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गिरधारी राम गोंझू
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गिरधारी राम गोंझू नागपुरी भाषा के एक प्रमुख साहित्यकार और विद्वान थे। वे झारखंड राज्य के रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय-क्षेत्रीय भाषा विभाग के पूर्व अध्यक्ष थे। उन्हें 2022 में मरणोपरांत झारखंड में साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
== उल्लेखनीय कार्य ==
गोंझू ने 1975 में गुमला के चैनपुर में परमबीर अल्बर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में अपना शिक्षण करियर शुरू किया। बाद में वे 1978 में गोसनर कॉलेज राँची में प्रोफेसर थे। तब वे राँची कॉलेज और राँची विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थे। वह राँची विश्वविद्यालय में आदिवासी और क्षेत्रीय भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष थे। उन्होंने झारखण्ड की सांस्कृतिक विरासत, नागपुरी के प्राचीन कवि, झारखण्ड के लोकगीत, झारखण्ड के वाद्ययंत्र , सदानी नागपुरी व्याकरण, नागपुरी शब्दकोश, मातृभाषा की भूमिका, खुखड़ी-रुगडा, ऋतु के रंग मांदर के संग, महाबली राधे कर बलिदान, झारखण्ड का अमर पुत्र: मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, महाराजा मदरा मुंडा और अखरा निंदाय गेलक आदि सहित 25 से अधिक पुस्तकें लिखी थीं।
== सन्दर्भ ==