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411 समाचार
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दिबाकर परिड़ा

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दिबाकर परिड़ा ଦିବାକର ପରିଡ଼ା ओड़िआ ३० नवंबर १९११ गड़बाणिकिलो, राणपुर रियासत ४ अप्रैल १९४१ भगलपुर जेल, बिहार फाँसी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी राणपुर प्रजामंडल आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन राणपुर प्रजामंडल हरिहर परिड़ा, तारा देवी दिबाकर परिड़ा (३० नवंबर १९११ – ४ अप्रैल १९४१) ओड़िशा के एक स्वतंत्रता सेनानी और प्रजामंडल आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वे तत्कालीन राणपुर रियासत में राजशाही की निरंकुशता, प्रजा पर लगाए जाने वाले विभिन्न करों तथा जबरन श्रम जैसी प्रथाओं के विरुद्ध चले आंदोलन के प्रमुख संगठकों में थे।Dictionary of Martyrs: India's Freedom Struggle (1857–1947) 4 Indian Council of Historical Research एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार 2019 रघुनाथ महान्ती के साथ वे राणपुर प्रजामंडल आंदोलन के प्रमुख युवा नेताओं के रूप में उभरे। १९३९ में राणपुर में ब्रिटिश राजनीतिक एजेंट मेजर आर. एल. बजेलगेट की मृत्यु के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया। उपलब्ध सरकारी और शोधपरक स्रोतों के अनुसार दिबाकर परिड़ा और रघुनाथ महान्ती को मृत्युदंड दिया गया तथा ४ अप्रैल १९४१ को भगलपुर जेल में फाँसी दी गई।Raghunath Mohanty Azadi Ka Amrit Mahotsav संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकारThe Saga of a Patriot Orissa Review 2006 August प्रारंभिक जीवन दिबाकर परिड़ा का जन्म ३० नवंबर १९११ को तत्कालीन राणपुर रियासत के गड़बाणिकिलो गाँव में हुआ था। वे हरिहर परिड़ा और तारा देवी के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनके पिता हरिहर परिड़ा राणपुर राज्य के प्रशासन से जुड़े थे और उनमें प्रशासनिक अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस था।दास बिनोदिनी The Prajamandala Movement in Orissa: Ranpur in Retrospect Orissa Review 2005 August दिबाकर के पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। पारिवारिक उत्तराधिकार से उन्हें पर्याप्त भूमि-संपत्ति प्राप्त हुई थी, फिर भी उन्होंने राणपुर राज्य की प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी की। इस प्रकार उनका जीवन तत्कालीन रियासत के प्रशासन और वहाँ के सामान्य लोगों की परिस्थितियों से निकटता से जुड़ा रहा। दिबाकर ने अपनी शिक्षा पूरी करने का प्रयास किया, लेकिन पिता की असामयिक मृत्यु के कारण उन्हें कक्षा ११ के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय होते गए। राजनीतिक चेतना राणपुर रियासत में उस समय प्रजा पर विभिन्न प्रकार के कर और उपकर लगाए जाते थे। जबरन श्रम तथा प्रशासनिक अधिकारियों के अत्याचारों के कारण जनता में असंतोष बढ़ रहा था। दिबाकर परिड़ा के परिवार का भी प्रशासनिक अन्याय से सामना हुआ था, जिससे उनके भीतर राजशाही के दमनकारी स्वरूप के प्रति विरोध की भावना विकसित हुई। दिबाकर अपने मित्र और सहकर्मी रघुनाथ महान्ती के साथ राणपुर की जनता को संगठित करने लगे। दोनों ने गाँव-गाँव जाकर लोगों से संपर्क किया और अन्यायपूर्ण राजकीय आदेशों का विरोध करने तथा अपने अधिकारों के लिए संगठित होने का आह्वान किया। राणपुर प्रजामंडल आंदोलन १९३८ में राणपुर में प्रजामंडल का गठन हुआ। संगठन का उद्देश्य रियासत में प्रजा के अधिकारों और उत्तरदायी शासन की माँग को सामने रखना था। राणपुर प्रजामंडल के अध्यक्ष बनमाली राम, उपाध्यक्ष कृपासिंधु मिश्र, सचिव रघुनाथ महान्ती और संगठन सचिव दिबाकर परिड़ा थे।Prajamandala Movement in Ranpur Bijuli Malla National Seminar: Exploring Unsung Chapters of Freedom Struggle of Odisha Gangadhar Meher University दिबाकर और रघुनाथ ने आंदोलन को गाँवों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी गतिविधियों में नागरिक स्वतंत्रता, जंगल और जल-संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार तथा बेठी और भेटी जैसी जबरन श्रम एवं वसूली की प्रथाओं के विरोध की माँग शामिल थी। दिबाकर अपने संगठनात्मक कार्य के साथ-साथ कविताओं और नारों के माध्यम से भी आंदोलन को जनसामान्य तक पहुँचाते थे। भारत सरकार के स्वतंत्रता सेनानी संबंधी विवरण में उल्लेख है कि उन्होंने ऐसी अनेक कविताएँ और नारे लिखे जो राणपुर के आंदोलनकारियों में उत्साह उत्पन्न करते थे। राष्ट्रीय नेताओं से संपर्क राणपुर आंदोलन को व्यापक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने के प्रयासों में दिबाकर परिड़ा और रघुनाथ महान्ती की भूमिका रही। १९३४ में महात्मा गांधी के ओड़िशा दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने राणपुर की परिस्थितियों के बारे में उन्हें जानकारी दी। १९३६ में जवाहरलाल नेहरू के ओड़िशा दौरे के समय भी राणपुर की स्थिति उनके सामने रखी गई थी। १९३९ में दिबाकर और रघुनाथ के नेतृत्व में प्रजामंडल का जनसंपर्क अभियान तेज हुआ। इस दौरान नबाकृष्ण चौधरी, पवित्र मोहन प्रधान, प्राणनाथ पटनायक, गंगाधर पैकराय और मालती चौधरी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं की भागीदारी वाली सभा भी आयोजित की गई। राणपुर में १९३९ का आंदोलन २ जनवरी १९३९ को राणपुर के शासक ने प्रजामंडल को गैरकानूनी घोषित कर दिया और उसके कुछ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके विरोध में बड़ी संख्या में लोग राजमहल के सामने एकत्र हुए और गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की माँग करने लगे। ५ जनवरी १९३९ को आंदोलन ने निर्णायक रूप ले लिया। राणपुर के राजा ने ब्रिटिश राजनीतिक एजेंट मेजर आर. एल. बजेलगेट से सहायता माँगी। बजेलगेट कुछ सशस्त्र बलों के साथ राणपुर पहुँचे। रास्ते में आंदोलनकारियों ने मार्ग को लकड़ियों और अन्य अवरोधों से रोक दिया था। राजमहल के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र थे। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार बजेलगेट और भीड़ के बीच विवाद तथा झड़प हुई। बजेलगेट ने अपनी रिवॉल्वर से गोली चलाई, जिससे एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। इसके बाद उत्तेजित भीड़ ने बजेलगेट पर हमला किया और उनकी मृत्यु हो गई।History of the Freedom Movement in Orissa 4 Odisha Archives / Gopabandhu Academy of Administration 21–22 इस घटना के बाद ब्रिटिश प्रशासन ने राणपुर में व्यापक दमनात्मक कार्रवाई शुरू की। बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया और आंदोलन से जुड़े अनेक लोगों को कारावास तथा अन्य कठोर दंड दिए गए। गिरफ्तारी और मुकदमा मेजर बजेलगेट की मृत्यु के बाद दिबाकर परिड़ा और रघुनाथ महान्ती को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में कुल २६ व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मुकदमा चलाया गया।The Ranpur Prajamandal Movement Orissa Review 2013 AprilThe Story of Freedom Movement in Orissa States 291–292 मुकदमे के लिए विशेष जाँच न्यायालय की व्यवस्था की गई। ब्रह्मपुर के संयुक्त मजिस्ट्रेट बी. शिवरामन ने प्रारंभिक जाँच की। दिबाकर और रघुनाथ के पक्ष में बचाव समिति गठित की गई और उनके पक्ष में वकीलों ने पैरवी की। मुकदमे के अंत में दिबाकर परिड़ा और रघुनाथ महान्ती को मृत्युदंड दिया गया। अन्य कई अभियुक्तों को आजीवन कारावास तथा कुछ को अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई गई। शहादत मृत्युदंड पाए जाने के बाद दिबाकर परिड़ा और रघुनाथ महान्ती को राणपुर जेल से भगलपुर जेल ले जाया गया। उपलब्ध विवरणों के अनुसार दोनों को जेल की मृत्यु-कोठरी में रखा गया था। ४ अप्रैल १९४१ की सुबह भगलपुर जेल में दिबाकर परिड़ा और रघुनाथ महान्ती को फाँसी दे दी गई। उनके शव उनके परिजनों अथवा समर्थकों को नहीं सौंपे गए। राणपुर में दोनों नेताओं की गिरफ्तारी और बाद में फाँसी ने आंदोलनकारियों तथा स्थानीय जनता के बीच गहरा प्रभाव छोड़ा। रघु-दिबाकर दिबाकर परिड़ा और रघुनाथ महान्ती की संयुक्त राजनीतिक गतिविधियों तथा बलिदान के कारण दोनों को लोकप्रिय रूप से रघु-दिबाकर के नाम से याद किया जाता है। राणपुर प्रजामंडल आंदोलन के इतिहास में दोनों की भूमिका एक साथ दर्ज की गई है।The Conflict Between Vedic Aryans and Iranians Journal of Indian History and Culture 21 2 2015 १९३९ के राणपुर आंदोलन में दोनों ने जनता को संगठित करने, प्रजामंडल की गतिविधियों को विस्तार देने और राजशाही के दमन के विरुद्ध जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके बलिदान को ओड़िशा के गड़जात क्षेत्रों में चले प्रजामंडल आंदोलनों के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। विरासत दिबाकर परिड़ा का जीवन ओड़िशा की देशी रियासतों में चले प्रजामंडल आंदोलनों के इतिहास से जुड़ा है। राणपुर आंदोलन ने नागरिक स्वतंत्रता, उत्तरदायी शासन और प्रजा के आर्थिक-सामाजिक अधिकारों के प्रश्नों को प्रमुखता से उठाया। भारत सरकार ने उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के उन सेनानियों में शामिल किया है जिन्होंने राणपुर में राजशाही और औपनिवेशिक प्रशासन के विरुद्ध संघर्ष किया। २०१७ में प्रधानमंत्री द्वारा ओड़िशा के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को सम्मानित किए जाने के अवसर पर दिबाकर परिड़ा और रघुनाथ महान्ती के वंशजों का भी उल्लेख किया गया था।Prime Minister stirs Paika emotion The Telegraph 16 April 2017 ओड़िशा के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में दिबाकर परिड़ा को विशेष रूप से राणपुर प्रजामंडल आंदोलन के युवा संगठक और शहीद के रूप में स्मरण किया जाता है। यह भी देखें ओड़िशा का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन सन्दर्भ Dictionary of Martyrs: India's Freedom Struggle (1857–1947) 4 Indian Council of Historical Research एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार 2019 दास बिनोदिनी The Prajamandala Movement in Orissa: Ranpur in Retrospect Orissa Review 2005 August The Saga of a Patriot Orissa Review 2006 August The Ranpur Prajamandal Movement Orissa Review 2013 April The Conflict Between Vedic Aryans and Iranians Journal of Indian History and Culture 21 2 2015 History of the Freedom Movement in Orissa 4 Odisha Archives / Gopabandhu Academy of Administration Raghunath Mohanty Azadi Ka Amrit Mahotsav संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार बाहरी कड़ियाँ रघुनाथ महान्ती — आजादी का अमृत महोत्सव, भारत सरकार The Prajamandala Movement in Orissa: Ranpur in Retrospect The Saga of a Patriot — Orissa Review History of the Freedom Movement in Orissa https://web.archive.org/web/20240609023457/https://puri.odisha.gov.in/sites/default/files/2023-08/CHAPTER-II_23.pdf 9 जून 2024 श्रेणी:१९११ में जन्मे लोग श्रेणी:१९४१ में निधन श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी:ओड़िशा के स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी:ओड़िशा के शहीद श्रेणी:प्रजामंडल आंदोलन श्रेणी:राणपुर श्रेणी:फाँसी से मृत लोग