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411 समाचार
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रामभद्राचार्य

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जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज Jagadguru Rambhadracharya.jpg 250px अक्टूबर २५, २००९ के दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य प्रवचन देते हुए ज्ञानपीठ पुरस्कार 1950 1 14 y जौनपुर, उत्तर प्रदेश, भारत गिरिधर मिश्र पण्डित ईश्वरदास महाराज विशिष्टाद्वैत वेदान्त धर्मचक्रवर्ती, महामहोपाध्याय, श्रीचित्रकूटतुलसीपीठाधीश्वर, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य, महाकवि, प्रस्थानत्रयीभाष्यकार, इत्यादि मानवता ही मेरा मन्दिर मैं हूँ इसका एक पुजारी ॥ हैं विकलांग महेश्वर मेरे मैं हूँ इनका कृपाभिखारी ॥२००३ http://jagadgururambhadracharya.org/videos/jrhu?id=2 जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास जून २१, २०११ https://web.archive.org/web/20140916075051/http://jagadgururambhadracharya.org/videos/jrhu?id=2 16 सितंबर 2014 live प्रस्थानत्रयी पर राघवकृपाभाष्य, श्रीभार्गवराघवीयम्, भृंगदूतम्, गीतरामायणम्, श्रीसीतारामसुप्रभातम्, श्रीसीतारामकेलिकौमुदी, अष्टावक्र, इत्यादि thumb|हिन्दी उच्चारण:रामभद्राचार्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य (जगद्गुरुरामभद्राचार्यः) (१९५०–), पूर्वाश्रम नाम गिरिधर मिश्र(ग्राम -सराय भोगी, ब्लॉक-सुजानगंज तहसील-मछलीशहर जौनपुर) चित्रकूट (उत्तर प्रदेश, भारत) में रहने वाले एक प्रख्यात विद्वान्, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद्, रचनाकार, प्रवचनकार, दार्शनिक और हिन्दू धर्मगुरु हैं।लोक सभा अध्यक्ष कार्यालय Speeches अंग्रेज़ी http://speakerloksabha.nic.in/Speech/SpeechDetails.asp?SpeechId=195 मार्च ८, २०११ Swami Rambhadracharya, ..., is a celebrated Sanskrit scholar and educationist of great merit and achievement. ... His academic accomplishments are many and several prestigious Universities have conferred their honorary degrees on him. A polyglot, he has composed poems in many Indian languages. He has also authored about 75 books on diverse themes having a bearing on our culture, heritage, traditions and philosophy which have received appreciation. A builder of several institutions, he started the Vikalanga Vishwavidyalaya at Chitrakoot, of which he is the lifelong Chancellor. (स्वामी रामभद्राचार्य, ...., बहुमुखी प्रतिभा और उपलब्धियों के धनी एक प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वान् और शिक्षाविद् हैं। ... आपकी अनेक शैक्षणिक उपलब्धियाँ हैं और कईं माननीय विश्वविद्यालयों ने आपको मानद उपाधियाँ प्रदान की हैं। आप एक बहुभाषाविद् हैं और आपने अनेक भारतीय भाषाओं में काव्य रचे हैं। आपने विविध विषयवस्तु वाली ७५ पुस्तकें रची हैं, जिन्होंने हमारी संस्कृति, धरोहर और परम्पराओं पर छाप छोड़ी है और जिन्हें सम्मान प्राप्त हुआ है। आपने कई संस्थानों के साथ चित्रकूट में विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना की है, जिसके आप आजीवन कुलाधिपति हैं।) https://web.archive.org/web/20110721174235/http://speakerloksabha.nic.in/Speech/SpeechDetails.asp?SpeechId=195 21 जुलाई 2011 live वे रामानन्द सम्प्रदाय के वर्तमान चार जगद्गुरु रामानन्दाचार्यों में से एक हैं और इस पद पर १९८८ ई से प्रतिष्ठित हैं।आर चन्द्रा जीवन यात्रा ८ ११ क्रान्ति भारत समाचार लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत सितम्बर २००८ २२-२३अग्रवाल २०१०, पृष्ठ ११०८-१११०।दिनकर २००८, पृष्ठ ३२। वे चित्रकूट में स्थित संत तुलसीदास के नाम पर स्थापित तुलसी पीठ नामक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष हैं।नागर २००२, पृष्ठ ९१। वे चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति हैं। The Chancellor अंग्रेज़ी http://www.jrhu.com/index_files/Page350.htm जुलाई २१, २०१० जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय https://web.archive.org/web/20100516025933/http://www.jrhu.com/index_files/Page350.htm 16 मई 2010 dead अंग्रेज़ी Analysis and Design of Algorithm द्विवेदी ज्ञानेन्द्र कुमार लक्ष्मी प्रकाशन दिसम्बर १, २००८ नई दिल्ली, भारत ISBN 978-81-318-0116-1 पृष्ठ x यह विश्वविद्यालय केवल चतुर्विध विकलांग विद्यार्थियों को स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और डिग्री प्रदान करता है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दो मास की आयु में नेत्र की ज्योति से रहित हो गए थे और तभी से प्रज्ञाचक्षु हैं। के के बिड़ला प्रतिष्ठान वाचस्पति पुरस्कार २००७ http://www.kkbirlafoundation.com/downloads/pdf/vach-2007.pdf मार्च ८, २०११ https://web.archive.org/web/20110713154542/http://www.kkbirlafoundation.com/downloads/pdf/vach-2007.pdf 13 जुलाई 2011 dead सुतपा मुखर्जी A Blind Sage's Vision: A Varsity For The Disabled At Chitrakoot आउटलुक नयी दिल्ली, भारत मई १०, १९९९ http://www.outlookindia.com/article.aspx?207437 अंग्रेज़ी जून २१, २०११ https://web.archive.org/web/20110806214544/http://www.outlookindia.com/article.aspx?207437 6 अगस्त 2011 live अध्ययन या रचना के लिए उन्होंने कभी भी ब्रेल लिपि का प्रयोग नहीं किया है। वे बहुभाषाविद् हैं और २२ भाषाएँ बोलते हैं।दिनकर २००८, पृष्ठ ३९। श्री जगद्गुरु रामभद्राचार्य औपचारिक वेबसाइट http://jagadgururambhadracharya.org May 10, 2011 अंग्रेज़ी आश्चर्यजनक तथ्य: अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी और अनेक भारतीय भाषाओं सहित २२ भाषाओं का ज्ञान https://web.archive.org/web/20110716183604/http://www.jagadgururambhadracharya.org/ 16 जुलाई 2011 live वे भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी सहित कई भाषाओं में आशुकवि और रचनाकार हैं। उन्होंने २५० से अधिक पुस्तकों और ग्रंथों की रचना की है, जिनमें चार महाकाव्य (दो संस्कृत और दो हिन्दी में), रामचरितमानस पर हिन्दी टीका, अष्टाध्यायी पर काव्यात्मक संस्कृत टीका और प्रस्थानत्रयी (ब्रह्मसूत्र, भगवद्गीता और प्रधान उपनिषदों) पर संस्कृत भाष्य सम्मिलित हैं।दिनकर २००८, पृष्ठ ४०–४३। उन्हें तुलसीदास पर भारत के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों में गिना जाता है,प्रसाद १९९९, पृष्ठ xiv: "Acharya Giridhar Mishra is responsible for many of my interpretations of the epic. The meticulousness of his profound scholarship and his extraordinary dedication to all aspects of Rama's story have led to his recognition as one of the greatest authorities on Tulasidasa in India today ... that the Acharya's knowledge of the Ramacharitamanasa is vast and breathtaking and that he is one of those rare scholars who know the text of the epic virtually by heart." (मेरे द्वारा इस ग्रंथ के किए गए अनेकानेक अर्थों के पीछे आचार्य गिरिधर मिश्र की प्रेरणा है। उनके गहनतम पाण्डित्य का अवधान और रामायण के सभी पक्षों के प्रति उनकी विलक्षण लगन के कारण आज वे भारत में तुलसीदास पर सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों में अग्रगण्य हैं। ... आचार्य का रामचरितमानस का ज्ञान व्यापक और आश्चर्यजनक हैं और वे उन विरल विद्वानों में से हैं जिन्हें यह ग्रन्थ पूर्णतः कण्ठस्थ है।)अंग्रेज़ी The Ramayana: Global View लल्लन प्रसाद, ed. व्यास हर आनन्द प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड १९९६ दिल्ली, भारत ISBN 978-81-241-0244-2 ... Acharya Giridhar Mishra, a blind Tulasi scholar of uncanny critical insight, ... (आचार्य गिरिधर मिश्र, एक मीमांसक अंतर्दृष्टि से संपन्न प्रज्ञाचक्षु तुलसी विद्वान, ...) पृष्ठ ६२ और वे रामचरितमानस की एक प्रामाणिक प्रति के सम्पादक हैं, जिसका प्रकाशन तुलसी पीठ द्वारा किया गया है।रामभद्राचार्य (ed) २००६। स्वामी रामभद्राचार्य रामायण और भागवत के प्रसिद्ध कथाकार हैं – भारत के भिन्न-भिन्न नगरों में और विदेशों में भी नियमित रूप से उनकी कथा आयोजित होती रहती है और कथा के कार्यक्रम संस्कार टीवी, सनातन टीवी इत्यादि चैनलों पर प्रसारित भी होते हैं।एन बी टी न्यूज़ गाज़ियाबाद नवभारत टाईम्स मन से भक्ति करो मिलेंगे राम : रामभद्राचार्य http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/7329118.cms जनवरी २१, २०११ जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20110929115330/http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/7329118.cms 29 सितंबर 2011 live संवाददाता ऊना दैनिक ट्रिब्यून केवल गुरु भवसागर के पार पहुंचा सकता है : बाबा बाल जी महाराज http://dainiktribuneonline.com/2011/02/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%AD%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B9/ फ़रवरी १३, २०११ जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20120407022949/http://dainiktribuneonline.com/2011/02/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%AD%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B9/ 7 अप्रैल 2012 live संवाददाता सीतामढ़ी जागरण याहू ज्ञान चक्षु से रामकथा का बखान करने पहुंचे रामभद्राचार्य http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7679575.html मई ५, २०११ जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20110922161110/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_7679575.html 22 सितंबर 2011 dead संवाददाता ऋषिकेश जागरण याहू दु:ख और विपत्ति में धैर्य न खोएं http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7835924_1.html जून ७, २०११ जून २४, २०११ प्रख्यात राम कथावाचक स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि ... https://web.archive.org/web/20110922161250/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7835924_1.html 22 सितंबर 2011 dead Anjoria सिंगापुर में भोजपुरी के अलख जगावत कार्यक्रम http://anjoria.com/?p=4041 जून २६, २०११ जून ३०, २०११ श्री लक्ष्मी नारायण मन्दिर में सुप्रसिद्ध मानस मर्मज्ञ जगतगुरु रामभद्राचार्य जी राकेश के मानपत्र देके सम्मानित कइले। भोजपुरी https://web.archive.org/web/20110701095824/http://anjoria.com/?p=4041 1 जुलाई 2011 dead रामभद्राचार्य जी http://www.sanatantv.com/rambhadracharya.php सनातन टीवी May 10, 2011 अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20110720021254/http://www.sanatantv.com/rambhadracharya.php 20 जुलाई 2011 dead २०१५ में भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया। जन्म एवं प्रारम्भिक जीवन माता शची देवी और पिता पण्डित राजदेव मिश्र के पुत्र जगद्गुरु रामभद्राचार्य का जन्म एक वसिष्ठगोत्रिय सरयूपारीण ब्राह्मण परिवार में भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के जौनपुर जिले के सांडीखुर्द नामक ग्राम में हुआ। माघ कृष्ण एकादशी विक्रम संवत २००६ (तदनुसार १४ जनवरी १९५० ई), मकर संक्रान्ति की तिथि को रात के १०:३४ बजे बालक का प्रसव हुआ। उनके पितामह पण्डित सूर्यबली मिश्र की एक चचेरी बहन मीरा बाई की भक्त थीं और मीरा बाई अपने काव्यों में श्रीकृष्ण को गिरिधर नाम संबोधित करती थीं, अतः उन्होंने नवजात बालक को गिरिधर नाम दिया।दिनकर २००८, पृष्ठ २२–२४। दृष्टि बाधन गिरिधर की नेत्रदृष्टि दो मास की अल्पायु में नष्ट हो गयी। मार्च २४, १९५० के दिन बालक की आँखों में रोहे हो गए। गाँव में आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध नहीं थी। बालक को एक वृद्ध महिला चिकित्सक के पास ले जाया गया जो रोहे की चिकित्सा के लिए जानी जाती थी। चिकित्सक ने गिरिधर की आँखों में रोहे के दानों को फोड़ने के लिए गरम द्रव्य डाला, परन्तु रक्तस्राव के कारण गिरिधर के दोनों नेत्रों की ज्योति चली गयी।अंग्रेज़ी अनेजा मुक्ता; आईवे टीम २००५ Abilities Redefined - Forty Life Stories Of Courage And Accomplishment अखिल भारतीय नेत्रहीन परिसंघ Shri Ram Bhadracharyaji - A Religious Head With A Vision http://www.aicb.in/images/success_story.pdf अप्रैल २५, २०११ ६६-६८ https://web.archive.org/web/20110903121706/http://www.aicb.in/images/success_story.pdf 3 सितंबर 2011 dead आँखों की चिकित्सा के लिए बालक का परिवार उन्हें सीतापुर, लखनऊ और मुम्बई स्थित विभिन्न आयुर्वेद, होमियोपैथी और पश्चिमी चिकित्सा के विशेषज्ञों के पास ले गया, परन्तु गिरिधर के नेत्रों का उपचार न हो सका। गिरिधर मिश्र तभी से प्रज्ञाचक्षु हैं। वे न तो पढ़ सकते हैं और न लिख सकते हैं और न ही ब्रेल लिपि का प्रयोग करते हैं – वे केवल सुनकर सीखते हैं और बोलकर लिपिकारों द्वारा अपनी रचनाएँ लिखवाते हैं। प्रथम काव्य रचना गिरिधर के पिता मुम्बई में कार्यरत थे, अतः उनका प्रारम्भिक अध्ययन घर पर पितामह की देख-रेख में हुआ। दोपहर में उनके पितामह उन्हें रामायण, महाभारत, विश्रामसागर, सुखसागर, प्रेमसागर, ब्रजविलास आदि काव्यों के पद सुना देते थे। तीन वर्ष की आयु में गिरिधर ने अवधी में अपनी सर्वप्रथम कविता रची और अपने पितामह को सुनाई। इस कविता में यशोदा माता एक गोपी को श्रीकृष्ण से लड़ने के लिए उलाहना दे रही हैं। मेरे गिरिधारी जी से काहे लरी ॥ तुम तरुणी मेरो गिरिधर बालक काहे भुजा पकरी ॥ सुसुकि सुसुकि मेरो गिरिधर रोवत तू मुसुकात खरी ॥ तू अहिरिन अतिसय झगराऊ बरबस आय खरी ॥ गिरिधर कर गहि कहत जसोदा आँचर ओट करी ॥ गीता और रामचरितमानस का ज्ञान एकश्रुत प्रतिभा से युक्त बालक गिरिधर ने अपने पड़ोसी पण्डित मुरलीधर मिश्र की सहायता से पाँच वर्ष की आयु में मात्र पन्द्रह दिनों में श्लोक संख्या सहित सात सौ श्लोकों वाली सम्पूर्ण भगवद्गीता कण्ठस्थ कर ली। १९५५ ई में जन्माष्टमी के दिन उन्होंने सम्पूर्ण गीता का पाठ किया।परौहा तुलसीदास स्वामी रामभद्राचार्य गीतरामायणम् (गीतसीताभिरामं संस्कृतगीतमहाकाव्यम्) महाकविजगद्गुरुस्वामिरामभद्राचार्याणां व्यक्तित्वं कृतित्वंच जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय जनवरी १४, २०११ ५–९ संस्कृत संयोगवश, गीता कण्ठस्थ करने के ५२ वर्ष बाद नवम्बर ३०, २००७ ई के दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने संस्कृत मूलपाठ और हिन्दी टीका सहित भगवद्गीता के सर्वप्रथम ब्रेल लिपि में अंकित संस्करण का विमोचन किया।एस्ट्रो ज्योति Vedic scriptures and stotras for the Blind people in Braille अंग्रेज़ी http://www.astrojyoti.info/helpfortheblind.htm जून २५, २०११ https://web.archive.org/web/20110706055811/http://www.astrojyoti.info/helpfortheblind.htm 6 जुलाई 2011 dead अंग्रेज़ी एस्ट्रो ज्योति Braille Bhagavad Gita inauguration http://astrojyoti.info/blindgitainaguration.htm जून २५, २०११ जून 2020 InternetArchiveBot ब्यूरो रिपोर्ट अंग्रेज़ी ज़ी न्यूज़ Bhagavad Gita in Braille Language http://www.zeenews.com/news411003.html दिसम्बर ३, २००७ जून २५, २०११ एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल वेबदुनिया हिन्दी अब ब्रेल लिपि में भगवद्गीता http://hindi.webdunia.com/news/news/regional/0712/06/1071206064_1.htm दिसम्बर ६, २००७ जुलाई २, २०११ https://web.archive.org/web/20110924103148/http://hindi.webdunia.com/news/news/regional/0712/06/1071206064_1.htm 24 सितंबर 2011 dead सात वर्ष की आयु में गिरिधर ने अपने पितामह की सहायता से छन्द संख्या सहित सम्पूर्ण श्रीरामचरितमानस साठ दिनों में कण्ठस्थ कर ली। १९५७ ई में रामनवमी के दिन व्रत के दौरान उन्होंने मानस का पूर्ण पाठ किया। कालान्तर में गिरिधर ने समस्त वैदिक वाङ्मय, संस्कृत व्याकरण, भागवत, प्रमुख उपनिषद्, संत तुलसीदास की सभी रचनाओं और अन्य अनेक संस्कृत और भारतीय साहित्य की रचनाओं को कण्ठस्थ कर लिया। उपनयन और कथावाचन गिरिधर मिश्र का उपनयन संस्कार निर्जला एकादशी के दिन जून २४, १९६१ ई को हुआ। अयोध्या के पण्डित ईश्वरदास महाराज ने उन्हें गायत्री मन्त्र के साथ-साथ राममन्त्र की दीक्षा भी दी। भगवद्गीता और रामचरितमानस का अभ्यास अल्पायु में ही कर लेने के बाद गिरिधर अपने गाँव के समीप अधिक मास में होने वाले रामकथा कार्यक्रमों में जाने लगे। दो बार कथा कार्यक्रमों में जाने के बाद तीसरे कार्यक्रम में उन्होंने रामचरितमानस पर कथा प्रस्तुत की, जिसे कईं कथावाचकों ने सराहा। औपचारिक शिक्षा उच्च विद्यालय ७ जुलाई १९६७ के दिन जौनपुर स्थित आदर्श गौरीशंकर संस्कृत महाविद्यालय से गिरिधर मिश्र ने अपनी औपचारिक शिक्षा प्रारम्भ की, जहाँ उन्होंने संस्कृत व्याकरण के साथ-साथ हिन्दी, आंग्लभाषा, गणित, भूगोल और इतिहास का अध्ययन किया।दिनकर २००८, पृष्ठ २५–२७ मात्र एक बार सुनकर स्मरण करने की अद्भुत क्षमता से सम्पन्न एकश्रुत गिरिधर मिश्र ने कभी भी ब्रेल लिपि या अन्य साधनों का सहारा नहीं लिया। तीन महीनों में उन्होंने वरदराजाचार्य विरचित ग्रन्थ लघुसिद्धान्तकौमुदी का सम्यक् ज्ञान प्राप्त कर लिया। प्रथमा से मध्यमा की परीक्षाओं में चार वर्ष तक कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद उच्चतर शिक्षा के लिए वे सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय गए। संस्कृत में प्रथम काव्यरचना आदर्श गौरीशंकर संस्कृत महाविद्यालय में गिरिधर ने छन्दःप्रभा के अध्ययन के समय आचार्य पिंगल प्रणीत अष्टगण का ज्ञान प्राप्त किया। अगले ही दिन उन्होंने संस्कृत में अपना प्रथम पद भुजंगप्रयात छन्द में रचा। महाघोरशोकाग्निनातप्यमानं पतन्तं निरासारसंसारसिन्धौ। अनाथं जडं मोहपाशेन बद्धं प्रभो पाहि माँ सेवकक्लेशहर्त्तः ॥ हे सर्वसमर्थ प्रभु, सेवक के क्लेशों को हरनेवाले! मैं इस महाघोर शोक की अग्नि द्वारा तपाया जा रहा हूँ, निरासार संसार-सागर में गिर रहा हूँ, अनाथ और जड़ हूँ और मोह के पाश से बँधा हूँ, मेरी रक्षा करें। thumb|right|युवावस्था में गिरिधर मिश्र शास्त्री (स्नातक) तथा आचार्य (परास्नातक) १९७१ में गिरिधर मिश्र वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत व्याकरण में शास्त्री (स्नातक उपाधि) के अध्ययन के लिए प्रविष्ट हुए। १९७४ में उन्होंने सर्वाधिक अंक अर्जित करते हुए शास्त्री (स्नातक उपाधि) की परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्पश्चात् वे आचार्य (परास्नातक उपाधि) के अध्ययन के लिए इसी विश्वविद्यालय में पंजीकृत हुए। परास्नातक अध्ययन के दौरान १९७४ में अखिल भारतीय संस्कृत अधिवेशन में भाग लेने गिरिधर मिश्र नयी दिल्ली आए। अधिवेशन में व्याकरण, सांख्य, न्याय, वेदान्त और अन्त्याक्षरी में उन्होंने पाँच स्वर्ण पदक जीते। भारत की तत्कालीन प्रधानमन्त्रिणी श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने उन्हें पाँचों स्वर्णपदकों के साथ उत्तर प्रदेश के लिए चलवैजयन्ती पुरस्कार प्रदान किया। उनकी योग्यताओं से प्रभावित होकर श्रीमती गाँधी ने उन्हें आँखों की चिकित्सा के लिए संयुक्त राज्य अमरीका भेजने का प्रस्ताव किया, परन्तु गिरिधर मिश्र ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। १९७६ में सात स्वर्णपदकों और कुलाधिपति स्वर्ण पदक के साथ उन्होंने आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी एक विरल उपलब्धि भी रही – हालाँकि उन्होंने केवल व्याकरण में आचार्य उपाधि के लिए पंजीकरण किया था, उनके चतुर्मुखी ज्ञान के लिए विश्वविद्यालय ने उन्हें ३० अप्रैल १९७६ के दिन विश्वविद्यालय में अध्यापित सभी विषयों का आचार्य घोषित किया।सितम्बर १३, २००९ http://jagadgururambhadracharya.org/videos/manasdharma?id=15 श्रीराम कथा (मानस धर्म) चित्रकूट, उत्तर प्रदेश, भारत जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय जुलाई १, २०११ डीवीडी संख्या ८, भाग १, समय ००:५०:२०। https://web.archive.org/web/20160307192520/http://jagadgururambhadracharya.org/videos/manasdharma?id=15 7 मार्च 2016 live विद्यावारिधि (पी एच डी) एवं वाचस्पति (डी लिट्) आचार्य की उपाधि पाने के पश्चात् गिरिधर मिश्र विद्यावारिधि (पी एच डी) की उपाधि के लिए इसी विश्वविद्यालय में पण्डित रामप्रसाद त्रिपाठी के निर्देशन में शोधकार्य के लिए पंजीकृत हुए। उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से शोध कार्य के लिए अध्येतावृत्ति भी मिली, परन्तु आगामी वर्षों में अनेक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। संकटों के बीच उन्होंने अक्टूबर १४, १९८१ को संस्कृत व्याकरण में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से विद्यावारिधि (पी एच डी) की उपाधि अर्जित की। उनके शोधकार्य का शीर्षक था अध्यात्मरामायणे अपाणिनीयप्रयोगानां विमर्शः और इस शोध में उन्होंने अध्यात्म रामायण में पाणिनीय व्याकरण से असम्मत प्रयोगों पर विमर्श किया। विद्यावारिधि उपाधि प्रदान करने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उन्हें सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग के अध्यक्ष के पद पर भी नियुक्त किया। लेकिन गिरिधर मिश्र ने इस नियुक्ति को अस्वीकार कर दिया और अपना जीवन धर्म, समाज और विकलांगों की सेवा में लगाने का निर्णय लिया। १९९७ में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने उन्हें उनके शोधकार्य अष्टाध्याय्याः प्रतिसूत्रं शाब्दबोधसमीक्षणम् पर वाचस्पति (डी लिट्) की उपाधि प्रदान की। इस शोधकार्य में गिरिधर मिश्र नें अष्टाध्यायी के प्रत्येक सूत्र पर संस्कृत के श्लोकों में टीका रची है। विरक्त दीक्षा और तदनन्तर जीवन १९७६ में गिरिधर मिश्र ने करपात्री महाराज को रामचरितमानस पर कथा सुनाई। स्वामी करपात्री ने उन्हें विवाह न करने, वीरव्रत धारण करके आजीवन ब्रह्मचारी रहने और किसी वैष्णव सम्प्रदाय में दीक्षा लेने का उपदेश दिया।दिनकर २००८, पृष्ठ २८–३१। गिरिधर मिश्र ने नवम्बर १९, १९८३ के कार्तिक पूर्णिमा के दिन रामानन्द सम्प्रदाय में श्री श्री १००८ श्री रामचरणदास महाराज फलाहारी से विरक्त दीक्षा ली। अब गिरिधर मिश्र रामभद्रदास नाम से आख्यात हुए। thumb|left|चित्रकूट में मन्दाकिनी नदी के तट पर षाण्मासिक पयोव्रत के दौरान सुखासन और ध्यानमुद्रा में ध्यानस्थ जगद्गुरु रामभद्राचार्य पयोव्रत गिरिधर मिश्र ने गोस्वामी तुलसीदास विरचित दोहावली के निम्नलिखित पाँचवे दोहे के अनुसार १९७९ ई में चित्रकूट में छः महीनों तक मात्र दुग्ध और फलों का आहार लेते हुए अपना प्रथम षाण्मासिक पयोव्रत अनुष्ठान सम्पन्न किया।दोहावली पोद्दार हनुमान प्रसाद गीता प्रेस १९९६ गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत १०दूबे डॉ हरिप्रसाद जागरण याहू पवित्र स्थान: ६ महीने रहें चित्रकूट http://in.jagran.yahoo.com/news/features/general/8_14_5390035.html अप्रैल १३, २०११ जुलाई ३, २०११ तुलसीदास ने माना है कि यदि कोई व्यक्ति छह मास तक पयस्विनी के किनारे रहता है और केवल फल खाकर राम नाम जपता रहता है, तो उसे सभी तरह की सिद्धियां मिल जाती हैं। https://web.archive.org/web/20110922160213/http://in.jagran.yahoo.com/news/features/general/8_14_5390035.html 22 सितंबर 2011 dead पय अहार फल खाइ जपु राम नाम षट मास। सकल सुमंगल सिद्धि सब करतल तुलसीदास ॥ केवल दूध और फलों का आहार लेते हुए छः महीने तक राम नाम जपो। तुलसीदास कहते हैं कि ऐसा करने से सारे सुन्दर मंगल और सिद्धियाँ करतलगत हो जाएँगी। १९८३ ई में उन्होंने चित्रकूट की स्फटिक शिला के निकट अपना द्वितीय षाण्मासिक पयोव्रत अनुष्ठान सम्पन्न किया। यह पयोव्रत स्वामी रामभद्राचार्य के जीवन का एक नियमित व्रत बन गया है। २००२ ई में अपने षष्ठ षाण्मासिक पयोव्रत अनुष्ठान में उन्होंने श्रीभार्गवराघवीयम् नामक संस्कृत महाकाव्य की रचना की।२००२ संस्कृत अक्टूबर ३०, २००२ श्रीभार्गवराघवीयम् (संस्कृतमहाकाव्यम्) स्वामी रामभद्राचार्य चित्रकूट, उत्तर प्रदेश, भारत जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय ५११दिनकर २००८, पृष्ठ १२७। वे अब भी तक नियमित रूप से षाण्मासिक पयोव्रत का अनुष्ठान करते रहते हैं, २०१०-२०११ में उन्होंने अपने नवम पयोव्रत का अनुष्ठान किया।संवाददाता चित्रकूट जागरण याहू भारतीय शिक्षा सिखाती है संस्कार http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7135505.html जनवरी ५, २००७ जुलाई २, २०११ https://web.archive.org/web/20110922161314/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7135505.html 22 सितंबर 2011 dead संवाददाता चित्रकूट जागरण याहू तीर्थ में गूंजते रहे गुरु वंदना के स्वर http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6598239.html जुलाई २५, २०१० जुलाई २, २०११ https://web.archive.org/web/20110922161406/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6598239.html 22 सितंबर 2011 dead संवाददाता चित्रकूट अमर उजाला जिले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का शोध संस्थान बनेगा http://www.amarujala.com/city/Chitakut/Chitakut-16337-42.html जनवरी ५, २०११ जुलाई २, २०११ https://web.archive.org/web/20110911142000/http://www.amarujala.com/city/Chitakut/Chitakut-16337-42.html 11 सितंबर 2011 dead thumb|right| अक्टूबर २५, २००९ के दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य चित्रकूट स्थित तुलसी पीठ में संत तुलसीदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए तुलसी पीठ १९८७ में उन्होंने चित्रकूट में एक धार्मिक और समाजसेवा संस्थान तुलसी पीठ की स्थापना की, जहाँ रामायण के अनुसार श्रीराम ने वनवास के चौदह में से बारह वर्ष बिताए थे।संवाददाता चित्रकूट जागरण याहू प्रज्ञाचक्षु की आंख बन गई बुआ जी http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7135652.html जनवरी ५, २०११ जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20110922155920/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7135652.html 22 सितंबर 2011 dead इस पीठ की स्थापना हेतु साधुओं और विद्वज्जनों ने उन्हें श्रीचित्रकूटतुलसीपीठाधीश्वर की उपाधि से अलंकृत किया। इस तुलसी पीठ में उन्होंने एक सीताराम मन्दिर का निर्माण करवाया, जिसे काँच मन्दिर के नाम से जाना जाता है। जगद्गुरुत्व जगद्गुरु सनातन धर्म में प्रयुक्त एक उपाधि है जो पारम्परिक रूप से वेदान्त दर्शन के उन आचार्यों को दी जाती है जिन्होंने प्रस्थानत्रयी (ब्रह्मसूत्र, भगवद्गीता और मुख उपनिषद्) पर संस्कृत में भाष्य रचा है। मध्यकाल में भारत में कई प्रस्थानत्रयीभाष्यकार हुए थे यथा शंकराचार्य, निम्बार्काचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, रामानन्दाचार्य और अंतिम थे वल्लभाचार्य (१४७९ से १५३१ ई)। वल्लभाचार्य के भाष्य के पश्चात् पाँच सौ वर्षों तक संस्कृत में प्रस्थानत्रयी पर कोई भाष्य नहीं लिखा गया।संवाददाता चित्रकूट जागरण याहू श्री सीता राम विवाह के आनंदित क्षणों मे झूमे भक्त http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7168843.html जनवरी १२, २०११ जुलाई १२, २०११ हरिद्वार से आये आचार्य चंद्र दत्त सुवेदी ने कहा कि प्रस्थानत्रयी पर सबसे पहले भाष्य आचार्य शंकर ने लिखा और अब वल्लभाचार्य के छह सौ [sic] साल बाद जगद्गुरु स्वामी राम भद्राचार्य जी ने लिखा। https://web.archive.org/web/20110922160437/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7168843.html 22 सितंबर 2011 dead जून २४, १९८८ ई के दिन काशी विद्वत् परिषद् वाराणसी ने रामभद्रदास का तुलसीपीठस्थ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य के रूप में चयन किया। ३ फ़रवरी १९८९ को प्रयाग में महाकुंभ में रामानन्द सम्प्रदाय के तीन अखाड़ों के महन्तों, सभी सम्प्रदायों, खालसों और संतों द्वारा सर्वसम्मति से काशी विद्वत् परिषद् के निर्णय का समर्थन किया गया।अग्रवाल २०१०, पृष्ठ ७८१। इसके बाद १ अगस्त १९९५ को अयोध्या में दिगंबर अखाड़े ने रामभद्रदास का जगद्गुरु रामानन्दाचार्य के रूप में विधिवत अभिषेक किया। अब रामभद्रदास का नाम हुआ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य। इसके बाद उन्होंने ब्रह्म सूत्र, भगवद्गीता और ११ उपनिषदों (कठ, केन, माण्डूक्य, ईशावास्य, प्रश्न, तैत्तिरीय, ऐतरेय, श्वेताश्वतर, छान्दोग्य, बृहदारण्यक और मुण्डक) पर संस्कृत में श्रीराघवकृपाभाष्य की रचना की। इन भाष्यों का प्रकाशन १९९८ में हुआ। वे पहले ही नारद भक्ति सूत्र और रामस्तवराजस्तोत्र पर संस्कृत में राघवकृपाभाष्य की रचना कर चुके थे। इस प्रकार स्वामी रामभद्राचार्य ने ५०० वर्षों में पहली बार संस्कृत में प्रस्थानत्रयीभाष्यकार बनकर लुप्त हुई जगद्गुरु परम्परा को पुनर्जीवित किया और रामानन्द सम्प्रदाय को स्वयं रामानन्दाचार्य द्वारा रचित आनन्दभाष्य के बाद प्रस्थानत्रयी पर दूसरा संस्कृत भाष्य दिया। हज़ारी प्रसाद द्विवेदी ग्रन्थावली ४ द्विवेदी मुकुन्द राजकमल प्रकाशन २००७ प्रथम संस्करण १९८१ संशोधित, परिवर्धित नई दिल्ली, भारत ISBN 972812671358-5 पृष्ठ २७३ संयुक्त राष्ट्र को सम्बोधन अगस्त २८ से ३१, २००० ई के बीच न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित सहस्राब्दी विश्व शान्ति शिखर सम्मलेन में भारत के आध्यात्मिक और धार्मिक गुरुओं में जगद्गुरु रामभद्राचार्य सम्मिलित थे। संयुक्त राष्ट्र को उद्बोधित करते हुए अपने में उन्होंने भारत और हिन्दू शब्दों की संस्कृत व्याख्या और ईश्वर के सगुण और निर्गुण स्वरूपों का उल्लेख करते हुए शान्ति पर वक्तव्य दिया। इस वक्तव्य द्वारा उन्होंने विश्व के सभी विकसित और विकासशील देशों से एकजुट होकर दरिद्रता उन्मूलन, आतंकवाद दलन और निःशस्त्रीकरण के लिए प्रयासरत होने का आह्वान किया। वक्तव्य के अन्त में उन्होंने शान्ति मन्त्र का पाठ किया।अंग्रेज़ी संवाददाता कार्यालय दि हिन्दू 100 from India for World Peace Summit http://www.hindu.com/2000/05/26/stories/14262185.htm मई २६, २००० जून २४, २०११ अगस्त 2021 InternetArchiveBot विश्व धर्म संसद Delegates http://www.millenniumpeacesummit.com/news000905.html अंग्रेज़ी जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20110714094809/http://www.millenniumpeacesummit.com/news000905.html 14 जुलाई 2011 dead अयोध्या मसले में साक्ष्य जुलाई २००३ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सम्मुख अयोध्या विवाद के अपर मूल अभियोग संख्या ५ के अन्तर्गत धार्मिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में साक्षी बनकर प्रस्तुत हुए (साक्षी संख्या ओ पी डब्लु १६)।अंग्रेज़ी शर्मा अमित इण्डियन एक्सप्रेस No winners in VHP’s Ayodhya blame game http://www.indianexpress.com/oldStory/23063/ मई १, २००३ जून २५, २०११ अंग्रेज़ी Babar destroyed Ram temple at Ayodhya मिड डे http://www.mid-day.com/news/2003/jul/58790.htm जुलाई १७, २००३ जून २५, २०११ https://web.archive.org/web/20110810072515/http://www.mid-day.com/news/2003/jul/58790.htm 10 अगस्त 2011 live अंग्रेज़ी मिड डे Ram Koop was constructed by Lord Ram http://www.mid-day.com/news/2003/jul/59146.htm जुलाई २१, २००३ जून २५, २०११ https://web.archive.org/web/20110810072509/http://www.mid-day.com/news/2003/jul/59146.htm 10 अगस्त 2011 live उनके शपथ पत्र और जिरह के कुछ अंश अन्तिम निर्णय में उद्धृत हैं।अग्रवाल २०१०, पृष्ठ. ३०४, ३०९, ७८०-७८८, ११०३-१११०, २००४-२००५, ४४४७, ४४४५-४४५९, ४५३७, ४८९१-४८९४, ४९९६।शर्मा २०१०, पृष्ठ २१, ३१.शर्मा २०१०, पृष्ठ २७३. अपने शपथ पत्र में उन्होंने सनातन धर्म के प्राचीन शास्त्रों (वाल्मीकि रामायण, रामतापनीय उपनिषद्, स्कन्द पुराण, यजुर्वेद, अथर्ववेद, इत्यादि) से उन छन्दों को उद्धृत किया जो उनके मतानुसार अयोध्या को एक पवित्र तीर्थ और श्रीराम का जन्मस्थान सिद्ध करते हैं। उन्होंने तुलसीदास की दो कृतियों से नौ छन्दों (तुलसी दोहा शतक से आठ दोहे और कवितावली से एक कवित्त) को उद्धृत किया जिनमें उनके कथनानुसार अयोध्या में मन्दिर के तोड़े जाने और विवादित स्थान पर मस्जिद के निर्माण का वर्णन है। प्रश्नोत्तर के दौरान उन्होंने रामानन्द सम्प्रदाय के इतिहास, उसके मठों, महन्तों के विषय में नियमों, अखाड़ों की स्थापना और संचालन और तुलसीदास की कृतियों का विस्तृत वर्णन किया। मूल मन्दिर के विवादित स्थान के उत्तर में होने के प्रतिपक्ष द्वारा रखे गए तर्क का निरसन करते हुए उन्होंने स्कन्द पुराण के अयोध्या महात्म्य में वर्णित राम जन्मभूमि की सीमाओं का वर्णन किया, जोकि न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल द्वारा विवादित स्थल के वर्तमान स्थान से मिलती हुई पायी गयीं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय thumb|right|जनवरी २, २००५ ई के दिन विकलांग विश्वविद्यालय के परिसर में मुख्य भवन के सामने अस्थि विकलांग विद्यार्थियों के साथ कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य २३ अगस्त १९९६ ई के दिन स्वामी रामभद्राचार्य ने चित्रकूट में दृष्टिहीन विद्यार्थियों के लिए तुलसी प्रज्ञाचक्षु विद्यालय की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने केवल विकलांग विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु एक संस्थान की स्थापना का निर्णय लिया। इस उद्देश्य के साथ उन्होंने सितम्बर २७, २००१ ई को चित्रकूट, उत्तर प्रदेश, में जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना की। About JRHU अंग्रेज़ी http://www.jrhu.com/index_files/Page329.htm जुलाई २१, २००९ जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय https://web.archive.org/web/20090704010720/http://jrhu.com/index_files/Page329.htm 4 जुलाई 2009 dead शुभ्रा जगदगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय http://www.bhartiyapaksha.com/?p=9111 भारतीय पक्ष अप्रैल २५, २०११ फ़रवरी १२, २०१० 21 जुलाई 2012 https://archive.today/20120721205725/http://www.bhartiyapaksha.com/?p=9111 bot: unknown यह भारत और विश्व का प्रथम विकलांग विश्वविद्यालय है।अंग्रेज़ी हिन्दुस्तान टाइम्स तरुण सुभाष A Special University for Special Students: UP does a first - it establishes the country's first exclusive university for physically and mentally disabled students http://www.disabilityindia.org/djinstjuly05C.cfm#up जुलाई ३, २००५ जून २३, २०११ https://web.archive.org/web/20110623093255/http://disabilityindia.org/djinstjuly05C.cfm#up 23 जून 2011 dead जनसत्ता एक्सप्रेस रागिणी दीक्षित चित्रकूट: दुनिया का प्रथम विकलांग विश्वविद्यालय जुलाई १०, २००७ इस विश्वविद्यालय का गठन उत्तर प्रदेश सरकार के एक अध्यादेश द्वारा किया गया, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश राज्य अधिनियम ३२ (२००१) में परिवर्तित कर दिया गया।उत्तर प्रदेश सरकार सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग सूचना का अधिकार अधिनियम २००५: अनुक्रमणिका http://infotech.up.nic.in/hindi/suchana/suchana.htm जून २५, २०११ https://web.archive.org/web/20110123122117/http://infotech.up.nic.in/hindi/suchana/suchana.htm 23 जनवरी 2011 dead Home अंग्रेज़ी http://www.jrhu.com/index.htm जून २४, २०११ जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय https://web.archive.org/web/20111008025426/http://www.jrhu.com/index.htm 8 अक्तूबर 2011 dead अंग्रेज़ी E-Governance in India: initiatives & issues सिन्हा आर पी कंसेप्ट पब्लिशिंग कम्पनी दिसम्बर १, २००६ नई दिल्ली, भारत ISBN 978-81-8069-311-3 पृष्ठ १०४अंग्रेज़ी Handbook of universities गुप्ता अमीता; कुमार, आशीष एटलांटिक प्रकाशक एवं वितरक जुलाई ६, २००६ नई दिल्ली, भारत ISBN 978-81-269-0608-6 पृष्ठ ३९५ इस अधिनियम ने स्वामी रामभद्राचार्य को विश्वविद्यालय का जीवन पर्यन्त कुलाधिपति भी नियुक्त किया। यह विश्वविद्यालय संस्कृत, हिन्दी, आंग्लभाषा, समाज शास्त्र, मनोविज्ञान, संगीत, चित्रकला (रेखाचित्र और रंगचित्र), ललित कला, विशेष शिक्षण, प्रशिक्षण, इतिहास, संस्कृति, पुरातत्त्वशास्त्र, संगणक और सूचना विज्ञान, व्यावसायिक शिक्षण, विधिशास्त्र, अर्थशास्त्र, अंग-उपयोजन और अंग-समर्थन के क्षेत्रों में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टर की उपाधियाँ प्रदान करता हैं। Courses Offered अंग्रेज़ी http://www.jrhu.com/index_files/Page449.htm अप्रैल २५, २०११ जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय https://web.archive.org/web/20111008025403/http://www.jrhu.com/index_files/Page449.htm 8 अक्तूबर 2011 dead विश्वविद्यालय में २०१३ तक आयुर्वेद और चिकित्साशास्त्र (मेडिकल) का अध्यापन प्रस्तावित है।संवाददाता महोबा जुलाई ६, २०११ विकलांगों के लिए मेडिकल कालेज जल्द http://www.amarujala.com/city/Mahoba/Mahoba-33757-44.html जुलाई ९, २०११ अमर उजाला https://web.archive.org/web/20110911142024/http://www.amarujala.com/city/Mahoba/Mahoba-33757-44.html 11 सितंबर 2011 dead विश्वविद्यालय में केवल चार प्रकार के विकलांग – दृष्टिबाधित, मूक-बधिर, अस्थि-विकलांग (पंगु अथवा भुजाहीन) और मानसिक विकलांग – छात्रों को प्रवेश की अनुमति है, जैसा कि भारत सरकार के विकलांगता अधिनियम १९९५ में निरूपित है। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार यह विश्वविद्यालय प्रदेश के प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रानिक्स शैक्षणिक संस्थाओं में से एक है।उत्तर प्रदेश सरकार सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग कम्प्यूटर शिक्षा http://infotech.up.nic.in/hindi/ourgoal/our_goal_3.htm जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20120326030659/http://infotech.up.nic.in/hindi/ourgoal/our_goal_3.htm 26 मार्च 2012 dead मार्च २०१० ई में विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में कुल ३५४ विद्यार्थियों को विभिन्न शैक्षणिक उपाधियाँ प्रदान की गईं।संवाददाता चित्रकूट जागरण याहू विकलांग विश्वविद्यालय का दूसरा दीक्षात समारोह ७ मार्च को http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6211271.html फ़रवरी २४, २०१० जुलाई २, २०११ https://archive.today/20120710081612/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6211271.html 10 जुलाई 2012 dead बुन्देलखण्ड लाईव औपचारिकताओं के बीच संपन्न हुआ विकलांग विवि का दीक्षान्त समारोह http://www.bundelkhandlive.com/site/?p=6289 मार्च ७, २०१० जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20160502031042/http://www.bundelkhandlive.com/site/?p=6289 2 मई 2016 dead संवाददाता चित्रकूट जागरण याहू अच्छी शिक्षा-दीक्षा से विकलांग बनेंगे राष्ट्र प्रगति में सहायक http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6236876.html मार्च ७, २०१० जुलाई २, २०११ https://web.archive.org/web/20110922161507/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6236876.html 22 सितंबर 2011 dead जनवरी २०११ ई में आयोजित तृतीय दीक्षांत समारोह में ३८८ विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपाधियाँ प्रदान की गईं। इंडो-एशियन न्यूज़ सर्विस वन इंडिया हिन्दी चित्रकूट में राजनाथ सिंह को मानद उपाधि http://thatshindi.oneindia.in/news/2011/01/15/20110115240706-aid0122.html जनवरी १५, २०११ जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20110922115936/http://thatshindi.oneindia.in/news/2011/01/15/20110115240706-aid0122.html 22 सितंबर 2011 live एस एन बी चित्रकूट राष्ट्रीय सहारा रामभद्राचार्य विवि का दीक्षांत समारोह - राजनाथ सिंह डीलिट की उपाधि से सम्मानित http://rashtriyasahara.samaylive.com/epapermain.aspx?queryed=9&boxid=3291131&parentid=18540&eddate=1/15/11&querypage=15 जनवरी १५, २०११ जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20170510100452/http://rashtriyasahara.samaylive.com/epapermain.aspx?queryed=9 10 मई 2017 dead रामचरितमानस की प्रामाणिक प्रति thumb|right|जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने द्वारा सम्पादित रामचरितमानस की प्रामाणिक प्रति (भावार्थबोधिनी टीका सहित) भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को अर्पित करते हुए गोस्वामी तुलसीदास ने अयुताधिक पदों से युक्त रामचरितमानस की रचना १६वी शताब्दी ई में की थी। ४०० वर्षों में उनकी यह कृति उत्तर भारत में बहुत लोकप्रिय बन गयी और इसे पाश्चात्य भारतविद् बहुशः उत्तर भारत की बाईबिल कहते हैं।अंग्रेज़ी लौख्टैफेल्ड जेम्स जी ISBN 978-0-8239-3180-4 The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z अंग्रेज़ी २००१ रोज़ेन प्रकाशन ग्रुप पृष्ठ ५५९व्हाईटफ़िश, मोंटाना, संयुक्त राज्य अमरीका मैक्फ़ी जे एम ISBN 978-1-4179-1498-2 The Ramayan of Tulsidas or the Bible of Northern India मई २३, २००४ केसिंजर पब्लिशिंग एल एल सी पृष्ठ vii Preface The choice of the subtitle is no exaggeration. The book is indeed the Bible of Northern India http://books.google.com/books?id=AbG4yfdE1b4C&printsec=frontcover&dq=isbn:9781417914982&hl=en&ei=4dADTtKeHqTV0QG9poS4Cw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CCoQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false अंग्रेज़ी 24 जून 2011 https://web.archive.org/web/20140702222723/http://books.google.com/books?id=AbG4yfdE1b4C#v=onepage&q&f=false 2 जुलाई 2014 live इस काव्य की अनेकों प्रतियाँ मुद्रित हुई हैं, जिनमें श्री वेंकटेश्वर प्रेस (खेमराज श्रीकृष्णदास) और रामेश्वर भट्ट आदि पुरानी प्रतियाँ और गीता प्रेस, मोतीलाल बनारसीदास, कौदोराम, कपूरथला और पटना से मुद्रित नयी प्रतियाँ सम्मिलित हैं।अंग्रेज़ी Fury in Ayodhya over Ramcharitmanas http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2009-11-01/india/28068936_1_seers-editions-disciples नवम्बर १, २००९ दि टाईम्स ऑफ इण्डिया मंजरी; अरोड़ा, वी एन मिश्र वी एन अरोड़ा जून २५, २०११ https://archive.today/20121216080047/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2009-11-01/india/28068936_1_seers-editions-disciples 16 दिसंबर 2012 live मानस पर अनेक टीकाएँ लिखी जा चुकी हैं, जिनमें मानसपीयूष, मानसगूढार्थचन्द्रिका, मानसमयंक, विनायकी, विजया, बालबोधिनी इत्यादि सम्मिलित हैं।रामभद्राचार्य २००६, पृष्ठ १-२७। बहुत स्थानों पर इन प्रतियों और टीकाओं में छन्दों की संख्या, मूलपाठ, प्रचलित वर्तनियों (यथा अनुनासिक प्रयोग) और प्रचलित व्याकरण नियमों (यथा विभक्त्यन्त स्वर) में भेद हैं। कुछ प्रतियों में एक आठवाँ काण्ड भी परिशिष्ट के रूप में मिलता है, जैसे कि मोतीलाल बनारसीदास और श्री वेंकटेश्वर प्रेस की प्रतियों में।प्रसाद १९९९, पृष्ठ ७९५–८५२ तुलसीकृत रामायण: पण्डित ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा हिन्दी में अनूदित (विशिष्ट संस्करण) http://www.khe-shri.com/details.asp?id=1858b&grpno=33&grpname=Ramayana जून ३०, २०११ Shri Ventakeshwar Steam Press, Bombay लवकुशकाण्ड सहित https://web.archive.org/web/20141102192437/http://www.khe-shri.com/details.asp?id=1858b&grpno=33&grpname=Ramayana 2 नवंबर 2014 dead २०वी शताब्दी में वाल्मीकि रामायण और महाभारत का विभिन्न प्रतियाँ के आधार पर सम्पादन और प्रामाणिक प्रति (critical edition) का मुद्रण क्रमशः बड़ौदा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय और पुणे स्थित भण्डारकर प्राच्य शोध संस्थान द्वारा किया गया था,अंग्रेज़ी The Mahabharata http://www.bori.ac.in/mahabharata.htm भण्डारकर प्राच्य शोध संस्थान अप्रैल २५, २०११ https://web.archive.org/web/20080209174531/http://www.bori.ac.in/mahabharata.htm 9 फ़रवरी 2008 dead पृष्ठ xxv Introduction Critical Inventory of Ramayana Studies in the World: Indian Languages and English के कृष्णमूर्ति १९९२ साउथ एशिया बुक्स ISBN 978-81-7201-100-0 स्वामी रामभद्राचार्य बाल्यकाल से २००६ ई तक रामचरितमानस की ४००० आवृत्तियाँ कर चुके थे। उन्होंने ५० प्रतियों के पाठों पर आठ वर्ष अनुसन्धान करके एक प्रामाणिक प्रति का सम्पादन किया। इस प्रति को तुलसी पीठ संस्करण के नाम से मुद्रित किया गया। आधुनिक प्रतियों की तुलना में तुलसी पीठ प्रति में मूलपाठ में कई स्थानों पर अन्तर है - मूल पाठ के लिए स्वामी रामभद्राचार्य ने पुरानी प्रतियों को अधिक विश्वसनीय माना है। इसके अतिरिक्त वर्तनी, व्याकरण और छन्द सम्बन्धी प्रचलन में आधुनिक प्रतियों से तुलसी पीठ प्रति निम्नलिखित प्रकार से भिन्न है।शुक्ल राम सागर वेबदुनिया रामचरित मानस की भाषा और वर्तनी http://hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0911/11/1091111004_1.htm नवम्बर ९, २००९ जून २५, २०११ https://web.archive.org/web/20110924103446/http://hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0911/11/1091111004_1.htm 24 सितंबर 2011 dead गीता प्रेस सहित कईं आधुनिक प्रतियाँ २ पंक्तियों में लिखित १६-१६ मात्राओं के चार चरणों की इकाई को एक चौपाई मानती हैं, जबकि कुछ विद्वान एक पंक्ति में लिखित ३२ मात्राओं की इकाई को एक चौपाई मानते हैं। तुलसी जन्म भूमि: शोध समीक्षा राम गणेश पाण्डेय भारती भवन प्रकाशन २००८ संशोधित एवं परिवर्धित संस्करण चित्रकूट, उत्तर प्रदेश, भारत प्रथम संस्करण २००३ हनुमान चालीसा ... इसकी भाषा अवधी है। दोहा-चौपाई छन्द हैं। इसमें ४० चौपाइयाँ और २ दोहे हैं। पृष्ठ ५४ रामभद्राचार्य ने ३२ मात्राओं की एक चौपाई मानी है, जिसके समर्थन में उन्होंने हनुमान चालीसा और आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा पद्मावत की समीक्षा के उदाहरण दिए हैं। उनके अनुसार इस व्याख्या में भी चौपाई के चार चरण निकलते हैं क्यूंकि हर १६ मात्राओं की अर्धाली में ८ मात्राओं के बाद यति है। परिणामतः तुलसी पीठ प्रति में चौपाइयों की गणना फ़िलिप लुट्गेनडॅार्फ़ की गणना जैसी है।१९९१ The Life of a Text: Performing the 'Ramcaritmanas' of Tulsidas लुट्गेनडॅार्फ़ फ़िलिप कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय प्रेस बर्कली, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमरीका ISBN 978-0-520-06690-8 The Text and the Research Context १४ कुछ अपवादों (पादपूर्ति इत्यादि) को छोड़कर तुलसी पीठ की प्रति में आधुनिक प्रतियों में प्रचलित कर्तृवाचक और कर्मवाचक पदों के अन्त में उकार के स्थान पर अकार का प्रयोग है। रामभद्राचार्य के मतानुसार उकार का पदों के अन्त में प्रयोग त्रुटिपूर्ण है, क्यूंकि ऐसा प्रयोग अवधी के स्वभाव के विरुद्ध है। तुलसी पीठ की प्रति में विभक्ति दर्शाने के लिए अनुनासिक का प्रयोग नहीं है जबकि आधुनिक प्रतियों में ऐसा प्रयोग बहुत स्थानों पर है। रामभद्राचार्य के अनुसार पुरानी प्रतियों में अनुनासिक का प्रचलन नहीं है। आधुनिक प्रतियों में कर्मवाचक बहुवचन और मध्यम पुरुष सर्वनाम प्रयोग में संयुक्ताक्षर न्ह और म्ह के स्थान पर तुलसी पीठ की प्रति में क्रमशः न और म का प्रयोग है। आधुनिक प्रतियों में प्रयुक्त तद्भव शब्दों में उनके तत्सम रूप के तालव्य शकार के स्थान पर सर्वत्र दन्त्य सकार का प्रयोग है। तुलसी पीठ के प्रति में यह प्रयोग वहीं है जहाँ सकार के प्रयोग से अनर्थ या विपरीत अर्थ न बने। उदाहरणतः सोभा (तत्सम शोभा) में तो सकार का प्रयोग है, परन्तु शंकर में नहीं क्यूँकि रामभद्राचार्य के अनुसार यहाँ सकार कर देने से वर्णसंकर के अनभीष्ट अर्थ वाला संकर पद बन जाएगा।रामभद्राचार्य २००६, पृष्ठ १३-१४। नवम्बर २००९ में तुलसी पीठ की प्रति को लेकर अयोध्या में एक विवाद हो गया था। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् और राम जन्मभूमि न्यास ने मानस से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए स्वामी रामभद्राचार्य से क्षमायाचना करने को कहा था। संवाददाता अयोध्या (भाषा) वेबदुनिया रामचरित मानस से जुड़ा विवाद गहराया http://hindi.webdunia.com/news/news/regional/0911/03/1091103099_1.htm नवम्बर ३, २००९ जून २५, २०११ https://web.archive.org/web/20110924103211/http://hindi.webdunia.com/news/news/regional/0911/03/1091103099_1.htm 24 सितंबर 2011 dead उत्तर में स्वामी रामभद्राचार्य का कथन था कि उन्होंने केवल मानस की प्रचलित प्रतियों का संपादन किया था, मूल मानस में संशोधन नहीं।संवाददाता चित्रकूट जागरण याहू संशोधन नही संपादन किया है:जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6186032.html जुलाई २, २०११ फ़रवरी १५, २०१० https://web.archive.org/web/20110922161615/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6186032.html 22 सितंबर 2011 dead इंडो-एशियन न्यूज़ सर्विस वन इण्डिया हिन्दी रामचरितमानस का संपादन किया, संशोधन नहीं http://thatshindi.oneindia.in/news/2010/04/30/1272570846.html जुलाई २, २०११ अप्रैल ३०, २०१० https://web.archive.org/web/20110922120137/http://thatshindi.oneindia.in/news/2010/04/30/1272570846.html 22 सितंबर 2011 dead यह विवाद तब शान्त हुआ जब स्वामी रामभद्राचार्य ने अखाड़ा परिषद् को एक पत्र लिखकर उनके पहुँचे कष्ट और पीड़ा पर खेद प्रकट किया। पत्र में रामभद्राचार्य ने अखाड़ा परिषद् से निवेदन किया कि वे पुरानी प्रतियों को ही मान्य मानें, अन्य प्रतियों को नहीं।अरविन्द शुक्ला वेबदुनिया रामभद्राचार्य के खेद जताने से संत पड़े ठंडे http://hindi.webdunia.com/news/news/regional/0911/09/1091109004_1.htm नवम्बर ९, २००९ जून २५, २०११ https://web.archive.org/web/20110924103313/http://hindi.webdunia.com/news/news/regional/0911/09/1091109004_1.htm 24 सितंबर 2011 dead साहित्यिक कृतियाँ जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने ८० से अधिक पुस्तकों और ग्रंथों की रचना की है, जिनमें से कुछ प्रकाशित और कुछ अप्रकाशित हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं। काव्य thumb|right|अक्टूबर ३०, २००२ को श्रीभार्गवराघवीयम् का लोकार्पण करते हुए भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य बायीं ओर हैं। महाकाव्य श्रीभार्गवराघवीयम् (२००२) – एक सौ एक श्लोकों वाले इक्कीस सर्गों में विभाजित और चालीस संस्कृत और प्राकृत के छन्दों में बद्ध २१२१ श्लोकों में विरचित संस्कृत महाकाव्य। स्वयं महाकवि द्वारा रचित हिन्दी टीका सहित। इसका वर्ण्य विषय दो राम अवतारों (परशुराम और राम) की लीला है। इस रचना के लिए कवि को २००५ में संस्कृत के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साहित्य अकादमी सम्मान २००५ २००५ नेशनल पोर्टल ऑफ इण्डिया http://india.gov.in/knowindia/sakademi_awards05.php अप्रैल २४, २०११ https://web.archive.org/web/20110409185243/http://india.gov.in/knowindia/sakademi_awards05.php 9 अप्रैल 2011 live पी टी आई डी एन ए इंडिया Kolatkar, Dalal among Sahitya Akademi winners http://www.dnaindia.com/india/report_kolatkar-dalal-among-sahitya-akademi-winners_1003524 दिसम्बर २२, २००५ जून २४, २०११ अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20120324185345/http://www.dnaindia.com/india/report_kolatkar-dalal-among-sahitya-akademi-winners_1003524 24 मार्च 2012 live जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। अष्टावक्र (२०१०) – एक सौ आठ पदों वाले आठ सर्गों में विभाजित ८६४ पदों में विरचित हिन्दी महाकाव्य। यह महाकाव्य अष्टावक्र ऋषि के जीवन का वर्णन है, जिन्हें विकलांगों के पुरोधा के रूप में दर्शाया गया है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। अरुन्धती (१९९४) – १५ सर्गों और १२७९ पदों में रचित हिन्दी महाकाव्य। इसमें ऋषि दम्पती वसिष्ठ और अरुन्धती के जीवन का वर्णन है। राघव साहित्य प्रकाशन निधि, राजकोट द्वारा प्रकाशित। खण्डकाव्य आजादचन्द्रशेखरचरितम् – स्वतन्त्रता सेनानी चन्द्रशेखर आज़ाद पर संस्कृत में रचित खण्डकाव्य (गीतादेवी मिश्र द्वारा रचित हिन्दी टीका सहित)। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। लघुरघुवरम् – संस्कृत भाषा के केवल लघु वर्णों में रचित संस्कृत खण्डकाव्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। सरयूलहरी – अयोध्या से प्रवाहित होने वाली सरयू नदी पर संस्कृत में रचित खण्डकाव्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। भृंगदूतम् (२००४) – दो भागों में विभक्त और मन्दाक्रान्ता छन्द में बद्ध ५०१ श्लोकों में रचित संस्कृत दूतकाव्य। दूतकाव्यों में कालिदास का मेघदूतम्, वेदान्तदेशिक का हंससन्देशः और रूप गोस्वामी का हंसदूतम् सम्मिलित हैं। भृंगदूतम् में किष्किन्धा में प्रवर्षण पर्वत पर रह रहे श्रीराम का एक भँवरे के माध्यम से लंका में रावण द्वारा अपहृत माता सीता को भेजा गया सन्देश वर्णित है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। काका विदुर – महाभारत के विदुर पात्र पर विरचित हिन्दी खण्डकाव्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। पत्रकाव्य कुब्जापत्रम् – संस्कृत में रचित पत्रकाव्य। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। गीतकाव्य राघव गीत गुंजन – हिन्दी में रचित गीतों का संग्रह। राघव साहित्य प्रकाशन निधि, राजकोट द्वारा प्रकाशित। भक्ति गीत सुधा – भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण पर रचित ४३८ गीतों का संग्रह। राघव साहित्य प्रकाशन निधि, राजकोट द्वारा प्रकाशित। गीतरामायणम् (२०११) – सम्पूर्ण रामायण की कथा को वर्णित करने वाला लोकधुनों की ढाल पर रचित १००८ संस्कृत गीतों का महाकाव्य। यह महाकाव्य ३६-३६ गीतों से युक्त २८ सर्गों में विभक्त है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। रीतिकाव्य श्रीसीतारामकेलिकौमुदी (२००८) – १०९ पदों के तीन भागों में विभक्त प्राकृत के छः छन्दों में बद्ध ३२७ पदों में विरचित हिन्दी (ब्रज, अवधी और मैथिली) भाषा में रचित रीतिकाव्य। काव्य का वर्ण्य विषय बाल रूप श्रीराम और माता सीता की लीलाएँ हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। शतककाव्य श्रीरामभक्तिसर्वस्वम् – १०० श्लोकों में रचित संस्कृत काव्य जिसमें रामभक्ति का सार वर्णित है। त्रिवेणी धाम, जयपुर द्वारा प्रकाशित। आर्याशतकम् – आर्या छन्द में १०० श्लोकों में रचित संस्कृत काव्य। अप्रकाशित। चण्डीशतकम् – चण्डी माता को अर्पित १०० श्लोकों में रचित संस्कृत काव्य। अप्रकाशित। राघवेन्द्रशतकम् – श्री राम की स्तुति में १०० श्लोकों में रचित संस्कृत काव्य। अप्रकाशित। गणपतिशतकम् – श्री गणेश पर १०० श्लोकों में रचित संस्कृत काव्य। अप्रकाशित। श्रीराघवचरणचिह्नशतकम् – श्रीराम के चरणचिह्नों की प्रशंसा में १०० श्लोकों में रचित संस्कृत काव्य। अप्रकाशित। स्तोत्रकाव्य श्रीगंगामहिम्नस्तोत्रम् – गंगा नदी की महिमा का वर्णन करता संस्कृत काव्य। राघव साहित्य प्रकाशन निधि, राजकोट द्वारा प्रकाशित। श्रीजानकीकृपाकटाक्षस्तोत्रम् – सीता माता के कृपा कटाक्ष का वर्णन करता संस्कृत काव्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। श्रीरामवल्लभास्तोत्रम् – सीता माता की प्रशंसा में रचित संस्कृत काव्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। श्रीचित्रकूटविहार्यष्टकम् – आठ श्लोकों में श्रीराम की स्तुति करता संस्कृत काव्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। भक्तिसारसर्वत्रम् – संस्कृत काव्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। श्रीराघवभावदर्शनम् – आठ शिखरिणीयों में उत्प्रेक्षा अलंकार के माध्यम से श्रीराम की उपमा चन्द्रमा, मेघ, समुद्र, इन्द्रनील, तमालवृक्ष, कामदेव, नीलकमल और भ्रमर से देता संस्कृत काव्य। कवि द्वारा ही रचित अवधी कवित्त अनुवाद और खड़ी बोली गद्य अनुवाद सहित। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। सुप्रभातकाव्य श्रीसीतारामसुप्रभातम् – चालीस श्लोकों (८ शार्दूलविक्रीडित, २४ वसन्ततिलक, ४ स्रग्धरा और ४ मालिनी) में रचित संस्कृत सुप्रभात काव्य। कवि द्वारा रचित हिन्दी अनुवाद सहित। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। कवि द्वारा ही गाया हुआ काव्य संस्करण युकी कैसेट्स, नयी दिल्ली द्वारा विमोचित। भाष्यकाव्य अष्टाध्याय्याः प्रतिसूत्रं शाब्दबोधसमीक्षणम् – पद्य में अष्टाध्यायी पर संस्कृत भाष्य। विद्यावारिधि शोधकार्य| राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान द्वारा प्रकाश्यमान| नाटक नाटककाव्य श्रीराघवाभ्युदयम् – श्रीराम के अभ्युदय पर संस्कृत में रचित एकांकी नाटक। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। उत्साह – हिन्दी नाटक। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। गद्य thumb|right|जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा रचित कुछ पुस्तकें और ग्रन्थ (सम्पादित श्रीरामचरितमानस की प्रति सहित) प्रस्थानत्रयी पर संस्कृत भाष्य श्रीब्रह्मसूत्रेषु श्रीराघवकृपाभाष्यम् – ब्रह्मसूत्र पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। श्रीमद्भगवद्गीतासु श्रीराघवकृपाभाष्यम् – भगवद्गीता पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। कठोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – कठोपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। केनोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – केनोपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। माण्डूक्योपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – माण्डूक्योपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। ईशावास्योपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – ईशावास्योपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। प्रश्नोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – प्रश्नोपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। तैत्तिरीयोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – तैत्तिरीयोपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। ऐतरेयोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – ऐतरेयोपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। श्वेताश्वतरोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – श्वेताश्वतरोपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। छान्दोग्योपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – छान्दोग्योपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। बृहदारण्यकोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – बृहदारण्यकोपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। मुण्डकोपनिषदि श्रीराघवकृपाभाष्यम् – मुण्डकोपनिषद् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। अन्य संस्कृत भाष्य श्रीनारदभक्तिसूत्रेषु श्रीराघवकृपाभाष्यम् – नारद भक्ति सूत्र पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट, सतना, मध्य प्रदेश द्वारा प्रकाशित। श्रीरामस्तवराजस्तोत्रे श्रीराघवकृपाभाष्यम् – रामस्तवराजस्तोत्रम् पर संस्कृत में रचित भाष्य। श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। हिन्दी भाष्य महावीरी – हनुमान् चालीसा पर हिन्दी में रचित टीका। भावार्थबोधिनी – श्रीरामचरितमानस पर हिन्दी में रचित टीका। श्रीराघवकृपाभाष्य – श्रीरामचरितमानस पर हिन्दी में नौ भागों में विस्तृत टीका। रच्यमान। विमर्श अध्यात्मरामायणे अपाणिनीयप्रयोगानां विमर्शः – अध्यात्म रामायण में पाणिनीय व्याकरण से असम्मत प्रयोगों पर संस्कृत विमर्श। वाचस्पति उपाधि हेतु शोधकार्य। अप्रकाशित। श्रीरासपंचाध्यायीविमर्शः (२००७) – भागवत पुराण की रासपंचाध्यायी पर हिन्दी विमर्श। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। प्रवचन संग्रह तुम पावक मँह करहु निवासा (२००४) – रामचरितमानस में माता सीता के अग्नि प्रवेश पर सितम्बर २००३ में दिए गए नवदिवसीय प्रवचनों का संग्रह। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। अहल्योद्धार (२००६) – रामचरितमानस में श्रीराम द्वारा अहल्या के उद्धार पर अप्रैल २००० में दिए गए नवदिवसीय प्रवचनों का संग्रह। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। हर ते भे हनुमान (२००८) – शिव के हनुमान रूप अवतार पर अप्रैल २००७ में दिए गए चतुर्दिवसीय प्रवचनों का संग्रह। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट द्वारा प्रकाशित। पुरस्कार और सम्मान विरक्त दीक्षा के उपरान्त thumb|right|२००६ में तत्कालीन लोक सभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी द्वारा वाणी अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किए जाते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य thumb|left|मार्च ३०, २००६ के दिन तत्कालीन राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा प्रशस्ति पत्र से पुरस्कृत किए जाते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य २०११। हिमाचल प्रदेश सरकार, शिमला की ओर से देवभूमि पुरस्कार। हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जोसेफ़ कुरियन द्वारा प्रदत्त।अंग्रेज़ी Himachal Pradesh State Level Award For Sandeep Marwah मार्च ४, २०११ http://www.prlog.org/11352079-himachal-pradesh-state-level-award-for-sandeep-marwah.html एशियन न्यूज़ एजेंसी जून २५, २०११ https://web.archive.org/web/20110727194654/http://www.prlog.org/11352079-himachal-pradesh-state-level-award-for-sandeep-marwah.html 27 जुलाई 2011 dead २००८। श्रीभार्गवराघवीयम् के लिए के के बिड़ला प्रतिष्ठान की ओर से श्री वाचस्पति पुरस्कार। राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल शैलेन्द्र कुमार सिंह द्वारा प्रदत्त।अंग्रेज़ी विशेष संवाददाता दि हिन्दू Selected for Birla Foundation awards फ़रवरी २०, २००८ जून २४, २०११ http://www.hindu.com/2008/02/20/stories/2008022051411300.htm https://web.archive.org/web/20120508162811/http://www.hindu.com/2008/02/20/stories/2008022051411300.htm 8 मई 2012 live विशेष संवाददाता दि हिन्दू K.K. Birla Foundation awards presented अप्रैल १९, २००८ http://www.hindu.com/2008/04/19/stories/2008041954260500.htm जून २४, २०११ https://web.archive.org/web/20120508141825/http://www.hindu.com/2008/04/19/stories/2008041954260500.htm 8 मई 2012 live २००७। तुलसी शोध संस्थान, इलाहाबाद नगर निगम की ओर से गोस्वामी तुलसीदास समर्चन सम्मान। भारत के भूतपूर्व प्रधान न्यायाधीश रमेश चन्द्र लाहोटी द्वारा प्रदत्त।औपचारिक वेबसाइट गोस्वामी तुलसीदास समर्चन सम्मान http://jagadgururambhadracharya.org/ViewContent/gallery/Awards%20Prizes/originals/Goswami%20Tulsidas%20Saarchan%20Samman.jpg जुलाई २, २०११ श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास अगस्त 2021 InternetArchiveBot २००६। हिन्दी साहित्य सम्मलेन, प्रयाग की ओर से संस्कृत महामहोपाध्याय।औपचारिक वेबसाइट २००६ में संस्कृत महामहोपाध्याय http://jagadgururambhadracharya.org/ViewContent/gallery/Awards%20Prizes/originals/Sanskrit%20Mahamahopadhyay%20in%202006.jpg जुलाई २, २०११ श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास अगस्त 2021 InternetArchiveBot २००६। जयदयाल डालमिया श्री वाणी ट्रस्ट की ओर से श्रीभार्गवराघवीयम् के लिए श्री वाणी अलंकरण पुरस्कार। तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी द्वारा प्रदत्त। २००६। मध्य प्रदेश संस्कृत संस्थान, भोपाल, की ओर से श्रीभार्गवराघवीयम् के लिए बाणभट्ट पुरस्कार। २००५। श्रीभार्गवराघवीयम् के लिए संस्कृत में साहित्य अकादमी पुरस्कार। २००४। बादरायण पुरस्कार। तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति अब्दुल कलाम द्वारा प्रदत्त।आर चन्द्रा सम्मान और पुरस्कार ८ ११ क्रान्ति भारत समाचार लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत सितम्बर २००८ २१ २००३। मध्य प्रदेश संस्कृत अकादमी की ओर से राजशेखर सम्मान। २००३। लखनऊ स्थित भाऊराव देवरस सेवा न्यास की ओर से भाऊराव देवरस पुरस्कार।टी एन एन अंग्रेज़ी Bhaurao Samman for Dattopanth Thengadi मार्च १७, २००३ http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2003-03-17/lucknow/27275780_1_award-honour-sangh-workers मई २७, २०११ The दि टाईम्स ऑफ़ इंडिया https://web.archive.org/web/20110811145709/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2003-03-17/lucknow/27275780_1_award-honour-sangh-workers 11 अगस्त 2011 live विशेष संवाददाता केन्द्र लखनऊ जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य तथा वरिष्ठ चिंतक दत्तोपंत ठेंगडी को भाऊराव देवरस सेवा सम्मान - वैभवशाली राष्ट्र के निर्माण का आह्वान मार्च ३०, २००३ http://www.panchjanya.com/30-3-2003/20back.html पाञ्चजन्य अप्रैल २९, २०११ https://archive.today/20030504102726/http://www.panchjanya.com/30-3-2003/20back.html 4 मई 2003 dead २००३। दीवालीबेन मेहता चैरीटेबल ट्रस्ट द्वारा धर्म और संस्कृति में प्रगति के लिए दीवालीबेन पुरस्कार। भारत के भूतपूर्व प्रमुख न्यायाधीश पी एन भगवती द्वारा प्रदत्त।औपचारिक वेबसाइट दीवालीबेन पुरस्कार http://jagadgururambhadracharya.org/ViewContent/gallery/Awards%20Prizes/originals/Diwaliben%20award.jpg जुलाई २, २०११ श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास अगस्त 2021 InternetArchiveBot २००३। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की ओर से अतिविशिष्ट पुरस्कार। २००२। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी, की ओर से कविकुलरत्न की उपाधि। २०००। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की ओर से विशिष्ट पुरस्कार।औपचारिक वेबसाइट उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा विशिष्ट पुरस्कार http://jagadgururambhadracharya.org/ViewContent/gallery/Awards%20Prizes/originals/Vishisht%20Puraskar%20by%20UP%20Sanskrit%20Sansthan.jpg जुलाई २, २०११ श्री तुलसी पीठ सेवा न्यास अगस्त 2021 InternetArchiveBot २०००। लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, नयी दिल्ली की ओर से महामहोपाध्याय की उपाधि।अंग्रेज़ी Shri Lal Bahadur Shastri Rashtriya Sanskrit Vidyapeetha - Convocation http://www.slbsrsv.ac.in/newconvocation.asp जून ११, २०११ श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रिय संस्कृत विद्यापीठ The Fourth Convocation of the Vidyapeetha was organized on 11th of February, 2000. ... Honorary title of Mahamahopadhyaya was conferred on Shri Swami Rambhadracharya (U.P.), ... by the Chancellor. (११ फ़रवरी २००० को विद्यापीठ का चतुर्थ दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कुलाधिपति द्वारा ... श्री स्वामी रामभद्राचार्य, उत्तर प्रदेश, को महामहोपाध्याय की मानद उपाधि प्रदान की गई। ) https://web.archive.org/web/20160127043306/http://www.slbsrsv.ac.in/newconvocation.asp 27 जनवरी 2016 dead १९९९। कविराज विद्या नारायण शास्त्री अर्चन-सम्मान समिति, भागलपुर (बिहार) द्वारा संस्कृत भाषा को योगदान हेतु कविराज विद्या नारायण शास्त्री अर्चन-सम्मान पुरस्कार।नागर २००२, पृष्ठ १८४। १९९९। अखिल भारतीय हिन्दी भाषा सम्मेलन, भागलपुर (बिहार) द्वारा हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति को अमूल्य योगदान और उनके प्रचार-प्रसार हेतु महाकवि की उपाधि।नागर २००२, पृष्ठ १८३। १९९८। विश्व धर्म संसद द्वारा धर्मचक्रवर्ती की उपाधि।नागर २००२, पृष्ठ १८२। पूर्वाश्रम में प्राप्त १९७६। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में कुलाधिपति स्वर्ण पदक। १९७६-७७। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में आचार्य की परीक्षा में सात स्वर्ण पदक। १९७५। अखिल भारतीय संस्कृत वाद विवाद प्रतियोगिता में पाँच स्वर्ण पदक। १९७४। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में शास्त्री की परीक्षा में स्वर्ण पदक।पद्म विभूषण 2015 टिप्पणियाँ 2 </div> सन्दर्भ अग्रवाल न्यायमूर्ति सुधीर सितम्बर ३०, २०१० Consolidated Judgment in OOS No. 1 of 1989, OOS No. 3 of 1989, OOS No. 4 of 1989 & OOS No. 5 of 1989 इलाहाबाद उच्च न्यायालय इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/DisplayAyodhyaBenchLandingPage.do अंग्रेज़ी अप्रैल २४, २०११ https://web.archive.org/web/20140827003623/http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/DisplayAyodhyaBenchLandingPage.do 27 अगस्त 2014 dead दिनकर डॉ वागीश श्रीभार्गवराघवीयम् मीमांसा देशभारती प्रकाशन दिल्ली, भारत २००८ महाकवि परिचय (व्यक्तित्व एवं कृतित्व) ISBN 978-81-908276-6-9 The Holy Journey of a Divine Saint: Being the English Rendering of Swarnayatra Abhinandan Granth अंग्रेज़ी शान्ति लाल नागर आचार्य दिवाकर शर्मा शिव कुमार गोयल सुरेन्द्र शर्मा सुशील बी आर प्रकाशन निगम २००२ प्रथम, सजिल्द संस्करण नई दिल्ली, भारत ISBN 978-81-7646-288-4 अंग्रेज़ी Sri Ramacaritamanasa The Holy Lake Of The Acts Of Rama राम चन्द्र प्रसाद मोतीलाल बनारसीदास १९९९ सचित्र, पुनर्मुद्रित संस्करण दिल्ली, भारत ISBN 978-81-208-0762-4 http://books.google.com/books?id=VV7leonJ8aQC&printsec=frontcover&dq=isbn:8120807626&hl=en&ei=zlz_Td-XHZGmuQODt6iaAw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CCkQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false प्रथम संस्करण १९९१ जून २०, २०११ https://web.archive.org/web/20140203211144/http://books.google.com/books?id=VV7leonJ8aQC#v=onepage&q&f=false 3 फ़रवरी 2014 live रामद्राचार्य स्वामी, ed. मार्च ३०, २००६ श्रीरामचरितमानस – मूल गुटका (तुलसीपीठ संस्करण) चतुर्थ संस्करण जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट, उत्तर प्रदेश, भारत शर्मा न्यायमूर्ति धरम वीर सितम्बर ३०, २०१० Judgment in OOS No. 4 of 1989 इलाहाबाद उच्च न्यायालय http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/DisplayAyodhyaBenchLandingPage.do इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत अंग्रेज़ी अप्रैल २४, २०११ https://web.archive.org/web/20140827003623/http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/DisplayAyodhyaBenchLandingPage.do 27 अगस्त 2014 dead शर्मा न्यायमूर्ति धरम वीर सितम्बर ३०, २०१० Annexure V इलाहाबाद उच्च न्यायालय http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/DisplayAyodhyaBenchLandingPage.do इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत अंग्रेज़ी अप्रैल २४, २०११ https://web.archive.org/web/20140827003623/http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/DisplayAyodhyaBenchLandingPage.do 27 अगस्त 2014 dead बाहरी कड़ियाँ Jagadguru Rambhadracharya जगद्गुरु रामभद्राचार्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य की औपचारिक वेबसाइट रामचरितमानस पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य की भावार्थबोधिनी टीका गूगल पृष्ठों पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य की अनौपचारिक वेबसाइट जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय जगद्गुरु रामभद्राचार्य के विषय में जानकारी और उनके प्रवचनों का यूट्यूब चैनल श्रेणी:उत्तर प्रदेश के लोग श्रेणी:जगद्गुरु रामभद्राचार्य श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:भारतीय शिक्षाविद् श्रेणी:भारतीय संत श्रेणी:भारतीय समाजसेवी श्रेणी:भारतीय साहित्यकार श्रेणी:संस्कृत आचार्य श्रेणी:संस्कृत कवि श्रेणी:संस्कृत नाटककार श्रेणी:संस्कृत साहित्यकार श्रेणी:हिन्दी कवि श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार श्रेणी:हिन्दू आध्यात्मिक नेता श्रेणी:हिन्दू धर्म श्रेणी:हिन्दू गुरु श्रेणी:1950 में जन्मे लोग श्रेणी:पद्म विभूषण धारक