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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कुमारपाल

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गुजरात के चालुक्य राजा 1143 - 1172 जयसिंह सिद्धराज अजयपाल सोलंकी वंश thumb|right|300px|श्री तरंग तीर्थ या तरंगा मंदिर जिसका निर्माण कुमारपाल ने करवायाकुमारपाल चौलुक्य (सोलंकी) राजवंश के राजा थे। इनके राज्य की राजधानी गुजरात के अनहिलवाडा (आधुनिक काल में सिद्धपुर पाटण) में थी। कुछ विद्वानों के अनुसार इनका जन्म विक्रम संवत ११४९ में, राज्याभिषेक ११९९ में और मृत्यु १२३० में हुई। ईस्वी संवत के अनुसार उनका राज्य ११३० से ११४० माना जाता है। तदनुसार उनके जन्म का समय ईसा के पश्चात ११४२ से ११७२ तक सिद्ध किया गया है। पालवंश के राजा भारतीय संस्कृति, साहित्य और कला के विकास के लिए जाने जाते हैं।नाहर डॉ॰ रतिभानु सिंह प्राचीन भारत का राजनैतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास १९७४ किताब महल इलाहाबाद, भारत ५९४ editor: १ फरवरी २००८ इस परंपरा का पालन करते हुए कुमारपाल ने भी शास्त्रों के उद्वार के लिये अनेक पुस्तक भंडारों की स्थापना की, हजारों मंदिरों का जीर्णोद्धार किया और नये मंदिर बनवाकर भूमि को अलंकृत किया। उसको वीरावल के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धारकर्ता भी माना गया है। उसने जिन मंदिरों का निर्माण किया उनमें १२२१ में निर्मित गुजरात का तरंगा मंदिरhttp://www.jainjagat.com/viewtemple.php/Tirthankars/Ajitnath/54 Shri Taranga Teerth १ फरवरी २००८ पीएचपी जैनजगत.ऑर्ग अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20060813195622/http://www.jainjagat.com/viewtemple.php/Tirthankars/Ajitnath/54 13 अगस्त 2006 dead, भगवान शांतिनाथ का मंदिरhttp://www.pilgrimage-india.com/jain-pilgrimage/jain-tirth-yatra.html Jain Tirth Yatra १ फरवरी २००८ एचटीएमएल पिलग्रिमेजइंडिया.कॉम अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20080219092232/http://www.pilgrimage-india.com/jain-pilgrimage/jain-tirth-yatra.html 19 फ़रवरी 2008 dead तथा श्री तलज तीर्थhttp://www.jainjagat.com/viewtemple.php/Tirthankars/Pushpadanta(Suvidhinatha)/29 Shri Talaja Teerth १ फरवरी २००८ पीएचपी जैनजगत.कॉम अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20060813185109/http://www.jainjagat.com/viewtemple.php/Tirthankars/Pushpadanta(Suvidhinatha)/29 13 अगस्त 2006 dead प्रसिद्ध है। यही नहीं हथकरघा तथा अन्य हस्तकलाओं का भी कुमारपाल ने बहुत सम्मान और विकास किया। कुमारपाल के प्रयत्नों से पाटण पटोला (रेशम से बुना हुआ विशेष कपड़ा तथा साड़ियाँ) का सबसे बड़ा केन्द्र बना और यह कपड़ा विश्वभर में अपनी रंगीन सुंदरता के कारण जाना गया।http://www.nif.org.in/patan Adding life to a centuries’ old dyeing art-Patan १ फरवरी २००८ निफ़.ऑर्ग.इन. अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20160304225201/http://nif.org.in/patan 4 मार्च 2016 dead अनेक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे गए और गुजरात जैन धर्म, शिक्षा और संस्कृति का प्रमुख केन्द्र बन गया।http://www.jaintirths.com/general/jainpatrons.htm Jain Tirths १ फरवरी २००८ एचटीएम जैनतीर्थ्स.कॉम अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20080530001921/http://www.jaintirths.com/general/jainpatrons.htm 30 मई 2008 dead उसने पशुवध इत्यादि बंद करवा के गुजरात को अहिंसक राज्य घोषित किया। उसकी धर्म परायणता की गाथाएँ आज भी अनेक जैन-मंदिरों की आरती और मंगलदीवो में आदर के साथ गाई जाती हैं।http://www.geocities.com/bhavna_shah/AratiMangalDivo.htm Ärati & Mangal Deevo १ फरवरी २००८ भावना शाह अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20040914091138/http://www.geocities.com/bhavna_shah/AratiMangalDivo.htm 14 सितंबर 2004 dead इन्होंने स्वर्गीय महाराजा सिद्धराज जयसिंह जी द्वारा नाराज राजपुत सरदार जो की आबू नरेश महाराजा विक्रमसिंह परमार के राज में सन 1191 से 1199 राजपुत घाँची जाति ग्रहण किये हुए ठहरे थे, उन सभी सरदारों को सन 1199 में उन्होंने सभी 14 जातियों के सरदारो को अहिलनवाड़ा बुलाकर पुनः लौटने का आग्रह किया गया पर उनमें से कुछ सरदार पुनः अहिलनवाड़ा जाकर अपनी मूल पहचान ग्रहण कर ली व बाकी सरदारो ने क्षत्रिय लाठेचा सरदार राजपुत घाँचीजाति के रूप में राजपुताना में ही रहना स्वीकार किया जब कुमरपाल के राज्य की सीमा जैसलमेर तक लगने लगी तो उन्होंने अपने द्वारा स्थापित क्षत्रिय सरदारो के लिए मारवाड़ रियासत के पाली कस्बे में उन क्षत्रिय लाठेचा सरदारो के लिए इष्टदेव सोमनाथ महादेव मंदिर का निर्माण अपने राजकोषीय व्यय से करवाया ताकि सभी 13 जातियों के सरदार अपने इष्टदेव को राजपुताना में रहते हुए याद कर सके । कुमारपाल चरित संग्रहhttp://www.jainlibrary.org/jlib/Kumarpal_Charitrasamgraha.pdf कुमारपाल चरित संग्रह १ फरवरी २००८ पीडीएफ़ जैनलाइब्रेरी.ऑर्ग https://web.archive.org/web/20160304110117/http://www.jainlibrary.org/jlib/Kumarpal_Charitrasamgraha.pdf 4 मार्च 2016 dead नामक ग्रंथ में लिखा गया है कि वह अद्वितीय विजेता और वीर राजा था। उनकी आज्ञा उत्तर में तुर्कस्थान, पूर्व में गंगा नदी, दक्षिण में विंद्याचल और पर्श्विम में समुद्र पर्यत के देशों तक थी। राजस्थान इतिहास के लेखक कर्नल टॉड ने लिखा है- 'महाराजा की आज्ञा पृथ्वी के सब राजाओं ने अपने मस्तक पर चढाई।' (वेस्टर्न इण्डिया - टॉड) वह जैन धर्म के प्रसिद्ध आचार्य हेमचंद्र का शिष्य थाhttp://www.jainworld.com/education/juniors/junles23.htm ACHARYA HEMACHANDRA १ फरवरी २००८ एचटीएम जैनवर्लड.कॉम अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20071216100720/http://www.jainworld.com/education/juniors/junles23.htm 16 दिसंबर 2007 dead वह जैन धर्म के प्रति गहरी आस्था रखता था और जीवों के प्रति दयालु तथा सत्यवादी था। इस परंपरा के अनुसार उसने अपनी धर्मपत्नी महारानी मोपलदेवी की मृत्यु के बाद आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत पालन किया तथा जीवन में कभी भी मद्यपान अथवा मांस का भक्षण नहीं किया। मृत्यु के समय उसकी अवस्था ८० वर्ष थी। सन्दर्भ इन्हें भी देखें सोलंकी वंश yes श्रेणी:कुमारपाल श्रेणी:गुजरात के शासक श्रेणी:१२वीं शताब्दी के भारतीय शासक श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना