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विरूपाक्ष मंदिर, हम्पी
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विरूपाक्ष मंदिर १४वीं शताब्दीJuly 2012 द्रविड़ स्थापत्य शैली पम्पापति या विरुपाक्ष (शिव) हम्पी (पम्पा क्षेत्र) Virupaksha Temple in Hampi.jpg विजयनगर जिला कर्नाटक भारत 15.335165 76.458727 type:landmark_region:IN inline Location in कर्नाटक India Karnataka विरूपाक्ष मन्दिर या पम्पापति मन्दिर विरूपाक्ष मंदिर विजयनगर साम्राज्य
विरूपाक्ष मंदिर कर्नाटक राज्य के हम्पी में तुंगभद्रा नदी के किनारे पर स्थित एक पवित्र स्थान और ऐतिहासिक स्थल है। ७वीं शताब्दी के दौरान निर्मित किए गए इस मंदिर के इतिहास और सुन्दर वास्तुकला के कारण इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया। मंदिर की दीवारों पर ७वीं शताब्दी की समृद्ध शिलालेख भी मौजूद हैं जो इसकी समृद्ध विरासत के प्रमाण को प्रस्तुत करते हैं। यह प्राचीन मंदिर भगवान् शिव के रूपों में से एक 'विरूपाक्ष' (= विरूप + अक्ष = विपरीत अक्ष वाले) को समर्पित है जिसे “प्रसन्न विरुपाक्ष मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में मुख्य देवता के साथ साथ कई देवी-देवताओं की सुन्दर मूर्तियां भी हैं जो कलाकृतियों के माध्यम से कई देवी-देवताओं की पौराणिक कहानियों को दर्शाती हैं। इस मंदिर का इतिहास प्रसिद्ध विजयनगर साम्राज्य से जुड़ा है। 500 साल पहले इस मंदिर का गोपुरम बना था। ये मंदिर द्रविड़ स्थापत्य शैली में बना हुआ है।
तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी किनारे पर हेमकूट पहाड़ी की तलहटी पर बने इस मंदिर का गोपुरम 50 मीटर ऊंचा है। भगवान शिव के अलावा इस मंदिर में भुवनेश्वरी और पंपा की मूर्तियां भी बनी हुई हैं। इस मंदिर के पास छोटे-छोटे और मंदिर हैं जो कि अन्य देवी देवताओं को समर्पित हैं। देवराय द्वितीय के शासनकाल में उसके सेनानायक लंकन दंडेश द्वारा निर्मित द्रविड़ स्थापत्य शैली में ये मंदिर ईंट तथा चूने से बना है। इसे यूनेस्को की घोषित राष्ट्रीय धरोहरों में शामिल है।
माना जाता है हम्पी ही रामायण काल का किष्किन्धा है। यहां भगवान शिव के विरुपाक्ष रूप की पूजा की जाती है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की कहानी रावण और भगवान शिव से जुड़ी हुई है। इस मंदिर की मुख्य विशेषता यहां का शिवलिंग है जो दक्षिण की ओर झुका हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण जब शिव के दिए हुए शिवलिंग को लेकर लंका जा रहा था तो यहां पर रुका था। उसने इस जगह एक बूढ़े आदमी को शिवलिंग पकड़ने के लिए दिया था। उस बूढ़े आदमी ने शिवलिंग को जमीन पर रख दिया, तब से वह शिवलिंग यहीं जम गया और लाख कोशिशों के बाद भी हिलाया नहीं जा सका। मंदिर की दीवारों पर उस प्रसंग के चित्र बने हुए हैं जिसमें रावण शिव से पुनः शिवलिंग को उठाने की प्रार्थना कर रहे हैं और भगवान शिव इंकार कर देते हैं। यहां अर्ध सिंह और अर्ध मनुष्य की देह धारण किए नृसिंह की 6.7 मीटर ऊंची मूर्ति है। किवदन्ति है कि भगवान विष्णु ने इस जगह को अपने रहने के लिए कुछ अधिक ही बड़ा समझा और क्षीरसागर वापस लौट गए।
चित्रावली
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
विरुपाक्ष मंदिर के चित्र, 2013 https://web.archive.org/web/20140329181432/http://indiatourism.ws/hampi/virupaksha_temple/ 29 मार्च 2014
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