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भारतीय धर्म-निरपेक्षता
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भारत में धर्मनिरपेक्षता जुलाई 2026
thumb|जयपुर स्थित बिड़ला मंदिर, जिसमें हिन्दू वास्तुकला के शिखर, बौद्ध वास्तुकला के स्तूप तथा इस्लामी वास्तुकला के गुम्बद की स्थापत्य विशेषताओं का समावेश दिखाई देता है। मंदिर की संगमरमर की दीवारों पर हिन्दू देवी-देवताओं के साथ-साथ ईसा मसीह एवं कुछ ईसाई संतों की आकृतियाँ भी उकेरी गई हैं।
भारत 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र रहा है।Haynes Jeffrey Handbook on Religion and International Relations Edward Elgar Publishing Limited 2021 348 978-1-83910-024-6 आधुनिक भारत में धर्मनिरपेक्ष गणराज्य की स्थापना का श्रेय प्रायः भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दिया जाता है।Kohli Atul India's Democracy: An Analysis of Changing State-Society Relations Princeton University Press 2014 148
1976 में पारित 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान की प्रस्तावना में भारत को औपचारिक रूप से "समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य" घोषित किया गया।The Constitution (Forty-Second Amendment) Act, 1976 http://indiacode.nic.in/coiweb/amend/amend42.htm Government of India हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने 1994 के ऐतिहासिक एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ मामले में स्पष्ट किया कि भारत अपनी स्थापना के समय से ही धर्मनिरपेक्ष राज्य रहा है।S.R. Bommai vs Union Of India on 11 March, 1994 https://indiankanoon.org/doc/60799/ Indian Kanoon
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि राज्य के कार्यों में धर्म का कोई स्थान नहीं है तथा कोई भी राज्य सरकार यदि धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के विपरीत कार्य करती है तो वह संविधान के विरुद्ध मानी जाएगी और उसके विरुद्ध संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है।When the Supreme Court Firmly De-linked Religion from Politics https://cjp.org.in/sr-bommai-vs-union-of-india/
भारतीय संविधान के अनुसार राज्य संचालित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती तथा भारतीय संविधान का अनुच्छेद 27 के अंतर्गत किसी विशेष धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए करदाताओं के धन का उपयोग निषिद्ध है।The Constitution of India https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s380537a945c7aaa788ccfcdf1b99b5d8f/uploads/2024/07/20240716890312078.pdf Government of India
यद्यपि धर्मनिरपेक्षता आधुनिक भारत के मूल सिद्धांतों में से एक है, भारतीय धर्मनिरपेक्षता पश्चिमी देशों में प्रचलित राज्य और धर्म के पूर्ण पृथक्करण के सिद्धांत से भिन्न है। भारतीय संविधान राज्य को धार्मिक मामलों में सीमित हस्तक्षेप की अनुमति देता है।A skewed secularism? http://www.sacw.net/article2081.html Hindustan Times 15 May 2011 8 जून 2026 21 मार्च 2015 https://web.archive.org/web/20150321162617/http://www.sacw.net/article2081.html dead
भारत में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे विषयों पर विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून (Personal Laws) लागू हैं।How courts decide on matters of religion https://www.livemint.com/news/india/how-courts-decide-on-matters-of-religion-1551715822881.html 5 March 2019 इसके अतिरिक्त, कुछ धार्मिक संस्थानों और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का प्रबंधन एवं संरक्षण केंद्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। केंद्रीय वक्फ परिषद तथा अनेक प्रमुख हिन्दू मंदिर इसके उदाहरण हैं।Freeing temples from state control https://www.thehindu.com/opinion/lead/freeing-temples-from-state-control/article5594132.ece The Hindu 20 January 2014
भारतीय धर्मनिरपेक्षता की इस विशिष्ट व्यवस्था ने समय-समय पर विभिन्न बहसों और विवादों को जन्म दिया है, जिनमें समान नागरिक संहिता, बहुविवाह, उत्तराधिकार संबंधी अधिकार तथा धार्मिक कानूनों की व्याख्या जैसे विषय प्रमुख रहे हैं।
इतिहास
thumb|एलोरा की गुफाएँ, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, महाराष्ट्र में स्थित हैं। पाँचवीं से दसवीं शताब्दी के मध्य निर्मित इन गुफाओं में 12 बौद्ध, 17 हिन्दू तथा 5 जैन गुफाएँ सम्मिलित हैं। इनका निकटवर्ती निर्माण प्राचीन भारत में विभिन्न धर्मों के सह-अस्तित्व तथा धार्मिक सहिष्णुता का प्रमाण माना जाता है।Pia Brancaccio (2000). "The Buddhist Caves at Aurangabad: The Impact of the Laity". Ars Orientalis, Vol. 30, Supplement 1, pp. 41–50.Owen, L. (2012). Carving Devotion in the Jain Caves at Ellora. Brill, Netherlands.
लगभग 2200 वर्ष पूर्व अशोक तथा लगभग 1400 वर्ष पूर्व हर्षवर्धन ने विभिन्न धर्मों को संरक्षण प्रदान किया था। प्राचीन भारत में धार्मिक स्वतंत्रता विद्यमान थी और राज्य सभी नागरिकों को उनके धर्म की परवाह किए बिना समान अधिकार प्रदान करता था।
पाँचवीं से दसवीं शताब्दी के मध्य निर्मित एलोरा की गुफाएँ धार्मिक सह-अस्तित्व का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जहाँ बौद्ध, हिन्दू और जैन स्मारक एक ही परिसर में स्थित हैं।Ellora Caves https://whc.unesco.org/en/list/243 UNESCO World Heritage CentreBrockman, N. (2011), Encyclopedia of Sacred Places, 2nd Edition.
किसी व्यक्ति को अपने धर्म का सम्मान करते हुए बिना उचित कारण अन्य धर्मों की निन्दा नहीं करनी चाहिए। अशोक के शिलालेख, शिला अभिलेख XII, लगभग 250 ईसा पूर्व A. V. Thomas, Christians in Secular India, Fairleigh Dickinson University Press, pp. 26–27.A. L. Basham, The Wonder That Was India, Grove Press, New York (1959).
बारहवीं शताब्दी में इस्लाम के आगमन तथा दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ धार्मिक संबंधों की प्रकृति में परिवर्तन आया। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इस काल में धार्मिक और राजनीतिक विचारधाराओं के बीच मतभेद उभरे, जिसने भारतीय समाज को प्रभावित किया।Makarand Paranjape (2009), Altered Destinations: Self, Society and Nation in India, pp. 150–152.
मुगल साम्राज्य के काल में अकबर को धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाने वाले प्रमुख शासकों में माना जाता है। उन्होंने जज़िया कर समाप्त किया, विभिन्न धर्मों के विद्वानों के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया तथा हिन्दू मंदिरों के निर्माण पर लगे प्रतिबंधों को हटाया।Gale Encyclopedia of World History: Governments, "Mughal Empire".Richards, John F. The Mughal Empire. Cambridge University Press, 1993.
thumb|left|अकबर का मकबरा, सिकंदरा। इसके स्थापत्य में हिन्दू और इस्लामी दोनों परंपराओं के तत्व सम्मिलित हैं।
औरंगज़ेब के पश्चात भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी तथा बाद में ब्रिटिश राज का नियंत्रण स्थापित हुआ। ब्रिटिश प्रशासन ने धर्म और राज्य को पूर्णतः पृथक नहीं किया, किन्तु हिन्दुओं, मुसलमानों और ईसाइयों के लिए कानून के समक्ष समानता की अवधारणा को पुनः स्थापित किया।Larson 2001
उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य तक ब्रिटिश प्रशासन विवाह, उत्तराधिकार तथा तलाक जैसे मामलों में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए पृथक व्यक्तिगत कानूनों का प्रयोग करता था। बाद में इन विषयों के लिए एंग्लो-हिन्दू और एंग्लो-मुस्लिम विधियों का विकास किया गया।Derrett J. Duncan Religion, Law and the State in India 1973 Faber & Faber
ब्रिटिश शासन ने भारतीय ईसाइयों, पारसियों तथा अन्य समुदायों के लिए भी पृथक व्यक्तिगत कानून बनाए, जिनमें भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1865 तथा विशेष विवाह अधिनियम, 1872 प्रमुख थे।Nandini Chatterjee, The Making of Indian Secularism: Empire, Law and Christianity.
right ब्रिटिश भारत के मुसलमानों की यह लंबे समय से इच्छा रही है कि किसी भी स्थिति में प्रथागत कानून मुस्लिम व्यक्तिगत कानून का स्थान न ले। मुस्लिम व्यक्तिगत विधि (शरीयत) अनुप्रयोग अधिनियम, 1937 की प्रस्तावना The Muslim Personal Law (Shariat) Application Act, 1937, Universal Law Publishing.
यद्यपि ब्रिटिश प्रशासन ने भारत में एक समान आपराधिक और प्रशासनिक कानून व्यवस्था विकसित की, तथापि उसकी "फूट डालो और राज करो" नीति ने विभिन्न समुदायों के बीच विभाजन को बढ़ावा दिया।The Partition: The British game of 'divide and rule' https://www.aljazeera.com/opinions/2017/8/10/the-partition-the-british-game-of-divide-and-rule Shashi Tharoor मॉर्ले-मिंटो सुधार (1909) के अंतर्गत मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र स्थापित किए गए, जिससे सामुदायिक राजनीति को बल मिला।
बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में महात्मा गांधी और मुहम्मद अली जिन्ना जैसे नेताओं के नेतृत्व में स्वशासन की माँग तेज हुई। इसी काल में ब्रिटिश सरकार ने अनेक ऐसे कानून बनाए जो स्वतंत्रता के बाद भी प्रभावी रहे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुस्लिम व्यक्तिगत विधि (शरीयत) अनुप्रयोग अधिनियम, 1937 था।Smith 2011
इस अधिनियम तथा मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 ने यह सिद्धांत स्थापित किया कि भारतीय मुसलमानों के लिए धार्मिक कानून उनके व्यक्तिगत कानून के रूप में लागू हो सकते हैं। स्वतंत्रता के पश्चात 1950 के दशक में संसद द्वारा पारित हिन्दू विधि सुधारों को हिन्दुओं, बौद्धों, जैनों और सिखों पर लागू किया गया, जबकि मुसलमानों के लिए शरीयत-आधारित व्यक्तिगत कानून प्रभावी बने रहे।Larson 2001Chandra Mallampalli, Christians and Public Life in Colonial India.
हाल के अध्ययनों में भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति के बीच संबंधों पर भी चर्चा की गई है। अंजलि रमन (2026) के अनुसार पारसी समुदाय की घटती जनसंख्या और सामाजिक उपस्थिति भारत की बहुलतावादी परंपरा के समक्ष उभरती चुनौतियों को दर्शाती है।Raman Anjali Longing, Loss and the Diminishing Parsee Community in Trying to Grow International Journal of Language, Literature and Culture 6 2 March–April 2026 10.22161/ijllc.6.2.9
सन्दर्भ