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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अक्रूर

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नवम्बर 2021 right|thumb|300px|गोपियों को समझाते हुए अक्रूर अक्रूर कृष्णकालीन एक यादववंशी मान्य व्यक्ति थे। ये सात्वत वंश में उत्पन्न वृष्णि के पौत्र थे। इनके पिता का नाम श्वफल्क था (जिन्हें जयन्त भी कहते हैैं) जिनके साथ काशी के राजा अपनी पुत्री गांदिनी का विवाह किया था। इन्हीं दोनों की संतान होने से अक्रूर श्वाफल्कि तथा गांदिनीनंदन के नाम से भी प्रसिद्ध थे। मथुरा के राजा कंस की सलाह पर बलराम तथा कृष्ण को वृन्दावन से मथुरा लाए (भागवत १०.४०)। मथुरा के राजा कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम का वध करने के उद्देश्य से वहाँ एक 'धनुष यज्ञ' उत्सव का आयोजन किया था। इस योजना के तहत उन्हें आदरपूर्वक मथुरा आमंत्रित करने और रथ पर बैठाकर लाने के लिए कंस ने यादव वंशीय मान्य पुरुष अक्रूर जी को वृंदावन भेजा था। अक्रूर जी कंस की आज्ञा पाकर वृंदावन पहुँचे और बलराम तथा श्रीकृष्ण को रथ पर बैठाकर मथुरा लेकर आए।श्रीमद्भागवत महापुराण, दसवां स्कंध, अध्याय ३६-३८ स्यमंतक मणि से भी इनका बहुत संबंध था। अक्रूर तथा कृतवर्मा द्वारा प्रोत्साहित होने पर शतधन्वा ने कृष्ण के श्वसुर तथा सत्यभामा के पिता सत्राजित का वध कर दिया। फलतः क्रुद्ध होकर श्रीकृष्ण ने शतधन्वा को मिथिला तक पीछा कर मार डाला, पर मणि उसके पास नहीं निकली। वह मणि अक्रूर के ही पास थी जो डरकर द्वारिका से बाहर चले गए थे। उन्हें मनाकर कृष्ण मथुरा लाए तथा अपने बंधु वर्गों में बढ़ने वाले कलह को उन्होंने शांत किया (भागवत १०.५७)। श्रेणी:पौराणिक पात्र