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गुलेल
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गुलेल (Slingshot) thumb प्रक्षेप्य हथियार / खेल उपकरण विश्वव्यापी (आधुनिक रूप 19वीं सदी के मध्य से) लकड़ी, धातु या पॉलीमर (फ्रेम); लेटेक्स या रबर (बैंड); चमड़ा या सिंथेटिक कपड़ा (पाउच) स्टील के छर्रे, सीसे की गोलियां, पत्थर, या मिट्टी की गोलियां 10 से 30 मीटर (सटीक निशाने के लिए)
गुलेल (Slingshot), जिसे ब्रिटिश अंग्रेज़ी में कैटापल्ट भी कहा जाता है, एक छोटा, हाथ से संचालित होने वाला प्रक्षेप्य हथियार है। इसमें मुख्य रूप से एक 'Y' आकार का फ्रेम (जिसे 'फोर्क' कहा जाता है) होता है, जिसके दोनों सिरों पर अत्यधिक प्रत्यास्थ रबर या लेटेक्स के बैंड बंधे होते हैं। इन बैंड्स के दूसरे छोर पर एक छोटा 'पाउच' या थैली जुड़ी होती है, जिसमें प्रक्षेप्य (जैसे पत्थर या धातु के छर्रे) को रखकर पीछे की ओर खींचा जाता है और फिर लक्ष्य की ओर दागा जाता है। अपनी सरलता के बावजूद, एक आधुनिक गुलेल अत्यंत घातक और सटीक मारक क्षमता वाली हो सकती है।Middleton Richard The Practical Guide to Man-Powered Bullets: Catapults, Crossbows, Blowguns, & Air-Rifles Merlin Unwin Books 2005 978-1873674840 45-50
इतिहास और उत्पत्ति
यद्यपि प्राचीन काल से ही 'गोफन' जैसे रस्सी से घुमाकर फेंके जाने वाले हथियारों का उपयोग होता रहा है, लेकिन आधुनिक 'गुलेल' का जन्म अपेक्षाकृत नया है। आधुनिक गुलेल का अस्तित्व 1839 में चार्ल्स गुडइयर द्वारा वल्कनीकृत रबर के आविष्कार के बिना संभव नहीं था।"The History of Slingshots"अगस्त 2026 InternetArchiveBot
गुडइयर की खोज के बाद, जब रबर की लोच और स्थायित्व में सुधार हुआ, तो दुनिया भर में विशेषकर बच्चों और किशोरों ने वाई-आकार की लकड़ी की टहनियों और रबर की पट्टियों का उपयोग करके गुलेल बनाना शुरू कर दिया। 20वीं सदी के मध्य तक, यह व्यावसायिक रूप से निर्मित एक प्रमुख खेल और शिकार उपकरण बन गई।Hunting Slingshotअगस्त 2026 InternetArchiveBot
यांत्रिकी और भौतिकी
गुलेल का कार्य सिद्धांत पूरी तरह से ऊर्जा के रूपांतरण पर आधारित है। यह उपकरण स्थितिज ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है:
जब शूटर पाउच को प्रक्षेप्य के साथ पीछे खींचता है, तो उसकी मांसपेशियों की यांत्रिक ऊर्जा रबर बैंड्स में 'प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा' के रूप में संचित हो जाती है।
जैसे ही पाउच को छोड़ा जाता है, बैंड्स तेज़ी से अपनी मूल अवस्था में सिकुड़ते हैं, और संचित स्थितिज ऊर्जा प्रक्षेप्य की 'गतिज ऊर्जा' में बदल जाती है, जिससे वह उच्च वेग से आगे बढ़ता है।
रबर बैंड जितने मोटे और भारी होंगे, वे उतनी ही अधिक ऊर्जा संचित करेंगे, लेकिन उन्हें खींचने के लिए अधिक शारीरिक बल की भी आवश्यकता होगी।Koehler Jack H. Slingshot Shooting Sling Publishing 2007 978-0976531104 22-26
डिज़ाइन और बैंड के प्रकार
आधुनिक गुलेल के निर्माण में विज्ञान का भरपूर उपयोग किया जाता है। फ्रेम अब केवल लकड़ी के नहीं, बल्कि एल्यूमीनियम, स्टील और उच्च गुणवत्ता वाले पॉलीमर से बनाए जाते हैं। कुछ मॉडलों में कलाई को सहारा देने के लिए 'रिस्ट ब्रेस' भी होता है, जो अधिक बल लगाने में मदद करता है।
मुख्य रूप से दो प्रकार के इलास्टिक बैंड का उपयोग किया जाता है:
ट्यूबलर बैंड: ये रबर की गोल नलियों की तरह होते हैं। ये बहुत टिकाऊ होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं, लेकिन इनकी संकुचन गति थोड़ी धीमी होती है।
फ्लैट बैंड: ये लेटेक्स की चपटी पट्टियाँ होती हैं। ये बहुत तेज़ी से सिकुड़ती हैं, जिससे प्रक्षेप्य को अत्यधिक गति मिलती है, लेकिन ये जल्दी घिस या टूट जाती हैं। निशानेबाज़ी प्रतियोगिताओं में इनका सर्वाधिक उपयोग होता है।Zimmerman Paul The Physics of Elastic Projectile Weapons Journal of Applied Mechanics 45 2 1998 112-118
आधुनिक उपयोग और कानूनी स्थिति
आजकल गुलेल का उपयोग मुख्य रूप से 'टारगेट शूटिंग' (निशानेबाज़ी प्रतियोगिताओं) और 'उत्तरजीविता कौशल' के तहत छोटे जानवरों (जैसे खरगोश या पक्षियों) के शिकार के लिए किया जाता है। सैन्य और गुरिल्ला युद्ध में भी इसका उपयोग ड्रोन्स को गिराने या दंगा नियंत्रण के दौरान पुलिस बलों द्वारा किया गया है।
चूँकि स्टील के छर्रों से लैस एक आधुनिक गुलेल घातक चोट पहुँचा सकती है, इसलिए कई देशों और अमेरिकी राज्यों (जैसे न्यू जर्सी) में रिस्ट-ब्रेस वाली गुलेल को एक प्रतिबंधित हथियार माना जाता है और इसके उपयोग पर सख्त कानूनी कानून लागू हैं।"SECTION 265.01: Criminal possession of a weapon in the fourth degree"
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
विश्व स्लिंगशॉट संघ (WSA) - आधिकारिक नियम और तकनीकें