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स्काकजुंग
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स्काकजुंग (कोकझुंग)
स्काकजुंग जिसे कोकझुंग भी कहा जाता है, भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पूर्वी भाग में स्थित एक उच्च हिमालयी क्षेत्र है। यह ऊपरी सिंधु नदी बेसिन का हिस्सा है तथा ऐतिहासिक रूप से मौसमी चराई, खानाबदोश पशुपालन और लद्दाख तथा पश्चिमी तिब्बत के बीच पारंपरिक आवागमन से जुड़ा रहा है। यह क्षेत्र स्थायी बस्तियों की अपेक्षा मौसमी उपयोग के लिए अधिक जाना जाता है।Ashu Mann Skakjung/ Kokzhung: India’s ancestral Himalayan gateway https://www.news9live.com/featured/skakjung-ladakh-ancient-himalayan-gateway-nomads-2988172 News9live News9live 4 अगस्त 2026 10 जुलाई 2026
भूगोल
स्काकजुंग लगभग 33°04′34″ उत्तर अक्षांश और 79°10′08″ पूर्व देशांतर पर स्थित है। यह पूर्वी लद्दाख के उच्च हिमालयी शीत मरुस्थल क्षेत्र में स्थित है। यहाँ विस्तृत चरागाह, नदी तटीय मैदान तथा पर्वतीय भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं। क्षेत्र की जलवायु अत्यधिक ठंडी और शुष्क है, जिसके कारण यहाँ स्थायी कृषि और बड़े पैमाने पर बसावट का विकास नहीं हुआ। स्थानीय समुदायों द्वारा इसका उपयोग मुख्यतः मौसमी चराई के लिए किया जाता है।thumb|स्ककजुंग प्राचीन हिमालय का रास्ता रहा है, जो पश्मीना व्यापार, खानाबदोश चरवाहों और लद्दाख-तिब्बत की ऐतिहासिक-संस्कृति के संपर्क का अहम केंद्र रहा है।
इतिहास
स्काकजुंग का उपयोग ऐतिहासिक रूप से लद्दाख और पश्चिमी तिब्बत के बीच मौसमी आवागमन तथा चराई मार्गों के एक भाग के रूप में किया जाता था। यह क्षेत्र रुदोक और पूर्वी लद्दाख के बीच पारंपरिक मार्गों से संबद्ध था, जिनका उपयोग स्थानीय व्यापार और पशुपालकों के आवागमन के लिए किया जाता था। इन मार्गों के माध्यम से नमक,पश्मीना,बोरेक्स, पशु उत्पाद, अनाज, वस्त्र तथा लोहे के औजारों का सीमित व्यापार किया जाता था।
पशुपालन
स्काकजुंग का संबंध चांगपा समुदाय से है, जो पूर्वी लद्दाख का पारंपरिक खानाबदोश पशुपालक समुदाय है। यह समुदाय मुख्य रूप से याक तथा पश्मीना बकरियों का पालन करता है। पश्मीना ऊन इस क्षेत्र की पारंपरिक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख उत्पाद रहा है।
मौसमी प्रवास के दौरान चांगपा समुदाय विभिन्न चरागाहों का उपयोग करता है तथा अस्थायी शिविरों और पत्थरों से बने बाड़ों का निर्माण करता है। पश्मीना ऊन का प्रसंस्करण स्थानीय स्तर पर किया जाता था तथा इसका उपयोग क्षेत्रीय विनिमय और व्यापार में भी होता था।
संस्कृति
स्काकजुंग तथा इसके आसपास के क्षेत्रों में तिब्बती बौद्ध धर्म से संबंधित मणि दीवार और पत्थरों पर उत्कीर्ण बौद्ध मंत्र पाए जाते हैं। ये स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा हैं तथा कुछ स्थानों पर पारंपरिक मार्गों की पहचान के लिए भी प्रयुक्त होते रहे हैं।
प्रशासन
प्रशासनिक अभिलेखों में स्काकजुंग का उल्लेख लद्दाख के पारंपरिक चरागाह क्षेत्रों के रूप में मिलता है। क्षेत्र का उपयोग मुख्यतः मौसमी पशुपालन तथा चराई गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है।
वर्तमान स्थिति
स्काकजुंग भारत के पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्र के निकट स्थित है। हाल के वर्षों में पूर्वी लद्दाख में सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं, दूरसंचार, ऊर्जा तथा पशु चिकित्सा से संबंधित सुविधाओं के विकास पर कार्य किया गया है। पश्मीना उत्पादन तथा खानाबदोश पशुपालक समुदायों के समर्थन के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं।