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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अपरा (ग्रन्थ)

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अपरा Apara2.jpg 150px मुखपृष्ठ 'सूर्यकांत त्रिपाठी निराला' राजकमल प्रकाशन प्रथम संस्करण-१९४६ हिंदी भारत साहित्य गीत, नई कविता कविता संग्रह १८६ 81-267-0552-3 thumb|150px|left|अपरा:संस्करण १९७१ अपरा सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की एक काव्य रचना है। http://pustak.org:5200/bs/home.php?bookid=3090 अपरा जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150118213523/http://pustak.org:5200/bs/home.php?bookid=3090 18 जनवरी 2015 deadGreat Personalities महान व्यक्तित्व https://books.google.co.in/books?id=UBSlBQAAQBAJ उपकार प्रकाशन प्रो॰ आर॰पी॰ चतुर्वेदी २०१० 9788174820617 ४३ अंग्रेज़ी 5 फ़रवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150205212307/https://books.google.co.in/books?id=UBSlBQAAQBAJ 5 फ़रवरी 2015 live अपरा पहली बार सन १९४६ में प्रकाशित हुई थी।The Indian millennium, AD 1000-2000 भारतीय सहस्त्राब्दी, ई॰ १०००-२००० https://books.google.co.in/books?id=sghuAAAAMAAJ गोपा सभर्वाल पेंगुइन बुक्स (मूल प्रकाशक: यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन) २००० ५४८ 9780140295214 अंग्रेज़ी 5 फ़रवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150205221726/https://books.google.co.in/books?id=sghuAAAAMAAJ 5 फ़रवरी 2015 live उस समय इसका प्रकाशन साहित्यकार संसद द्वारा महादेवी वर्मा के संपादन में हुआ था। छठे संस्करण तक वह यहीं से प्रकाशित होती रही। सातवाँ संस्करण भारती भंडार से प्रकाशित हुआ। तब इसका मुखपृष्ठ बायी ओर दिए गए चित्र के अनुसार दो रंग वाला था। इसके बाद यह राजकमल प्रकाशन http://www.rajkamalprakashan.com/prodfull.asp?id=83&catdesc=&name=APARA Publications Detail APARA ८ दिसंबर 2008 एएसपी राजकमल प्रकाशन समूह अंग्रेज़ीजून 2020 InternetArchiveBot से प्रकाशित हुई। इसको निराला ने सिस्टर निवेदिता को समर्पित किया है। इसमें महाकवि निराला की १९४६ तक प्रकाशित उनके सभी संग्रहों में से चुनी हुई ८० कविताएँ संकलित हैं। चयन स्वयं निराला ने किया था, इसलिए इसकी महत्ता स्वतःसिद्ध है। यहाँ संकलित कविताओं से निराला के कवि-रूप का समग्र परिचय प्राप्त किया जा सकता है, इस अर्थ में यह संकलन गागर में सागर ही है। http://pustak.org/bs/home.php?bookid=3090 अपरा ८ दिसंबर 2008 पीएचपी भारतीय साहित्य संग्रह जून 2020 InternetArchiveBot निराला की आत्मा नई दिशा खोजने के लिए सदा से विकल रही थी और अपरा तक यह खोज तीन दशक पार कर चुकी थी। इस संकलन में उनकी रचनाएँ में अनेक रेखाओं का सम विषम मेल मिलता है। एक ओर उनका दर्शन उन रहस्यमय सूक्ष्म तत्तवों का साथ नहीं छोड़ना चाहता जो युगों युगों का अर्जित अनुभूति वैभव है और दूसरी ओर उनकी पार्थिवता धरती के उस गुरुत्व से बाँधे हुए है, जो आज की पहली आवश्यकता है। एक ओर उनकी सांस्कृतिक दृष्टि पुरातन की प्रत्येक रेखा में उजले रंग भरती है और दूसरी ओर उनकी आधुनिकता व्यंग्य़ की ज्वाला में तपा तपाकर सब रंग उड़ाती रहती है। कोमल मधुर गीतों की वंशी से ओज के शंख तक उनकी स्वर साधना का उतार चढ़ाव है।निराला सूर्यकांत त्रिपाठी अपरा १९७१ भारती भंडार, लीडर प्रेस इलाहाबाद ३ ८ दिसंबर २००८ निराला उस छायायुग के कृती हैं, जिसने जीवन में उमड़ते हुए विद्रोह को संगीत का स्वर और भाव का मुक्त सूक्ष्म आकाश दिया। वे ऐसे युग का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो उस विद्रोह का परिचय कठोर धरती पर विषम कंठ में चाहता है। सन्दर्भ श्रेणी:सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' श्रेणी:पुस्तकें