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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ज्वालामुखी अश्मक

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जुलाई 2026 ज्वालामुखी अश्मक अथवा लैपिली (अंग्रेज़ी: Lapilli) टेफ़्रा का एक आकार-वर्ग है। यह ऐसे छोटे ज्वालामुखीय कण होते हैं जो ज्वालामुखी विस्फोट या कभी-कभी उल्कापिंड टक्कर के दौरान वायु में उछलकर भूमि पर गिरते हैं। लैपिली शब्द लैटिन भाषा के "छोटे पत्थर" अर्थ वाले शब्द से लिया गया है।Bron K.A. Reimold W.U. & Gibson R.L. Large Meteorite Impacts and Planetary Evolution IV https://archive.org/details/largemeteoriteim0000inte 2010 The Geological Society of America 222 978-0-8137-2465-2 thumb|right|340px|किलाउआ ज्वालामुखी पर पाए गए ज्वालामुखी अश्मक इन कणों में प्यूमिस, स्कोरिया, ज्वालामुखीय काँच, शैल-टुकड़े, क्रिस्टल अथवा राख से बने गोलिकीय कण सम्मिलित हो सकते हैं। आकार के आधार पर अश्मक का व्यास सामान्यतः 2 से 64 मिलीमीटर के बीच माना जाता है।Fisher R. V. 1961 Proposed classification of volcaniclastic sediments and rocks https://archive.org/details/sim_geological-society-of-america-bulletin_1961-09_72_9/page/1409 Geological Society of America Bulletin 72 9 1409–1414 10.1130/0016-7606(1961)72[1409:PCOVSA]2.0.CO;2 64 मिलीमीटर से बड़े ज्वालामुखीय कणों को ज्वालामुखीय बम या ज्वालामुखीय खंड कहा जाता है, जबकि 2 मिलीमीटर से छोटे कणों को ज्वालामुखीय राख की श्रेणी में रखा जाता है।VHP Photo Glossary: Lapilli https://volcanoes.usgs.gov/images/pglossary/lapilli.php यूएसजीएस निर्माण ज्वालामुखी अश्मक सामान्यतः विस्फोट के दौरान बाहर निकले पिघले या अर्ध-पिघले लावा के ठंडा होने से बनते हैं। तेज विस्फोट के कारण ये अनियमित, कोणीय, गोलाकार या बूंद जैसी आकृतियों में पाए जा सकते हैं। यदि इनका निर्माण सिलिका-समृद्ध लावा से हो तो ये प्रायः प्यूमिस के रूप में तथा मैफिक लावा से बनने पर स्कोरिया के रूप में मिलते हैं। कभी-कभी ज्वालामुखीय विस्फोट के दौरान आसपास की चट्टानों के टुकड़े भी उड़कर अश्मक आकार के कणों में बदल जाते हैं। इन कणों के जमाव से बनने वाली चट्टानों को “अश्मक टफ” कहा जाता है, जो विशेष रूप से रयोलाइट, एंडेसाइट तथा डेसाइट ज्वालामुखीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं। यदि गर्म अश्मक परतें जमने के बाद आपस में चिपक जाएँ, तो “वेल्डेड टफ” नामक कठोर चट्टान बन सकती है। इनमें चपटे अश्मक और ज्वालामुखीय कणों की विशिष्ट बनावट दिखाई देती है। अभिवृद्धि अश्मक thumb|अभिवृद्धि अश्मक राख की परतों से बने गोलाकार ज्वालामुखीय कणों को अभिवृद्धि अश्मक (Accretionary lapilli) कहा जाता है। इनका निर्माण ज्वालामुखीय बादलों में उपस्थित नमी के कारण होता है, जहाँ गीली राख छोटे कणों के चारों ओर परत-दर-परत जमती जाती है। यह प्रक्रिया ओलों के निर्माण से मिलती-जुलती मानी जाती है। कुछ अभिवृद्धि अश्मकों के केंद्र में शैल या क्रिस्टल होते हैं जिन पर राख की परतें जमी होती हैं। इन्हें “आवृत अश्मक” भी कहा जाता है और ये प्रायः जल-संपर्क वाले ज्वालामुखीय विस्फोटों में बनते हैं। महत्व ज्वालामुखी अश्मक ज्वालामुखीय गतिविधियों के अध्ययन में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनके आकार, संरचना और रासायनिक गुणों से वैज्ञानिक ज्वालामुखीय विस्फोट की तीव्रता, लावा के प्रकार तथा विस्फोट की प्रकृति का अनुमान लगाते हैं। भूविज्ञान और ज्वालामुखी विज्ञान में इनका विशेष अध्ययन किया जाता है। इन्हें भी देखें स्कोरिया सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ lapilli Volcanic Materials Identification http://facweb.bhc.edu/academics/science/harwoodr/GEOL101/Labs/VolcanicMaterials/ 16 जून 2026 16 दिसंबर 2005 https://web.archive.org/web/20051216120850/http://facweb.bhc.edu/academics/science/harwoodr/GEOL101/Labs/VolcanicMaterials/ dead Tephra fall from Mt. St. Helens https://pubs.usgs.gov/pp/p1563/ Category:ज्वालामुखी विज्ञान Category:भूविज्ञान