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ओणम
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अगस्त 2015
ओणम Onapookkalam.jpg ओणम ओणम ओनम हिन्दू, मलयाली, भारतीय प्रवासी ezr ओणम नक्षत्र चिंगम माह में इस तिथि पर राजा महाबलि भ्रमण करने आते हैं। १२ सितंबर २ सितंबर
ओणम केरळम् का एक प्रमुख त्यौहार है। ओणम का उत्सव चिंगम (सिंघम/सिंहम्) मास में राजा महाबलि के स्वागत में प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है जो दस दिनों तक चलता है।https://www.aajtak.in/religion/festivals/story/onam-festival-2019-importance-and-history-about-onam-know-worship-method-tlifd-959834-2019-09-10 ओणम: क्या है ओणम का महत्व और इतिहास, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त आज तक hi 2021-07-21 ओणम में प्रत्येक घर के आँगन में फूलों की पंखुड़ियों से सुन्दर सुन्दर रंगोलियाँ (पूक्कलम) डाली जाती हैं। युवतियाँ उन रंगोलियों के चारों ओर वृत्त बनाकर उल्लास पूर्वक नृत्य (तिरुवाथिरा कलि) करती हैं। इस पूक्कलम का प्रारम्भिक स्वरूप पहले (अत्तम के दिन) तो छोटा होता है परन्तु नित्य इसमें एक और वृत्त फूलों का बढ़ा दिया जाता है। ऐसे बढ़ते बढ़ते दसवें दिन (तिरुवोणम) यह पूक्कलम वृहत आकार धारण कर लेता है। इस पूक्कलम के बीच त्रिक्काकरप्पन (वामन अवतार में विष्णु), राजा बलि तथा उसके अंग-रक्षकों की प्रतिष्ठा होती है जो कच्ची मिटटी से बनायीं जाती है।
ओणम में नौका दौड़ जैसे खेलों का आयोजन भी होता है।
ओणम एक सम्पूर्णता से भरा हुआ त्योहार है जो सभी के घरों को सुखों से भर देता है।
इतिहास
ओणम का त्योहार मुख्य रूप से पौराणिक राजा महाबलि के स्मरण और उनके स्वागत में मनाया जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह त्योहार केरळम् के एक अत्यंत लोकप्रिय असुर राजा महाबलि के सुशासन की याद दिलाता है, जिन्होंने कभी इस भूमि पर राज किया था। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा महाबलि की बढ़ती लोकप्रियता और शक्ति से ईर्ष्या के कारण, देवताओं ने उनके शासन को समाप्त करने की योजना बनाई। इसके लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर एक बौने ब्राह्मण के रूप में पृथ्वी पर जन्म लिया। उन्होंने राजा महाबलि की उदारता की परीक्षा लेने के लिए उनसे तीन पग (कदम) भूमि दान में माँगी। चूँकि किसी ब्राह्मण को दान देने से इनकार करना अधर्म माना जाता था, इसलिए राजा महाबलि उनकी इच्छा पूरी करने के लिए सहर्ष तैयार हो गए। वामन ने अपने विशाल रूप में पहले दो कदमों में ही पूरे ब्रह्मांड को माप लिया। तब राजा महाबलि ने अपना वचन निभाने और अपनी प्रजा की रक्षा के लिए अपना सिर वामन के पैर के नीचे रख दिया, जिससे वे पाताल लोक चले गए। राजा महाबलि की इस महान उदारता और आत्मोसर्ग से प्रसन्न होकर, उन्हें साल में एक बार अपनी प्रजा और प्रिय भूमि से मिलने का वरदान मिला। राजा महाबलि की इसी वार्षिक घर वापसी को हर साल केरळम् में ओणम के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
ऐतिहासिक शिलालेखों के अनुसार, यह त्योहार प्राचीन समय में मंदिर अनुष्ठानों और वामन पूजा से जुड़ा हुआ था, जिसके प्रमाण त्रिक्काकरा वामनमूर्ति मंदिर के १०वीं शताब्दी के शिलालेखों में मिलते हैं।Haraniya Krutika Onam: Where Myth & History Meet https://livehistoryindia.com/story/living-culture/onam-where-myth-history-meet Live History India 2017-09-02 लगभग १४वीं शताब्दी के बाद, लोक गाथाओं और कृषक समाज के प्रभाव से यह त्योहार राजा महाबलि केंद्रित एक सामाजिक उत्सव में तब्दील हो गया।Research Desk The myth of Mahabali: Tracing Onam’s origin, evolution, and its subaltern reinterpretation https://indianexpress.com/article/research/the-myth-mahabali-connections-kerala-buddhist-tracing-onams-origin-evolution-8913973/ The Indian Express 2023-08-29
चित्र दीर्घा
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
श्रेणी:संस्कृति
श्रेणी:हिन्दू त्यौहार
श्रेणी:दक्षिण भारतीय त्यौहार