411 REFERENCE · Wikipedia
पारद (प्राचीन जाति)
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
</ref>फ़रवरी 2021
पारद एक प्राचीन जाति जो पारस के उस प्रदेश में निवास करती थी जो कास्पियन सागर के दक्षिण के पहाड़ों को पार करके पड़ता था। इसके हाथ में बहुत दिनों तक पारस साम्राज्य रहा।
महाभारत, मनुस्मृति, बृहत्संहिता इत्यादि में पारद देश और पारद जाति का उल्लेख मिलता है। यथा—
पौंड्र- काश्चौंखूद्रविडाः काम्बोजा यवनाः शकाः। पारदाः पह्लवाश्चीनाः किराता दरदाः खशाः। (मनु० १०. ४४)
इसी प्रकार बृहत्संहिता में पश्चिम दिशा में बसनेवाली जातियों में 'पारत' और उनके देश का उल्लेख है—
'पंचनद रमठ पारत तारक्षिति श्रृंग वैश्य कनक शकाः।
पुराने शिलालेखों में 'पार्थव' रूप मिलता हैं जिससे युनानी 'पार्थिया' शब्द बना है। युरोपीय विद्वानों ने 'पह्लव' शब्द को इसी 'पार्थिव' का अपभ्रंश या रूपांतक मानकर पह्लव और पारद को एक ही ठहराया है। पर संस्कृत साहित्य में ये दोनों जातियाँ भिन्न लिखी गई हैं। मनुस्मृति के समान महाभारत और बृहत्संहिता में भी 'पह्लव' 'पारद' से अलग आया है। अतः 'पारद 'का'पह्लव' से कोई संबंध नहीं प्रतीत होता। पारस में पह्लव शब्द शाशानवंखी सम्राटों के समय से ही भाषा और लिपि के अर्थ में मिलता है। इससे सिद्ध होता है कि इसका प्रयोग अधिक व्यापक अर्थ में पारसियों को लिये भारतीय ग्रंथों में हुआ है। किसी समय में पारस के सरदार 'पहलवान' कहलाते थे। संभव है, इसी शब्द से 'पह्लव' शब्द बना हो। मनुस्मृति में 'पारदों' और 'पह्लवों' आदि को आदिम क्षत्रिय कहा है।
त्रिभुवनदास की पुस्तक Ancient India में पारस/पारद परंपरा का उल्लेख मिलता है। इसी आधार पर कुछ लेखक पारदों को सूर्यवंशी-रघुवंशी क्षत्रिय परंपरा से जोड़ते हैं। चूँकि भगवान श्रीराम रघुवंश के प्रमुख सम्राट माने जाते हैं, इसलिए समाज-परंपरा में पारधी पोवारों का संबंध भी श्रीराम के रघुवंशी वंश से जोड़ा जाता है।[1]
श्रेणी:प्राचीन जातियाँ
श्रेणी:प्राचीन भारत का इतिहास
[1][Tribhuwandas, Ancient India]