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411 समाचार
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एक मामूली आदमी

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अंगूठाकार|न स डी अंगूठाकार|सादगी अंगूठाकार|इकिरू अका १९५२ अंगूठाकार|भलाई और दया अशोक लाल का नाटक 'एक मामूली आदमी' अकिरा कुरोसावा की फ़िल्म ‘इकिरू’(Ikiru, aka To Live, 1952) से प्रेरित है। 'एक मामूली आदमी 'नाटक को निदेशक अरविन्द गौड़ ने गत दशक में ८० से अधिक बार मंचित किया है। अस्मिता थियेटर ग्रुप ने 'एक मामूली आदमी' का मंचन रा ना वि (NSD) के भारत रंग महोत्सव और सन्गीत नाटक अकादमी महोत्सव में भी किया है। स्वदेश दीपक के कोर्ट मार्शल के बाद निदेशक अरविन्द गौड़ का यह सर्वाधिक चर्चित व सफल नाटक है।http://sites.google.com/site/asmitatheatre/ashok-lal-s-ek-mamooli-aadmi अशोक लाल का नाटक 'एक मामूली आदमी' नाट्य समीक्षक २६ फरवरी २००९ गूगल साईट.काम https://web.archive.org/web/20090316001308/http://sites.google.com/site/asmitatheatre/ashok-lal-s-ek-mamooli-aadmi 16 मार्च 2009 live 'एक मामूली आदमी' के नायक ईश्वर चन्द अवस्थी की भूमिका दिल्ली-६ फिल्म से चर्चित,ओमकारा के लिए फिल्म फेयर अवार्ड पाने वाले अभिनेता दीपक डोबरियाल ने की है। इप्टा मुंबई ने रमन कुमार के निर्देशन में इस नाटक के कई सफल मंचन किये हैं जिसमें फिल्म अभिनेता अंजन श्रीवास्तव ने ईश्वर चंद्र अवस्थी की भूमिका बखूबी निभायी। उत्तर भारत के सक्रिय थिएटर ग्रुप अनुकृति रंगमंडल कानपुर ने भी 29 जून 2023 को एक मामूली आदमी का मंचन वाल्मीकि रंगशाला,उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी परिसर गोमती नगर लखनऊ में किया। 023 को एक मामूली आदमी का मंचन वाल्मीकि रंगशाला उ प्र संगीत नाटक अकादमी परिसर गोमती नगर लखनऊ में किया जा रहा जून नाटक के बारे में 'एक मामूली आदमी ' का नायक लिपिक - ईश्वर चन्द अवस्थी अकेलेपन और सतही रिश्तो के साथ निरुत्साह जिन्दगी जी रहा है। असली खुशी के लिए तरसता अवस्थी जब यह तथ्य जानता है कि वह् जल्दी मरने वाला है तो वो खुशी की तलाश करता है। मरने का एहसास उसे नया जीवन और उत्साह देता है। अवस्थी मरने से पहले कुछ असाधारण काम करने का निर्णय लेता है। वह दूसरों की खुशी का स्रोत बन खुद की जिन्दगी का मकसद बनता है। आज के उपभोक्तावादी समाज में जीवन की वास्तविकताओ को नाटक में दर्शाया गया है। कुरुसावा की फ़िल्म ‘इकिरू’से प्रेरित अशोक लाल का नाटक 'एक मामूली आदमी' रोचक तरीके से दिखाता है कि किस तरह पारिवारिक और सामाजिक संवाद-विहीनता व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन में व्यक्ति को संवेदनशीलता से दूर ले जाकर कुछ ख़ास होने की क़ैद में डाल देती है। यह् नाटक चुनौती के साथ आशा और सकारात्मक सोच के विकास में योगदान देता है। सन्दर्भ श्रेणी:नाटक श्रेणी:पुस्तकें श्रेणी:हिन्दी नाटक