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होलोमार्फिक फलन
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right|thumb|एक आयताकार ग्रिड (उपर) और उसका f अनुकोण प्रतिचित्रण प्रतिबिम्ब (नीचे)।
गणित में, होलोमार्फिक फलन अथवा पूर्णसममितिक फलन सम्मिश्र विश्लेषण में केन्द्रिय उद्देश्य का अध्ययन है। एक होलोमार्फिक फलन एक अथवा अधिक सम्मिश्र चरों का सम्मिश्र फलन है जो अपने प्रांत में प्रत्येक बिन्दु के प्रतिवेश में सम्मिश्र अवकलनिय हो।
परिभाषा
माना सम्मिश्र फलन f केवल एक सम्मिश्र चर पर निर्भर है, f इसके प्रांत में का बिन्दु z0 पर अवकलन निम्न सीमा द्वारा परिभाषित होता है:http://www.ams.org/bookstore/pspdf/mbk-49-prev.pdf सम्मिश्र अवकलन 4 मई 2013 https://web.archive.org/web/20130202203500/http://www.ams.org/bookstore/pspdf/mbk-49-prev.pdf 2 फ़रवरी 2013 live
यह अवकलन वास्तविक फलनों के अवकलन के समान ही है केवल अन्तर इतना है कि यहां पर सभी चर सम्मिश्र हैं।
यदि f संबद्ध विवृत समुच्चय U में के प्रत्येक बिन्दु z0 पर सम्मिश्र अवकलनीय है तब हम कहते हैं कि f, U पर होलोमार्फिक है। यदि f किसी बिन्दु z0 के प्रतिवेश में अवकलनीय है तो हम कहते हैं कि f बिन्दु 'z0 पर होलोमार्फिक''' है।http://www.homsigmaa.org/buc.pdf होलोमार्फिसिटी (पूर्णसममितिकता) 4 मई 2013 https://web.archive.org/web/20111211215931/http://www.homsigmaa.org/buc.pdf 11 दिसंबर 2011 dead
सन्दर्भ
श्रेणी:गणित
श्रेणी:सम्मिश्र विश्लेषण