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अनुच्छेद 88 (भारत का संविधान)
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भारत का संविधान भाग 5 संसद के सदनों के संबंध में मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी के अधिकार अनुच्छेद 89(भारत का संविधान) अनुच्छेद 87 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी संविधान 1949 प्रकाशित
अनुच्छेद 88 भारत के संविधान का एक अनुच्छेद है। यह अनुच्छेद संविधान के भाग V से संबधित है यह संसद के सदनों के संबंध में मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी के अधिकारों से संबंधित है।
पृष्ठभूमि
अनुच्छेद 72 (अनुच्छेद 88) के मसौदे पर 18 मई 1949 को बहस हुई । इसने भारत के मंत्रियों और अटॉर्नी-जनरल को संसद में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्रदान किया। संविधान सभा ने 18 मई 1949 को बिना किसी संशोधन के मसौदा अनुच्छेद को अपनाया । Article 88: Rights of Ministers and Attorney-General as respects Houses https://www.constitutionofindia.net/articles/article-88-rights-of-ministers-and-attorney-general-as-respects-houses/ Constitution of India 19 अप्रैल 2026
मूलपाठ
भारत के प्रत्येक मंत्री और महान्यायवादी को अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में सदनों की किसी भी संयुक्त बैठक में, तथा संसद की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया हो, बोले तथा दुसरे प्रकार से कार्यवाहियों में भाग ले, किन्तु इस अनुच्छेद के आधार पर उसको मत देने का हक्क न होगा।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र लेखक:राजेन्द्र प्रसाद 1957 33 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१०९
Every Minister and the Attorney-General of India shall have the right to speak in, and otherwise to take part in the proceedings of, either House, any joint sitting of the Houses, and any committee of Parliament of which he may be named a member, but shall not by virtue of this article be entitled to vote.भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र लेखक:राजेन्द्र प्रसाद 1957 33 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१०८
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद