकी अभिरक्षा में देखभाल अधिक आसान हो जाएगी.नोर्बर्ट वीनर साइबरनेटिक्स, पृष्ठ 148, द एमआईटी (MIT) प्रेस, 1948 ISBN 026273009X
मस्तिष्कखंडछेदन के बारे में चिंताएं निरंतर बढ़ीं. सोवियत संघ के बीच 1950 में आधिकारिक तौर पर इस शल्कीयक्रिया पर प्रतिबंध लगा दिया.Приказ एम3 (МЗ) सीसीसीपी (СССР) 1003 (9 дек. 1950). Невропатология и психиатрия 20, संख्या. 1 (1951): 17-18. सोवियत संघ में चिकित्सकों ने निष्कर्ष निकाला कि शल्यक्रिया "मानवता के सिद्धांतों के विपरीत" थी यह "एक पागल व्यक्ति को एक मूर्ख में बदलना था।"http://facstaff.unca.edu/ddiefenb/lobotomy.html Portrayal of Lobotomy in the Popular Press: 1935–1960* Facstaff.unca.edu 2009-10-17 https://web.archive.org/web/20100323015412/http://facstaff.unca.edu/ddiefenb/lobotomy.html 23 मार्च 2010 dead 1970 के दशक तक, कई देशों ने शल्यक्रिया पर प्रतिबंध लगा दिया था, ऐसा ही कई अमेरिकी राज्यों ने भी किया। Wood Jeffrey C Wood Minnie Therapy 101: A Brief Look at Modern Psychotherapy Techniques & How They Can Help http://books.google.com/?id=NwR_ppR3Ib8C&pg=PA153&dq=countries+that+banned+lobotomy&q=countries%20that%20banned%20lobotomy April 6, 2010 2008 September New Harbinger Publications 978-1572245686 153 Chapter 9: Famously Failed Therapies मनोशल्य चिकित्सा के अन्य रूपों के लिए कानूनी तौर पर नियंत्रित और विनियमित अमेरिका केन्द्रों में और फिनलैंड, स्वीडन, ब्रिटेन, स्पेन, भारत, बेल्जियम और नीदरलैंड में अभ्यास किया जा करना जारी रखा.
1977 में अमेरिकी कांग्रेस बायोमेडिकल और व्यवहार रिसर्च मानव विषयों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय समिति बनाई आरोप है कि मनोशल्य चिकित्सा-मस्तिष्कखंडछेदन तकनीक को अल्पसंख्यकों नियंत्रण और नियंत्रित करना व्यक्तिगत अधिकारों का प्रयोग किया गया सहित जांच. इसने शल्यक्रिया के बाद के प्रभावों की भी जांच की. समिति ने निष्कर्ष निकाला कि कुछ बहुत ही सीमित और ठीक से क्रियान्वित मनोशल्य चिकित्सा का सकारात्मक प्रभाव हो सकता था।
1970 के दशक के आरंभ तक मस्तिष्कखंडछेदन का प्रयोग आमतौर से रुक चुका था, लेकिन कुछ देश मनोशल्य चिकित्सा के दूसरे रूपों का उपयोग करते रहे. उदाहरण के लिए सन् 2001 में बेल्जियम में लगभग 70 शल्यक्रियाएं, ब्रिटेन में 15 और मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल बोस्टन में लगभग 15 प्रति वर्ष साल एक है, जबकि फ्रांस में 1980 के दशक में प्रति वर्ष पांच रोगियों पर ऑपरेशन किए गए।La neurochirurgie fonctionnelle d'affections psychiatriques sévères Comité Consultatif National d'Ethique 2002-04-25 http://www.ccne-ethique.fr/docs/fr/avis071.pdf fr PDF 23 जनवरी 2011 https://web.archive.org/web/20110720211020/http://www.ccne-ethique.fr/docs/fr/avis071.pdf 20 जुलाई 2011 dead (फ्रेंच राष्ट्रीय सलाहकार समिति पर आचार पर, राय # 71: गंभीर मनोरोग स्थिति की कार्यात्मक तंत्रिकाशल्यक्रिया)
उल्लेखनीय मामले
राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की बहिन रोजमेरी कैनेडी का 23 वर्ष की उम्र में मस्तिष्कखंडछेदन हुआ था जिससे वे स्थाई रूप से अक्षम हो गईं थीं।http://books.google.com/?id=xnckeeTICn0C&printsec=frontcover&q= Feldman, Burton The Nobel prize: a history of genius, controversy, and prestige Arcade Publishing 271 2001 1559705922 Feldman
हॉवर्ड डली ने अपने संस्मरण में लिखा 12 वर्ष की उम्र में उनका मस्तिष्कखंडछेदन किया गया था।Day Elizabeth http://www.guardian.co.uk/science/2008/jan/13/neuroscience.medicalscience He was bad, so they put an ice pick in his brain... द गार्डियन Guardian Media Group 31 मार्च 2010 12 जनवरी 2008 https://web.archive.org/web/20100118102821/http://www.guardian.co.uk/science/2008/jan/13/neuroscience.medicalscience 18 जनवरी 2010 live
न्यूजीलैंड के लेखक और कवि जेनेट फ़्रेम को निर्धारित मस्तिष्कखंडछेदन से एक दिन साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त हुआ था और यह शल्यक्रिया की गई। Janet Frame, 79, Writer Who Explored Madness Douglas Martin http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=980CE6DF1138F933A05752C0A9629C8B63 January 30, 2004 New York Times 2007-11-17
फ्रांसीसी कनाडाई गायक ऐलिस रोबी का मस्तिष्कखंडछेदन हुआ और बाद में उन्होंने पुनः पेशेवर गायन शुरू कर दिया.
स्वीडिश आधुनिकतावादी चित्रकार सिगरिद जेरेन का 1948 में एक मस्तिष्कखंडछेदन के बाद निधन हो गया।
नाटककार टेनेसी विलियम्स की बड़ी बहन का एक मस्तिष्कखंडछेदन हुआ जिससे वे अक्षम हो गईं; इस प्रकरण ने उनकी कई कृतियों के पात्रों और रूपांकनों को प्रेरित किया है।फिलिप कॉलिन, समथिंग क्लाउडी, समथिंग क्लेयर: टेनेसी विलियम्स पोस्टमॉडर्न मेमरी प्ले https://web.archive.org/web/20160304193927/https://journals.ku.edu/index.php/jdtc/article/viewFile/1985/1948 4 मार्च 2016 . स्प्रिंग 1998. 28 मई 2010 को पुनःप्राप्त.
यह अक्सर कहा जाता है कि जब 1848 में एक लोहे की छड़ दुर्घटनावश फिनीस गेग के सिर में से निकल गई थी, तो यह एक आकस्मिक मस्तिष्कखंडछेदन बन गया, या यह कि इस घटना ने किसी प्रकार से एक शताब्दी बाद मस्तिष्कखंडछेदन शल्य चिकित्सा को प्रेरित किया। गेग के एक पुस्तक की लंबाई के अध्ययन के अनुसार, सतर्क जांच में ऐसा कोई संबंध नहीं निकला.Macmillan, M http://www.deakin.edu.au/hbs/GAGEPAGE/PgLobot.htm Phineas Gage and Frontal Lobotomies 2009-03-21 https://web.archive.org/web/20081202205349/http://www.deakin.edu.au/hbs/GAGEPAGE/PgLobot.htm 2 दिसंबर 2008 dead Macmillan, M 2000 An odd kind of fame: Stories of Phineas Gage https://archive.org/details/oddkindfamestori00macm MIT Press 0262133636 250
साहित्यिक और सिनेमाई चित्रण
मस्तिष्कखंडछेदन का कई साहित्यिक और सिनेमाई प्रस्तुतीकरणों में चित्रण हुआ है दोनों में इस शल्यक्रिया के प्रति समाज का रवैया परिलक्षित हुआ है, समय-समय पर बदलाव भी हुए हैं। 1946 में रॉबर्ट पेन वॉरेन ने अपने उपन्यास ऑल द किंग्स मेन में मस्तिष्कखंडछेदन का र्वणन यह कहते हुए किया है, “एक कमांची बहादुर ऐसा दिखता है जैसे एक नौसिखिए के हाथ में छुरा दे दिया हो”. शल्यचिकित्सक को एक दमित व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है, जो प्रेम के द्वारा अन्यों को नहीं बदल पाता, इसलिए "उच्च श्रेणी बढ़ईगीरी के काम" का सहारा लेता है।Grenader M.E. Of Graver Import Than History: Psychiatry In Fiction Journal of Libertarian Studies 2 1 42–44 Pergamon Press Great Britain 1978 http://www.mises.org/journals/jls/2_1/2_1_3.pdf PDF 2008-01-22 10.1177/0957154X05052224 https://web.archive.org/web/20111020212314/http://mises.org/journals/jls/2_1/2_1_3.pdf 20 अक्तूबर 2011 dead टेनेसी विलियम्स के 1958 के नाटक सडनली, लास्ट समर में नायिका को अपने चचेरे भाई सेबस्तियन के बारे में सच्चाई बताने से रोकने के लिए मस्तिष्कखंडछेदन की धमकी दी गई है।Bigsby C.W.E. A Critical Introduction to Twentieth-Century American Drama: Volume 2 Cambridge University Press जनवरी 25, 1985 100 http://books.google.com/?id=BBQhZKBIiZAC&pg=PA100&dq=%22Suddenly,+Last+Summer%22+lobotomy 978-0521277174 2008-01-23 शल्य चिकित्सक कहता है, "मैं गारंटी ले नहीं ले सकता कि एक मस्तिष्कखंडछेदन उसे मुंह खोलने से रोक लेगा. उसकी चाची जवाब देती है, "यह हो सकता है, नहीं भी हो सकता है, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसकी बात पर कौन विश्वास करेगा, डॉक्टर?"Williams Tennessee Tennessee Williams Suddenly Last Summer Dramatists Play Service January 1998 15 http://books.google.com/?id=MvX7y3Rb4osC&pg=PA15&dq=%22Suddenly,+Last+Summer%22+lobotomy 978-0822210948 2008-01-23
केन केसी के 1962 के उपन्यास वन फ्ल्यू ओवर द कुकू'ज नेस्ट तथा इसके 1975 में फिल्मांतरण में शल्यक्रिया का अभिशंसी चित्रण पाया जा सकता है। मानसिक वार्ड के कई रोगियों को अनुशासित और शांत करने के लिए उनका मस्तिष्कखंडछेदन कर दिया जाता है। शल्यक्रिया को क्रूर और अपमानजनक, "ललाट खंड बधिया" के रूप में वर्णित किया गया है। इस पुस्तक के वर्णनकर्ता चीफ ब्रॉमडेन स्तब्ध हैं: "सामने कुछ नहीं है। सिर्फ उन दुकानों के पुतलों में से एक की तरह." एक मरीज की शल्यक्रिया उसे एक तीव्र से एक जीर्ण मानसिक स्थिति में बदल देती है। "आप उसकी आंखो से देख सकते हैं कि कैसे उन्होंने बाहर उसे जला दिया, उसकी आंखें धुएं से भरी हैं और सलेटी तथा अंदर से सुनसान हैं।"
अन्य स्रोतों में शामिल हैं सिल्विया प्लाथ का 1963 का उपन्यास द बेल जार, जिसमें नायक, एस्तेर एक सम्तिष्कखंडछेदित युवा स्त्री वेलेरी की "अनवरत संगमरमरी शांति" के लिए आतंक के साथ प्रतिक्रिया करता है। इलियट बेकर के 1964 के उपन्यास और 1966 के फिल्म संस्करण, ए फाइन मैडनेस में एक व्यभिचारी, झगड़ालू कवि के अमानवीय मस्तिष्कखंडछेदन का चित्रण किया है, जो अंत में भी उतना ही आक्रामक है जितना हमेशा होता था। शल्य चिकित्सक को एक अमानवीय बेवकूफ के रूप में दर्शाया गया है।Gabbard Glen O Gabbard Krin Psychiatry and the Cinema 2nd American Psychiatric Publishing, Inc. March 1999 119–120 http://books.google.com/?id=D42m3IIrEDoC&pg=RA1-PT90&lpg=RA1-PT90&dq=%22a+fine+madness%22+lobotomy 978-0880489645 2008-01-23 1982 की आत्मकथ्य फिल्म फ्रांसिस में अभिनेत्री फ्रांसिस फार्मर के परानेत्रगोलकीय मस्तिष्कखंडछेदन का एक विचलित कर देने वाला दृश्शाय दिखाया गयया है। यह दावाArnold William Shadowland https://archive.org/details/francesfarmersha0000arno Berkley Books 1982 0425054810 कि फार्मर का मस्तिष्कखंडछेदन किया गया था (और यह शल्यक्रिया फ्रीमैन ने की थी) की आलोचना की गई है क्योंकि इसके समर्थन में नगण्य या कोई भी साक्ष्य नहीं था।Bragg Lynn Myths and Mysteries of Washington TwoDot 1st June 1, 2005 72–75 http://books.google.com/?id=A2IzPOb0AfYC&pg=PA75&dq=Frances+farmer+lobotomy 978-0762734276 2008-01-23 सितंबर 2021 InternetArchiveBot El-Hai Jack Jack El-Hai 241–42 The Lobotomist: A Maverick Medical Genius and His Tragic Quest to Rid the World of Mental Illness John Wiley & Sons 2007 0470098309
2010 में मार्टिन स्कोरसेजी की 1950 के दशक की पृष्ठभूमि पर, जब मनोरोग समुदाय में मस्तिष्कखंडछेदन को एक उपयुक्त शल्यक्रिया माना जाता था, लिखे गए इसी नाम के उपन्यास पर आधारित मनोवैज्ञानिक रहस्यमय-रोमांचक फिल्म शटर आइलैंड में, मुख्य पात्र जो आपराधिक रूप से पागल पाया जाता है, को यह विकल्प दिया जाता है कि या तो वह इस सच्चाई का सामना करे कि उसने अपनी पत्नी का कत्ल किया है या मस्तिष्कखंडछेदित हो. उपन्यास में, यह स्पष्ट है कि पुनः पागलपन में जाने के बाद उसकी इच्वछा के बिना मस्तिष्कखंडछेदन किया जाता है, जबकि फिल्म में यह अस्पष्ट है कि क्या उसने पागलपन का ढोंग किया था ताकि वह मस्तिष्कखंडछेदित होकर एक अच्छे आदमी के रूप में मरे बजाय बिना इलाज के एक शैतान के रूप में जीवित रहे.March 3, 2010 Rosenberg Adam http://moviesblog.mtv.com/2010/03/03/shutter-island-author-dennis-lehane-gives-his-read-on-the-movies-ending/ 'Shutter Island' Author Dennis Lehane Gives His Read On The Movie's Ending MTV April 3, 2010 https://web.archive.org/web/20101228201259/http://moviesblog.mtv.com/2010/03/03/shutter-island-author-dennis-lehane-gives-his-read-on-the-movies-ending 28 दिसंबर 2010 live डॉ॰ जेम्स गिलीगन, मैसाचुसेट्स जेल के मनोरोग चिकित्सालय के पूर्व निर्देशक और तकनीकी सलाहकार के रूप में कहाः
We worked together to make sure the story reflected a true war that was going on in the mid-20th century within the psychiatric community: a war between those clinicians who wanted to treat these patients with new forms of psychotherapy, education and medicine, and those who regarded the violent mentally ill as incurable and advocated controlling their behavior by inflicting irreversible brain damage, including indiscriminate use of shock treatment and crude forms of brain surgery, such as lobotomies.2010 http://www.shutterisland.com/media/documents/about/Shutter_Island_Production_Notes.pdf PDF Shutter Island Production Notes April 3, 2010 https://web.archive.org/web/20110716064549/http://www.shutterisland.com/media/documents/about/Shutter_Island_Production_Notes.pdf 16 जुलाई 2011 live
इन्हें भी देखें
बायोएथिक्स और चिकित्सा एथिक्स
फ्रंटल लोब विकार
फ्रंटल लोब चोट
नोट्स
2
सन्दर्भ
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शटर द्वीप (2010)
बाहरी कड़ियाँ
लोकप्रिय प्रेस में लोबोटॉमी का चित्रण: 1935-1960
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'माई लोबोटॉमी': हावर्ड डली की यात्रा. एनपीआर (NPR) रेडियो वृत्तचित्र
अ क्वालिफाइड डिफेन्स ऑफ़ 'देन': क्यूजेएम (QJM)
श्रेणी:खंडोच्छेदन