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सुरैया
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सुरैया Suraiya 2013 stamp of India.jpg अभिनेत्री / गायिका
सुरैया (15 जून 1929 – 31 जनवरी 2004) हिन्दी फिल्मों की प्रमुख अभिनेत्री और गायिका थीं। उनका पूरा नाम सुरैया जमाल शेख था। 1940 के दशक के उत्तरार्ध और 1950 के दशक के आरंभ में वे हिन्दी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय महिला सितारों में शामिल थीं। अभिनय के साथ गायन में भी उनकी अलग पहचान थी। उन्होंने अपने फिल्मी जीवन में 70 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और लगभग 338 गीत गाए। अपने चरम समय में वे अपने कई पुरुष सह-अभिनेताओं से अधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्री थीं।
परिचय
सुरैया का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर में हुआ था। वे बहुत छोटी उम्र में अपने परिवार के साथ बंबई (वर्तमान मुंबई) आ गई थीं। फिल्मों से उनका परिचय बचपन में ही हो गया था। 1936 में उन्होंने मैडम फैशन में बाल कलाकार के रूप में काम किया। 1941 में ताजमहल में उन्होंने मुमताज महल की भूमिका निभाई और इसके बाद फिल्मों में उनका अभिनय-जीवन आगे बढ़ा।
सुरैया अभिनय के साथ गायन भी करती थीं और अधिकांश फिल्मों में अपने लिए स्वयं गाती थीं। 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने नई दुनिया (1942) के लिए गीत गाया। संगीतकार नौशाद ने उनकी गायन प्रतिभा को पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आगे चलकर उनकी आवाज उनकी लोकप्रियता का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा बनी जितना उनका अभिनय।
1940 के दशक के उत्तरार्ध में विद्या (1948), प्यार की जीत (1948), दिल्लगी (1949) और बड़ी बहन (1949) जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़े सितारे के रूप में स्थापित किया। उस समय वे केवल अभिनेत्री नहीं बल्कि ऐसी गायिका-अभिनेत्री थीं जिनकी लोकप्रियता बॉक्स ऑफिस और संगीत, दोनों में दिखाई देती थी।
जीवन और फिल्मी सफर
सुरैया का फिल्मी सफर ऐसे समय में आगे बढ़ा जब हिन्दी सिनेमा में अभिनेत्री का सितारा-रूप मुख्यतः अभिनय से जुड़ा था। सुरैया ने अभिनय और गायन को एक साथ अपनी पहचान बनाया। 1940 के दशक के उत्तरार्ध और 1950 के दशक के आरंभ में वे अपने दौर की सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में थीं और कई अवसरों पर उनका पारिश्रमिक उनके पुरुष सह-अभिनेताओं से भी अधिक था।
उनकी लोकप्रियता का एक कारण यह भी था कि उनकी फिल्मों में उनकी अपनी आवाज का इस्तेमाल होता था। इससे पर्दे पर उनका अभिनय और गीत एक ही व्यक्तित्व से जुड़ जाता था। अनमोल घड़ी, दिल्लगी, बड़ी बहन, अफ़सर और दास्तान जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को मजबूत किया।
उनके करियर की सबसे उल्लेखनीय फिल्मों में मिर्ज़ा ग़ालिब (1954) शामिल है। इसमें उन्होंने मोती बेगम की भूमिका निभाई और ग़ालिब की रचनाओं पर आधारित गीतों को अपनी आवाज दी। फिल्म को व्यापक प्रशंसा मिली और सुरैया के अभिनय तथा गायन की विशेष सराहना हुई। यह फिल्म उनके फिल्मी जीवन के अंतिम दौर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में मानी जाती है।
1950 के दशक के मध्य के बाद उनकी फिल्मों की संख्या कम होती गई। उनकी अंतिम प्रदर्शित फिल्मों में रुस्तम सोहराब (1963) प्रमुख थी। इसके बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और लगभग सार्वजनिक जीवन से अलग हो गईं।
प्रेम और निजी जीवन
सुरैया का नाम अभिनेता देव आनंद के साथ उनके प्रेम संबंध के कारण भी लंबे समय तक चर्चा में रहा। दोनों ने एक साथ कई फिल्मों में काम किया और 1948 से 1951 के बीच उनका संबंध रहा। विद्या, जीत, अफ़सर और अन्य फिल्मों के दौरान दोनों की निकटता बढ़ी।
दोनों विवाह करना चाहते थे, लेकिन सुरैया के परिवार ने इस संबंध का विरोध किया। धार्मिक अंतर और परिवार की सामाजिक चिंताओं के कारण संबंध को स्वीकार नहीं किया गया। परिवार के दबाव के सामने सुरैया विवाह का निर्णय नहीं ले सकीं और अंततः दोनों अलग हो गए।
इस संबंध से जुड़े कई प्रसंग बाद में लोकप्रिय फिल्मी किस्सों का हिस्सा बन गए। इनमें देव आनंद द्वारा सुरैया को अंगूठी देने और परिवार द्वारा संबंध रोकने की घटना विशेष रूप से चर्चित रही। उपलब्ध स्रोत इस बात पर सहमत हैं कि परिवार के विरोध के कारण यह संबंध विवाह में नहीं बदल सका। सुरैया ने बाद में विवाह नहीं किया।
प्रेम संबंध समाप्त होने के बाद सुरैया ने अपने निजी जीवन को सार्वजनिक चर्चा से काफी हद तक दूर रखा। उनका बाद का जीवन अपेक्षाकृत एकांत में बीता। इस कारण उनके जीवन के बारे में अनेक किस्से प्रचलित हुए, लेकिन उनके जीवन का मूल्यांकन केवल देव आनंद के साथ उनके संबंध से करना उनके फिल्मी योगदान को सीमित कर देता है।
प्रमुख फ़िल्में
वर्ष फ़िल्म भूमिका/टिप्पणी 1936 मैडम फैशन बाल कलाकार के रूप में शुरुआती फिल्म 1941 ताजमहल मुमताज महल 1943 इशारा 1945 फूल 1946 अनमोल घड़ी प्रमुख भूमिका 1946 उमर खय्याम 1947 परवाना 1947 दर्द 1948 विद्या 1948 प्यार की जीत 1949 जीत देव आनंद के साथ 1949 दिल्लगी 1949 बड़ी बहन 1950 अफ़सर देव आनंद के साथ 1950 दास्तान 1952 दीवाना 1954 मिर्ज़ा ग़ालिब मोती बेगम 1954 बिल्वमंगल 1956 मिस्टर लैम्बू 1963 रुस्तम सोहराब अंतिम प्रदर्शित फिल्मों में
उनकी प्रमुख फिल्मों में इशारा, तदबीर, फूल, अनमोल घड़ी, उमर खय्याम, परवाना, दर्द, विद्या, प्यार की जीत, दिल्लगी, बड़ी बहन, अफ़सर, दास्तान, दीवाना, बिल्वमंगल, मिर्ज़ा ग़ालिब और रुस्तम सोहराब शामिल हैं।
सम्मान
1996 में सुरैया को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए स्क्रीन लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया। 1999 में उन्हें बिमल रॉय स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी मिला। 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी ने नई दिल्ली में मिर्ज़ा ग़ालिब की द्विशताब्दी के अवसर पर ग़ालिब की स्मृति को अभिनय और गायन के माध्यम से जीवित रखने के लिए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया।
अंतिम वर्ष और मृत्यु
फिल्मों से दूर होने के बाद सुरैया ने अपना जीवन काफी हद तक निजी रखा। उनके अंतिम वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ती गईं। वे हाइपोग्लाइसीमिया, इस्कीमिया और इंसुलिनोमा जैसी बीमारियों से पीड़ित थीं। 31 जनवरी 2004 को मुंबई में उनका निधन हो गया। वे 74 वर्ष की थीं। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के मरीन लाइंस स्थित बड़ा कब्रिस्तान में किया गया।
संदर्भ
Suraiya https://en.wikipedia.org/wiki/Suraiya Wikipedia 13 सितंबर 2026
Her stardom shattered norms, but love didn't follow: The story of Suraiya https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/her-stardom-shattered-norms-but-love-didnt-follow-the-story-of-suraiya/photostory/124685274.cms The Times of India 22 अक्टूबर 2025 13 सितंबर 2026
When Dev Anand talked about losing his first love Suraiya https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/when-dev-anand-talked-about-losing-his-first-love-suraiya-101664168222694.html Hindustan Times 26 सितंबर 2022 13 सितंबर 2026
Suraiya: The Last Nightingale of Bollywood https://www.songsofyore.com/ Songs of Yore 13 सितंबर 2026