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नरहरिदास
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सितंबर 2024
name/Suraj Nishad गुरगुजपुर, [भरथा]] सीतापुर , उत्तर प्रदेश, भारत 1610 ई० (संवत 1667 वि०) वैष्णव बैरागी रुक्मिणी मंगल, छप्पय नीति, कवित्त संग्रह इत्यादि नरहरिदास
नरहरिदास हिंदी साहित्य की भक्ति परंपरा में हिन्दी भाषा के कवि थे। इन्हें संस्कृत और फारसी का भी अच्छा ज्ञान था।
जीवन
नरहरि का जन्म उत्तर प्रदेश में रायबरेली, जिले के पखरौली नामक गाँव में हुआ था। इनका संपर्क हुमायूँ, शेरशाह सूरी, सलीमशाह तथा रीवाँ नरेश रामचंद्र आदि शासकों से माना जाता है। हालांकि इनको सर्वाधिक महत्व अकबर ने प्रदान किया।नरहरि, भोला नाथ तिवारी, हिंदी साहित्य कोश - भाग - 2 : नामवाची शब्दावली, ज्ञानमंडल लिमिटेड, वाराणसी, 2015, पृष्ठ - 285
गुरु-शिष्य परंपरा
नरहरिदास तुलसीदास (1532-1623) के गुरु माने जाते है।https://hi.wikisource.org/wiki/पृष्ठ:हिंदी_साहित्य_का_इतिहास-रामचंद्र_शुक्ल.pdf/१५० रामानन्द (1299 प्रयाग में जन्म) के 12 शिष्य थे, जिनमें मुख्य कबीरदास, रैदास (रविदास), नरहर्यानन्द (नरहरिदास), धन्ना (जाट), सेना (नाई), पीपा (राजपूत), सदना (कसाई) थे। रामानन्द से दीक्षा लेने के बाद नरहर्यानन्द से नरहरिदास बन गए।https://hi.wikisource.org/wiki/पृष्ठ:हिंदी_साहित्य_का_इतिहास-रामचंद्र_शुक्ल.pdf/१४३
रचनाएँ
इनके नाम से तीन ग्रंथ - रुक्मिणी मंगल, छप्पय नीति और कवित्त संग्रह प्रसिद्ध हैं जिनमें से केवल 'रुक्मिणी मंगल' ही प्राप्त हो सका है। इनकी कुछ फुटकल रचनाएँ भी मिलती हैं।
सन्दर्भ
श्रेणी:भक्तिकाल के कवि