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बैष्णब चरण पटनायक
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बैष्णव चरण पटनायक ବୈଷ୍ଣବ ଚରଣ ପଟ୍ଟନାୟକ 29 अप्रैल 1914 ढेंकानाल, ओड़िशा, ब्रिटिश भारत 1 जनवरी 2013 ढेंकानाल, ओड़िशा, भारत भारतीय राजनीतिज्ञ, स्वतंत्रता सेनानी ढेंकानाल प्रजामंडल आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अन्नपूर्णा पटनायक लोक सभा के सदस्य 1962 1967 ढेंकानाल
बैष्णव चरण पटनायक (29 अप्रैल 1914 – 1 जनवरी 2013) ओड़िशा के स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ थे। वे ढेंकानाल रियासत में प्रजामंडल आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन और ढेंकानाल रियासत की दमनकारी व्यवस्था के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध में भी भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद वे ओड़िशा विधानसभा के सदस्य रहे और 1962 में ढेंकानाल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा के लिए निर्वाचित हुए।Baishnab Charan Pattnaik Azadi Ka Amrit Mahotsav भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय
प्रारंभिक जीवन
बैष्णव चरण पटनायक का जन्म 29 अप्रैल 1914 को ढेंकानाल में साधु चरण पटनायक और रंभा देवी के घर हुआ था। विद्यार्थी जीवन से ही वे ब्रिटिश शासन और तत्कालीन रियासतों की दमनकारी प्रशासनिक व्यवस्था के विरोध में सक्रिय हो गए थे।
1931 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें हाई स्कूल से निष्कासित कर दिया गया। बाद में उन्होंने रेलवे में नौकरी की। रेलवे की नौकरी से प्राप्त यात्रा सुविधा का उपयोग उन्होंने ओड़िशा के बाहर के राष्ट्रीय नेताओं से संपर्क करने और ढेंकानाल की राजनीतिक स्थिति तथा वहाँ चल रहे आंदोलन के बारे में जानकारी देने के लिए किया।
प्रजामंडल आंदोलन
ब्रिटिश भारत की रियासतों में प्रजा के अधिकारों और उत्तरदायी शासन की मांग को लेकर चले प्रजामंडल आंदोलन में पटनायक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ढेंकानाल रियासत में तत्कालीन शासक की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन तेज होने पर वे उसके प्रमुख कार्यकर्ताओं में शामिल हो गए।
उनका संपर्क ओड़िशा के समाजवादी और साम्यवादी विचारों से प्रभावित राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं से हुआ। उपलब्ध स्रोतों के अनुसार भगवती चरण पाणिग्रही, गुरूचरण पटनायक और अनन्त पटनायक जैसे नेताओं के प्रभाव से उनके राजनीतिक विचारों में क्रांतिकारी और साम्यवादी प्रवृत्तियाँ विकसित हुईं।
1938 में ढेंकानाल राज्य में प्रजामंडल आंदोलन के दौरान पुलिस दमन में अनेक लोग मारे गए। 11 अक्टूबर 1938 को बाजी राउत सहित कई लोगों की हत्या के बाद पटनायक ने उनके शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत सरकार के स्वतंत्रता आंदोलन संबंधी डिजिटल जिला अभिलेख में भी उन्हें उन कार्यकर्ताओं में शामिल किया गया है जिन्होंने ब्रिटिश बलों के विरोध के बावजूद बाजी राउत और अन्य मृतकों के शवों को खन्नानगर श्मशान तक पहुँचाया।Digital District Repository: Dhenkanal Azadi Ka Amrit Mahotsav भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय
भारत छोड़ो आंदोलन
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के बाद पटनायक ने ढेंकानाल क्षेत्र में आंदोलन को सक्रिय रूप से संगठित किया। उन्होंने युवाओं और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर ब्रिटिश प्रशासन और रियासती शासन के विरुद्ध प्रतिरोध किया।
आंदोलन के दौरान उन्होंने तत्कालीन मढ़ी पुलिस थाने पर कब्जा करने के अभियान का नेतृत्व किया। मढ़ी वर्तमान में कामाख्यानगर क्षेत्र में स्थित है। आंदोलनकारियों ने पुलिस थाने तथा कुछ सरकारी भवनों को आग लगा दी और ब्रिटिश पुलिस बल के साथ मुठभेड़ हुई। इस संघर्ष में पटनायक घायल हुए।
एक विवरण के अनुसार गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्होंने मृत व्यक्ति का रूप धारण किया और साथियों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए ले जाए जाते समय वहाँ से निकलकर नाव के माध्यम से सुरक्षित स्थान की ओर चले गए। बाद में वे कोलकाता पहुँचे, जहाँ उनका उपचार हुआ।Sri Baishnaba Charan Patnaik, Freedom Fighter Mera Apna Bihar 17 जनवरी 2019
भारत सरकार के स्वतंत्रता आंदोलन संबंधी स्रोतों के अनुसार उन्होंने भूमिगत गतिविधियों के माध्यम से भी आंदोलन जारी रखा। ब्रिटिश प्रशासन और ढेंकानाल के शासक द्वारा उन्हें खतरनाक क्रांतिकारी माना गया था और उनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया गया था।
कारावास
स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रियता के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उपलब्ध विवरणों के अनुसार 1939 से 1942 के बीच वे कारावास में रहे। 1948 से 1952 तक भी उन्हें रियासती शासन और उसके बाद की राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित संघर्षों के कारण जेल में रहना पड़ा।
कारावास के बावजूद वे राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे। 1952 में वे ओड़िशा की पहली विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। उस समय वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े हुए थे। 1952 के ओड़िशा विधानसभा चुनाव के उपलब्ध परिणामों में ढेंकानाल विधानसभा क्षेत्र से बैष्णव चरण पटनायक को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में दर्ज किया गया है।1952 Orissa Legislative Assembly election Election results reference
राजनीतिक जीवन
स्वतंत्रता के बाद पटनायक ने संसदीय राजनीति में प्रवेश किया। वे 1952–1957 की प्रथम ओड़िशा विधानसभा के सदस्य रहे। उनके राजनीतिक जीवन में प्रारंभिक चरण में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रभाव रहा था।
बाद के वर्षों में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े। 1962 के आम चुनाव में वे ढेंकानाल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और निर्वाचित हुए। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार उन्हें 90,250 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजा शंकर प्रताप सिंह देव महेन्द्र बहादुर को 37,962 मत मिले।General Elections, 1962: Dhenkanal Constituency भारत निर्वाचन आयोग
वे 1962 से 1967 तक तीसरी लोक सभा के सदस्य रहे। उनके कार्यकाल में ढेंकानाल क्षेत्र और ओड़िशा से संबंधित विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया।Third Lok Sabha: Who's Who 1962 लोक सभा सचिवालय
राजनीतिक विचार और सार्वजनिक भूमिका
पटनायक का राजनीतिक जीवन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के राष्ट्रवादी चरण, रियासती प्रजामंडल आंदोलन और बाद के वामपंथी राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ा रहा। वे प्रभावशाली वक्ता और संगठनकर्ता के रूप में भी जाने जाते थे। उन्होंने हस्तलिखित तथा साइक्लोस्टाइल किए गए राजनीतिक साहित्य के माध्यम से आंदोलनकारी विचारों को जनता तक पहुँचाने में भूमिका निभाई।
उनकी राजनीति का प्रारंभिक आधार ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और रियासती निरंकुशता का विरोध था। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने लोकतांत्रिक संसदीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
बाजी राउत से संबंध
ढेंकानाल के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में पटनायक का नाम बाजि राउत के साथ भी जुड़ा हुआ है। 11 अक्टूबर 1938 को ब्रिटिश पुलिस द्वारा बाजि राउत और अन्य आंदोलनकारियों की हत्या के बाद उनके शवों को सुरक्षित रूप से अंतिम संस्कार स्थल तक पहुँचाने वालों में पटनायक प्रमुख थे।
इस घटना ने ढेंकानाल के प्रजामंडल आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में भूमिका निभाई। बाजि राउत बाद में ओड़िशा के स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे कम आयु के शहीदों में प्रसिद्ध हुए।
निधन
बैष्णव चरण पटनायक का निधन 1 जनवरी 2013 को ढेंकानाल नगर के चंदन बाजार स्थित उनके निवास पर हुआ। वे 98 वर्ष के थे।Freedom fighter Baishnab Charan Patnaik dead at 99 Outlook
विरासत
बैष्णव चरण पटनायक को ढेंकानाल के प्रजामंडल आंदोलन और ओड़िशा के स्वतंत्रता संघर्ष के प्रमुख कार्यकर्ताओं में स्मरण किया जाता है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के अनसुने नायकों में शामिल किया था।
ओड़िशा के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में उनकी भूमिका विशेष रूप से तीन क्षेत्रों से जुड़ी हुई है—ढेंकानाल प्रजामंडल आंदोलन, 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन और स्वतंत्रता के बाद संसदीय राजनीति। वे उन स्वतंत्रता सेनानियों में थे जिन्होंने रियासती शासन के विरुद्ध जनआंदोलन को स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापक धारा से जोड़ा।
आधार
श्रेणी:1914 में जन्मे लोग
श्रेणी:2013 में निधन
श्रेणी:ओड़िशा के स्वतंत्रता सेनानी
श्रेणी:ओड़िशा के राजनीतिज्ञ
श्रेणी:ओड़िया राजनीतिज्ञ
श्रेणी:तीसरी लोक सभा के सदस्य
श्रेणी:भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिज्ञ
श्रेणी:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ
श्रेणी:ढेंकानाल जिले के लोग
श्रेणी:ढेंकानाल के इतिहास से संबंधित लोग