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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

आव्यूह

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thumb|247px|right|आव्यूह की संरचना गणित में आव्यूह एक अदिश राशियों से निर्मित आयताकार रचना है। यह आयताकार रचना लघु कोष्ठक "()", दोहरे दण्ड "|| ||" अथवा दीर्घ कोष्ठक "[ ]" के अन्दर बंद होती है। इसमें संख्याओं का एक विशेष प्रकार का विन्यास किया जाता है, अत: इसे आव्यूह, या मैट्रिक्स, की संज्ञा दी गई है। मैट्रिक्स के अवयव संख्याएँ होती हैं किन्तु ये ऐसी कोई भी अमूर्त वस्तु हो सकती है जिनका गुणा किया जा सके एवं जिन्हें जोड़ा जा सके। परिभाषा सर्वप्रथम सिल्वेस्टर (1850 ई.) ने आव्यूह की यह परिभाषा दी थी कि संख्याओं के किसी आयताकार या वर्गाकार सरणी को, जिसमें से सारणिक (determinants) बन सकें, आव्यूह कहते हैं। आधुनिक समय में आव्यूह को एक अतिसंमिश्र (hypercomplex) संख्या के रूप में मानते हैं। इस दृष्टिकोण के प्रवर्तक हैं मिल्टन (1853 ई.) और केली (1858 ई.)।Anton, Howard (1987), Elementary Linear Algebra (5th ed.), New York: Wiley, ISBN 0-471-84819-0 आकार नाम mohit lodhi =!:'[light Color. Green'green:light ] ! आकार उदाहरण विवरण पंक्ति आव्यूह 1 × n इसमें ऐसे आव्यूह आते हैं, जिसमें केवल एक ही पंक्ति होते हैं। स्तम्भ आव्यूह n × 1 इसमें ऐसे आव्यूह आते हैं, जिसमें केवल एक ही स्तम्भ होते हैं। वर्ग आव्यूह n × n इसमें ऐसे आव्यूह आते हैं, जिसमें एक से अधिक पंक्ति और स्तम्भ होते हैं। अथवा इसमें स्तंभों तथा पक्तियों की संख्या समान होती है । इसे कुछ स्थितियों में अदिश आव्यूह, शून्य आव्यूह त्रिभुजीय आव्यूह भी कहते हैं। संकेत चिन्ह किसी भी आव्यूहों को लिखते समय उसे कोष्ठक में लिखा जाता है। मुख्यतः आव्यूह को "A" से दर्शाया जाता है। वहीं a11 या a1,1 से पंक्ति और स्तम्भों के मान को दिखाया जाता है। ऊपर दिये गए उदाहरण में a11 पहले पंक्ति में और पहले स्तम्भ में है। इस कारण इसे 1,1 लिख कर दर्शाया गया है। वहीं इसी प्रकार से a12 या a1,2 पहले पंक्ति में है और दूसरे स्तम्भ में है। दूसरे स्तम्भ में होने के कारण अन्त में 2 लिखा गया है। पंक्ति के सभी मानों को m और स्तम्भ के सभी मानों को n से दर्शाया जाता है। रैखिक परिवर्तन क्षैतिज कतरनी m=1.25. क्षैतिज व्यवस्था दबाव मानचित्रण r=3/2 प्रक्षेपित 3/2परिक्रमण π/6R = 30° 175px 150px 150px 125px 125px इतिहास आव्यूह का बहुत लम्बा इतिहास है, लेकिन रेखीय गणना हेतु इसका उपयोग वर्ष 1800 के बाद ही शुरू हो पाया। चीनी पाठ्य "गणित कला के नौ अध्याय" दूसरी सदी में लिखा गया इसका पहला उदाहरण था। जिसमें इसे एक प्रकार के व्यूह संरचना के रूप में हल किया गया था। इसके बाद वर्ष 1545 में इटली के गणितज्ञ गिरोलामो कार्डनो ने इस विधि को चीन से ले कर यूरोप में अर्स मेग्ना के नाम से प्रकाशित किया।Discrete Mathematics 4th Ed. Dossey, Otto, Spense, Vanden Eynden, Published by Addison Wesley, October 10, 2001 ISBN 978-0321079121 | p.564-565 जापान के गणितज्ञ सेकी भी इस तरह के विधि से वर्ष 1683 में कई गणितीय समीकरण हल किए। Wang Ling (historian) Science and Civilisation in China http://books.google.com/books?id=jfQ9E0u4pLAC&pg=PA117 III 1959 केंब्रिज विवि केंब्रिज 9780521058018 117 12 दिसंबर 2015 https://web.archive.org/web/20170118193516/https://books.google.com/books?id=jfQ9E0u4pLAC&pg=PA117 18 जनवरी 2017 live इसके बाद डच गणितज्ञ जेन डे विट्ट ने इसका एक परिवर्तित रूप 1659 में एक पुस्तक में प्रकाशित किया।Discrete Mathematics 4th Ed. Dossey, Otto, Spense, Vanden Eynden, Published by Addison Wesley, October 10, 2001 ISBN 978-0321079121 | p.564 इन्हें भी देखें व्यूहों की सूची सारणिक सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ आव्युह वियोजन (matrix decomposition) (गणितांजलि) श्रेणी:बीजगणित श्रेणी:आव्यूह सिद्धान्त