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411 समाचार
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बेसल नाभिक

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बेसल गैन्ग्लिया (अथवा बेसल नाभिक) रीढ़धारी जीवों के मस्तिष्क में स्थित विभिन्न मूल के नाभिकों का एक समूह है (अधिकांश भ्रूणीय मूल के टेलेंसिफेलिक होते हैं जबकि कुछ अन्य डाइएन्सिफेलिक एवं मीजेन्सिफेलिक तत्व होते हैं) जो एक संयुक्त कार्यात्मक इकाई के रूप में कार्य संपादन करते हैं। वे मस्तिष्क के अग्र भाग के आधार क्षेत्र में स्थित होते हैं और सेरेब्रल कॉर्टेक्स, थैलेमस तथा मस्तिष्क के अन्य क्षेत्रों से मजबूती से जुड़े होते हैं। बेसल गैन्ग्लिया विभिन्न कार्यों से जुड़े होते हैं, जिनमे स्वैच्छिक गतिशीलता नियंत्रण, दैनिक आचरण अथवा "आदतों" से संबंधित प्रक्रियात्मक शिक्षण, आँख की हलचल,Stocco Andrea Lebiere Christian Anderson John R. Conditional routing of information to the cortex: A model of the basal ganglia’s role in cognitive coordination https://archive.org/details/sim_psychological-review_2010-04_117_2/page/541 Psychological Review 117 2 541–74 2010 20438237 10.1037/a0019077 संज्ञानात्मक एवं भावुक कार्य शामिल हैं।James A. Weyhenmeyer Eve. A. Gallman Rapid Review of Neuroscience https://archive.org/details/neuroscience0000weyh Mosby Elsevier 2007 102 0-323-02261-8 वर्तमान में लोकप्रिय सिद्धांत बेसल गैन्ग्लिया को मुख्यतः क्रिया चयन के लिए जिम्मेदार मानते हैं, अर्थात इस बात का निर्णय करना कि एक समय पर विभिन्न संभव व्यवहारों में से किसे करना है।Chakravarthy V. S. Joseph Denny Bapi Raju S. What do the basal ganglia do? A modeling perspective Biological Cybernetics 103 3 237–53 2010 20644953 10.1007/s00422-010-0401-y प्रयोगात्मक अध्ययन दर्शाते हैं कि बेसल गैन्ग्लिया कई गतिशील तंत्रों पर निरोधात्मक प्रभाव डालते हैं और इस निरोधी प्रभाव के हटते ही गतिशील तंत्र सक्रिय हो जाता है। बेसल गैन्ग्लिया में "व्यवहार का बदलना" मस्तिस्क के कई हिस्सों से प्रसारित होने वाले संकेतों से प्रभावित होता है, जिसमें सम्मिलित है प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स जो कि कार्यकारी कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।Executive impairment in Parkinson's disease: response automaticity and task switching Cameron IG, Watanabe M, Pari G, Munoz DP. Neuropsychologia 2010 June 7 48 20303998 http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20303998 बेसल गैन्ग्लिया के मुख्य घटक हैं- स्ट्रिएटम जिसे निओस्ट्रिएटम भी कहते हैं और जो कॉडेट एवं पुटामेन से बना होता है, ग्लोबस पैलिडस या पैलिडम जो ग्लोबस पैलिडस एक्सटर्ना (जीपीइ) या ग्लोबस पैलिडस इंटर्ना (जीपीआई) से बना होता है, सब्सटैंशिया निग्रा जो सब्सटैंशिया निग्रा पार्स कॉम्पेक्टा (एसएनसी) एवं सब्सटैंशिया निग्रा पार्स रेटिकुलाटा (एसएनआर) से मिलकर बना होता है और सबथैलेमिक नाभिक (एसटीएन).James D. Fix Neuroanatomy (Board Review Series) https://archive.org/details/brsneuroanatomyt00fixj 4th Baltimore Wulters Kluwer & Lippincott Wiliams & Wilkins Basal Ganglia and the Striatal Motor System 2008 274–281 0-7817-7245-1 स्ट्रिएटम, जो सबसे बड़ा घटक है, कई मस्तिष्क क्षेत्रों से इनपुट प्राप्त करता है लेकिन केवल बेसल गैन्ग्लिया के अन्य घटकों को ही आउटपुट भेजता है। पैलिडम सबसे महत्वपूर्ण इनपुट स्ट्रिएटम से (परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप में) प्राप्त करता है और निरोधात्मक आउटपुट गतिशीलता से संबंधित कई क्षेत्रों को भेजता है, जिसमें सम्मिलित है थैलेमस का हिस्सा जो कॉर्टेक्स के गतिशीलता से संबंधित क्षेत्रों को उभारता है। रेटिकुलाटा (एसएनआर) जो सब्सटेंशिया निग्रा का एक भाग है, वह पैलिडम की ही तरह कार्य करता है, एवं कॉम्पेक्टा नामक दूसरा हिस्सा स्ट्रिएटम को न्यूरो ट्रांसमीटर डोपामिन स्रोत का इनपुट प्रदान करता है। सबथैलेमिक नाभिक (एसटीएन) मुख्य रूप से स्ट्रिएटम तथा कॉर्टेक्स से इनपुट प्राप्त करता है और पैलिडम के हिस्से (आंतरिक भाग या जीपीआई) को भेज देता है। इन क्षेत्रों में से प्रत्येक में एक आंतरिक संरचनात्मक और न्यूरो-रासायनिक संगठन होता है। विभिन्न तंत्रिका अवस्थाओं, जिनमे कई गतिशीलता से जुड़े विकार हैं, में बेसल गैन्ग्लिया केंद्रीय भूमिका निभाता है। सबसे उल्लेखनीय हैं, पार्किंसंस रोग, जिसमे सब्सटेंशिया निग्रा पर कॉम्पेक्टा (एसएनसी) में मेलानिन पिग्मेंटेड डोपामिन उत्पादक कोशिकाओं का पतन होता है और हंटिंगटन्स विकार जिसमे मूलतः स्ट्रिएटम क्षतिग्रस्त होती हैं। कुछ व्यव्हार नियंत्रण से जुड़े विकारों में बेसल गैन्ग्लिया की अकार्यक्षमता अवस्था भी पाई जाती है, जैसे कि, टोरेट्स सिंड्रोम में, बेलिस्मस (विशेष रूप से हेमी हेमिबेलिस्मस), जुनूनी बाध्यकारी विकार (ओसीडी), एवं विल्सन रोग (हेपाटोलेंटिकुलर पतन). विल्सन रोग और हेमी बेलिस्मस विकार के आलावा पार्किन्संस विकार एवं हंटिंगटन्स विकार से संबंधित न्यूरो पैथोलॉजी तंत्रों को ठीक प्रकार से समझा नहीं जा सका है अथवा वे अब भी विकासशील सैद्धांतिक अवस्था में ही हैं। बेसल गैन्ग्लिया में एक हाथ-पैरों कि तरह दिखाई देने वाला क्षेत्र होता है जिसके अवयवों को अलग - अलग नाम दिए गए हैं- नाभिक एकम्बेंस (एन ए), वेंट्रल पैलिडम और वेंट्रल टेगमेंटल क्षेत्र (वीटीए). (वीटीए) एफेरेंट्स नाभिक एकम्बेंस को उसी तरह डोपामिन प्रदान करते हैं जिस तरह सब्सटैंशिया निग्रा डोर्सल (पृष्ठीय) स्ट्रिएटम को डोपामिन प्रदान करती है। चूँकि ऐसे बहुत सारे साक्ष्य हैं जो दर्शाते हैं कि दुर्लभ अध्ययन में इसकी केंद्रीय भूमिका होती है, अतः वीटीए → एनए के डोपामिनेर्जिक प्रक्षेपण ने बड़ी संख्या में इस ओर ध्यान आकर्षित किया है। उदाहरण के लिए, कई अत्यधिक नशे वाली दवाएँ जिनमें कोकीन, एम्फिटामिन्स एवं निकोटिन सम्मिलित हैं, इनके बारे में समझा जाता है कि वे वीटीए → एनए डोपामिन संकेत कि प्रभावकारिता को बढ़ाकर कार्य संपादन करती है। इस बात के भी सबूत हैं कि पागलपन में वीटीए → एनए डोपामिनेर्जिक प्रक्षेपण अति उत्तेजना पर प्रभावी है।Inta D. Meyer-Lindenberg A. Gass P. Alterations in Postnatal Neurogenesis And Dopamine Dysregulation in Schizophrenia: A Hypothesis Schizophrenia Bulletin 2010 10.1093/schbul/sbq134 ऐनाटॉमी/शरीर-रचना-विज्ञान Anatomical subdivisions and connections of the basal ganglia विकास की दृष्टी से मानव तंत्रिका तंत्र का वर्गीकरण अक्सर 3 मूल आदिम गुहाओं पर आधारित है। उक्त प्राथमिक गुहायें मानव भ्रूण में न्यूरल नलिका के सामान्य विकास के समय बनती हैं और प्रारंभ में इसमें रोस्ट्रल से कौडल (सिर से एड़ी तक) अभिविन्यास में सम्मिलित रहती हैं- प्रोसेनसिफेलों, मेसेंसिफेलों, एवं रोबेंसिफेलों गुहायें. बाद में, तंत्रिका तंत्र के विकास के दौरान, प्रत्येक अनुभाग छोटे-छोटे अवयवों में परिवर्तित हो जाते हैं। निम्न तालिका इस विकासात्मक वर्गीकरण को दर्शाती है और बेसल गैन्ग्लियाhttp://biology.about.com/library/organs/brain/blprosenceph.htm Divisions of the Brain Regina Bailey about.com 30 नवंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101202223928/http://biology.about.com/library/organs/brain/blprosenceph.htm 2 दिसंबर 2010 dead में पाई जाने वाली शरीर संरचना तक अनुगमन करती है। (बेसल गैन्ग्लिया से सम्बद्ध शरीर संरचनाओं को गहरे एवं बड़े शब्दों के रूप में दर्शाया गया है): न्यूरल नलिका का प्राथमिक विभाजन माध्यमिक उपखंड वयस्क मानव में अंतिम खंड-विभाजन प्रोसेंसीफैलॉन / भ्रूणीय अवस्था का अग्रमस्तिष्क टेलेनसीफैलॉनडाइएन्सेफ़लॉन मानव कॉर्टेक्स (खोपड़ी के दोनों गोलार्द्धों), कॉडेट/ पूंछवाला, पुटामेन, ग्लोबस पैलिडस (पैलिडम) थैलेमस, हाइपोथैलेमस, सबथैलेमस, एपीथैलेमस/अधिचेतक,सबथेलामिक नाभिक मीजेन्सिफेलोन मीजेन्सिफेलोन मीजेन्सिफेलोन (मध्यमस्तिष्क), सब्स्टेंशिया निग्रा पार्स कॉम्पेक्टा (एसएनसी), सब्स्टेंशिया पार्स रेटिकुलाटा (एसएनआर) रोम्बेनसिफेलोन मीटेनसिफेलोनमिलेनसिफेलोन पोन्स और सेरिबलममेडुला thumb|400px|मानव मस्तिष्क का कपाल विच्छेदन बेसल गैन्ग्लिया दर्शाते हुए.सफेद पदार्थ को गहरे धूसर रंग में और धूसर पदार्थ को हलके धूसर रंग में दर्शाते है। अग्रभाग : स्ट्रिआटम, ग्लोबस पैलिडस (जीपीई और जीपीआई) पार्श्वभाग: सबथैलेमिक नाभिक (एस टी एन), नाइग्रा सब्सटेंशिया (एस एन) बेसल गैन्ग्लिया टेलेनसिफेलोन का एक बुनियादी अवयव है। इसके विपरीत, कोर्टिक्स की परत अग्रमस्तिष्क की सतह को अस्तर करती हैं, जब कि बेसल गैन्ग्लिया जो कि ग्रे पदार्थ का अलग ही दिखाई देने वाला समूह है वह मस्तिष्क की गहराई में थैलेमस के संगम के समीप ही स्थित होता है। मस्तिष्क के अधिकांश भागों की तरह, बेसल गैन्ग्लिया में भी बाएँ और दाएँ पक्ष होते हैं जो कि एक दूसरे कि आभासी छवियों के रूप में होते है। शारीरिक संरचनात्मक दृष्टी से शरीर संरचना शास्त्रियों ने बेसल गैन्ग्लिया को चार अलग-अलग संरचनाओं में विभाजित किया है और यह विभाजन इस पर निर्भर करता है कि उक्त संरचना कितनी बेहतर तरीके से रोस्ट्रल हैं (दूसरे शब्दों में कहें तो वे सिर से कितनी पास है): इनमें से दो अर्थात स्ट्रिएटम एवं पैलिडम अपेक्षाकृत बड़ी हैं, अन्य दो, अर्थात सब्स्टेंशिया निग्रा एवं सबथेलमिक नाभिक आकार में छोटी संरचना हैं। दाईं ओर के उदाहरण में, मानव मस्तिष्क के दो कपाल अनुभाग मानचित्र में बेसल गैन्ग्लिया के अवयवों की स्थिति दर्शायी जाती है। टिपण्णी के स्वरुप स्पष्ट किया जाता है कि, उक्त मानचित्र में दिखाई न देने वाले, सबथेलमिक नाभिक और सब्स्टेंशिया निग्रा मस्तिस्क में बहुत पीछे (पृष्ठ में) स्थित हैं। स्ट्रिएटम Striatum स्ट्रिएटम बेसल गैन्ग्लिया का सबसे बड़ा अवयव है। स्ट्रिएटम की संरचना को कुछ विशिष्ट दिशाओं में काटे जाने पर धारियां दिखाई देती हैं जिनमे से कई छोटे-बड़े तंत्रिका तंतुओं (सफेद पदार्थ) का उगम दिखाई देता है, इसलिए इसके लिए शब्द "स्ट्रिएटम" प्रयुक्त किया जाता है। पूर्व के शरीर संरचना वैज्ञानिकों ने मानव मस्तिष्क का परीक्षण कर समझा था कि स्ट्रिएटम दो भिन्न-भिन्न पदार्थों से बना है जिन्हें आंतरिक कैप्सूल नामक श्वेत पदार्थ के विस्तार से पृथक किया गया है। उन्होंने इन दो पदार्थों को कॉडेट और पुटामेन का नाम दिया. आधुनिक शरीर संरचना वैज्ञानिकों ने सूक्ष्मदर्शी और न्यूरो रासायनिक अध्ययनों द्वारा निष्कर्ष निकाला कि इन पदार्थों को एक ही रचना अर्थात स्ट्रिएटम के दो अलग हिस्सों के रूप में मानना उचित है, ठीक उसी तरह, जिस तरह किसी नगर को कोई नदी दो हिस्सों में पृथक करती है। कॉडेट एवं पुटामेन कि बीच कई कार्यात्मक अन्तरों कि पहचान की गई है, किन्तु इन्हें उन तथ्यों का परिणाम समझा गया जिनके तहत स्ट्रिएटम के हर एक क्षेत्र अनिवार्य रूप से प्रमस्तिष्क कॉर्टेक्स के विशिष्ट भागों से जुड़े हुए पाए गए हैं। स्ट्रिएटम का आंतरिक संगठन असाधारण रूप से जटिल है। इसमें बहुतांश न्यूरॉन्स (लगभग 96%) "मध्यम काँटेदार न्यूरॉन्स", किस्म के हैं। वे जीऐबीएर्गिक (GABAergic) कोशिकाएं हैं (अर्थात वे अपने लक्ष्य को रोकते है) जिनकी कोशिका निकाय छोटे हैं और डेंड्राईट घने डेंड्राईटिक काँटों से आच्छादित हैं जिन्हें साइनेप्टिक इनपुट मूलतः कॉर्टेक्स एवं थैलेमस से प्राप्त होते हैं। न्यूरो रसायन एवं जोड़ने के तरीके के आधार पर माध्यम कांटेदार न्यूरॉन्स को कई तरीकों से उपप्रकारों में विभाजित किया जा सकता हैं। अगला सबसे अधिक बहु-संख्य का प्रकार (लगभग 2%), बड़े, चिकनी डेंड्राईट युक्त, कोलिनर्जिक अंतर्न्यूरॉन्स हैं। अन्य और भी कई प्रकार के आंतरिक न्यूरॉन्स हैं, जो न्यूरल आबादी के छोटे भाग हैं। कई अध्ययनों से पता चला है कि कॉर्टेक्स और स्ट्रिएटम के बीच आमतौर पर स्थलाकृतिक संबंध रहे हैं, अर्थात, कॉर्टेक्स का प्रत्येक हिस्सा स्ट्रिएटम के कुछ भाग को, उसके बाद अन्य को, मजबूत इनपुट भेजता है। स्थलाकृति की प्रकृति को समझना मुश्किल है, लेकिन, शायद कुछ हिस्से में क्योंकि स्ट्रिएटम का संगठन तीन आयामों में आयोजित किया गया है जबकि कॉर्टेक्स, एक स्तरित संरचना के रूप में, दो में आयोजित है। इस आयामी विसंगति के चलते एक संरचना का दूसरी पर मानचित्रण करने में बड़ी मात्रा में विरूपण और अलगाव दिखाई पड़ता है। दिलचस्प है कि, वही स्थलाकृति संबंध थैलेमस स्ट्रिआटल के लिए लागू होते है।Kamishina H Yurcisin G Corwin J Reep R Striatal projections from the rat lateral posterior thalamic nucleus Brain Research 1204 24–39 2008 18342841 10.1016/j.brainres.2008.01.094 पैलिडम Pallidum पैलिडम ग्लोबस पैलिडस ("पीला ग्लोब") नामक एक बड़ी संरचना होती है जोकि एक छोटे उदर तलीय विस्तार के साथ स्थित होती है, जिसे वेंट्रल पैलिडम कहा जाता है। ग्लोबस पैलिडस एकल तंत्रिका पदार्थ के रूप में प्रतीत होता है, लेकिन कार्यात्मक भिन्नता के चलते दो भागों में विभाजित किया जा सकता है, उन हिस्सों को आंतरिक (कभी कभी "मध्य") बाह्य (कभी कभी "पार्श्व") खंड कहा जाता है, एवं संक्षिप्त में जीपीआई और जीपीइ भी कहते हैं। दोनों खण्डों में मूलतः जीएबीएएर्गिक न्यूरॉन्स होते हैं, जो उनके लक्ष्य पर निरोधात्मक प्रभाव दिखाते हैं। उक्त दो खंड अलग-अलग तंत्रिका परिपथों में भाग लेते हैं। बाहरी खंड अथवा जीपीई को प्रमुख रूप से इनपुट प्राप्ति स्ट्रिएटम से होती है और वह सबथैलेमस नाभिक पर प्रक्षेपित होता है। आंतरिक खंड, या जीपीआई, को दो पथों के माध्यम सेस्ट्रिएटम द्वारा संकेत प्राप्त होते हैं, जिन्हें "प्रत्यक्ष" और "अप्रत्यक्ष" पथ कहा जाता है। पैलिडल न्यूरॉन्स एक "गैर निरोधात्मक" सिद्धांत का उपयोग कर कार्य करते हैं। उक्त न्यूरॉन्स इनपुट के अभाव में स्थिर उच्च दर से प्रक्षेपित होते हैं और स्ट्रिएटम द्वारा संकेत के चलते वे "ठहराव" की स्थिति में आ जाते हैं। चूँकि स्वयं पैलिडल न्यूरॉन्स का उनके लक्ष्यों पर निरोधात्मक प्रभाव है, पैलिडम को प्राप्त इनपुट का कुल प्रभाव पैलिडल कोशिका द्वारा लक्ष्यों पर प्रदर्शित नियंत्रित निरोध के रूप में दिखाई देता हैं। सब्स्टेंशिया निग्रा Substantia nigra सब्स्टेंशिया निग्रा बेसल गैन्ग्लिया के एक मिसेनसिफेलिक ग्रे पदार्थ का भाग है जो एसएनआर (रेटिकुलाटा) और एसएनसी (कोम्पेक्टा) में विभाजित है। अक्सर एसएनआर जीपीआई के साथ सामंजस्य में काम करता है एवं एसएनआर - जीपीआई कॉम्पलेक्स, थैलेमस का निरोधी कार्य करता है। सब्स्टेंशिया निग्रा पार्स कोम्पेक्टा न्यूरो ट्रांसमीटर डोपामिन का निर्माण करता है जो कि स्ट्रिआटल पथ का संतुलन बनाने में काफी महत्वपूर्ण होता है। नीचे दिया गया परिपथ बेसल गैन्ग्लिया के अवयवों की भूमिका एवं परिपथ को समझाता है। सबथैलेमिक नाभिक Subthalamic nucleus सबथैलेमिक नाभिक, बेसल गैन्ग्लिया का एक डाइएन्सिफेलिक ग्रे पदार्थ है, एवं यह गैन्ग्लिया का एकमात्र हिस्सा है जो वास्तव में "उत्तेजक" ग्लुटामिक अम्ल ट्रांसमीटर बनाता है। सबथैलेमिक नाभिक (एसटीएन) की भूमिका एसएनआर-जीपीआई कॉम्पलेक्स को उत्तेजित करना है और साथ ही वह "अप्रत्यक्ष मार्ग" का एक हिस्सा भी होता है। परिपथ के जोड़ thumb|200px|right|कनेक्टिविटी मानचित्र, लाल रंग में उत्तेजक ग्लुतामेतार्गिक, नीले रंग में निरोधात्मक जीएबीएएर्गिक और मैजंटा रंग में नियंत्रक डोपामिनर्जिक पथ दर्शाता है। बेसल गैन्ग्लिया के जटिल परिपथ को समझने के लिए, हमें सर्वप्रथम परिपथ के महत्वपूर्ण भागीदारों को जानना आवश्यक है। बेसल गैन्ग्लिया थैलेमस और कॉर्टेक्स के साथ सीधे संपर्क में होता है। इसीलिए, बेसल गैन्ग्लिया द्वारा निर्मित परिपथ में कॉर्टेक्स, थैलेमस और बेसल गैन्ग्लिया, बेसल गैन्ग्लिया द्वारा निर्मित तीन मुख्य भागीदार होते हैं। मानव मस्तिष्क कॉर्टेक्स, सत्ता की उच्चतम स्थिति, एवं जगत के प्रति जागरूक धारणा के लिए जिम्मेदार होता है। तंत्रिका तंत्र द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किए गए सभी कार्य कॉर्टेक्स से संबंधित हैं। कॉर्टेक्स के कई अलग-अलग क्षेत्र भिन्न-भिन्न कामों को अंजाम देते हैं। प्री-सेन्ट्रल गायरस कॉर्टेक्स का ऐसा ही एक भाग है जिसे "मोटर कॉर्टेक्स" नाम से भी जाना जाता है। कॉर्टेक्स के मोटर कॉर्टेक्स क्षेत्र के विशिष्ट न्यूरॉन्स (प्री-सेन्ट्रल गायरस) अपने एक्संस को बेसल गैन्ग्लिया के स्ट्रिआटम भाग तक विस्तृत करते हैं। उक्त कोर्टिक्स के न्यूरॉन्स न्यूरोट्रांसमीटर ग्लूटामेट छोड़ते हैं, जो उत्तेजक प्रकृति का होता है। ग्लूटामेट से उत्साहित होने के बाद स्ट्रिआटम में स्थित कोशिकाएं दो विभिन्न दिशाओं में प्रक्षेपित होकर दो प्रमुख पथ का निर्माण करती हैं- "प्रत्यक्ष " एवं "परोक्ष " परिपथ. प्रत्यक्ष परिपथ में कॉर्टेक्स द्वारा एक बार उत्तेजित होने पर, स्ट्रिआटम की कोशिकाएं निरोधी न्यूरॉन्स (जीएबीए (GABA) नामक न्यूरो ट्रांसमीटर निर्मित करती हैं) एसएनआर -जीपीआई कॉम्पलेक्स कोशिकाओं (एसएनआर एवं जीपीआई स्थान के संबंध में भिन्नता रखते हैं किन्तु एक जैसे कार्य संपादन के कारण उन्हें जटिल समझना सही है), पर प्रक्षेपित करती है। एसएनआर और जीपीआई, लगातार जीएबीए निर्मित करते हुए अन्सा लेंटिकुलारिस परिपथ द्वारा थैलेमस से संपर्क में रहते हुए उस पर निरोधात्मक प्रभाव क्रियान्वित करने हेतु प्रयत्नशील रहते हैं। एसएनआर -जीपीआई (जो खुद थैलेमस के निरोधी हैं) के निरोधात्मक प्रभाव (स्ट्रिआटल निरोधात्मक प्रभाव द्वारा) के चलते अंतिम निष्कर्ष स्वरुप थैलेमस पर निरोधात्मक प्रभाव का लोप होता है। यह दिलचस्प बात है कि थैलेमस खुद कॉर्टेक्स पर प्रक्षेपित हो लगातार कॉर्टेक्स को ग्लूटामेट द्वारा उत्तेजित करता है। इसीलिए, प्रत्यक्ष परिपथ के चलते थैलेमस को अनुमति प्राप्त होती है कि वह कॉर्टेक्स को उत्तेजित करे. उत्तेजित होने के बाद कॉर्टेक्स यह "उत्तेजना" सन्देश मोटर परिपथ को पार्श्व कोर्टिको स्पाइनल ट्रेक्ट के माध्यम से मांसपेशियों तक पहुँचाता है, जिसके फलस्वरूप अति गतिज व्यवहार (अर्थात गति में वृद्धि) नजर आता है। निम्न आरेख "प्रत्यक्ष" मार्ग दर्शाता है: कॉर्टेक्स - (उत्तेजित करता है) -> स्ट्रिएटम - (रोकता है) -> "एसएनआर-जीपीआई" कॉम्पलेक्स - (रोकता है) -> थैलेमस - (उत्तेजित करता है) -> कॉर्टेक्स - (उत्तेजित करता है) -> मांसपेशियों, आदि -> (अति गतिज व्यवहार स्थिति) विपरीत सिरे पर अप्रत्यक्ष परिपथ होता है जो कि स्ट्रिएटम के न्यूरॉन्स से ही आरम्भ होता है। स्ट्रिएटम में स्थित न्यूरॉन्स के समूह कॉर्टेक्स द्वारा प्रेरित होते ही अब निरोधी एक्संस ग्लोबस पैलिडस एक्सटर्ना कि कोशिकाओं (जीपीई) को निरोधी संकेत प्रसारित करते हैं। जीपीई सबथैलेमिक नाभिक को लगातार निरोधी प्रभाव दर्शाते हैं। निरोधक (जीपीई) द्वारा निरोधी प्रभाव (स्ट्रिएटम द्वारा) के चलते एसटीएन वास्तव में उत्तेजित हो जाते हैं। इसके फलस्वरूप एसटीएन भी तत्पर होकर कॉम्पलेक्स एसएनआर-जीपीआई को उत्तेजित करते हैं, जहां एसएनआर - जीपीआई कॉम्पलेक्स का मुख्य कार्य थैलेमस पर निरोधी प्रभाव डालना होता है। इसके फलस्वरूप अंततः थैलेमस का वास्तविक निरोध होकर थैलेमस द्वारा कॉर्टेक्स को उतेजित करने की क्रिया में कमी होना, होता है। इसके फलस्वरूप कॉर्टेक्स, पार्श्व कोर्टिको स्पाइनल ट्रेक्ट द्वारा मांसपेशियों को कम उत्तेजित कर, अति गतिज स्थिति अथवा गति में कमी, में सहयोग करता है। संक्षेप में, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष परिपथ कार्य संपादन में परस्पर विरोधी होते हैं। कॉर्टेक्स - (उत्तेजित करता है) -> स्ट्रिएटम - (रोकता है) -> जीपीई - (रोकता है) -> एसटीएन - (उत्तेजित करता है) -> "एसएनआर-जीपीआई" कॉम्पलेक्स - (रोकता है) -> थैलेमस - (कम उत्तेजक है) -> कॉर्टेक्स - (कम उत्तेजक है) -> मांसपेशियों, आदि -> (अति गतिज स्थिति) thumb|right|बेसल गैन्ग्लिया के मुख्य परिपथ. यह चित्र दर्शाता है 2 कपाल विच्छेदन की स्लाइस जो एक दूसरे पर रखकर संबंधित बेसल गैन्ग्लिया संरचना शामिल की है, + और - तीर के बिंदु पर संकेत पथ उत्तेजक है या निरोधात्मक प्रभाव में है, क्रमशः दर्शाते हैं। हरे तीर उत्तेजक ग्लुतामेतार्गिक पथ का उल्लेख करते है, लाल तीर निरोधात्मक जीएबीएएर्गिक पथ और फ़िरोज़ा तीर सीधे पथ पर उत्तेजक और परोक्स पथ पर निरोधात्मक डोपामिनर्जिक पथ का उल्लेख करते है। किन्तु, यदि प्रत्यक्ष परिपथ गति की सहायता करे और अप्रत्यक्ष परिपथ सहायता न करे, तो मानव शरीर में जन्मजात स्वैच्छिक गति को लेकर विरोधाभास रहता है। इस विरोधाभास का निदान सब्सटेंशिया निग्रा पार्स कॉम्पेक्टा (एसएनसी) के कार्यान्वयन द्वारा होता है जो डोपामीन का उत्पादन करते हैं। डोपामीन से बेसल गैन्ग्लिया में स्थित विशिष्ट ड़ी 1 रिसेप्टर्स उत्तेजित हो "प्रत्यक्ष" पथ को मदद करते हैं, जबकि बेसल गैन्ग्लिया में स्थित विशिष्ट ड़ी 2 रिसेप्टर्स पर डोपामीन से निरोधी प्रभाव उत्पन्न होता है एवं वास्तव में "अप्रत्यक्ष पथ" को मदद करता है। इस तरह शरीर, गति एवं उसकी अनुपस्थिति के बीच तारतम्य रख संतुलित स्थिति का निर्माण करता है। इस नाजुक तंत्र में संतुलन रहित स्थिति के चलते पार्किन्सन विकार जैसी व्याधियां उत्पन्न हो जाती हैं। शब्दावली के विषय में टिप्पणी बेसल गैन्ग्लिया और उसके अवयवों का नामकरण हमेशा समस्याग्रस्त रहा है। पूर्व के शरीर रचना शास्त्री स्थूल दर्शी शरीर संरचना को देखकर, किन्तु तंत्रिका रसायन शास्त्र के कोशिकीय निर्माण से अनजान होने के नाते, उन्होंने ऐसे अवयवों को संचित किया जो अब माना जाने लगा है कि भिन्न- भिन्न कार्यों को अंजाम देते हैं, (जैसे कि ग्लोबस पैलिडस के आतंरिक और बाह्य भाग) और इस तरह उन्होंने अवयवों को विभिन्न नाम दिए जो अब समझा जाता है कि कार्यात्मक दृष्टी से, उसी संरचना के हिस्से हैं (जैसे कॉडेट नाभिक और पुटामेन). "बेसल" शब्द इस तथ्य से उपजा है कि इसके अधिकांश तत्व अग्रमस्तिष्क के बेसल हिस्से में स्थित हैं। गैन्ग्लिया शब्द मिथ्या नाम है: आधुनिक उपयोग में मात्र परिधीय तंत्रिका तंत्र के न्यूरल/तंत्रिका समूहों को ही "गैन्ग्लिया" से संबोधित किया जाता जबकि केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के न्यूरल/तंत्रिका समूहों को "नाभिक" कहा जाता है। इस कारण से, बेसल गैन्ग्लिया को कभी कभी "बेसल नाभिक" के नाम से भी जाना है।Soltanzadeh Akbar Neurologic Disorders 964-6088-3-1 Jafari 2004 Tehranदिसम्बर 2010 टर्मिनोलॉजिय अनाटोमिका (1998), जो कि शरीर संरचना नामकरण के लिए अंतरराष्ट्रीय प्राधिकृत संस्था है, ने "नाभिक बेसेलिस" नाम सुझाया है जो कि सामान्यतः उपयोग में नहीं लिया जाता. अंतर्राष्ट्रीय बेसल गैन्ग्लिया सोसायटी (आएबी ऐ जी एस) अनौपचारिक रूप से मानती है कि बेसल गैन्ग्लिया यह स्ट्रिएटम, पैलिडम (दो नाभिक के साथ), सब्सटेंशिया निग्रा (दो भिन्न-भिन्न हिस्सों से) एवं सबथैलेमिक नाभिक से बना है। पेर्चेरोन आदि ने 1991 में और पेरेंट एंड पेरेंट ने 2005 में थैलेमस के मध्य भाग (सेंटर मीडियन- पैराफासिकुलर) को बेसल गैन्ग्लिया के एक भाग के रूप में सम्मिलित किया,Percheron G Filion M Parallel processing in the basal ganglia: up to a point Trends in Neurosciences 14 2 55–9 1991 1708537 10.1016/0166-2236(91)90020-UParent Martin Parent Andr� Single-axon tracing and three-dimensional reconstruction of centre m�dian-parafascicular thalamic neurons in primates The Journal of Comparative Neurology 481 1 127–44 2005 15558721 10.1002/cne.20348 जबकि मेना-सेगोविया आदि ने 2004 में पेडुन्क्युलोपोंटाइन कॉम्पलेक्स को भी सम्मिलित किया।Menasegovia J Bolam J Magill P Pedunculopontine nucleus and basal ganglia: distant relatives or part of the same family? https://archive.org/details/sim_trends-in-neurosciences_2004-10_27_10/page/585 Trends in Neurosciences 27 10 585–8 2004 15374668 10.1016/j.tins.2004.07.009 इसके अलावा, बेसल गैन्ग्लिया के विभिन्न नाभिकों को दिए गए नाम भिन्न-भिन्न हैं। विशेष रूप से, आदि मानव के ग्लोबस पैलिडस के अंदरूनी खंड को मूषकों में एंटोपेडुन्क्युलर नाभिक कहा जाता है। आदि मानव में "स्ट्रिएटम" और "ग्लोबस पैलिडस" के बाहरी खंड को पक्षियों में क्रमशः "पेलिओस्ट्रिएटम औग्मेंटेटम" और "पेलिओस्ट्रिएटम प्रिमिटिवम" कहा जाता है। कार्यप्रणाली शरीर रचना अध्ययन, मुख्यतः चूहों और वानरों के शारीरिक अध्ययन, तथा उन्हें क्षति पहुँचाने वाले विकारों के अध्ययन से, बेसल गैन्ग्लिया के कार्यों की जानकारी प्राप्त होती है। बेसल गैन्ग्लिया के विषय में विस्तृत जानकारी का सबसे बड़ा स्रोत दो तंत्रिका शास्त्र के विकार, पार्किन्सन रोग तथा हंटिंग्टन रोग हैं। इन दोनों विकारों के लिए, तंत्रिका की क्षति को अच्छी तरह ज्ञात कर परिणामस्वरूप दिखाई देने वाले लक्षणों के साथ सहसंबद्ध किया जा सकता है। पार्किंसंस रोग में, स्सब्सटेंशिया निग्रा में स्थित डोपामिनर्जिक कोशिकाओं का बड़ा नुकसान होता है, हंटिंग्टन रोग में स्ट्रिएटम में स्थित मध्यम काँटेदार न्यूरॉन्स का भारी नुकसान होता है। दोनों रोगों के लक्षण लगभग विपरीत हैं- पार्किंसंस रोग की विशेषता है कि उसमे गतिविधी करने की क्षमता का ह्रास होता है, जबकि हंटिंग्टन रोग की विशेषता है कि उसमे शरीर के भागों की अनऐच्छिक रूप से गतिविधी को रोकने में असमर्थता होती है। यह उल्लेखनीय है कि, हालांकि दोनों बीमारियों के लक्षण उनके संज्ञानात्मक उन्नत चरण में विशेष रूप से है, सबसे प्रमुख लक्षण, गतिविधी के आरम्भ एवं उनके नियंत्रण की क्षमता से संबंधित हैं। इस प्रकार, दोनों विकार मुख्य रूप से गतिविधी की अस्वस्थता में वर्गीकृत हैं। एक भिन्न किस्म का, गतिविधी की अस्वस्थता से संबंधित रोग, जिसे हेमिबेलिस्मस नाम से जाना जाता है और सबथेलामिक नाभिक की क्षति के चलते होता है। हेमिबेलिस्मस के लक्षण हैं, हाथों और पैरों की हिंसात्मक एवं अनियंत्रित रूप से गतिविधी. आँख की गतिविधी बेसल गैन्ग्लिया के एक सर्वाधिक अध्ययन किये हुए कार्यों में से है बेसल गैन्ग्लिया की आँखों की गतिविधी में भूमिका.Hikosaka O Takikawa Y Kawagoe R Role of the basal ganglia in the control of purposive saccadic eye movements. https://archive.org/details/sim_physiological-reviews_2000-07_80_3/page/953 Physiological reviews 80 3 953–78 2000 10893428 मस्तिष्क क्षेत्रों का व्यापक जाल नेत्रों की गति/हलचल को प्रभावित करता है जो मध्य मस्तिस्क के सुपीरियर कौलिक्युलस (एस सी) नामक क्षेत्र में केन्द्रित होता है। एससी एक स्तरित संरचना है जिसके स्तर दृश्य स्थल के दो आयामी नक्शे बनाते हैं। एससी के स्तरों की गहराई में तंत्रिका गतिविधि की एक "टक्कर" नेत्रों की हलचल को देखे गए किसी बिंदु पर निर्देशित करती है। बीजी की ओर से एससी को एक मजबूत निरोधात्मक प्रक्षेपण प्राप्त होता है जोकि सब्सटेंशिया निग्रा पार्स रेटिकुलाटा (एसएनआर) से निकलता होता है। एसएनआर में स्थित न्यूरॉन्स आमतौर पर उच्च दर से प्रक्षेपित होते है, किन्तु नेत्र की हलचल के आरम्भ होते ही वे "थम" जाते हैं और निरोधात्मक प्रभाव से एससी छोड़ते है। एसएनआर में सभी प्रकार की नेत्र की हलचल "थमने" से जुड़ी है - किन्तु व्यक्तिगत एसएनआर न्यूरॉन्स कुछ प्रकार की हलचल /गतिविधी से अधिक मजबूती के साथ जुड़े हो सकते हैं। कॉडेट नाभिक के कुछ भागों में के न्यूरॉन्स भी नेत्र की हलचल से संबंधित गतिविधि दर्शाते हैं। चूँकि बहुत अधिक कॉडेट कोशिका कम दर पर प्रक्षेपित होती है, यह क्रिया अधिकांश रूप में प्रक्षेपण के दर में बढ़ोत्तरी के रूप में प्रदर्शित होती है। कॉडेट नाभिक में उत्तेजना से नेत्रों की हलचल आरम्भ होती है, जोकि एसएनआर पर सीधे जीएबीएएर्गिक प्रक्षेपणों के मार्फ़त निरोधी प्रभाव प्रदर्शित करती है। प्रेरणा में भूमिका हालांकि मोटर नियंत्रण में बेसल गैन्ग्लिया की भूमिका स्पष्ट है, किन्तु कई संकेतों से ज्ञात होता है की वह व्यवहार के नियंत्रण में प्रेरणा के स्तर तक मौलिक तौर पर सम्मिलित है। पार्किंसंस रोग में, अवयवों की हलचल की क्षमता का निष्पादन अधिकतर प्रभावी नहीं होता, किन्तु प्रेरक कारक जैसे कि भूख, हलचल का आरम्भ करने में विफल है अथवा उसे उचित समय पर जारी करने में असफल है। पार्किन्सन रोगियों में गतिहीनता को कभी-कभी "इच्छा का लकवा" से भी वर्णित करते हैं।Niv Y. Rivlin-Etzion M. Parkinson's Disease: Fighting the Will? https://archive.org/details/sim_journal-of-neuroscience_2007-10-31_27_44/page/n60 Journal of Neuroscience 27 44 11777–9 2007 17978012 10.1523/JNEUROSCI.4010-07.2007 यह भी देखा गया है कि कभी-कभार उक्त रोगी काइनेसिया पैराडॉक्सिया नामक घटना प्रदर्शित करते हैं, जिसमे सामान्य रूप से गतिविहीन व्यक्ति आपातकाल में समन्वित और ऊर्जावान प्रतिक्रिया दर्शाता है और उसके बाद यथावत गतिविहीन अवस्था में आ जाता है। प्रेरित करने में बेसल गैन्ग्लिया का हाथ-पैरों सदृश्य भाग की भूमिका - अर्थात, नाभिक एकम्बेंस (एन ऐ), वेंट्रल पैलिडम और वेंट्रल टेगमेंटल एरिया (वीटीए) विशेष रूप से अच्छी तरह से स्थापित है। हजारों प्रयोगात्मक अध्ययन दिखाते हैं कि वीटीए से एनए तक डोपामिनर्जिक प्रक्षेपण, मस्तिस्क के प्रतिफल तंत्र में केंदीय भूमिका निभाते है। उत्तेजक इलेक्ट्रोड के साथ प्रत्यारोपित पशु बटन दबाते ही शीघ्र उत्तेजित हो जायेंगे यदि हर बार बटन दबाने की क्रिया के बाद कम अंतराल तक विद्युत प्रवाह जारी रखा जाये. कई चीजें ऐसी है जो लोगों को प्रतिफल सदृश्य महसूस होती है, जिनमे व्यसनी दवा, जायकेदार भोजन और सेक्स शामिल है, इनसे देखा गया कि वीटीए डोपामिन तंत्र के क्रियान्वयन में प्रखरता आ गयी। एनए या वीटीए को क्षति या नुकसान से गहरी अकर्मण्यता की स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, यह सार्वभौमिक रूप से स्वीकार नहीं है, पर कुछ सिद्दान्तकारों ने "आहार संबंधी" व्यवहारों एवं "उपभोग संबंधी" व्यवहारों में अंतर प्रतिपादित किया है जिसके अनुसार आहार संबंधी व्यवहार बेसल गैन्ग्लिया चालित हैं जबकि अन्य के साथ ऐसा नहीं है। उदाहरण के लिए, बेसल गैन्ग्लिया से गंभीर रूप से ग्रस्त पशु भोजन की ओर आकर्षित नहीं होगा भले ही भोजन कुछ इंच दूर रखा गया हो, लेकिन भोजन सीधे मुंह में रखा जाए तो वह पशु उसे चबायेगा और निगलेगा. तुलनात्मक शारीरिक रचना और नामकरण बेसल गैन्ग्लिया अग्रमस्तिष्क के बुनियादी अवयवों में से एक है और रीढ़धारी प्रजातियों में पहचाने जा सकते हैं।Comparative Neurobiology of the Basal Ganglia https://archive.org/details/comparativeneuro0000pare Parent A Wiley 1986 9780471803485दिसम्बर 2010 बल्कि, लम्प्रे (आमतौर पर सर्वाधिक आदिम रीढ़ धारी के रूप में जाना जाता है) में भी स्ट्रिएटल, पैलिडल और निग्रल शारीरिक रचना एवं कोशिका रसायन/हिस्टोलोजी के आधार पर पहचाने जा सकते हैं।Grillner S Ekeberg O Elmanira A Lansner A Parker D Tegner J Wallen P Intrinsic function of a neuronal network — a vertebrate central pattern generator1 https://archive.org/details/sim_brain-research-reviews_1998-05_26_2-3/page/184 Brain Research Reviews 26 2-3 184–97 1998 9651523 10.1016/S0165-0173(98)00002-2 बेसल गैन्ग्लिया के तुलनात्मक शारीरिक रचना एक स्पष्ट रूप से उभरता मुद्दा, इस तंत्र का विकास फाइलोजेनी के माध्यम से, संसृत और त्वचा के संबंध में दुबारा प्रवेशक फंदे के संयोजन के रूप में, जिसके चलते त्वचा आवरण का विकास और प्रसार निहित है। हालाकि, बेसल गैन्ग्लिया के संसृत चयनात्मक प्रसंस्करण की सीमा बनाम पुनः प्रवेशक फंदे के भीतर पृथक समानांतर प्रसंस्करण को लेकर विवाद है। भले ही, बेसल गैन्ग्लिया का रूपांतरण स्तनधारी विकास में त्वचीय पुन: प्रवेशी प्रणाली के रूप में मध्य मस्तिस्क के लक्ष्य से पैलिडल (या "पेलिओस्ट्रिआटम प्रिमिटिवम") के पुन: निर्देश के माध्यम से, जैसे की, सुपीरियर कोलिक्युलस, जो सौरोप्सिड मस्तिस्क में पाया जाता है, से मस्तिकीय कॉर्टेक्स के वेंट्रल थैलेमस के विशिष्ट क्षेत्रों तक उपसंच बनाकर स्ट्रिएटम में प्रक्षेपित होता है। ग्लोबस पैलिडस के आतंरिक खंड से अचानक पथ की रोस्ट्रल दिशा- वेंट्रल थैलेमस में अन्सा लेंटिकुलारिस के पथ के माध्यम से- बेसल गैन्ग्लिया के धारा प्रवाह और लक्षित उत्पत्ति परिवर्तन को देखा जा सकता है। मस्तिस्क में कोर्टिकल तंत्रों के दुबारा प्रवेशी तंत्रों की उत्पत्ति उद्भव को सिद्धांत के रूप में जेराल्ड एडेलमैन ने न्यूरल डार्विनवाद सिद्धांत के प्रति मूल जानकारी के उद्भव के एक आधार के रूप में प्रतिपादित किया।नवम्बर 2010 न्यूरोट्रांसमीटर मस्तिष्क के अधिकांश क्षेत्रों में, न्यूरॉन्स के प्रमुख वर्ग न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में ग्लूटामेट का उपयोग करते हैं और अपने लक्षों पर उत्तेजित प्रभाव प्राप्त करते हैं। किन्तु बेसल गैन्ग्लिया में बहुतांश न्यूरॉन्स न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में जीएबीए का उपयोग करते हैं और अपने लक्ष्य पर निरोधात्मक प्रभाव डालते हैं। स्ट्रिएटम एवं एसटीएन को कॉर्टेक्स और थैलेमस से प्राप्त इनपुट ग्लूटामेटर्जिक होते हैं, किन्तु स्ट्रिएटम, पैलिडम और सब्सटेंशिया निग्रा पार्स रेटिकुलाटा, सभी जीएबीए का उपयोग करते हैं। अन्य न्यूरोट्रांसमीटर में महत्वपूर्ण रूप से मद्धमकारी प्रभाव होता है। सबसे गहन अध्ययन डोपामिन में हुआ है, जिसका उपयोग सब्सटेंशिया निग्रा पार्स कॉम्पेक्टा से स्ट्रिएटम पर प्रक्षेपण में होता है एवं वेंट्रल टेगमेंटल क्षेत्र से नाभिक एकमबेंस पर सदृश प्रक्षेपण में होता है। एसिटाइलकोलाइन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसका उपयोग स्ट्रिएटम के कई बाहरी इनपुट एवं स्ट्रिआटल इंटरन्यूरॉन्स समूह, दोनों, द्वारा होता है। यद्यपि, कोलिनेर्जिक कोशिका कुल आबादी का थोड़ा भाग ही होती है, पर स्ट्रिएटम में, मस्तिस्क संरचना में पाया जाने वाला, सर्वाधिक एसिटाइलकोलाइन का सांद्रण होता है। बेसल गैन्ग्लिया से जुड़े विकार Basal ganglia disease ध्यान घटने का अतिक्रियाशील विकार (एडीएचडी) एथिमोर्मिक सिंड्रोम (पीएपी सिंड्रोम) उंगलियों की धीमी गति सेरेब्रल पक्षाघात: गर्भावस्था के दूसरे और तीसरे तिमाही में बेसल गैन्ग्लिया क्षति कोरिया डिस्टोनिया फार्स रोग विदेशी उच्चारण सिंड्रोम (एफएएस) हनटिंग्टन रोग लेश-नाइहैन सिंड्रोम आब्सेसिव कम्पल्सिव विकारRadua Joaquim Mataix-Cols David 2009 November Voxel-wise meta-analysis of grey matter changes in obsessive–compulsive disorder https://archive.org/details/bj-psych_2009-11_195_5/page/393 British Journal of Psychiatry 195 393–402 10.1192/bjp.bp.108.055046 19880927 5 Radua Joaquim van den Heuvel Odile A. Surguladze Simon Mataix-Cols David Meta-analytical comparison of voxel-based morphometry studies in obsessive-compulsive disorder vs other anxiety disorders Archives of General Psychiatry 67 7 701–711 5 जुलाई 2010 10.1001/archgenpsychiatry.2010.70 20603451 अन्य तनाव संबंधी विकार पार्किनसंस रोग पंदास (PANDAS) साईडेनहैम्स कोरिया टोरेट्स विकार टारडिव डिस्काइनेसिया, चिरकालिक एंटीसाइकोटिक उपचार के कारण होता है। तुतलानाPer A. Alm Stuttering and the basal ganglia circuits: a critical review of possible relations https://archive.org/details/sim_journal-of-communication-disorders_july-august-2004_37_4/page/325 Journal of communication disorders 37 4 325–69 2004 15159193 10.1016/j.jcomdis.2004.03.001 अकदंयुक्त डिस्फ़ोनिया विल्सन रोग नेत्रच्छदाकर्ष इतिहास इस स्वीकृति को आत्मसात करने में बहुत समय लगा कि बेसल गैन्ग्लिया प्रणाली का गठन एक प्रमुख मस्तिष्क तंत्र का गठन है। सर्वप्रथम, उप-कोर्टिकीय संरचनाओं की स्पष्ट पहचान, विलिस थॉमस ने 1664 में प्रकाशित की थी।अन्द्रेव गिलिएस, बेसल गैन्ग्लिया का एक संक्षिप्त इतिहास https://web.archive.org/web/20050130092911/http://www.anc.ed.ac.uk/~anaru/research/history/ 30 जनवरी 2005 , 27 पर लिया गया जून 2005 कई सालों तक, कॉर्पस स्ट्रिएटमवियूस्सेंस 1685) needs more bibliographic info दिसम्बर 2010 यह शब्द, उप कोर्टिकीय तत्त्वों के बड़े समूहों के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा, बाद में ज्ञात हुआ कि इनमे से कुछ का कार्यात्मक दृष्टी से रूप से कोई संबंध नहीं है।Percheron G Fénelon G Leroux-Hugon V Fève A History of the basal ganglia system. Slow development of a major cerebral system Revue neurologique 150 8-9 543–54 1994 7754290 कई सालों तक, पुटामेन और कॉडेट नाभिक एक दूसरे से जुड़े नहीं थे। इसके बजाय, पुटामेन पैलिडम से जुड़ा था जिसे नाभिक लेंटिकुलारिस या नाभिक लेंटिफोर्मिस की संज्ञा दी गयी थी। एक पूरी तरह से पुनर्विचार सेसिल और ओस्कर वोग्ट्स (1941) ने किया और कॉडेट नाभिक, पुटामेन और उदर्पृस्थ से जुड़ने वाले पदार्थ नाभिक एकम्बेंस संरचना समूह को स्ट्रिएटम शब्द का सुझाव देकर बेसल गैन्ग्लिया के विवरण को सरल किया। स्ट्रिएटम का नामकरण, स्ट्रिआटो-पेलिडो-निग्रल एक्संस के घने बंडलों की चमक से निर्मित होने वाले धारीदार स्वरूप के आधार पर किया गया था, जिसको मानव रचनाशास्त्री अलेक्जेंडर किन्निए विल्सन ने "पेंसिल के समान" कहा है। अपने मूल लक्ष्यों के साथ स्ट्रिएटम की संरचनात्मक कड़ी को पैलिडम और सब्सटेंशिया निग्रा से बाद खोजा गया था। ग्लोबस पैलिडस नाम डेजेराइन टो बुर्डाक ने 1822 में दिया था। इस के लिए, वोग्ट्स ने सरल नाम "पैलिडम" प्रस्तावित किया था। "लोकस नाइजर" शब्द को फेलिक्स विक-डी'एज़िर द्वारा ताचे नोइर के रूप में पेश किया गया था (1786), हालांकि उसके बाद से 1788 में वॉन सोम्मरिंग के योगदान के कारण वह संरचना सब्सटेंशिया निग्रा नाम से जानी जाती है। मिरटो ने 1896 में ग्लोबस पैलिडस और सब्सटेंशिया निग्रा के बीच संरचनात्मक समानता का उल्लेख किया था। दोनों को साथ-साथ पेलिडोनिग्रल एन्सेम्बल के रूप में जाना जाता है, जो बेसल गैन्ग्लिया का केन्द्रीय हिस्सा है। कुल मिलाकर, बेसल गैन्ग्लिया की मुख्या संरचना एक दूसरे से स्ट्रिआटो-पेलिडो-निग्रल बण्डल से जुड़ी होती है, जो पैलिडम से होकर गुजरती है और आतंरिक कैपसूल को "एडिन्गेर के कोम्ब बण्डल" के रूप में पार करती है और अंततः सब्सटेंशिया निग्रा तक पहुँचती है। बेसल गैन्ग्लिया से बाद में जुड़ने वाली अतिरिक्त संरचनाओं में शामिल हैं, "बॉडी ऑफ़ ल्यूस" (1865) (चित्र में ल्यूस के नाभिक) या सबथैलेमिक नाभिक जिसके जख्मों से गतिविधि से संबंधित विकार पैदा होते हैं। हाल ही में केन्द्रीय कॉम्पलेक्स (केन्द्रीय मीडियन - पैराफासिकुलर) और पेडुन्क्युलोपोंटाइन कॉम्पलेक्स को बेसल गैन्ग्लिया के नियंत्रक के रूप में माना गया है। 20वीं सदी की शुरुआत के आसपास, बेसल गैन्ग्लिया को पहले मोटर कार्यों से संबंधित माना गया था क्योंकि इनके जख्मों के कारण अक्सर मानव गतिविधियों में बाधा उत्पन्न होती थी (कोरिया, एथेटोसिस, पार्किन्सन विकार). इन्हें भी देखें संरचनात्मक उपविभाग और बेसल गैन्ग्लिया के संबंध नथानिएल ऐ. बुच्वाल्ड वानर बेसल गैन्ग्लिया प्रणाली सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ Basal+ganglia बेसल गैन्ग्लिया इमेजिंग https://web.archive.org/web/20070927220445/http://rad.usuhs.edu/medpix/medpix.html?mode=image_finder&action=search&srchstr=basal%20ganglia&srch_type=all 27 सितंबर 2007 यूएसयूएचएस पर बेसल गैन्ग्लिया पर स्कॉलरपीडिया लेख एनआईएफ अनुसन्धान -बेसल गैन्ग्लिया, तंत्रिका विज्ञान फ्रेमवर्क के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय बेसल गैन्ग्लिया सोसायटी श्रेणी:केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र श्रेणी:मस्तिष्क श्रेणी:बेसल गैन्ग्लिया श्रेणी:मोटर प्रणाली श्रेणी:तंत्रिका रचना श्रेणी:ऑब्‍सेसिव-कंपल्‍सिव डिसऑर्डर