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शब्बाथ
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सब्तअंग्रेज़ी दिसम्बर 2025सब्त (he שַׁבָּת) इब्राहीमी धर्मों में विश्राम और पूजा का दिन है। उत्पत्ति पुस्तक के अनुसार, परमेश्वर ने छह दिन में संसार की रचना की और सातवें दिन विश्राम किया, जिसकी स्मृति में यह दिन पवित्र माना जाता है। दस आज्ञाओं तथा सामरी तौरात में भी “सब्त को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखने” का निर्देश दिया गया है।https://www.britannica.com/topic/Sabbath Sabbath Encyclopaedia Britannica 2025-10-02
यहूदी धर्म में सब्त शनिवार को पड़ता है, जबकि ईसाई इसे रविवार को मनाते हैं। इस्लाम में सब्त की जगह मुसलमान शुक्रवार को जुमा की नमाज़ पढ़ते हैं।
उत्पत्ति और इतिहास
सब्त की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों के बीच मतभेद हैं। कुछ लोग इसे यहूदी परंपरा का मौलिक अंग मानते हैं, जबकि अन्य विद्वान इसे बैबिलोनियाई संस्कृति से प्रभावित मानते हैं। बैबिलोनियाई शब्द शपत्तु (šapattu) या शबत्तु (šabattu) का अर्थ होता है विश्राम अथवा शांतिपूर्ण दिन, जिससे सब्त की समानता देखी जाती है। समय के साथ यह दिन प्राचीन इज़राइलियों के धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक जीवन का आधार बन गया।https://www.jstor.org/stable/3269872 The Origins of the Sabbath Jacob Milgrom Journal of Biblical Literature 110 1 5–24 1991 2025-10-02
यहूदी धर्म में सब्त
यहूदी परंपरा में सब्त शुक्रवार सूर्यास्त से आरम्भ होकर शनिवार रात तीन तारों के दिखने तक चलता है। इस दिन को विश्राम, प्रार्थना और परिवार के साथ समय बिताने के लिए पवित्र माना जाता है। परंपरा अनुसार इस दिन विशेष भोजन किए जाते हैं और पूजा की शुरुआत मोमबत्तियाँ जलाने तथा वाइन और रोटी (चल्लाह) पर आशीर्वचन कहने से होती है। सब्त का समापन हवदाला नामक विशेष विधि से किया जाता है। यहूदी धार्मिक कानून के अनुसार इस दिन ३९ प्रकार के कार्य (मेलाखोत) निषिद्ध हैं, जैसे खेती, लेखन, निर्माण या आग जलाना।Abraham P. Bloch The Sabbath: Its Meaning for Modern Man Holt, Rinehart and Winston 1965 978-0030857776
ईसाई धर्म में सब्त
ईसाई धर्म में अधिकांश मत शनिवार की जगह रविवार को प्रभु का दिन मानते हैं, क्योंकि विश्वास के अनुसार यीशु मसीह इसी दिन मृतकों से जीवित हुए थे। रविवार को सामूहिक प्रार्थना और चर्च सभाएँ आयोजित होती हैं। फिर भी कुछ ईसाई संप्रदाय, जैसे सातवें-दिन एडवेंटिस्ट और सातवाँ-दिन बैप्टिस्ट, आज भी शनिवार को सब्त के रूप में मानते हैं। इस प्रकार ईसाई धर्म में सब्त की अवधारणा यहूदी परंपरा से प्रेरित होते हुए भी समय के साथ नया रूप ग्रहण कर चुकी है।Edward J. Kilmartin The Sabbath and the Lord's Day https://archive.org/details/sim_theological-studies_1961-09_22_3/page/370 Theological Studies 22 3 370–384 1961 10.1177/004056396102200303 2025-10-02
धार्मिक और सामाजिक महत्व
सब्त का महत्व केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह दिन मानव जीवन में विश्राम, स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए भी आवश्यक माना जाता है। परिवारिक सामंजस्य, आत्मावलोकन और आध्यात्मिकता को प्रोत्साहन देने में इसका विशेष योगदान है। आज भी कुछ यहूदी और ईसाई समुदाय सब्त के सभी नियमों का कठोरता से पालन करते हैं।https://www.myjewishlearning.com/article/shabbat-101/ Shabbat 101 My Jewish Learning 2025-10-02
आधुनिक प्रासंगिकता
आधुनिक युग में तेजी और व्यस्तता के बीच सब्त की अवधारणा अत्यंत सार्थक मानी जाती है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर जीवन को संतुलित करने का एक माध्यम है। कई धर्मनिरपेक्ष समाज भी सप्ताहांत (वीकएंड) को विश्राम और परिवारिक समय के रूप में मानते हैं, जो सब्त की भावना का ही एक रूपांतर है।Ruth Gledhill The Sabbath: A Day of Rest in a Restless World The Times 2025-09-15 https://www.thetimes.co.uk/article/the-sabbath-a-day-of-rest-in-a-restless-world-3d5x6j7z5 2025-10-02
संदर्भ
श्रेणी:धार्मिक छुट्टियाँ