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गोखरू
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right|thumb|250px|गोखरू के पौधों से भरा खेत
right|thumb|250px|गोखरू के कांटेदार फल
right|thumb|300px|गोखरू के पके और सूखे कांटेदार फल, बिना चप्पल-जूते के चलने वालों को परेशान करते हैं।
thumb|गोखरू के पके, सूखे फल
गोखरू या 'गोक्षुर' (Tribulus terrestris, Land caltrops, Puncture vine) भूमि पर फ़ैलने वाला छोटा प्रसरणशील क्षुप है जो कि आषाढ़ और श्रावण मास मे प्राय हर प्रकार की जमीन या खाली जमीन पर उग जाता है। पत्र खंडित और फूल पीले रंग के आते हैं, फल कंटक युक्त होते हैं, बाजार मे गोखरु के नाम से इसके बीज मिलते हैं। उत्तर भारत मे, हरियाणा, राजस्थान मे यह बहुत मिलता है।
इसमें चने के आकार के कड़े और कँटीले फल लगते हैं। ये फल ओषिधि के काम में आते हैं और वैद्यक में इन्हें शीतल, मधुर, पुष्ट, रसायन, दीपन और काश, वायु, अर्श और ब्रणनाशक कहा है। यह फल बड़ा और छोटा दो प्रकार का होता है। कहीं कहीं गरीब लोग इसके बीजों का आटा बनाकर खाते हैं।
यह शीतवीर्य, मुत्रविरेचक, बस्तिशोधक, अग्निदीपक, वृष्य, तथा पुष्टिकारक होता है। विभिन्न विकारो मे वैद्यवर्ग द्वारा इसको प्रयोग किया जाता है। मुत्रकृच्छ, सोजाक, अश्मरी, बस्तिशोथ, वृक्कविकार, प्रमेह, नपुंसकता, ओवेरियन रोग, वीर्य क्षीणता मे इसका प्रयोग किया जाता है।
परिचय
गोखरू ज़ाइगोफाइलिई (Zygophylleae) कुल के अंतर्गत ट्रिबुलस टेरेस्ट्रिस (Tribulus terrestris) नामक एक प्रसर वनस्पति है, जो भारत में बलुई या पथरीली जमीन में प्राय: सर्वत्र पाई जाती है। इसे छोटा गोखरू या गुड़खुल (हिंदी) और गोक्षुर (संस्कृत) भी कहते हैं। इसके संयुक्त पत्र में 5-7 जोड़े चने के समान पत्रक, पत्रकोणों में एकाकी पीले पुष्प और काँटेदार गाल फल होते हैं।
आयुर्वेद के 'दशमूल' नामक दस वनौषधियों के प्रसिद्ध गण में एक यह भी है और इसके मूल का (क्वाथ में) अथवा फल का (चूर्ण) चिकित्सा में उपयोग होता है। यह मधुर, स्नेहक, मूत्रविरेचनीय, बाजीकर तथा शोथहर होने के कारण मूत्रकृच्छ्र, अश्मरी, प्रमेह, नपुंसकत्व, सुजाक, वस्तिशोथ तथा वातरोगों में लाभदायक माना जाता है।
तिलकुल (Pedaliaceae) की पेडालियम म्यूरेक्स (Pedaliummurex) नामक एक दूसरी वनस्पति है, जो 'बड़ा गोखरू' के नाम से प्रसिद्ध है। इसके फलों का भी प्राय: छोटे गोखरू की तरह ही प्रयोग होता है। इसके फल चार काँटों से युक्त और आकार में पिरामिडीय शंकु जैसे होते हैं। यह दक्षिण भारत, विशेषत: समुद्रतट, गुजरात, काठियावाड़ तथा कोंकण आदि में होता है।
बाहरी कड़ियाँ
सेक्सुल समस्याओं और शारीरिक कमजोरी को दूर करे गोखरू, और भी हैं कई लाभ
गौक्षुर- (ट्रकइबुलस टेरेस्टि्रस) (अखिल विश्व गायत्री परिवार)
Germplasm Resources Information Network: Tribulus terrestris
Flora Europaea: native distribution in Europe
Page on T. terrestris at the Global Compendium of Weeds
Page from the U.S. Department of Agriculture's PLANTS database
Tribulus terrestris List of Chemicals (Dr. Duke's Databases)
श्रेणी:औषधीय पादप