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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

2024 अगरतला में बांग्लादेशी सहायक उच्चयोग पर हमला

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2 दिसंबर 2024 को, भारतीय राज्य त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित बांग्लादेश सहायक उच्चायोग पर हमला हुआ। हमलावरों की पहचान हिंदू संघर्ष समिति के सदस्यों के रूप में हुई, जो हिंदुत्व समूह विश्व हिंदू परिषद से संबद्ध है। == पृष्ठभूमि == जुलाई-अगस्त 2024 में छात्र-जनता के विद्रोह के बाद भारत की एक मजबूत सहयोगी शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश और भारत के बीच राजनयिक संबंध बिगड़ने लगे। भारतीय मीडिया द्वारा बांग्लादेश के सांप्रदायक ख़बरें चलाई गईं, भारत सरकार ने बार-बार चिंता व्यक्त की कि बांग्लादेशी हिंदुओं पर हिंसक सांप्रदायिक हमले हो रहे हैं। 25 नवंबर 2024 को, हिंदू भिक्षु और सनातन जागरण मंच के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास को बांग्लादेश में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जिसके कारण भारत में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। दास की रिहाई की मांग करते हुए 27 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रमुख सुवेन्दु अधिकारी ने 2 दिसंबर को बांग्लादेश-भारत सीमा पर नाकेबंदी करने की धमकी दी। 29 नवंबर को हिंदू संगठन बोंगियो हिंदू जागरण के सदस्यों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिया और कोलकाता में बांग्लादेश के उप उच्चायोग की सीमा पर बांग्लादेश का राष्ट्रीय ध्वज और मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस का पुतला जलाया, जिसकी बांग्लादेश सरकार ने आधिकारिक निंदा की। असम के करीमगंज जिले में सनातनी ऐक्य मंच के लगभग 40,000 सदस्यों ने जय श्री राम का नारा लगाते हुए अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की फैली खबरों का बदला लेने के लिए बांग्लादेश की सीमा पार करने का प्रयास किया। == घटना == हिंदू संघर्ष समिति कई दिनों से पूर्वोत्तर भारतीय राज्य त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बांग्लादेश विरोधी प्रदर्शन कर रही थी, जिसकी सीमा बांग्लादेश से लगती है। 2 दिसंबर 2024 को, लगभग 2 बजे अपराह्न (भारतीय समयानुसार) संगठन के सदस्य अगरतला स्थित बांग्लादेश सहायक उच्चायोग में उपस्थित हुए और उसके परिसर में प्रवेश किया। हमलावरों ने "बांग्लादेश का झंडा उतार जलाया और इमारत के अंदर तोड़फोड़ की"। घटना के बाद, बांग्लादेशी अधिकारियों ने सहायक उच्चायोग में सभी प्रकार की वीज़ा और कांसुलर सेवाएं अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिए। == प्रतिक्रियाएँ == बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर "गहरी नाराज़गी" व्यक्त की और इस हमले को "पूर्व नियोजित" बताया, जो स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। बयान में यह भी कहा गया कि यह हमला 1961 के राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन का उल्लंघन है। मंत्रालय ने ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय कुमार वर्मा को भी तलब किया। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने भारतीय मीडिया की कथित "गलत सूचना" का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया। अंतरिम सरकार के दो सलाहकारों नाहिद इस्लाम और एम सखावत हुसैन ने भी इस घटना के लिए भारत सरकार की आलोचना की। भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन, छात्र ओधिकार परिषद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश, गोनो ओधिकार परिषद और जातीय नागोरिक समिति सहित बांग्लादेश में विभिन्न राजनीतिक और छात्र संगठनों ने हमले की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। 10 दिसंबर को अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और दोनों पक्षों से राजनयिक विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का आग्रह किया। == मुकदमा == 3 दिसंबर को हमले में शामिल होने के संदेह में सात व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया तथा सहायक उच्चायोग क्षेत्र में तैनात तीन पुलिसकर्मियों को कर्तव्य में कथित लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया। == यह भी देखें == भारत-बांग्लादेश संबंध भारत का सहायक उच्चायोग, खुलना बांग्लादेश का सहयोग उच्चयोग, अगरतला == संदर्भ ==