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रक्तदंतिका
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मई 2025
मई 2025
रक्तदंतिका देवी मां पार्वती का ही एक स्वरूप है। वैप्रचिति नामक दानव के संहार के लिए माँ ने अद्भुत रूप लिया था। इन दानवों का भक्षण करने के कारण देवी के दांत अनार की कली के समान लाल हो गये थे। अत: देवी रक्तदंतिका कहलाई।
भगवती पार्वती का ये अवतार रक्त अर्थात लाल वर्ण का है जो लाल वस्त्र धारण किये हुए है। इनके हाथो मे खड्ग सुशोभित है। वैप्रचित्त नामक दानव के भक्षण के समय इनके दाँतो का वर्ण लाल हो गया, जिसके कारण परमेश्वरी को रक्तदंतिका कहके संबोधित किया गया। देवी पराशक्ति का यह रूप वैप्रीचिति के संहार हेतु प्रकट हुआ था, किंतु अपने भक्तो के लिए परमात्मिका अपने हर रूप मे आनंदसंदायिनी है।
मुर्ति रहस्य मे माँ के स्वरूप का विस्तृत वर्णन
माँ के स्वरूप का विस्तृत वर्णन श्री दुर्गा सप्तशती के अंत मे मुर्ति रहस्य के अंतर्गत मिलता है। माँ का स्वरूप रक्तवर्णी और चतुर्भुजी है।
दुर्गा सप्तशती मे वर्णन
दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय के अनुसार, , "वैवस्वत मन्वंतर के अट्ठाईसवें युग में शुम्भ और निशुम्भ नामक दो अन्य महादानव उत्पन्न होंगे। तब मैं नंद के घर में उनकी पत्नी यशोदा के गर्भ से जन्म लेकर दोनों असुरों का नाश करूँगी। तत्पश्चात् पृथ्वी पर अवतार लेकर मैं वैप्रचिति नामक दानव के दो असुर पुत्रों का वध करूँगी। उन महादानवों का भक्षण कर लाल दन्त (दांत) होने के कारण तब स्वर्ग में देवता और धरती पर मनुष्य सदा मुझे 'रक्तदंतिका' कह मेरी स्तुति करेंगे"
मई 2025