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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

दिसम्बर २०२५ बांग्लादेश हिंसा

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१८ से २० दिसम्बर २०२५ (बांग्ला संवत्: ३–५ पौष १४३२, शक संवत्: २७–२९ अग्रहायण १९४७, विक्रम संवत्: १८–२० पौष २०८२, कलियुग संवत्: ५१२६) के मध्य, शरीफ़ उस्मान हादी की हत्या के उपरान्त बांग्लादेश में दंगों, आगज़नी आक्रमणों तथा राजनैतिक अशान्ति की शृंखला हुई। हादी, जो इंक़िलाब मंच के प्रवक्ता थे, १८ दिसम्बर को निधन को प्राप्त हुए; उन्हें छह दिन पूर्व गोली मारी गई थी। उनके निधन की घोषणा के पश्चात उग्र भीड़ ने अनेक नागरिक तथा सांस्कृतिक संस्थानों को लक्ष्य बनाया, जिनमें राष्ट्रीय दैनिक प्रथम आलो तथा द डेली स्टार के कार्यालय, तथा छायानट एवं उदिची शिल्पिगोष्ठी जैसे सांस्कृतिक केन्द्र सम्मिलित थे। भारत के राजनयिक अभियानों तथा अवामी लीग-सम्बद्ध स्थलों को भी लक्ष्य बनाया गया। == पृष्ठभूमि == उस्मान हादी एक बांग्लादेशी राजनेता एवं कार्यकर्ता थे, जो भारत-विरोधी तथा अवामी लीग-विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध थे। वे इंक़िलाब मंच के संस्थापक नेता थे, जिसे जुलाई क्रान्ति के उपरान्त उस आन्दोलन के आदर्शों को सुरक्षित रखने हेतु स्थापित किया गया था। १२ दिसम्बर २०२५ को हादी को अज्ञात आक्रमणकारियों ने गोली मारी। बाद में ये व्यक्ति अवामी लीग के छात्र संगठन छात्र लीग के सदस्य पहचाने गए, जिसे अगस्त २०२४ से बांग्लादेश में प्रतिबन्धित किया गया था। समाचारों के अनुसार आक्रमणकारी भारत में शरण लेने हेतु बांग्लादेश से पलायन कर गए। १८ दिसम्बर को हादी सिंगापुर जनरल चिकित्सालय में गोली के घावों से मृत्यु को प्राप्त हुए। हिंसा के प्रारम्भ से पूर्व देशभर में विभिन्न स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए। == हिंसा == === माध्यमों के विरुद्ध हिंसा === १८ दिसम्बर की रात्रि को रुक्सु के उपाध्यक्ष तथा इस्लामी छात्र शिबिर के नेता मोस्ताकुर रहमान ने राजशाही में एक विरोध सभा में प्रथम आलो तथा द डेली स्टार को बन्द करने का आह्वान किया; उनके वक्तव्य सामाजिक माध्यमों पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए। उसी रात्रि, प्रदर्शनकारियों की भीड़ शाहबाग से कारवाँ बाज़ार क्षेत्र तक मार्च करती हुई प्रथम आलो (प्रगति भवन) के मुख्यालय पर पहुँची। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आक्रमणकारियों ने भवन की जाली चढ़कर स्वागत कक्ष को तोड़ा-फोड़ा तथा प्रवेशद्वार पर फर्नीचर एवं अभिलेखों को आग के हवाले कर दिया। इसके पश्चात् भीड़ समीपवर्ती द डेली स्टार भवन की ओर बढ़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आक्रमणकारी धार्मिक नारे लगाते हुए मुख्य द्वार तोड़कर भूतल एवं प्रथम तल को नष्ट कर गए। उन्होंने प्रांगण को आग लगा दी तथा अनेक कार्यालय सामग्री लूट ली, जिससे लगभग २५ से २८ पत्रकार एवं कर्मचारी विषाक्त धुएँ के कारण छत पर फँस गए। बाद में अग्निशमन सेवा एवं सेना ने उन्हें बचाया। न्यू एज के सम्पादक नुरुल कबीर ने कहा कि उन्हें भीड़ ने शारीरिक रूप से पीटा और "भारतीय एजेंट" कहकर अपमानित किया। महफ़ूज़ आनम ने इस घटना को योजनाबद्ध एवं हिंसात्मक बताया, और उस वीडियो का उल्लेख किया जो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ था, जिसमें आक्रमणकारी पत्रकारों को उनके घरों पर मारने की धमकी देते हुए सुने गए। बांग्लादेश समाचारपत्र स्वामी संघ तथा सम्पादक परिषद् ने संयुक्त रूप से "बांग्लादेश उग्र भीड़ हिंसा के अधीन" शीर्षक से विरोध सभा आयोजित की। === सांस्कृतिक स्थलों पर आक्रमण === शरीफ़ उस्मान हादी के निधन के समाचार के पश्चात, १८ दिसम्बर को जाहाँगीरनगर विश्वविद्यालय के इस्लामी छात्र शिबिर इकाई के सचिव मोस्तफ़िज़ुर रहमान ने विरोध सभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की "सच्ची स्वतन्त्रता" के लिए केवल राजनैतिक संघर्ष नहीं, अपितु "सांस्कृतिक संघर्ष" आवश्यक है। उन्होंने छायानट तथा उदिची जैसी संस्थाओं की "सांस्कृतिक प्रभुत्वता" को समाप्त करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने भारत के साथ राजनयिक सम्बन्ध विच्छेद तथा भारतीय नागरिकों को निष्कासित करने की माँग की, जब तक कि पूर्व प्रधानमन्त्री शेख़ हसीना को प्रत्यर्पित न किया जाए। सामाजिक माध्यमों पर उनके "तोश-नोश" शब्द (विनाश/विघटन) के प्रयोग की आलोचना के पश्चात रहमान ने फेसबुक पर स्पष्टीकरण दिया कि उनका आशय हिंसा भड़काना नहीं था, अपितु "फ़ासीवादी आख्यानों" को संस्थागत एवं प्रणालीगत ढंग से चुनौती देना था। उन्होंने संघर्ष को अनुशासित एवं संवैधानिक बताया। १९ दिसम्बर की प्रातः अज्ञात आक्रमणकारियों ने ढ़ानमण्डी स्थित छायानट संस्कृति भवन को लक्ष्य बनाया। उन्होंने सभागार को तोड़ा-फोड़ा तथा नालन्दा विद्यालय के कक्षों को आग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आक्रमणकारी धार्मिक नारे लगाते हुए छायानट को "भारतीय संस्कृति का प्रचारक" कहकर आक्रमण को उचित ठहराते थे। १९ दिसम्बर को ढाका के टोपखाना मार्ग स्थित उदिची शिल्पिगोष्ठी के केन्द्रीय कार्यालय में आग लगी। उदिची नेता अमित रंजन देय ने इसे योजनाबद्ध बताया, यद्यपि अग्निशमन सेवा ने कारण की पुष्टि नहीं की। === व्यक्तियों एवं गृहों पर आक्रमण === १८ दिसम्बर को भालुका उपज़िला में दीपु चन्द्र दास नामक एक हिन्दू व्यक्ति को ईशनिन्दा के आरोप में भीड़ ने पीटकर मार डाला तथा जलाया। १९ दिसम्बर को लक्ष्मीपुर सदर के भवनिगंज संघ में एक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी संयुक्त संगठन सचिव के निवास को आग लगा दी गई। उस समय परिवार भवन में ही था। आग से एक बालक की मृत्यु हुई तथा अन्य सदस्य घायल हुए। १८ दिसम्बर की रात्रि १०:३० बजे के पश्चात दुष्ट तत्वों ने बांग्लादेश टेलीविज़न (बीटीवी) के महानिदेशक महबूबुल आलम गौरा तथा अन्तरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के अभियोजक तनवीर हसन जुहार के गृहों को मगीरा में आग के हवाले कर दिया। === राजनैतिक एवं राजनयिक स्थलों का विनाश === प्रदर्शनकारियों ने बंगबन्धु स्मारक संग्रहालय (ढ़ानमण्डी ३२) स्थल को भी लक्ष्य बनाया, जिसे अगस्त २०२४ के विद्रोह में ध्वस्त कर दिया गया था। भीड़ ने शेष अवशेषों को नष्ट किया तथा शेख़ हसीना के पोस्टरों को जलाया। चटगाँव में प्रदर्शनकारियों ने भारत के सहायक उच्चायोग पर धावा बोलने का प्रयास करते हुए पुलिस से संघर्ष किया। अलग से, भीड़ ने पूर्व महापौर मोहिउद्दीन चौधरी तथा पूर्व शिक्षामन्त्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफ़ेल के गृहों को आग के हवाले कर दिया। १९ दिसम्बर की रात्रि लगभग ११:४० बजे जातीय पार्टी गुट तथा राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक मोर्चा के अध्यक्ष अनिसुल इस्लाम महमूद के गृह को तोड़ा-फोड़ा गया तथा आग लगा दी गई। राजशाही में प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय अवामी लीग कार्यालय को बुलडोज़र से ध्वस्त किया तथा भारतीय राजनयिक मिशन की ओर मार्च करने का प्रयास किया, किन्तु पुलिस ने उन्हें रोक दिया। बन्दरबन में चिट्टगाँव पर्वतीय क्षेत्र मामलों के पूर्व मन्त्री तथा अवामी लीग राजनेता उश्वे सिंग के गृह को आग लगा दी गई। === राजनयिक एवं राजनैतिक परिणाम === इस हिंसा की विशेषता प्रबल भारत-विरोधी भावना रही। जातीय नागरिक पार्टी (एनसीपी) के नेताओं ने वक्तव्य जारी कर स्थिति को "युद्ध" बताया तथा भारतीय उच्चायोग को बन्द करने की माँग की, जब तक कि हादी के "हत्यारे" लौटाए न जाएँ। सुरक्षा संकट के प्रत्युत्तर में भारतीय अधिकारियों ने अस्थायी रूप से राजशाही एवं खुलना में अपने वीज़ा केन्द्र बन्द कर दिए। इंक़िलाब मंच ने चेतावनी दी कि वह अन्तरिम सरकार को अपदस्थ करने हेतु आन्दोलन प्रारम्भ करेगा। यह चेतावनी सदस्य सचिव अब्दुल्लाह अल जाबेर ने शहीद हादी चत्तर पर आयोजित आपातकालीन पत्रकार सम्मेलन में दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार हादी की हत्या के दोषियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाती, तो संगठन राष्ट्रव्यापी आन्दोलन करेगा। == प्रतिक्रियाएँ == === सरकार === बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने प्रथम आलो तथा द डेली स्टार के सम्पादकों से व्यक्तिगत रूप से वार्ता की, उनके व्यक्तिगत सुरक्षा तथा उनके समाचार संस्थानों की रक्षा का आश्वासन दिया। उन्होंने राष्ट्रीय दैनिकों पर हुए आक्रमणों को "स्वतन्त्र माध्यम पर आक्रमण के तुल्य" बताया और कहा कि यह घटना "देश की लोकतान्त्रिक प्रगति में एक प्रमुख बाधा" उत्पन्न करती है। उन्होंने राष्ट्रव्यापी आह्वान किया कि "सीमांत तत्वों द्वारा की गई भीड़ हिंसा के सभी रूपों का प्रतिरोध किया जाए।" सरकार ने प्रमुख नगरों में पुलिस तथा बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) इकाइयों सहित कानून-प्रवर्तन संस्थाओं की उपस्थिति बढ़ा दी। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा उपाय आगे की वृद्धि को रोकने हेतु आवश्यक हैं, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं तथा नागरिक समाज समूहों ने राज्य की प्रतिक्रिया की अनुपातिकता पर प्रश्न उठाए। निर्वाचन आयुक्त अबुल फ़ज़ल मुहम्मद सनाउल्लाह ने कहा कि पुलिस, रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) तथा सेना की संयुक्त बलें २०२६ के आम चुनाव तक नियमित अभियान चलाएँगी ताकि जनसुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। === ग़ैर-सरकारी === इन आक्रमणों की निन्दा अनेक संगठनों ने की, जिनमें बांग्लादेश समाचारपत्र स्वामी संघ (एनओएबी), सम्पादक परिषद् तथा ट्रान्सपैरेंसी इण्टरनेशनल बांग्लादेश सम्मिलित हैं। मीडिया स्वतन्त्रता गठबन्धन ने गहरी चिन्ता व्यक्त की और हिंसा की निन्दा करते हुए कहा कि ऐसे कृत्य प्रेस स्वतन्त्रता को कमजोर करते हैं तथा जनसाधारण के सूचना-अधिकार का उल्लंघन करते हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता सलाहुद्दीन अहमद ने समाचार संस्थानों पर हिंसा की निन्दा करते हुए इसे "भीड़तन्त्र" कहा। जातीय नागरिक पार्टी (एनसीपी) के नेता नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया कि अन्तरिम सरकार के भीतर का एक गुट इस आक्रमण के लिए उत्तरदायी था। === प्रदर्शन === छायानट ने १९ दिसम्बर को ढ़ाका के शंकर क्षेत्र में सांगीतिक प्रदर्शन आयोजित किया। बांग्लादेश जातीयतावादी छात्रदल ने २१ दिसम्बर को ढाका विश्वविद्यालय में भीड़ हिंसा के विरुद्ध प्रदर्शन किया। उदिची ने २३ दिसम्बर को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आयोजित किए, जिनमें हादी की हत्या, दीपु चन्द्र दास की भीड़ द्वारा हत्या, मगीरा में बालक बलात्कार, तथा समाचार संस्थानों एवं सांस्कृतिक संगठनों पर आक्रमणों के विरुद्ध विरोध किया गया। २२ दिसम्बर को बांग्लादेश समाचारपत्र स्वामी संघ (एनओएबी) के नेतृत्व में अनेक पत्रकारों, व्यापारियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने पैन पैसिफ़िक सोनारगाँव के समक्ष हिंसा के विरुद्ध प्रदर्शन किया। == सम्बन्धित विषय == शेख़ हसीना का मुक़दमा == सन्दर्भ ==