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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बापूजी भांगरे

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पाठ=Bapuji Bhangare|अंगूठाकार|Bapuji Bhangare Top 10 Lesser Known Freedom Fighters Of Maharashtra Niju Ani Top 10s Only https://top10sonly.com/top-10-people/top-10-lesser-known-freedom-fighters-of-maharashtra/ नाईक बापूजी राव भांगरे (जन्म : तिथि - अज्ञात ; सातेवाड़ी, अकोला -- मृत्यु : नवम्बर १८४८ ) भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी थे।https://books.google.co.in/books?id=q9hGAAAAMAAJ Sahyādrītīla ādivāsī, Mahādevakoḷī Gāre Govinda 2003 Ādima Sāhitya mrhttps://books.google.co.in/books?id=WtDQDwAAQBAJ&dq=bapu+bhangre&source=gbs_navlinks_s MAHATMA JYOTIRAO PHULE- english Kulkarni-Pathare Dr Ravindra Thakur Translated From MARATHI to ENGLISH by Reshma 2020-02-17 Mehta Publishing House 978-93-5317-404-0 enhttps://books.google.co.in/books?id=8EsfAQAAIAAJ Feeding the Baniya: Peasants and Usurers in Western India Hardiman David 1996 Oxford University Press 978-0-19-563956-8 en इनका जन्म ही एक क्रांतिकारी कोली परिवार मे हुआ था। बापूजी भांगरे के पिताजी रामजी भांगरे जो मराठा साम्राज्य मे सुबेदार थे ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और उनको अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह पर सेल्यूलर जेल मे काले पानी की सजा सुनाई गई थी साथ ही भांगरे के दादाजी के सगे भाई वालोजी भांगरे भी क्रांतिकारी थे जिन्होने पेशवा के खिलाफ विद्रोह किया था और तोप से उड़ा दिया गया इतना ही नही बापूजी भांगरे के साथ सगे भाई राघोजी भांगरे ने भी अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए थे और शहिदी प्रात की।https://books.google.co.in/books?id=SoNuAAAAMAAJ Nineteenth Century History of Maharashtra: 1818-1857 Sunthankar B. R. 1988 Shubhada-Saraswat Prakashan 978-81-85239-50-7 enhttps://books.google.co.in/books?id=5kMrsTj1NeYC&dq=%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%82+%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%87&source=gbs_navlinks_s Caste, Conflict and Ideology: Mahatma Jotirao Phule and Low Caste Protest in Nineteenth-Century Western India O'Hanlon Rosalind 2002-08-22 Cambridge University Press 978-0-521-52308-0 en नाईक बापूजीराव रामजीराव भांगरे thumb बापूजी भांगरे के भाई राघोजी भांगरे के समाधि के महाराष्ट्र पुलिस सलामी देते हुए वंडकरी देवगांव, अकोले, मराठा साम्राज्य १८ अगस्त १८४५ सेंट्रल जेल , अहमदनगर, ब्रिटिश भारत भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन हिन्दू कोली रामजी भांगरे 1818 मे जब मराठा साम्राज्य ब्रिटिश सरकार द्वारा हराया जा चुका था और ब्रिटिश राज स्थापित किया जा रहा था तो ब्रिटिश सरकार को महाराष्ट्र मे जगह जगह विद्रोहों का सामना करना पड़ा जिनमे से एक तरफ विद्रोह बापूजी के पिताजी रामजी भांगरे के ने दहकाया हुआ था रामजी भांगरे की मृत्यु के पश्चात स्वतंत्रता की चिनगारी को उनके बेटे बापूजी भांगरे और राघोजी भांगरे ने व्यापक रुप दे दिया। क्रांतिकारी गतिविधियाँ १८४४ मे बापूजी भांगरे ने अपने भाई राघोजी भांगरे के साथ मिलकर क्रांतिकारी लोगों को इकट्ठा करके एक क्रांतिकारी सेना बनाई। बापूजी का मुख्यालय उत्तर-पश्चिम पूना का पहाड़ी क्षेत्र था। बापूजी भांगरे ने ब्रिटिश आधिन क्षेत्रों मे हमले करने सुरू कर दिये जो की ब्रिटिश सरकार को विफल करने का प्रयास था।https://books.google.co.in/books?id=t6U5AQAAIAAJ Itihas 1973 enhttps://books.google.co.in/books?id=XZNuAAAAMAAJ South India in 1857 War of Independence Divekar V. D. 1993 Lokmanya Tilak Smarak Trust en 20 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20181004185935/https://books.google.co.in/books?id=XZNuAAAAMAAJ 4 अक्तूबर 2018 live बापूजी भांगरे ने सरकारी खजाने, सरकारी कार्यालयों और सरकारी बंगलों पर हमला बोल दिया।https://books.google.co.in/books?id=IRpuAAAAMAAJ Mahārāshṭragāthā Ghodke H. M. 2000 Rājahãsa Prakāśana mr कुछ वनिया और चीतपावन ब्राह्मणों के प्रयाश पर ब्रिटिश सरकार ने बापूजी भांगरे की मां को बिच गांव मे प्रताड़ित किया एवं पिटाई लगा दी जिसके पश्चात बापूजी भांगरे ने दो बार गांव के वनिया और चीतपावन ब्राह्मणों की नाक और कान काट दिए जिसके बाद बापूजी भांगरे को कुख्यात डकैत घोषित कर दिया गया। ब्रिटिश सरकार ने कैप्टन गिवेर्ण के नेतृत्व मे ब्रिटिश सेना भेजी और मुठभेड़ में बापूजी भांगरे के ७८ साथी पकड़े गए परंतु बापूजी भांगरे को पकड़ने में असफल रहे।https://books.google.co.in/books?id=QNA-AQAAIAAJ Histories for the Subordinated Hardiman David 2007 Seagull Books 978-1-905422-38-8 en १८४५ मे बापूजी भांगरे के साथ ओर भी क्रांतिकारी लोग मिल ल गए। बापूजी भांगरे के विद्रोह ने व्यापक रूप धारण कर लिया एवं पूणे से सतारा तक फैल गया। ब्रिटिश सरकार ने कुछ लालची स्थानिय लोगों की मदद लेनी चाही परंतु कामयाबी नहीं मिली लेकिन कुछ रमोसी जाती के लोगों ने ब्रिटिश सरकार का पूरा साथ दिया जिसके चलते १८ अगस्त १८४५ को ब्रिटिश सेना ने कैप्टन गिवर्ण के नेतृत्व में बापूजी भांगरे और उसके कुछ साथीयों को पकड लिया एवं फांसी पर लटका दिया जिसके फलस्वरूप विद्रोह का ओर आक्रामक रुख हो गया एवं ब्रिटिश आधिन कई गांवों को लुट लिया गया, अंग्रेजों के दफ्तरों को लुट लिया गया और एक ब्रिटिश प्रशासक को मार दिया गया।https://books.google.co.in/books?id=PFY9fz68KEsC&dq=bapu+bhangre&source=gbs_navlinks_s Mahatma Jotirao Phooley: Father of the Indian Social Revolution Keer Dhananjay 1997 Popular Prakashan 978-81-7154-066-2 en संदर्भ