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एंफीबोलाइट
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एंफीबोलाइट रूपांतरित (Metamorphic) Amphibolite Geopark Prague 2014 1.jpg प्राग (चेक गणराज्य) के बॉटनिकल गार्डन में प्रदर्शित एंफीबोलाइट का एक विशाल शिलाखंड। हॉर्नब्लेंड और एक्टिनोलाइट जैसे एम्फिबोल खनिज, साथ में प्लेगियोक्लेज फेल्डस्पार। शिस्टोज़ या कमजोर पत्रित
एंफीबोलाइट एक प्रमुख रूपांतरित चट्टान है, जिसमें मुख्य रूप से एम्फिबोल समूह के खनिज (विशेष रूप से हॉर्नब्लेंड और एक्टिनोलाइट) और प्लेनियोक्लेज फेल्डस्पार पाए जाते हैं।एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: एंफीबोलाइट चट्टान के भौतिक और रासायनिक गुण इस चट्टान में क्वार्ट्ज़ (स्फटिक) की मात्रा या तो बिल्कुल नहीं होती या नाममात्र की होती है। यह आमतौर पर गहरे रंग की, अत्यधिक सघन और भारी चट्टान होती है, जिसकी संरचना कमजोर रूप से पत्रित या शिस्टोज़ (परतदार) होती है। चट्टान में काले और सफेद खनिजों के छोटे-छोटे दानों के कारण इसकी सतह देखने में 'नमक-और-काली मिर्च' जैसी चितकबरी दिखाई देती है।
लघु|दाएँ|220px|संयुक्त राज्य अमेरिका के केप कॉड क्षेत्र की भूगर्भिक परतों से प्राप्त एंफीबोलाइट पत्थर।
उत्पत्ति और निर्माण
एंफीबोलाइट का निर्माण अक्सर बेसाल्ट जैसी मैफिक आग्नेय चट्टानों के उच्च क्षेत्रीय रूपांतरण के कारण होता है।मैफिक आग्नेय चट्टानों का क्षेत्रीय रूपांतरण और शैल संरचना का भूवैज्ञानिक अध्ययन हालांकि, चूंकि रूपांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह से मूल चट्टान (प्रोटोलिथ) के रासायनिक संगठन पर निर्भर करती है, इसलिए कुछ विशिष्ट अशुद्ध चूना-मिट्टी और ज्वालामुखी से निकले महीन अवसाद भी रूपांतरित होकर एंफीबोलाइट खनिज संरचना का रूप ले सकते हैं।
चूना पत्थर, डोलोमाइट और सिडेराइट से युक्त अवसादी परतें भी आसानी से एंफीबोलाइट (ट्रेमोलाइट-शिस्ट, ग्रुनेराइट-शिस्ट आदि) में बदल जाती हैं, विशेष रूप से उन स्थानों पर जहाँ आस-पास के ग्रेनाइट के गर्म मैग्मा पिंडों के कारण संपर्क रूपांतरण हुआ हो।
मूल चट्टान के आधार पर इसे दो भागों में विभाजित किया जाता है:
ऑर्थो-एंफीबोलाइट: रूपांतरित बेसाल्ट या अन्य आग्नेय चट्टानों से बनने वाली एंफीबोलाइट।Winter John D. 2001 An Introduction to Igneous and Metamorphic Petrology https://archive.org/details/introductiontoig0000wint Prentice Hall
पैरा-एंफीबोलाइट: रासायनिक रूप से उपयुक्त अवसादी चट्टानों (जैसे चूना-मिट्टी या सिल्टस्टोन) के रूपांतरण से बनने वाली एंफीबोलाइट।
एंफीबोलाइट फेशीज
लघु|बाएँ|220px|इटली की वैल डी फ्लेरेस घाटी से प्राप्त गार्नेट (रक्तमणि) युक्त एंफीबोलाइट का एक रंगीन नमूना।
भूविज्ञान में 'एंफीबोलाइट' केवल एक चट्टान का नाम नहीं है, बल्कि यह तापमान और दबाव की एक पूरी विशिष्ट स्थिति को परिभाषित करता है, जिसे एंफीबोलाइट फेशीज कहा जाता है।साइंस डायरेक्ट: एंफीबोलाइट फेशीज के तापमान और दबाव की भूवैज्ञानिक स्थितियां
भौतिक स्थितियां: इस क्षेत्र का निर्माण तब होता है जब चट्टानें 500 °C से अधिक तापमान और लगभग 1.2 GPa तक के मध्यम से उच्च दबाव के प्रभाव में आती हैं। यह क्षेत्र पृथ्वी के भीतर लचीले विरूपण के अंतर्गत आता है।
खनिज संगठन की विशेषताएं: इस उच्च तापमान पर पुरानी हरी शिस्ट फेशीज के क्लोराइट जैसे खनिज हॉर्नब्लेंड में बदल जाते हैं। उच्च मैग्नीशियम वाले बेसाल्ट से एंथोफिलाइट (Mg-समृद्ध एम्फिबोल) का निर्माण होता है। अवसादी पैरा-एंफीबोलाइट में इस स्थिति में सुंदर गार्नेट (रक्तमणि या तामड़ा) के क्रिस्टल विकसित हो जाते हैं, जो चट्टान को अत्यधिक आकर्षक बना देते हैं।Philpotts Anthony R. Ague Jay J. 2009 Principles of Igneous and Metamorphic Petrology Cambridge University Press
यदि इस स्थिति के बाद चट्टान पर बिना तापमान बढ़े और अधिक दबाव पड़ता है, तो वह एक्लोगैत फेशीज में बदल जाती है। वहीं, यदि पानी की मौजूदगी में तापमान 650 से 700 °C से ऊपर चला जाए, तो चट्टानें पिघलने लगती हैं और सूखी चट्टानों में यह अत्यधिक तापमान ग्रैनुलाइट फेशीज को जन्म देता है।अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण: मेटामॉर्फिक फेशीज का अनुक्रम और विवर्तनिक प्रभाव
यूरालाइट
यह हाइड्रोथर्मल (जलीय-तापीय) रूप से परिवर्तित पायरॉक्सीनाइट चट्टान का एक विशेष रूप है। जमीन के भीतर गर्म पानी के संचरण के कारण इसके मूल पायरॉक्सिन खनिज एक्टिनोलाइट में बदल जाते हैं। इसकी बनावट बहुत अनूठी होती है, जिसमें पायरॉक्सिन के स्थान पर रेडियल (तारानुमा) आकृतियों में एक्टिनोलाइट के क्रिस्टल जड़े दिखाई देते हैं।माइंडैट खनिज डेटाबेस: यूरालाइट का हाइड्रोथर्मल रूपांतरण और पेट्रोलोजी
एपिडायोराइट
यह यूरोप में प्रयुक्त होने वाला एक पुराना भूवैज्ञानिक शब्द है। इसका उपयोग विशेष रूप से ऐसी ऑर्थो-एंफीबोलाइट चट्टानों के लिए किया जाता है जिनका प्रोटोलिथ (मूल रूप) डायोराइट, गैब्रो या अन्य गहरे आग्नेय अंतर्भेदन थे, और जहाँ मूल ऑगाइट खनिज रेशेदार यूरालाइट द्वारा प्रतिस्थापित हो चुका हो।ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे: यूरोप में प्रयुक्त ऐतिहासिक एपिडायोराइट शब्द की भूवैज्ञानिक व्याख्या
उपयोग
लघु|दाएँ|240px|गार्नेट युक्त एंफीबोलाइट पत्थर, जिसे व्यावसायिक बाजारों में "नॉर्डिक सनसेट ग्रेनाइट" के नाम से बेचा जाता है।
ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व: प्रागैतिहासिक काल में, मध्य यूरोप की प्रारंभिक नवपाषाण संस्कृति (जैसे लिनियरबैंडकेरामिक और रोसेन संस्कृतियाँ) के मानव इस पत्थर की कठोरता से भली-भांति परिचित थे। वे अपनी कुल्हाड़ियों, बसूलों और पाषाण उपकरणों के निर्माण के लिए एंफीबोलाइट का अत्यधिक उपयोग करते थे।जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंस: नवपाषाण काल के पाषाण उपकरणों में एंफीबोलाइट की पुरातात्विक भूमिका
वास्तुकला और निर्माण कार्य: आधुनिक युग में, एंफीबोलाइट एक अत्यंत लोकप्रिय आयामी पत्थर है। अपने गहरे आकर्षक रंग, चितकबरी बुनावट, अत्यधिक कठोरता और बेहतरीन पॉलिश (चमक) स्वीकार करने की क्षमता के कारण इसका उपयोग इमारतों के अग्रभाग, फर्श की फ़र्शिंग, काउंटर-टॉप और सजावटी स्मारकों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है।फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी: आयामी सजावटी पत्थर के रूप में एंफीबोलाइट की कठोरता का पेट्रोग्राफिक विश्लेषण व्यावसायिक बाजारों में इसे अक्सर 'ब्लैक ग्रेनाइट' या 'डार्क ग्रेनाइट' के व्यावसायिक नामों से भी बेचा जाता है।मूरमान्स्क निक्षेप और गार्नेट एंफीबोलाइट का व्यावसायिक वैश्विक विपणन
इन्हें भी देखें
ग्रेनाइट
शेल
सन्दर्भ
श्रेणी:शैलविज्ञान