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गोविंदराव खरे
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सुबेदार गोविंदराव नाईक खरे मराठा साम्राज्य मे पेशवा सरकार के अन्तर्गत रतनगढ़ किले के सूबेदार थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के एक किसान कोली परिवार में हुआ था। खरे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी थे जिन्होने महाराष्ट्र मे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हथियार उठाए थे और ब्रिटिश शासन का अंत घोषित कर दिया था।https://books.google.co.in/books?id=O1QbAAAAIAAJ Maharashtra State Gazetteers: Ahmadnagar 1976 Director of Government Printing, Stationery and Publications, Maharashtra State en
सूबेदार सरदार गोविंदरावजी नाईक खरे वंडकरी अहमदनगर, ब्रिटिश भारत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन हिंदू कोली रामजी भांगरे
१८१८ मे मराठा साम्राज्य और ब्रिटिश सरकार के बीच युद्ध हुआ जिसमें मराठा साम्राज्य खत्म हो गया इसके बाद भी खरे पेशवा के प्रति निष्ठावान रहा। ब्रिटिश सरकार की तरफ़ से खरे को सुबेदार की पदवी के लिए प्रस्ताव आया लेकिन खरे ने इंकार कर दिया। इसके बाद सरकार ने खरे के १२ रिस्तेदारो की जमीन छीन ली जिसपर वो शिवाजी के समय से हक जमाते आए थे साथ ही अंग्रेज और भी स्थानीय लोगों के साथ भी एसा कर रहे थे कारणवश खरे और १२ कोलीयों ने अन्य कोलीयों को एकजुट किया और अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया।https://books.google.co.in/books?id=6T-6AAAAIAAJ Fields and farmers in western India, 1850-1950 Nand Brahma 2003 Bibliomatrix en
विद्रोह
गोविंदराव खरे विद्रोह का एलान करने के पश्चात अपने क्रांतिकारी सेना बनाई और पहाड़ी इलाकों में केंद्र बना लिया। खरे के साथ काफी कोली जुड़े साथ ही कोंकण से आए रामजी भांगरे भी खरे के साथ हो गया और पहली ही बार मे सरकारी खजाने पर हमला बोल दिया। ब्रिटिश सरकार ने कैप्टन मैकिंटोश को ब्रिटिश सेना के साथ बागीयों को पकड़ने भेजा लेकिन मैकिंटोश खरे से लडने मे समर्थ नही था इसलिए उसने पहने बागीयों की पूरी जानकारी जुटानी चाही। मैकिंटोश ने पश्चिमी घाट मे सेना को जानकारी जुटाने में लगा दिया। सभी लोग क्रांतिकारीयों के पक्ष मे थे इसलिए किसी ने भी अंग्रेजों का साथ नही लेकिन कुछ चीतपावन ब्राह्मणों ने अंग्रेजों को काफी जानकारी दी।https://books.google.co.in/books?id=XZNuAAAAMAAJ South India in 1857 War of Independence Divekar V. D. 1993 Lokmanya Tilak Smarak Trust en 21 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20181004185935/https://books.google.co.in/books?id=XZNuAAAAMAAJ 4 अक्तूबर 2018 live
१८३० मे कैप्टन मैकिंटोश ने अकोला की पहाड़ियों से सेना भेजी जहां क्रांतिकारी सेना और ब्रिटिश सेना के बीच मुठभेड़ में ब्रिटिश सेना के कई जवान मारे गए लेकिन कैप्टन मैकिंटोश को कुछ भी हाथ नही लगा। खरे और रामजी भांगरे आसानी से बचकर निकल गए। लेकिन कुछ समय बाद दुबारा मुठभेड़ हुई जहां खरे को बंदी बना लिया गया और फांसी की सज़ा सुनाई गई।https://books.google.co.in/books?id=vZciAAAAMAAJ Tribals in an Urban Setting: A Study of Socio-economic Impact of Poona City on the Mahadeo Kolis Gāre Govinda 1976 Shubhada Saraswat en
संदर्भ