411 REFERENCE · Wikipedia
संदेश रासक
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
सन्देश रासक, अपभ्रंश में रचित एक एक काव्य है जिसकी रचना १०००-११०० ई के आसपास मुल्तान के कवि अब्दुर्रहमान ने किया था। यह ग्रन्थ उस अपभ्रंश में है जिससे लहन्दा, पंजाबी और सिन्धी आदि पश्चिमी भारतीय भाषाएँ जन्मी हैं।
इस ग्रंथ की पाण्डुलिपियाँ मुनि जिनविजय ने जैन पुस्तकालयों से प्राप्त की थी। मुनि जिनविजय का विचार है कि यह कृति ११९२ में गोरी के आक्रमण के पहले की है और तब तक मुल्तान एक प्रमुख हिन्दू तीर्थ हुआ करता था। पाण्डुलिपि में किसी जैन पण्डित द्वारा १४६५ में संस्कृत में लिखी व्याख्या भी सम्मिलित है।
सन्देश रासक, रासक काव्यरूप की विशेषताओं से संयुक्त तीन प्रक्रमों में विभाजित 223 छंदों का एक छोटा-सा विरह काव्य है, जिसमें कथावस्तु का कोई विशेष महत्त्व नहीं है। विरहिणी नायिका का पथिक के द्वारा अपने प्रिय के पास संदेश भेजना भारतीय साहित्य में अति प्रचलित काव्य-रूढ़ि है। किन्तु ‘संदेश-रासक’ की विशेषता उसके कथानक में नहीं, उसकी अभिव्यक्ति और कथनशैली में है। महाकाव्य या भारी-भरकम काव्य न होने के कारण अद्दहमाण को छोटी-छोटी बातों का विशद वर्णन करने का अवसर नहीं था फिर भी जिस मार्मिकता, संयम और सहृदयता का परिचय कवि ने दिया है वह उसकी कवित्व शक्ति, पांडित्य, परंपरा-ज्ञान और लोकवादिता की पूर्ण प्रतिष्ठा पाठक के हृदय में कर देती है। जिस प्रकार पात्र दुर्लभ होने पर लोग शतपत्रिका में ही आश्वस्त हो लेते हैं, उसी प्रकार जिन लोगों को प्राचीन कवियों की रचनाएँ रस नहीं दे पातीं उन सबको ‘संदेश-रासक’ का कवि काव्य-रस पान के लिए निमंत्रण देता है। इससे यह भी ज्ञात होता है कि इस ग्रंथ की रचना करते समय अद्दहमाण का दृष्टिकोण लोकवादी था। उन्होंने ‘संदेश-रासक’ का प्रणयन, साधारण जनों को दृष्टि में रखकर, उनके आनंद और विनोद के लिए किया था, पंडितों और विद्वानों के लिए नहीं।
विषयवस्तु
यह काव्य कालिदास द्वरा रचित मेघदूतम् से प्रेरित है।https://books.google.com/books?id=5BBDAAAAYAAJ&focus=searchwithinvolume&q=megh Studies in Punjab History & Culture, Gurcharan Singh, Enkay Publishers, 1990 p. 29-30 30 जुलाई 2017 https://web.archive.org/web/20160617113555/https://books.google.com/books?id=5BBDAAAAYAAJ&focus=searchwithinvolume&q=megh 17 जून 2016 live
रचनाकार ने इसका मंगलाचरण इस प्रकार किया है जिसमें हिन्दू और मुसलमान दोनों धर्मों के तत्वों का सम्मिश्रण है।हिंदी साहित्य को मुस्लिम साहित्यकारों का योगदान (1200 ई0 से 1850 ई0 तक) प्रोफ़ेसर शैलेश ज़ैदी, श्री नटराज प्रकाशन, ए-507/12, करतार नगर,बाबा श्यामगिरी मार्ग, साऊथ गामडी एक्सटेंशन, दिल्ली-53 https://web.archive.org/web/20170819170049/http://yugvimarsh.blogspot.com/2009/08/1200-0-1850-0.html 19 अगस्त 2017 (Blog.)
माणुस्सदुव्वविज्जाहरेहिं णहमग्गि सूर ससि बिंबे।आएहिं जो णमिज्जइ तं णयरे णमह कत्तारं।
O ''लोगों, उस कर्तार को नमन करो जिसको मनुष्य, देवता, विद्याधर, सूर्य और चन्द्रमा नमस्कार करते हैं।
सांस्कृतिक प्रभाव
अपभ्रंश में किसी मुसलमान द्वारा रचित यह प्रथम और एकमात्र ग्रंथ है।https://books.google.com/books?id=AbpjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Sandesh+Rasak Influence of Islam on Hindi Literature, Volume 47 of IAD oriental original series: Idarah-i Adabiyat-i Delli, Saiyada Asad Alī, Idarah-i-Adabiyat-i Delli, 2000, p. 12-13, 195 30 जुलाई 2017 https://web.archive.org/web/20170325124247/https://books.google.com/books?id=AbpjAAAAMAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Sandesh+Rasak 25 मार्च 2017 live
इन्हें भी देखें
पद्मावत
सन्दर्भ
श्रेणी:हिन्दी साहित्य
श्रेणी:हिन्दी साहित्य का इतिहास