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अवधी साहित्य
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भारत के अवध क्षेत्र की भाषा अवधी कहलाती है, जो राष्ट्रभाषा हिन्दी की एक उपभाषा है।http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement1.htm 2001 Census 6 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20080201193939/http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement1.htm 1 फ़रवरी 2008 live अवधी का प्राचीन साहित्य बड़ा संपन्न है। इसमें भक्ति काव्य और प्रेमाख्यान काव्य दोनों का विकास हुआ।
इतिहास
भक्तिकाव्य और प्रेमाख्यान काव्य, प्राचीन अवधी साहित्य की दो शाखाएँ हैं।
भक्तिकाव्य
200px|thumbnail| अवधी में रचित रामचरितमानस ग्रंथ के रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास
भक्तिकाव्य का शिरोमणि ग्रंथ गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ है। भक्तिकाव्य में गोस्वामी तुलसीदास का रामचरितमानस (संवत 1631) अवधी साहित्य की प्रमुख कृति है। इसकी भाषा संस्कृत शब्दावली से भरी है। रामचरितमानस के अतिरिक्त तुलसीदास ने अन्य कई ग्रंथ अवधी में लिखे हैं। इसी भक्ति साहित्य के अंतर्गत लालदास का "अवधबिलास" आता है। इसकी रचना संवत् 1700 में हुई। इनके अतिरिक्त कई और भक्त कवियों ने रामभक्ति विषयक ग्रंथ लिखे।Evolution of Awadhi (a branch of Hindi) https://web.archive.org/web/20140809014442/http://books.google.co.in/books?id=WfkWvgqk5c4C&lpg=PP1&pg=PP1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false 9 अगस्त 2014 By Baburam Saksena
संत कवियों में बाबा मलूकदास भी अवधी क्षेत्र के थे। इनकी बानी का अधिकांश अवधी में है। इनके शिष्य बाबा मथुरादास की बानी भी अधिकतर अवधी में है। बाबा धरनीदास यद्यपि छपरा जिले के थे तथापि उनकी बानी अवधी में प्रकाशित हुई। कई अन्य संत कवियों ने भी अपने उपदेश के लिए अवधी को अपनाया है।
यहां पर यह ध्यान देने योग्य है कि सूरजदासhttp://bidesia.co.in/anam-gumnam-badnam.php?subaction=showfull&id=1338969841&archive=&start_from=&ucat=11& तुलसीदास से सैकड़ा साल पहले भी अवधि में हुई थी रामकथा की रचना hi 7 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20160304235740/http://bidesia.co.in/anam-gumnam-badnam.php?subaction=showfull&id=1338969841&archive=&start_from=&ucat=11& 4 मार्च 2016 dead की ‘रामजन्म’ (गोस्वामी तुलसीदास के पूर्व हुए थे सूरजदास), ईश्वरदास की सत्यवती, कुतुबत का मिरगावत, लालचदास का हरिचरित, संवत 1558 में पुरुषोत्तम दास रचित जैमिनी पुराण, मंझन की मधुमालती, अमीर खुसरो व अब्दुलरहीम खानखाना की रचनाओं से अवधी को पूर्व में जो प्रतिष्ठा प्राप्त हुई थी, उसे आज रचनाशीलता के जरिए संरक्षित करने की जरूरत है।
नरोत्तमदास की संवत १६०५ में रचित सुदामा चरित काव्य-ग्रंथ अवधी में हैं।
प्रेमाख्यान काव्य
thumb|रानी नागमती अपने तोते से पूछती है, "मुझमें और पद्मावती में कौन अधिक सुन्दर है" ? वह तोता जो उत्तर देता है वह रानी को अच्छा नहीं लगता। ; पद्मावत की पाण्डुलिपि का एक उदाहरण'', 1750 ई०Padmavat https://web.archive.org/web/20131007030433/http://dsal.uchicago.edu/reference/gazetteer/pager.html?objectid=DS405.1.I34_V02_465.gif 7 अक्तूबर 2013 from The Imperial Gazetteer of India, 1909, v. 2, p. 430.Love's Subtle Magic: An Indian Islamic Literary Tradition by Aditya Behl, Oxford university Press (2012)Hayate Syed Ashraf Jahangir Semnani by Syed Waheed Ashraf published 1975
प्रेमाख्यान काव्य में सर्वप्रसिद्ध ग्रंथ मलिक मुहम्मद जायसी रचित "पद्मावत" है, जिसकी रचना "रामचरितमानस" से 34 वर्ष पूर्व हुई। दोहे चौपाई का जो क्रम "पद्मावत" में है प्राय: वही "मानस" में मिलता है। प्रेमाख्यान काव्य में मुसलमान लेखकों ने सूफी मत का रहस्य प्रकट किया है। इस काव्य की परंपरा कई सौ वर्षों तक चलती रही। मंझन की "मधुमालती", उसमान की "चित्रावली", आलम की "माधवानल कामकंदला", नूरमुहम्मद की "इंद्रावती" और शेख निःसार की "यूसुफ जुलेखा" इसी परंपरा की रचनाएँ हैं। शब्दावली की दृष्टि से ये रचनाएँ हिंदू कवियों के ग्रंथों से इस बात में भिन्न हैं कि इसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों की उतनी प्रचुरता नहीं है। प्रेमाख्यान का प्रतिनिधि ग्रंथ मलिक मुहम्मद जायसी रचित ‘पद्मावत’ है, जिसकी रचना ‘रामचरितमानस’ से चौंतीस वर्ष पहले हुई। अवधी की यह संपन्न परंपरा आज भी चली आ रही है।History of Hindi language https://web.archive.org/web/20150924001949/http://www.esamskriti.com/essays/docfile/14_395.doc 24 सितंबर 2015 , Compiled by Sanjeev Nayyar, March 2002
प्राचीन अवधी साहित्य में अधिकतर रचनाएँ देशप्रेम, समाजसुधार आदि विषयों पर और मुख्य रूप से व्यंग्यात्मक हैं। कवियों में प्रतापनारायण मिश्र, बलभद्र दीक्षित "पढ़ीस", वंशीधर शुक्ल, मृगेश, रमई काका और शारदाप्रसाद "भुशुंडि" विशेष उल्लेखनीय हैं।
प्रबंध की परंपरा में "रामचरितमानस" के ढंग का एक महत्वपूर्ण आधुनिक ग्रंथ द्वारिकाप्रसाद मिश्र का "कृष्णायन" है। इसकी भाषा और शैली "मानस" के ही समान है और ग्रंथकार ने कृष्णचरित प्राय: उसी तन्मयता और विस्तार से लिखा है जिस तन्मयता और विस्तार से तुलसीदास ने रामचरित अंकित किया है। द्वारिकाप्रसाद मिश्र ने इस ग्रंथ की रचना द्वारा यह सिद्ध कर दिया है कि प्रबंध के लिए अवधी की प्रकृति आज भी वैसी ही उपादेय है जैसी तुलसीदास के समय में थी।
वर्तमान में अवधी साहित्य
पढ़ीस, मृगेश, वंशीधर शुक्ल, रमई काका, पं.द्वारिका प्रसाद मिश्र, विश्वनाथ पाठक, त्रिलोचन शास्त्री, डॉ॰ श्यामसुंदर मधुप, बेकल उत्साही, पारस भ्रमर, विकल गोंडवी, जुमई खां आजाद, आद्या प्रसाद उन्मत, निर्झर प्रतापगढ़ी, असविंद द्विवेदी, जगदीश पीयूष, विक्रम मणि त्रिपाठी डॉ॰ विद्या विंदु सिंह, डॉ. शिवम तिवारी जैसे कई अनेक रचनाकार है, जिनका अवधी साहित्य में अमूल्य योगदान रहा हैं।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
रामचरितमानस
पद्मावत
बाहरी कड़ियाँ
अवधी साहित्य कोश
अवधी भाषा
अवधी को भूला अवध, मगर नेपाल में जिंदा
अवधी भाषा-प्रेम (अनुराग का चिट्ठा)
अवधी ग्रन्थावली (गूगल पुस्तक)
अवधी ग्रन्थावली, भाग - २ (गूगल पुस्तक ; लेखक - जगदीश पीयूष)
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