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जेम्स एलन रॉबिनसन
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जेम्स एलन रॉबिनसन 1960 यूनाइटेड किंगडम ब्रिटिश, अमेरिकी अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान शिकागो विश्वविद्यालय, हार्वर्ड विश्वविद्यालय लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, येल विश्वविद्यालय संस्थागत अर्थशास्त्र, राष्ट्रों की विफलता का सिद्धांत अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार (2024)
जेम्स एलन रॉबिनसन (जन्म 1960) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात ब्रिटिश-अमेरिकी अर्थशास्त्री और राजनीति विज्ञानी हैं, जिन्हें संस्थागत अर्थशास्त्र और राष्ट्रों की आर्थिक समृद्धि के कारणों का अत्यंत गहन अध्ययन करने के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। वर्ष 2024 में उन्हें अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान के लिए डारोन एसेमोग्लू और साइमन जॉनसन के साथ संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र के सर्वोच्च सम्मान, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह महान सम्मान उन्हें यह प्रमाणित करने के लिए प्रदान किया गया था कि किसी भी देश की राजनीतिक और सामाजिक संस्थाएं उस देश की आर्थिक प्रगति और गरीबी को कैसे निर्धारित करती हैं। उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण शोध आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकासशील देशों की समस्याओं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों को स्पष्ट रूप से समझने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।नोबेल पुरस्कार समिति: जेम्स एलन रॉबिनसन के प्रामाणिक तथ्य एवं जानकारी
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
उनका जन्म वर्ष 1960 में यूनाइटेड किंगडम में हुआ था। बचपन से ही उनके भीतर इतिहास, राजनीति और विभिन्न देशों की आर्थिक असमानताओं को समझने की अत्यंत गहरी लालसा विद्यमान थी। इसी स्वाभाविक जिज्ञासा ने उन्हें अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्कृष्ट रूप से पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रवेश लिया और वहाँ से अपना स्नातक अत्यंत उत्कृष्ट अंकों के साथ पूर्ण किया। इसके पश्चात उन्होंने वारविक विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। अपना अनुसंधान कार्य और अधिक गहराई से जारी रखने के लिए वे संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए और वहाँ अत्यंत प्रतिष्ठित येल विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। इसी महान संस्थान से उन्होंने वर्ष 1993 में अर्थशास्त्र में अपनी विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की सर्वोच्च उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की।
विशेषज्ञता और महान सिद्धांत
विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने दुनिया के कई अत्यंत प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक समर्पित प्राध्यापक और शोधकर्ता के रूप में कार्य किया।शिकागो विश्वविद्यालय: प्राध्यापक जेम्स एलन रॉबिनसन का आधिकारिक परिचय वे लंबे समय तक हार्वर्ड विश्वविद्यालय में कार्यरत रहे और वर्तमान में वे शिकागो विश्वविद्यालय में वैश्विक संघर्ष और शांति अध्ययन के एक पूर्णकालिक वरिष्ठ प्राध्यापक के रूप में अपनी अमूल्य सेवाएं दे रहे हैं। उनके अकादमिक शोध और विशेषज्ञता का मुख्य केंद्र राजनीतिक अर्थशास्त्र और तुलनात्मक आर्थिक विकास है। उन्होंने अपने साथी अर्थशास्त्री डारोन एसेमोग्लू के साथ मिलकर 'राष्ट्र क्यों विफल होते हैं' नामक एक अत्यंत नवीन, क्रांतिकारी और विश्वविख्यात पुस्तक लिखी, जिसने आर्थिक जगत में एक नई वैचारिक क्रांति ला दी।
उनका यह ऐतिहासिक सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि जिन देशों में 'समावेशी संस्थाएं' (जो सभी नागरिकों को समान आर्थिक और राजनीतिक अवसर प्रदान करती हैं) होती हैं, वे देश निरंतर आर्थिक प्रगति करते हैं और अत्यंत समृद्ध बनते हैं। इसके विपरीत, जिन देशों में 'शोषणकारी संस्थाएं' (जहाँ सत्ता और धन केवल कुछ ही शक्तिशाली लोगों के हाथों में केंद्रित होता है) होती हैं, वे देश हमेशा गरीबी, असमानता और संघर्ष के दुष्चक्र में फंसे रहते हैं। उन्होंने गणितीय प्रतिरूपों और ऐतिहासिक आंकड़ों का उपयोग करके यह पूरी तरह से सिद्ध कर दिया कि किसी भी देश के विकास के लिए केवल भौगोलिक स्थिति या संस्कृति ही नहीं, बल्कि वहाँ की कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्थाएं सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पुरस्कार और मान्यता
संस्थागत अर्थशास्त्र और वैश्विक असमानता के कारणों को स्पष्ट करने वाले उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 2024 में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। इस महान पुरस्कार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा किए गए शोध को एक नई और अत्यधिक प्रतिष्ठित मान्यता प्रदान की। नोबेल पुरस्कार के अतिरिक्त उन्हें दुनिया भर के कई अत्यंत प्रतिष्ठित आर्थिक संगठनों और संस्थाओं द्वारा बहुत ही बड़े सम्मानों से नवाजा गया है। उनके ऐतिहासिक शोध कार्य के कारण ही आज विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी महान संस्थाएं गरीब देशों के विकास के लिए अपनी नीतियां बनाते समय केवल वित्तीय सहायता पर ही नहीं, बल्कि वहाँ की संस्थागत व्यवस्थाओं को सुधारने पर भी सबसे अधिक ध्यान केंद्रित करती हैं। आज भी वे विज्ञान और अर्थशास्त्र के जगत के लिए एक बहुत बड़े प्रेरणास्रोत माने जाते हैं।
सन्दर्भ