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बैरवा समाज
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बैरवा अथवा बेरवा भारतीय राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में रहने वाली एक ओबीसी और अनुसूचित जाति है। बैरवा जाति दिल्ली में एक ओबीसी जाति है तथा "बैरवा" का अर्थ बहादुर होता है और यह शब्द "बिना बैर के" से भी हो सकता है।
ऐतिहासिक रूप से, बैरवाओं की उत्पत्ति राजस्थान की एक मीणा जाति से मानी जाती है। समय के साथ, मीणाओं का एक वर्ग धीरे-धीरे एक अलग समूह बन गया, और खेती , पशुपालन व अन्य काम करने लगा राजस्थान सरकार ने SC समुदाय में रखा गया ताकि जरूरत लोगो को आरक्षण का फायदा मिले, लेकिन दिल्ली में मतलब दिल्ली में रहने वाले बैरवा लोग ओबीसी वर्ग में आते हैं। बैरवा जाति के लोग राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली आदि जैसे राज्यों में बसे हुए हैं।
आज बैरवा जाति के बहुत लोग राजस्थान की राजनीति में शामिल है, किसान हैं तथा व्यवसायी हैं।
इनका मुख्य व्यवसाय खेती से जुड़ा रहा है लेकिन उससे इन्हें हटा दिया गया। वर्ष 1946 में उनियारा में बैरवा महासभा ने कृषि नहीं करने के कानून के खिलाफ अभियान चलाया जो 1949 में कानून के रद्द होने तक चला।शर्मा बृज किशोर https://books.google.com/books?id=VUYsAAAAMAAJ&q=bairwa+chamar Agrarian Movement in India 1987 प्रतीक्षा पब्लिकेशन en
परम्परा
बैरवा और मीणा जनजाति में समरूप रीति-रिवाज रहे हैं क्योंकि बैरवा मुख्यतः पूर्वी राजस्थान में पाये जाते हैं जहाँ मीणा जनजाति का बाहुल्य है।https://books.google.com/books?id=iKsqzB4P1ioC&q=berwa&pg=PA123 Rajasthan केएस सिंह 1 जनवरी 1998 पोप्यूलर प्रकाशन 9788171547661 गूगल बुक्स वर्ष 1981 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में उनकी जनसंख्या 429,627 थी जो वर्ष 2011 की जनगणना के समय बढ़कर 1,260,685 हो गयी। इनकी पर्याप्त जनसंख्या मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में भी मिल जाती है।https://censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_rajasthan.pdf Bairwa - Google Search
सन्दर्भ
श्रेणी:दलित जाति