Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

शिव ब्रत लाल

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

Shiv Brat Lal.jpg thumb|Maharishi Shiv Brat Lal Maharaj thumb|Maharishi Shiv Brat Lal Maharaj शिव ब्रत लाल वर्मन का जन्म सन् 1860 ईस्वी में भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िला में हआ था। वे 'दाता दयाल' और महर्षि जी' के नाम से भी प्रसिद्ध हुए. वे स्नातकोत्तर (एम.ए., एल.एल.डी.) तक पढ़े थे और लेखक और आध्यात्मिक गुरु के रूप में ख्याति पाई. ऐसा माना जाता है कि उन्होंने विभिन्न विषयों यथा सामाजिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर लगभग 3000 पुस्तकें और पुस्तिकाएँ लिखीं. संत मत, राधास्वामी मत और सुरत शब्द योग आदि पर लिखी उनकी अनेक पुस्तकों के कारण उन्हें 'राधास्वामी मत का वेद व्यास' भी कहा गया। “पूरी तरह, हर तरह और हर बात में मनुष्य बनो” उनकी प्रसिद्ध उक्ति है।.अंतर्राष्ट्रीय मानवता केंद्र भगत मुंशीराम Kashyap Publication 2009 9-54 9788190550109 राधास्वामी आध्यात्मिक आन्दोलन उनके गुरु परम संत राय बहादुर सालिग्राम साहिब जी थे जिन्हें हुजूर महाराज जी भी कहा जाता है। उनका अपने गुरु में अटल विश्वास था और वे राधास्वामी आध्यात्मिक आन्दोलन के अनुयायी बन गए। सन् 1898 में अपने गुरु के निधन के बाद उन्होंने ने सन् 1898 से ले कर 1939 तक राधास्वामी आध्यात्मिक आन्दोलन की सेवा की। http://www.radhaswamidinod.org/lineage.htm Radha Swami Satsang, Dinod Lineage 26 सितंबर 2009 https://web.archive.org/web/20081008112319/http://www.radhaswamidinod.org/lineage.htm 8 अक्तूबर 2008 dead शिव ब्रत लाल - एक लेखक एक उर्दू साप्ताहिक 'आर्य गज़ट' के संपादक के तौर पर कार्य करने के लिए वे लाहौर चले गए। 01 अगस्त 1907 को उन्होंने अपनी एक पत्रिका 'साधु' शुरू की। बहुत जल्द यह लोकप्रिय हो गई। एक लेखक के रूप में वे स्थापित हुए. उन्होंने अपने जीवन काल में लगभग 3000 पुस्तकों, पुस्तिकाओं और पत्रिकाओं का लेखन और संपादन किया। इनकी भाषा हिंदी के अतिरिक्त उर्दू और अंग्रेज़ी भी रही। वे फ़ारसी के भी अच्छे जानकार थे। उनके लेखन में विषयों की विविधता उनकी विशेष पहचान है। उनके गहन ज्ञान की झलक इनकी पुस्तकों में भरी जानकारी से हो जाती है जिनमें सामाजिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों का विषद विवरण है। इनकी पुस्तकें 'लाइट ऑन आनंद योग', 'दयाल योग' और 'शब्द योग' बहुत प्रसिद्ध हुईं.http://www.bookfinder.com/dir/i/Light_on_Ananda_Yoga-The_Yoga_of_Happiness/089142041X/ BookFinder.com 27 सितंबर 2009 https://web.archive.org/web/20110608002833/http://www.bookfinder.com/dir/i/Light_on_Ananda_Yoga-The_Yoga_of_Happiness/089142041X/ 8 जून 2011 dead Shiv Brat Lal's "Light On Ananda Yoga" Quotesसितंबर 2021 InternetArchiveBot http://groups.yahoo.com/group/SantMatFellowship/message/460 Shiv Brat Lal's "Dayal Yoga" Quotes 27 सितंबर 2009 https://web.archive.org/web/20110131203704/http://groups.yahoo.com/group/SantMatFellowship/message/460 31 जनवरी 2011 dead Shiv Brat Lal's "Dayal Yoga" Quotes 2जून 2020 InternetArchiveBot दाता दयाल की राधास्वामी आध्यात्मिक आंदोलन पर लिखी अन्य प्रसिद्ध पुस्तकें हैं:http://www.radhaswamidinod.org/library.htm Radhaswamidinod.org: Books by Maharishi ji 29 सितंबर 2009 https://web.archive.org/web/20080511221250/http://www.radhaswamidinod.org/library.htm 11 मई 2008 dead 1) लाइट ऑन आनंद योग (अंग्रेजी) 2) दयाल योग 3) शब्द योग 4) राधास्वामी योग: 1-6 भाग 5) राधास्वामी मत प्रकाश 6) अद्भुत उपासना योग: 1-2 भाग 7) अनमोल विचार 8) दस अवतारों की कथा 9) कबीर परिचय आद्यज्ञान 10) कबीर योग: 1-13 भाग 11) कर्म रहस्य 12) नानक योग: 1-3 भाग 13) पंथ संदेश 14) सफलता के साधन 15) सहज योग 16) सप्त ऋषि वृत्तांत 17) शरणगति योग 18) सत्संग के आठ वचन 19) व्यवहार ज्ञान प्रकाश 20) विचारांजलि महर्षि शिव ब्रत लाल का विश्व दौरा विश्व में राधा स्वामी आध्यात्मिक आंदोलन फैलाने के लिए उन्होंने लाहौर से दुनिया की यात्रा शुरू की। 2 अगस्त 1911 को वे कोलकाता पहुँचे। 22 अक्टूबर 1911 को वे कोलकाता से रंगून की ओर समुद्र से रवाना हुए . 31 अक्टूबर को वे पेनांग पहुँचे और सिंगापुर और जावा होते हुए 22 नवम्बर को हांगकांग पहुँचे . इन सभी स्थानों पर वे राधा स्वामी आध्यात्मिक आंदोलन का संदेश फैला रहे थे। उसके बाद वे जापान और बाद में सैन फ्रांसिस्को अमेरिका गये और सैन फ्रांसिस्को में व्याख्यान भी दिए। http://books.google.com/books?id=cnWmWUQ1paYC Data Dayal Maharishi Shiv Brat Lal Verman By Muḥammad Anṣārullāh 29 सितंबर 2009 https://web.archive.org/web/20130604220120/http://books.google.com/books?id=cnWmWUQ1paYC 4 जून 2013 live http://sportygirly67.blogspot.com/ Shiv Brat Lal's trip to US 29 सितंबर 2009 https://web.archive.org/web/20110708064024/http://sportygirly67.blogspot.com/ 8 जुलाई 2011 dead आश्रम की स्थापना सन् 1912 में शिव ब्रत लाल जी ने गोपी गंज, मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश, भारत में अपने आश्रम की स्थापना की। उनके प्रेरक प्रवचनों ने समस्त भारत और विदेशों में राधा स्वामी आंदोलन के चाहने वालों को आकर्षित किया। 23 फ़रवरी 1939 को सत्तर वर्ष की आयु में इनहो ने शिवरात्रि के दिन समाधि ली। उनकी पवित्र समाधि गोपी गंज के निकट राधा स्वामी धाम में है। महर्षि शिव ब्रत लाल के उत्तराधिकारी उनके प्रमुख उत्तराधिकारी जिन्होंने उनके काम को आगे बढ़ाया परम संत मास्टर राम सिंह जी अरमान (अरमान साहेब जी) संत सत्गुरु वक़्त बाबा फकीर चंद जी, होशियारपुर, पंजाब पीर-ए-मुग़ां (पंडित बुआ दत्त) (दिल्ली) दाता दयाल के मिशन को आगे बढ़ाने वाले अन्य गुरु परम संत नंदू भाई जी महाराज आंध्र प्रदेश परम संत पी.आनंद राव जी महाराज हैदराबाद, आंध्र प्रदेश परम संत कुबेर नाथ श्रीवास्तव जी परम संत प्रेमानंद जी बाहरी कड़ियाँ Radha Swami Satsang, Dinod Official website Radha Swami Satsang, Dinod Yahoo Group [ https://web.archive.org/web/20091024001043/http://geocities.com/eckcult/faqir.html Faqir Chand: The Unknowing Sage] Faqir Chand Meets the Tibetan Book of the Dead Shiv Bratl Lal's views on Inner Sound https://web.archive.org/web/20090804235649/http://www.manavtamandir.com/ इन्हें भी देखें राधास्वामी मत सेठ शिव दयाल सिंह जी महाराज मानवता मंदिर संत मत दयाल बाग सन्दर्भ श्रेणी:राधा स्वामी मत श्रेणी:सुरत शब्द योग श्रेणी:आध्यात्मिक गुरु श्रेणी:संत मत श्रेणी:निधन वर्ष अनुपलब्ध