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411 समाचार
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बृहत्तर इसराइल

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right|thumb|300px|बृहत्तर इसराइल right|thumb|300px|बाइबिल के विभिन्न विवरणों के अनुसार 'इसराइल देश' की सीमाएँ: लाल (गिनती 34), नीला (यहेज़क़ेल 47) बृहत्तर इसराइल (he ארץ ישראל השלמה) इसराइल के एतिहासिक या वांछित क्षेत्र से संबंधित एक समुद्धरणवादी संकल्पना है। ज़ियोनवादी आंदोलनों के क्षेत्रीय दावे समय तथा समाजवादी, संशोधनवादी या धार्मिक ज़ियोनवादी समूहों के आधार पर भिन्न हैं।Shelef 2018 बृहत्तर इसराइल शब्द के दो अलग अर्थ होते हैं – एक जो आधुनिक इसराइल के साथ-साथ गोलान पहाड़ियाँ, पश्चिमी तट और ग़ज़ा पट्टी का मिलन है; और दूसरा जो नील नदी से फ़रात नदी तक फैला हुआ विशाल क्षेत्र है।https://theweek.com/world-news/what-is-the-greater-israel-movement What is the 'Greater Israel' movement? 18 October 2024 The Week 29 January 2025 इतिहास प्रारंभिक ज़ियोनवाद दाएँ|अंगूठाकार|ज़ियोनवाद के संस्थापक थियोडोर हर्टज़ल, ल. 1898 ज़ियोनवाद के संस्थापक थियोडोर हर्टज़ल ने फ़िलिस्तीन में एक यहूदी राज्य के लिए तनख़ से प्रेरणा ली। हर्टज़ल ने दाऊदी राज्य से इस यहूदी राज्य का भौगोलिक विस्तार प्राप्त किया।Haddad, H. S. (1974). The Biblical Bases of Zionist Colonialism. Journal of Palestine Studies, 3(4), 97–113. https://doi.org/10.2307/2535451 उनकी सोच विलियम हेकलर नामक अंग्रेज़ी ईसाई ज़ियोनवादी से भी प्रेरित थे,Haddad 1974: "It was a Christian Zionist, a fundamentalist minister, Rev. Hechler, Chaplain to the British Embassy in Vienna, who gave Herzl the biblical definitions of the boundaries of the prospective state." और उन्होंने अपने दैनन्दिनी में लिखा: हेकलर ने हमारे [ट्रेन] कंपार्टमेंट में फ़िलिस्तीन का नक़्शा खोला और मुझे समझाया। उत्तरी सीमा कैपाडोशिया के सामने वाले पहाड़ होंगे, दक्षिणी सीमा, स्वेज़ नहर। हमारा नारा होगा: "सुलेमान और दाऊद का फ़िलिस्तीन।"Marvin Lowenthal's translation of The Diaries of Theodore Herzl (New York: Dial Press, 1956), p. 124 [citation copied from Haddad 1974] इसराइल की भूमि अंगूठाकार|इब्राहीम को प्रदत्त भूमि, जिसमें मिस्र की नदी के पूर्व और फ़रात के पश्चिम, कादेश के उत्तर और हमात के दक्षिण स्थित सारी भूमि शामिल है। यह मानचित्र क्लैरेंस लार्किन की एक 1919 की पुस्तक से है। इसराइल की भूमि (he אֶרֶץ יִשְׂרָאֵל) दक्षिणी लेवंट का एक क्षेत्र है। इसे कनान, प्रतिश्रुत भूमि, पवित्र भूमि, और फ़िलिस्तीन भी कहा जाता है। इस भूमि की सीमाएँ इब्रानी बाइबिल के अलग-अलग अध्यायों में भिन्न होती हैं, जैसे उत्पत्ति 15, निर्गमन 23, गिनती 34 और यहेज़क़ेल 47 में लिखा गया है। बाइबिल में नौ बार, भूमि को "दान से बेर्शेबा तक" कहा जाता है, और तीन बार इसे "हमात की घाटी से लेकर मिस्र की नाले तक" कहा जाता है (1 राजा 8:65, 1 इतिहास 13:5 और 2 इतिहास 7:8). बाइबिल में इसराइल की भूमि के तीन भौगोलिक अर्थ होते हैं: पहले अर्थ (उत्पत्ति 15:18–21) के अनुसार, इब्राहीम के सभी पुत्रों को प्रदत्त भूमि "मिस्र की नदी से फ़रात तक है"। दूसरा अर्थ (गिनती 34:1–15 और यहेज़क़ेल 47:13–20) मिस्र से आज़ादी के बाद इसराइल के बारह गोत्र के बीच विभाजित भूमि का उल्लेख करता है। एक और अर्थ (व्यवस्थाविवरण 11:24, व्यवस्थाविवरण 1:7) के हिसाब से, इसराइलियों यह भूमि धीरे-धीरे सालों के दौरान पाएंगे, जैसे निर्गमन 23:29 और व्यवस्थाविवरण 7:22) में लिखा गया है। यह विवरण एतिहासिक इसराइली राज्यों की सीमाओं से अलग है। अपने चरम पर, यह राज्य बाइबिल की सीमाएँ के क़रीब होते थे, किन्तु उनके समरूप नहीं। यहूदी धर्म इसराइल के केवल वह जगहों को मानता है जहाँ यहूदी न्याय प्रचालित होती थी।Rachel Havelock, River Jordan: The Mythology of a Dividing Line, University of Chicago Press, 2011 p.210. वह कहता है कि भूमि तौरात के आधार से परमेश्वर द्वारा दी गई यहूदियों की धरोहर है।http://bible.cc/exodus/6-4.htm Exodus 6:4 I also established my covenant with them to give them the land of Canaan, where they resided as foreigners Bible.cc 2013-08-11 उत्पत्ति पुस्तक के अनुसार, परमेश्वर ने अब्राम के वंशजों को यह भूमि देने का वादा किया था; यह दोनों के बीच एक वाचा है।http://www.biblegateway.com/passage/?search=Gen%2015:18%E2%80%9321;&version=NIV; Gen 15:18–21; NIV; - On that day the LORD made a covenant Bible Gateway 2013-08-11 अब्राम का नाम बदलकर इब्राहीम रखा गया, और वादा उनके बेटे इसहाक़ और पोते याक़ूब के वंशजों, यानी इसराइलियों को सौंपा गया था। इतिहास के प्राध्यापक एच. एस हद्दाद लिखते हैं "हालाँकि बाइबिल में प्रतिज्ञात भूमि के अलग-अलग सीमाएँ प्रकट है, एरेत्स इसराइल का ठिकाना स्पष्ट है। चाहे यह "दान से बेर्शेबा तक" और "मरुस्थल से समुद्र तक" हो या, अक्सर, नील से फ़रात तक, यरुशलम इसका केंद्र है, जिसके चारो ओर सीमाएँ का अंदाज़ा लगाया जाता है।"Haddad, H. S. (1974). The Biblical Bases of Zionist Colonialism. Journal of Palestine Studies, 3(4), 97–113. https://doi.org/10.2307/2535451 इसराइल राज्य प्राचीन इसराइल और यहूदिया का इतिहास इसराइल राज्य इसराइल राज्य (सामरिया) यहूदा राज्य इसराइल राज्य (1047 – 931 ई.पू.), इसराइलियों द्वारा स्थापित राज्य था। इसराइल राज्य (सामरिया) (930 – ल. 720 ई.पू.), उत्तरी इसराइल का राज्य था, जो पहले राज्य के पतन के बाद स्थापित हुआ। यहूदिया राज्य (930 – 587 ई.पू.), दक्षिण यहूदी राज्य था, जो इसराइल राज्य के विघटन के बाद स्थापित हुआ। द्वितीय मंदिर काल द्वितीय मंदिर काल ज़ियोन में वापसीयहूदी इतिहास में, द्वितीय मंदिर काल (516 ई.पू. – 70 ई.) के दौरान, यरुशलम में द्वितीय मंदिर स्थित था। यह ज़ियोन में वापसी एवं यरुशलम मंदिर के पुनर्निर्माण से शुरू हुआ तथा पहले यहूदी-रोमन युद्ध और यरुशलम की घेराबंदी से समाप्त हुआ। ब्रिटिश फ़िलिस्तीन फ़िलिस्तीन जनादेश बाल्फ़ोर घोषणा बाल्फ़ोर घोषणा पाठ=An image of a typed letter on aged paper, dated November 2nd, 1917, to Lord Rothschild from the Foreign Office.|अंगूठाकार| 1917 की बाल्फ़ोर घोषणापत्र 1917 को प्रथम विश्वयुद्ध के समय, ब्रिटिश सरकार ने बाल्फ़ोर घोषणा दी, जिसमें कहा गया था कि वह फ़िलिस्तीन में यहूदियों के लिए एक देश की स्थापना से सहमत थे। उस समय, फ़िलिस्तीन उस्मानियों के तहत था, और वहाँ यहूदियों की अल्पसंख्या होती थी।यह घोषणा ब्रिटेन के विदेश मंत्री आर्थर बाल्फ़ोर से ब्रिटिश यहूदी नेता वॉल्टर रोथ्सचाइल्ड को लिखित 2 नवंबर 1917 के एक पत्र में थी। इसे 9 नवंबर 1917 को प्रेस में प्रकाशित किया गया था। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान, सीनाई और फ़िलीस्तीन अभियान जनवरी 1915 और अक्टूबर 1918 तक चला। ब्रिटिश ने फ़िलिस्तीन को क़ब्ज़ा किया, और 1918 में पश्चिमी फ़िलीस्तीन सहित उस्मानी सीरिया को बाँटा गया था। फ़िलीस्तीन जनादेश फ़िलिस्तीन जनादेश अंगूठाकार|1931 से इर्गुन का एक पोस्टर, जिसमें फ़िलिस्तीन जनादेश और ट्रैंसजॉर्डन अमीरात सहित "इसराइल की भूमि" का मानचित्र है। बेतार और इर्गुन जैसे प्रारंभिक संशोधनवादी ज़ियोनवादी समूह फ़िलिस्तीन जनादेश और ट्रैंसजॉर्डन को बृहत्तर इसराइल का भाग मानते थे।The Making of the Arab–Israeli Conflict, 1947–1951 https://archive.org/details/makingofarabisra0000papp_z8o9 Pappé Ilan I.B.Tauris 1994 978-1-85043-819-9 London 21 1937 को, पील आयोग ने फ़िलिस्तीन जनादेश के विभाजन का सुझाव दिया। उस वर्ष, अपने बेटे को लिखित एक पत्र में डेविड बेन-गुरियन ने कहा कि बँटवारे को माना जाएगा। उन्होंने लिखा: क्योंकि क़ब्ज़े में यह बढ़ाई महत्तवपूर्ण है बस अपने आप से ही नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि हम इससे अपनी शक्ति बढ़ाते हैं, और शक्ति में हर बढ़ाई पूरी भूमि को पाने में मदद करता है। राष्ट्र की स्थापना, भले ही भूमि के केवल एक हिस्से पर, आज हमारी शक्ति का महत्तम प्रयोग और पूरे देश को आज़ाद करने के एतिहासिक प्रयासों के लिए शक्तिशाली बढ़ावा है।Letter from David Ben-Gurion to his son Amos, written 5 October 1937, Obtained from the Ben-Gurion Archives in Hebrew, and translated into English by the Institute of Palestine Studies, BeirutMorris Benny Benny Morris Righteous Victims: A History of the Zionist-Arab Conflict, 1881-1998 Knopf Doubleday Publishing Group 2011 9780307788054 138 Quote: "No Zionist can forgo the smallest portion of the Land Of Israel. [A] Jewish state in part [of Palestine] is not an end, but a beginning. … Our possession is important not only for itself … through this we increase our power, and every increase in power facilitates getting hold of the country in its entirety. Establishing a [small] state … will serve as a very potent lever in our historical effort to redeem the whole country"Beyond Chutzpah: On the Misuse of Anti-semitism and the Abuse of History Norman Finkelstein University of California Press 2005 9780520245983 280 https://books.google.com/books?id=Xmi2Yw0QzN8C&pg=PA280 उन्होंने यह बात कई अवसरों में कहीं, जैसे जून 1938 में यहूदी एजेंसी से मिलने समय,Quote from a meeting of the Jewish Agency executive in June 1938: "[I am] satisfied with part of the country, but on the basis of the assumption that after we build up a strong force following the establishment of the state, we will abolish the partition of the country and we will expand to the whole Land of Israel." inMasalha Nur Expulsion of the Palestinians: The Concept of "Transfer" in Zionist Political Thought, 1882-1948 https://archive.org/details/expulsionofpales00masa/page/107 107 1992 Inst for Palestine Studies 9780887282355; andSegev Tom One Palestine, Complete: Jews and Arabs Under the British Mandate https://archive.org/details/onepalestinecomp00sege/page/403 403 2000 Henry Holt and Company 9780805048483 और ख़ाइम वाइट्समैन ने भी यह कहा।From a letter from Chaim Weizmann to Arthur Grenfell Wauchope, High Commissioner for Palestine, while the Peel Commission was convening in 1937: "We shall spread in the whole country in the course of time ... this is only an arrangement for the next 25 to 30 years." Masalha Nur Expulsion of the Palestinians: The Concept of "Transfer" in Zionist Political Thought, 1882-1948 https://archive.org/details/expulsionofpales00masa/page/62 62 1992 Inst. for Palestine Studies 9780887282355 बेन गुरियन ने कहा:हम पर थोपी गई सीमाएँ को ढा देंगे, और ज़रूरी नहीं कि यह युद्ध से हो। मैं मानता हूँ कि निकट भविष्य में हमारे और अरब राज्य के बीच एक समझौता किया जा सकता है।"Howard M. Sachar History of Israel from the rise of Zionism to our Time pp. 207-208 पील आयोग के ज़ियोनवादी नेता ख़ाइम वाइट्समैन ने कहा "मैं जानता हूँ कि परमेश्वर ने इसराइलियों को फ़िलिस्तीन वादा किया हैं, लेकिन में नहीं जानता उन्होंने क्या सीमाएँ रखी हैं। मैं मानता हूँ कि वह आज के प्रस्तावित सीमाओं से चौड़ी थी, और शायद उनमें ट्रैंसजॉर्डन भी शामिल था।"Lewis, G. (2009). Balfour and Weizmann: The Zionist, the Zealot and the Emergence of Israel. United Kingdom: Bloomsbury PublishingChaim Weizmann, Trial and Error: The Autobiography of Chaim Weizmann (1949), Volume 2 इसराइल राज्य का प्रारंभिक काल द न्यूयॉर्क टाइम्स के जोएल ग्रीनबर्ग ने लिखा: "1948 को इसराइल की स्थापना पर, श्रमिक ज़ियोनवादी सत्ता ने, जिसने इसराइल की स्वतंत्रता के पहले तीस वर्षों तक राज की, ब्रिटिश फ़िलिस्तीन के स्वतंत्र यहूदी और अरब राज्यों में विभाजन को स्वीकार किया। विपक्ष संशोधनवादी ज़ियोनवादियों, जो आज के लिकुद दल हैं, एरेत्स इस्राएल हा-श्लेमा—बृहत्तर इसराइल, या, इसराइल की सम्पूर्ण भूमि (शालेम, यानी सम्पूर्ण) चाहते थे।"https://www.nytimes.com/1998/11/22/weekinreview/the-world-pursuing-peace-netanyahu-and-his-party-turn-away-from-greater-israel.html The World: Pursuing Peace; Netanyahu and His Party Turn Away from 'Greater Israel' Greenberg Joel 22 November 1998 The New York Times 31 January 2019 1967 के छह दिन के युद्ध में पश्चिमी तट और ग़ज़ा पट्टी के क़ब्ज़े से बृहत्तर इसराइल का आंदोलन बढ़ने लगा और वहाँ इसराइली बस्तियाँ भी बनने लगीं। 1977 के चुनाव का भी बड़ा प्रभाव पड़ा, जिससे लिकुद सत्ता में आई। ग्रीनबर्ग ने लिखा: बीज को 1977 में बोया गया था, जब लिकुद के मेनाख़ेम बेगिन ने पहली बार श्रमिकों को हराकर अपने दल को सत्ता में लाया। एक दशक पहले, 1967 के युद्ध में, इसराइली सैनिकों ने पश्चिमी तट और ग़ज़ा पट्टी में घुसकर 1948 के विभाजन को ख़त्म कर दिए थे। तब से, बेगिन जी ने यहूदिया और सामरिया (पश्चिमी तट) की निष्ठा का उपदेश सुनाने लगे और वहाँ बसने का बढ़ावा दिए। लेकिन जब वह पद ग्रहण किए उन्होंने पश्चिमी तट और ग़ज़ा पर क़ब्ज़ा नहीं किया, यह मानते हुए कि फ़िलिस्तीनियों को आत्मसात करके इसराइल एक द्विराष्ट्रीय देश बन सकता था।https://www.nytimes.com/1998/11/22/weekinreview/the-world-pursuing-peace-netanyahu-and-his-party-turn-away-from-greater-israel.html The World: Pursuing Peace; Netanyahu and His Party Turn Away from 'Greater Israel' Greenberg Joel 22 November 1998 The New York Times 31 January 2019 प्रधानमंत्री इत्सहाक शामिर बृहत्तर इसराइल के एक प्रमुख समर्थक थे; उन्होंने बस्तियों को वित्त पोषित किया और वैधता दी।Mordechai Bar-On (2004) A Never-Ending Conflict: A Guide to Israeli Military History Greenwood Publishing Group, 0-275-98158-4 p 219 श्रेणी:नव-ज़ियोनवाद श्रेणी:अरब–इसराइली संघर्ष की राजनीति श्रेणी:इसराइल भूमि श्रेणी:इसराइल से जुड़े षड्यंत्र सिद्धांत