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अजीत कौर
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अजीत कौर पद्म श्री ਅਜੀਤ ਕੌਰ pa Ajeet Caur.jpg 250px अजीत कौर (2015) 1934 11 16 लाहौर, ब्रिटिश भारत (अब पाकिस्तान) लेखिका, उपन्यासकार, सामाजिक कार्यकर्ता भारतीय एम.ए. (अर्थशास्त्र) दिल्ली विश्वविद्यालय कथा साहित्य, आत्मकथा, संस्मरण सामाजिक यथार्थ, महिला विमर्श, राजनीति पंजाबी खानाबदोश (आत्मकथा), गौरी, पोस्टमार्टम साहित्य अकादमी पुरस्कार (1985)पद्म श्री (2006)साहित्य अकादमी फेलोशिप (2024) अर्पणा कौर (पुत्री) एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड लिटरेचर (AFAL)फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर (FOSWAL)
अजीत कौर (जन्म: 16 नवंबर 1934) एक भारतीय लेखिका हैं, जो मुख्य रूप से पंजाबी साहित्य में अपने योगदान के लिए जानी जाती हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, नारी संघर्ष और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े विषय शामिल होते हैं। वे वर्तमान में जीवित और सक्रिय हैं, तथा वर्ष 2024 में उन्हें साहित्य के क्षेत्र में भारत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक 'साहित्य अकादमी महत्तर सदस्यता' (फेलोशिप) से सम्मानित किया गया है।https://www.amarujala.com/delhi-ncr/renowned-punjabi-writer-ajit-kaur-honored-with-sahitya-akademi-mahatar-membership-2024-12-20 प्रतिष्ठित पंजाबी लेखिका अजीत कौर को साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता, अध्यक्ष ने किया सम्मानित 20 दिसंबर 2024 Amar Ujala 20 मार्च 2026 hi
साहित्य के अतिरिक्त, वे पर्यावरण और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने नई दिल्ली में 'एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड लिटरेचर' (AFAL) और 'फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर' (FOSWAL) की स्थापना की है।http://www.foswal.org/about_us.php About Us: Foundation of SAARC Writers and Literature FOSWAL 20 मार्च 2026जून 2026 InternetArchiveBot
thumb|अजीत कौर और हरविंदर सिंह, चंडीगढ़ (1963)
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
अजीत कौर का जन्म 16 नवंबर 1934 को अविभाजित भारत के लाहौर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लाहौर में हुई। 1947 में विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अपनी आत्मकथा 'खानाबदोश' में अपने जीवन के अनुभवों और संघर्षों का विवरण दिया है। उनकी एक पुत्री अर्पणा कौर हैं, जो भारत की एक जानी-मानी चित्रकार हैं।
साहित्यिक कार्य
अजीत कौर ने मुख्य रूप से पंजाबी में लेखन किया है। उनकी कई रचनाओं का हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
कहानी संग्रह
कसाईबाड़ा
गुलबानो
महक दी मौत
बुतशिकन
फालतू औरत
सावियां चिड़ियां
मौत अली बाबे दी
ना मारो
नवम्बर 84
काले कुएँ
दास्तान एक जंगली राज की
उपन्यास
धुप्प वाला शहर (धूप वाला शहर)
पोस्टमार्टम
गौरी
आत्मकथा
खानाबदोश (पहला खंड)
कूड़ा-कबाड़ा (दूसरा खंड)
संस्मरण और यात्रा वृतांत
तकीए दा पीर
कच्चे रंगों दा शहर लंदन
अनुवाद एवं अन्य कार्य
सीताकांत महापात्र और रमाकांत रथ की कविताओं का अनुवाद।
साहित्य अकादमी के लिए कुलवंत सिंह विर्क पर एक मोनोग्राफ।
मीडिया रूपांतरण
उनकी रचनाओं पर आधारित दृश्य-श्रव्य कार्य भी हुए हैं। उनके कहानी संग्रह 'ना मारो' पर एक टीवी धारावाहिक बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, 'गुलबानो', 'चौखट' और 'मामी' पर टेली-फ़िल्में भी बनी हैं। अंग्रेजी में उनकी कहानियों का संग्रह 'डेड एंड' नाम से प्रकाशित हुआ है। उनकी कुछ पुस्तकें पाकिस्तान में भी प्रकाशित हुई हैं।
पुरस्कार और सम्मान
साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें निम्नलिखित सम्मान प्राप्त हुए हैं:
1979: पंजाब सरकार द्वारा शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार
1983: पंजाबी अकादमी, दिल्ली का साहित्य पुरस्कार
1985: आत्मकथा 'खानाबदोश' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कारhttps://sahitya-akademi.gov.in/awards/akademi%20samman_suchi.jsp Akademi Awards (1955-2023) - Punjabi Sahitya Akademi 20 मार्च 2026
1986: बाबा बलवंत अवार्ड
1989: भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार
2006: भारत सरकार द्वारा साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्रीhttps://www.rediff.com/news/report/padma/20060126.htm Adoor, Nilekani, Mahasveta among Padma awardees 26 जनवरी 2006 Rediff News 20 मार्च 2026 en
2019: कुवेम्पु राष्ट्रीय पुरस्कार (Kuvempu Rashtriya Puraskar)
2024: साहित्य अकादमी महत्तर सदस्यता (फ़ेलोशिप)
सन्दर्भ
श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत पंजाबी भाषा के साहित्यकार
श्रेणी:भारतीय महिला साहित्यकार
श्रेणी:पद्म श्री प्राप्तकर्ता
श्रेणी:1934 में जन्मे लोग
श्रेणी:जीवित लोग
श्रेणी:लाहौर के लोग