Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

शंखपुष्पी

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

300px|right|thumb|कॉन्वल्वस अर्वेन्विस (Convolvulus arvenvis) का पुष्प शंखपुष्पी (वानस्पतिक नाम:Convolvulus pluricaulis) एक पादप है। शंख के समान आकृति वाले श्वेत पुष्प होने से इसे शंखपुष्पी कहते हैं। इसे क्षीरपुष्प (दूध के समान सफेद फूल वाले), 'मांगल्य कुसुमा' (जिसके दर्शन से मंगल माना जाता हो) भी कहते हैं। यह सारे भारत में पथरीली भूमि में जंगली रूप में पायी जाती हैं। परिचय पुष्पभेद से शंखपुष्पी की तीन जातियाँ बताई गई हैं। श्वेत, रक्त, नील पुष्पी। इनमें से श्वेत पुष्पों वाली शंखपुष्पी ही औषधि मानी गई है।मासिक धर्म मे सहायक है। शंखपुष्पी के क्षुप प्रसरणशील, छोटे-छोटे घास के समान होते हैं। इसका मूलस्तम्भ बहुवर्षायु होता है, जिससे 10 से 30 सेण्टीमीटर लम्बी, रोमयुक्त, कुछ-कुछ उठी शाखाएँ चारों ओर फैली रहती हैं। जड़ उंगली जैसी मोटी 1-1 इंच लंबी होती है। सिरे पर चौड़ी व नीचे सकरी होती है। अंदर की छाल और लकड़ी के बीच से दूध जैसा रस निकलता है, जिसकी गंध ताजे तेल जैसी दाहक व चरपरी होती है। तना और शाखाएँ सुतली के समान पतली सफेद रोमों से भरी होती हैं। पत्तियाँ 1 से 4 सेण्टीमीटर लंबी, रेखाकार, डण्ठल रहित, तीन-तीन शिराओं से युक्त होती हैं। पत्तियों के मलवे पर मूली के पत्तों सी गंध आती है। फूल हल्के गुलाबी रंग के संख्या में एक या दो कनेर के फूलों से मिलती-जुलती गंध वाले होते हैं। फल छोटे-छोटे कुछ गोलाई लिए भूरे रंग के, चिकने तथा चमकदार होते हैं। बीज भूरे या काले रंग के एक ओर तीन धार वाले, दूसरी ओर ढाल वाले होते हैं। बीज के दोनों ओर सफेद रंग की झाई दिखती है। मई से दिसम्बर तक इसमें पुष्प और फल लगते हैं। शेष समय यह सूखी रहती है। गीली अवस्था में पहचानने योग्य नहीं रह पाती। श्वेत पुष्पा शंखपुष्पी के क्षुप दूसरे प्रकारों की अपेक्षा छोटे होते हैं तथा इसके पुष्प शंख की तरह आवर्त्तान्तित होते हैं। शंखपुष्पी के आयुर्वेदिक गुण -कर्म और प्रभाव- शंखपुष्पी कषाय, स्निग्ध, पिच्छिल, तिक्त, मेध्य, रसायन, अपस्मार आदि मानसिक -रोगों को दूर करने वाली; स्मृति, कान्ति तथा बलवर्धक है। यह कुष्ठ कृमि और विष को नष्ट करती है। यह मेध्य, शामक, वाजीकरण, आक्षेपरोधी, कृमिघ्न, ज्वरघ्न होती हैं। आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेद जड़ी -बूटी रहस्य 2017 दिव्य प्रकाशन 978 -81 -89235 -44 -4 1450 द्वितीय बाहरी कड़ियाँ शंखपुष्पी (मध्य भारत के सगंधीय और औषधीय पादप) शंखपुष्पी के फायदे शंखपुष्पी https://web.archive.org/web/20200928182527/http://www.awgp.org/hindi/?gayatri%2Fsanskritik_dharohar%2Fbharat_ajastra_anudan%2Faurved%2Fjadibutiyon_dwara_chikitsa%2Fshankhpushpi%2F 28 सितंबर 2020 (अखिल विश्व गायत्री परिवार] Flora Europaea: Convolvulus Flora of China: Convolvulus सन्दर्भ * श्रेणी:औषधीय पादप