411 REFERENCE · Wikipedia
अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून 'जिसे सशस्त्र संघर्ष का कानून या युद्ध के नियम भी कहा जाता है, उन कानूनी नियमों का समूह है जो युद्ध और अन्य सशस्त्र संघर्षों के दौरान पक्षों के आचरण को नियंत्रित करते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय कानून की एक शाखा है जो सशस्त्र संघर्षों के मानवीय प्रभाव को सीमित करने का प्रयास करती है।https://www.jagcnet.army.mil/Sites%5C%5Cio.nsf/0/EEF9422EB2C293B68525805A0063ABED/%24File/LOAC%20Deskbook%20final%20with%202016%20index%20(20%20Sep).pdf Law of Armed Conflict Deskbook The United States Army Judge Advocate General's Legal Center and School 2016 Charlottesville, VA July 18, 2019 March 22, 2023 https://web.archive.org/web/20230322174323/https://www.jagcnet.army.mil/Sites%5C%5Cio.nsf/0/EEF9422EB2C293B68525805A0063ABED/$File/LOAC%20Deskbook%20final%20with%202016%20index%20%2820%20Sep%29.pdf dead
इसका मुख्य उद्देश्य उन व्यक्तियों की रक्षा करना है जो युद्ध में भाग नहीं ले रहे हैं या जिन्होंने लड़ाई में भाग लेना बंद कर दिया है, जैसे कि नागरिक, घायल सैनिक, युद्धबंदी और चिकित्सा कर्मी। साथ ही, यह युद्ध में प्रयुक्त हथियारों, साधनों और युद्ध करने के तरीकों पर भी सीमाएँ निर्धारित करता है, ताकि अनावश्यक पीड़ा और विनाश को कम किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का प्रयोग केवल सशस्त्र संघर्षों की स्थिति में होता है और इसका उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसके मानवीय परिणामों को कम करना है।
जेनेवा कानून और हेग कानून
आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून दो ऐतिहासिक धाराओं से मिलकर बना है:-
हेग कानून — जिसे पहले युद्ध का विधि-सम्मत कानून कहा जाता था।
जेनेवा कानून — जिसे मानवीय कानून भी कहा जाता है।Pictet Jean Humanitarian law and the protection of war victims Sijthoff Leyden 1975 90-286-0305-0 16–17
इन दोनों धाराओं के नाम उन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से लिए गए हैं जो क्रमशः हेग और जेनेवा में आयोजित हुए थे। इन सम्मेलनों के परिणामस्वरूप युद्ध और सशस्त्र संघर्षों से संबंधित महत्वपूर्ण संधियाँ बनीं, जिनमें 1899 और 1907 के हेग सम्मेलन तथा जेनेवा अभिसमय प्रमुख हैं। पहला जेनेवा अभिसमय 1863 में तैयार किया गया था।
दोनों धाराएँ जुस इन बेलो से संबंधित हैं, अर्थात् वे नियम जो यह निर्धारित करते हैं कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान कौन-सी सैन्य कार्रवाइयाँ और तरीके स्वीकार्य हैं।
जहाँ अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून जुस एंड बेलो (jus in bello) युद्ध शुरू हो जाने के बाद उसके संचालन से संबंधित नियमों और सिद्धांतों को नियंत्रित करता है, वहीं जुस एड बेलम (jus ad bellum) यह निर्धारित करता है कि युद्ध का सहारा लेना कब और किन परिस्थितियों में उचित माना जा सकता है। इसमें आक्रामक युद्ध का प्रश्न भी शामिल है। जुस एंड बेलो और जुस एड बेलम मिलकर युद्ध के कानून की दो प्रमुख शाखाएँ बनाते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्षों के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करती हैं।
यह कानून उन राज्यों के लिए बाध्यकारी होता है जो संबंधित संधियों के पक्षकार हैं। इसके अतिरिक्त, युद्ध से संबंधित कई प्रथागत और अलिखित नियम भी मौजूद हैं, जिनकी व्याख्या और पुष्टि नूर्नबर्ग मुकदमे के दौरान की गई थी।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्षों और आंतरिक (गैर-अंतरराष्ट्रीय) सशस्त्र संघर्षों के बीच स्पष्ट भेद करता है तथा दोनों परिस्थितियों के लिए अलग-अलग नियम लागू करता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:जेनेवा कानून